Correct Answer: (a) छत्तीसगढ़ का मरवाही छउ
Solution:- छउ नृत्य मार्शल और लोक परंपराओं वाला एक अर्द्धशास्त्रीय भारतीय नृत्य है। यह तीन शैलियों में पाया जाता है
- यानी पश्चिम बंगाल का पुरुलिया छउ, झारखंड का सरायकेला छउ और ओडिशा का मयूरभंज छउ।
- वर्ष 2010 में छउ नृत्य को यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि में शामिल किया गया था।
- छऊ नृत्य का परिचय
- यह पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के सीमावर्ती आदिवासी क्षेत्रों में प्रचलित है।
- संस्कृति मंत्रालय ने इसे शास्त्रीय नृत्य के रूप में पहचाना है, जिससे भारत के शास्त्रीय नृत्यों की संख्या नौ हो गई।
- मान्यता प्राप्त तीन रूप
- छऊ के तीन विशिष्ट और मान्यता प्राप्त रूप निम्नलिखित हैं:
- सरायकेला छऊ (झारखंड): यह सबसे पुराना रूप माना जाता है, जिसमें जटिल मुद्राएँ और अभिनय पर जोर होता है। यह राजघराने से जुड़ा है।
- पुरुलिया छऊ (पश्चिम बंगाल): इसमें चटकीले मुखौटे और ऊर्जावान नृत्य शैली प्रमुख है, जो चैत्र संक्रांति पर प्रस्तुत किया जाता है।
- मयूरभंज छऊ (ओडिशा): यह त्रिभुजाकार मुखौटों और तेज गति वाली चालों के लिए जाना जाता है, जिसमें लोक संगीत का प्रभाव है।
- ये तीनों रूप UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में भी शामिल हैं।
- कौन-सा रूप शामिल नहीं?
- छत्तीसगढ़ का मरवाही छऊ छऊ नृत्य के इन तीन मानक रूपों में से एक नहीं है।
- यह छत्तीसगढ़ में लोकप्रिय हो सकता है
- लेकिन संस्कृति मंत्रालय द्वारा शास्त्रीय छऊ के रूप में मान्यता प्राप्त तीन रूपों (सरायकेला, पुरुलिया, मयूरभंज) में इसका उल्लेख नहीं है। प्रश्न के संदर्भ में यह सही उत्तर है।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- "छऊ" शब्द संस्कृत के "छाय" से आया है, जिसका अर्थ छाया या मुखौटा होता है।
- प्राचीन काल में योद्धाओं द्वारा अभ्यास किया जाता था
- जो अब नाट्य और कला का रूप ले चुका है। यह नृत्य वसंत पंचमी या छऊ संक्रांति पर आयोजित होता है।