Correct Answer: (c) मोहिनीअट्टम
Solution:- मलयालम कवि वल्लथोल नारायण मेनन (Vallathol Narayana Menon) और नृत्यांगना और गुरु कल्याणीकुट्टी अम्मा (Kalyanikutti Amma) के प्रयासों ने 'मोहिनीअट्टम' नृत्य शैली को फिर से चलन में लाया और एक नया जीवनदान दिया।
- पृष्ठभूमि
- मोहिनीअट्टम केरल का एक कोमल, आकर्षक नृत्य है, जो मोहिनी (विष्णु का अवतार) की कथाओं पर आधारित है।
- ब्रिटिश काल में नृत्यसभाओं पर प्रतिबंध और सामाजिक परिवर्तनों से यह शैली लगभग विलुप्त हो चुकी थी।
- वल्लथोल नारायण मेनन (1878-1957), मलयालम के महाकवि, ने केरल की कलाओं के संरक्षण के लिए केरल कलामंडलम की स्थापना 1930 में की
- जहां कथकली के साथ-साथ मोहिनीअट्टम को भी बढ़ावा दिया।
- वल्लथोल का योगदान
- वल्लथोल ने कलामंडलम के माध्यम से पारंपरिक कलाओं को पुनर्जागरण दिया।
- उन्होंने मोहिनीअट्टम को औपचारिक प्रशिक्षण का केंद्र बनाया, छात्रों को प्रोत्साहित किया और इसे शास्त्रीय मान्यता दिलाने में भूमिका निभाई।
- उनका दृष्टिकोण राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान से प्रेरित था।
- कल्याणीकुट्टी अम्मा का योगदान
- कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा (1915-1999), थिरुनावाया की निवासी, को 'मोहिनीअट्टम की माता' कहा जाता है।
- उन्होंने कलामंडलम में वल्लथोल के मार्गदर्शन में नृत्य सीखा, इसे व्यवस्थित किया
- सात आइटम वाली प्रस्तुति प्रारूप बनाया, नव रसों का उपयोग जोड़ा, और 80 श्लोकों वाली तकनीक ग्रंथ रची।
- उन्होंने पूरे भारत में कार्यशालाएं चलाईं, छात्राएं तैयार कीं, और 'कल्याणीकुट्टी अम्मा शैली' विकसित की।
- पुनरुद्धार प्रक्रिया
- 1930-40 के दशक में कलामंडलम में इनके संयुक्त प्रयासों से मोहिनीअट्टम को नया स्वरूप मिला
- कोमल मुद्राएं, लयबद्ध पैरों की थिरकन, नेपथ्य संगीत (मलयालम-साहित्यिक), और रंगीन वेशभूषा पर जोर।
- चिन्नम्मा अम्मा जैसी अन्य कलाकारों के साथ मिलकर उन्होंने दो भिन्न शैलियां सृजित कीं। 1950 तक यह शैली राष्ट्रीय मंचों पर पहुंची।
- दीर्घकालिक प्रभाव
- आज मोहिनीअट्टम आठ मान्यता प्राप्त शास्त्रीय नृत्यों में शामिल है।
- इन प्रयासों ने केरल की सांस्कृतिक पहचान मजबूत की, और अम्मा के शिष्य जैसे कनक रंजिनी ने इसे वैश्विक बनाया।
- वल्लथोल की कलामंडलम विरासत आज भी जारी है।