Correct Answer: (b) गुरु वेंपति चिन्ना सत्यम
Solution:- वर्ष 1998 में पद्म भूषण प्राप्त करने वाले कुचिपुड़ी नृत्य शैली के गुरु, गुरु वेंपति चिन्ना सत्यम हैं।
- गुरु वेंपति चिन्ना सत्यम कुचिपुड़ी नृत्य शैली में एक प्रसिद्ध भारतीय नर्तक और कोरियोग्राफर थे, जो भारत के आंध्र प्रदेश का एक शास्त्रीय नृत्य है।
- जीवन परिचय
- वेम्पति चिन्ना सत्यम का जन्म 15 अक्टूबर 1929 को आंध्र प्रदेश में हुआ था और उनका निधन 29 जुलाई 2012 को हुआ।
- उन्होंने बचपन से ही कुचिपुड़ी नृत्य में प्रशिक्षण लिया और बाद में इसे अपनी शिक्षण शैली से परिष्कृत किया।
- उनके प्रयासों ने कुचिपुड़ी को न केवल संरक्षित किया, बल्कि इसे आधुनिक मंचों के लिए अनुकूलित भी किया।
- कुचिपुड़ी में योगदान
- 1963 में उन्होंने चेन्नई में कुचिपुड़ी कला अकादमी की स्थापना की, जो नृत्य परंपराओं को बढ़ावा देने का प्रमुख केंद्र बनी।
- उन्होंने श्रीनिवास कल्याणम और रुक्मिणी कल्याणम जैसे प्रसिद्ध कुचिपुड़ी बैले को कोरियोग्राफ किया
- जो इस शैली के विकास में मील के पत्थर साबित हुए।
- उनकी अनूठी तकनीकों ने जटिल फुटवर्क, अभिव्यंजक हावभाव और नाट्य तत्वों को मजबूत किया।
- पुरस्कार और सम्मान
- 1998 में उन्हें पद्म भूषण मिला, जो भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है
- उनके नृत्य क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए। इसके अलावा, उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
- ये सम्मान उनके द्वारा कुचिपुड़ी को आठ प्रमुख शास्त्रीय नृत्य रूपों में स्थापित करने के योगदान को दर्शाते हैं।
- विरासत और छात्र
- उनकी विरासत आज भी जीवित है, क्योंकि शांताला शिवलिंगप्पा जैसे कई प्रसिद्ध नर्तक उनके शिष्य रहे।
- उन्होंने नृत्य नाटकों को पुनर्जीवित कर आधुनिक दर्शकों तक पहुंचाया, जबकि शास्त्रीय सार को अक्षुण्ण रखा।
- कुचिपुड़ी, जो आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के कुचिपुड़ी गांव से उत्पन्न हुई, उनके कारण विश्व स्तर पर लोकप्रिय हुई।
- यह कुचिपुड़ी नृतकी मलबिका सेन का चित्र है, जो पारंपरिक वेशभूषा में मुद्रा प्रदर्शित कर रही हैं—शैली की सुंदरता को दर्शाता है।
- कुचिपुड़ी का संक्षिप्त परिचय
- कुचिपुड़ी आंध्र प्रदेश का शास्त्रीय नृत्य है, जो नृत्य, संगीत और अभिनय का मिश्रण है।
- यह हिंदू पौराणिक कथाओं पर आधारित है, जिसमें सुंदर आंदोलन और जटिल पैरकाम प्रमुख हैं।
- भारत के अन्य शास्त्रीय नृत्यों जैसे भरतनाट्यम, कथक और ओडिसी के साथ यह सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है।