सांस्कृतिक गतिविधियां (परम्परागत सामान्य ज्ञान) भाग-V

Total Questions: 59

11. चिदंबरम मंदिर के गोपुरम में किस नृत्य शैली की कई मुद्राएं हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) भरतनाट्यम
Solution:
  • चिदंबरम मंदिर के गोपुरम (मीनार) पर अंकित शास्त्रीय नृत्य शैली भरतनाट्यम है।
  • चिदंबरम मंदिर का गोपुरम जटिल मूर्तियों और कलात्मक निरूपण से सुशोभित है।
  • इसमें भरतनाट्यम मुद्राओं और इस नृत्य रूप से संबंधित तत्वों को चित्रित किया गया है
  • जो इस शास्त्रीय नृत्य परंपरा के साथ मंदिर के जुड़ाव का प्रतीक है।
  • मंदिर के चार मुख्य गोपुरम (प्रवेश द्वार टावर) हैं—पूर्व, दक्षिण, पश्चिम और उत्तर। इनमें पूर्वी गोपुरम सबसे प्रमुख है
  • जो राजा कोपरसिंगन द्वितीय (1243-1279 ई.) द्वारा निर्मित किया गया और 18वीं शताब्दी में सुब्बम्मल नामक महिला द्वारा मरम्मत कराया गया।
  • प्रत्येक गोपुरम में सात स्तर हैं, जो जटिल मूर्तियों से सजे हैं।
  • विशेष रूप से पूर्वी गोपुरम पर नाट्य शास्त्र के अनुसार भरतनाट्यम की 108 करण मुद्राएं (नृत्य की बुनियादी मुद्राएं) उत्कीर्ण हैं
  • यह गोपुरम नृत्य, संगीत और आध्यात्मिकता का प्रतीक है, जहां हर स्तर पर देवी-देवता, पौराणिक कथाएं और नृत्य मुद्राएं चित्रित हैं।​
  • भरतनाट्यम का महत्व
    • भरतनाट्यम भारत का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है, जिसकी जड़ें तमिलनाडु के मंदिरों में हैं और यह नाट्य शास्त्र पर आधारित है।
    • मंदिर के गोपुरम पर अंकित 108 मुद्राएं भरत मुनि के नाट्य शास्त्र से ली गई हैं, जो नृत्य के करण (शरीर के अंगों की गतियां) दर्शाती हैं।
    • ये मुद्राएं हाथों के हावभाव (हस्त मुद्राएं), पैरों की लयबद्ध गतियां, नेत्र, ग्रीवा और शरीर के अन्य भावों को प्रदर्शित करती हैं, जो नृत्य की जटिलता को जीवंत बनाती हैं।
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • चिदंबरम मंदिर नृत्य का केंद्र रहा है। यहां शिव-पार्वती के बीच नृत्य प्रतियोगना की कथा प्रसिद्ध है
    • जहां शिव ने उрд्ध्व तांडव मुद्रा दिखाई। भरतनाट्यम कलाकार इस मंदिर को पवित्र मानते हैं
    • क्योंकि मंदिर के खंभे और दीवारें भी नृत्य मुद्राओं से सजे हैं।
    • नट्यनजली महोत्सव यहां आयोजित होता है, जहां विभिन्न नृत्य शैलियां प्रस्तुत की जाती हैं।​
  • अन्य गोपुरम
    • दक्षिणी गोपुरम सबसे ऊंचा (42 मीटर) है, लेकिन पूर्वी गोपुरम नृत्य मुद्राओं के लिए प्रसिद्ध है।
    • सभी गोपुरम द्रविड़ शैली के बहुमंजिला तोरण हैं, जो मंदिर की भव्यता बढ़ाते हैं।​

12. नीचे दिए गए कथनों पर विचार कीजिए और भारतीय लोक और जनजातीय नृत्य शैलियों के संबंध में सही विकल्प का चयन कीजिए। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

(i) चैलम (Chailam), मिजोरम का लोक नृत्य है।

(ii) होजागिरी, गुजरात का लोक नृत्य है।

(iii) बिदेसिया, बिहार का लोक नृत्य है।

Correct Answer: (c) (i) और (iii) दोनों सही हैं।
Solution:
  • 'चैलम' मिजोरम राज्य में नृत्य का एक बहुत लोकप्रिय रूप है। इस प्रकार का नृत्य 'चपचार कुट' पर किया जाता है
  • जो मिजोरम के लोगों के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। 'होजागिरी' पूर्वोत्तर भारत के त्रिपुरा राज्य का एक लोक नृत्य है।
  • यह रियांग समुदाय की महिलाओं द्वारा किया जाता है
  • इसमें वे घड़ों पर खड़े होकर अपने सिर पर बोतल या अन्य वस्तु लिए संतुलन बनाए हुए नृत्य करती हैं।
  • बिदेसिया नृत्य बिहार के भोजपुरी भाषी क्षेत्र की लोकप्रिय नृत्य-नाटक शैली है।
  • बिदेसिया में पुरुष अभिनेता महिलाओं की भी भूमिका निभाते हैं। अतः कथन (i) और (iii) सही हैं।
  • लोक और जनजातीय नृत्यों की विशेषताएँ
    • लोक नृत्य आमतौर पर त्योहारों, विवाह, फसल कटाई या विजय उत्सवों पर किए जाते हैं
    • जिसमें पुरुष-महिलाएँ एक साथ भाग लेते हैं। जनजातीय नृत्य अधिक आदिवासी होते हैं
    • जो प्रकृति पूजा, शिकार या युद्ध से प्रेरित होते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, ये नृत्य तेज़ ढोल, मांझira, बांस की टटकारियों या लोक वाद्यों के साथ किए जाते हैं।
  • जनजातीय नृत्यों का महत्व
    • जनजातीय नृत्य मुख्यतः आदिवासी समुदायों द्वारा किए जाते हैं
    • जो उनकी धार्मिक आस्थाओं को दर्शाते हैं। जैसे, छत्तीसगढ़ का राउत नाच गोवर्धन पूजा से जुड़ा है
    • जबकि झारखंड का सरहुल सरना पूजा का प्रतीक है। मिज़ोरम का चैलम नृत्य (चपचाकुति उत्सव पर) महिलाओं द्वारा किया जाता है
    • जो सामूहिक एकता दिखाता है। ये नृत्य संरक्षण के लिए सांस्कृतिक मंत्रालय द्वारा प्रोत्साहित किए जाते हैं।
  • शास्त्रीय vs लोक/जनजातीय नृत्य
    • शास्त्रीय नृत्य (जैसे भरतनाट्यम, कत्थकली) भरत मुनि के नाट्यशास्त्र पर आधारित होते हैं
    • जबकि लोक-जनजातीय नृत्य मौखिक परंपराओं से विकसित होते हैं।
    • शास्त्रीय में तांडव-लास्य भाव प्रमुख हैं, लेकिन लोक नृत्यों में खुशी, श्रृंगार या वीर रस सहज रूप से प्रकट होता है।​
  • प्रसिद्ध उदाहरणों का विस्तार
    • गरबा-डांडिया (गुजरात): नवरात्रि पर रासलीला से प्रेरित, महिलाएँ मंडली में घूमती हैं। डांडिया में पुरुष लाठियों से ताल बजाते हैं।​
    • भांगड़ा-गिद्दा (पंजाब): विवाह और बदी पर, ऊर्जावान कदम और ढोल की थाप। गिद्दा महिलाओं का है।​
    • घूमर (राजस्थान): महिलाएँ घूंघट ओढ़े वृत्ताकार घूमती हैं, तेज़ ताल पर।​
    • बांस नृत्य (नागालैंड/मिज़ोरम): महिलाएँ बांस की खांचों के बीच कूदती हैं, ताल पर।​
    • पैंथी (छत्तीसगढ़): मारिया जनजाति का, दुर्गा पूजा पर।​

13. महरी और गोटीपुआ शब्द किस भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली से संबंधित हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) ओडिसी
Solution:
  • महरी और गोटीपुआ दोनों ओडिसी शास्त्रीय नृत्य शैली से संबंधित हैं। महरी नृत्य लगभग एक हजार वर्ष पुराना है
  • उत्कल के गंग शासकों के समय से यह नृत्य पुरी के जगन्नाथ मंदिर में दैनिक अनुष्ठानों का एक अभिन्न अंग रहा है।
  • गोटीपुआ नृत्य महरी परंपरा की एक शाखा के रूप में उत्पन्न हुआ।
  • गोटीपुआ और महरी नृत्यों को खुर्दा के राजा रामचंद्र द्वारा संरक्षण दिया गया था।
  • ओडिसी नृत्य का परिचय
    • ओडिसी भारत के आठ प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों में से एक है, जिसकी जड़ें ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी हैं।
    • यह नृत्य त्रिभंगी (शरीर के तीन भागों में वक्रता) और चौका (वर्गाकार स्थिर मुद्रा) जैसी मूल मुद्राओं पर आधारित है।
    • इसके विषय मुख्यतः भगवान कृष्ण, जगन्नाथ और राधा की भक्ति कथाओं से लिए जाते हैं।
  • गोटीपुआ परंपरा
    • गोटीपुआ ओडिसी का एक पूर्ववर्ती लोक-शास्त्रीय रूप है, जिसमें 'गोटी' (एकल) और 'पुआ' (लड़का) से मिलकर नाम बना है।
    • यह महरी परंपरा का विकसित रूप है, जब मंदिरों में महिला नर्तकियों की कमी हुई
    • 16वीं शताब्दी में ओडिशा के भोई राजा रामचंद्र देव ने युवा लड़कों को महिलाओं के वेश में प्रशिक्षित किया।
    • गोटीपुआ नर्तक कृष्ण और जगन्नाथ की स्तुति के लिए कलाबाजियाँ (बंध नृत्य), वंदना, अभिनय और लयबद्ध एक्रोबेटिक्स करते हैं।
    • रघुराजपुर गाँव (पुरी के पास) इसके प्रमुख केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है।
    • यह ओडिसी का लास्य अंग है, लेकिन इसमें शारीरिक शक्ति और तालबद्ध उछल-कूद प्रमुख हैं।​
  • वेशभूषा और प्रशिक्षण
    • महरी नर्तकियाँ रेशमी साड़ी, कंचुली, चूड़ियाँ, बिंदी और फूलों से सजती हैं।
    • गोटीपुआ में नर्तक कंचुला (रफ़ल्ड एप्रन जैसा वस्त्र), मनके गहने, काजल और बिंदी लगाते हैं।
    • प्रशिक्षण कठोर होता है—सुबह 5 बजे से पखावज, बंध (जैसे नहुनिया, पद्मासन, चकरी) और तेल मालिश। गोटीपुआ लड़के 6-14 वर्ष की आयु तक सीखते हैं।​
  • आधुनिक महत्व
    • ये दोनों ओडिसी को समृद्ध करते हैं। प्रसिद्ध गुरु जैसे केलु चरण महापात्रा ने गोटीपुआ से ओडिसी विकसित किया।
    • आज रघुराजपुर जैसे केंद्रों में ये प्रदर्शन मंदिर उत्सवों, त्योहारों और पर्यटन के लिए होते हैं।
    • ओडिसी को 20वीं शताब्दी में शास्त्रीय मान्यता मिली, जिसमें महरी-गोटीपुआ की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

14. दक्षिण भारत में तीसरी शताब्दी ई.पू. में कुचेलापुरीया, कुचेलापुरम में निम्नलिखित में से किस नृत्य शैली की उत्पत्ति हुई? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) कुचिपुड़ी
Solution:
  • दक्षिण भारत में तीसरी शताब्दी ई.पू. में कुचेलापुरीया, कुचेलापुरम में कुचिपुड़ी नृत्य शैली की उत्पत्ति हुई।
  • ऐसा माना जाता है कि इस नृत्य शैली का नाम आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में स्थित कुचिपुड़ी ग्राम के नाम पर पड़ा है
  • जिसे कुचेलापुरम या कुचिलापुरी नाम से भी जाना जाता है।
  • इस नृत्य रूप का उल्लेख 10वीं शताब्दी के तांबे के शिलालेखों और 15वीं शताब्दी के मचुपल्ली कैफत जैसे ग्रंथों में भी है।
  • उत्पत्ति और इतिहास
    • कुचिपुड़ी की जड़ें तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व तक जाती हैं, जब यह कुचेलापुरम गाँव में विकसित हुई
    • जो ब्राह्मण पुरोहितों द्वारा संरक्षित एक नृत्य-नाटक परंपरा थी।
    • इसकी संहिताबद्ध रूप 17वीं शताब्दी में सिद्धेन्द्र योगी द्वारा मिला, जिन्हें इसका जनक माना जाता है
    • उन्होंने इसे भक्ति रसपूर्ण नाटकों के रूप में परिष्कृत किया।
    • मूल रूप से पुरुष कलाकार ही इसे प्रस्तुत करते थे, जो मंदिरों में रात के समय भगवान कृष्ण की कथाएँ अभिनीत करते थे।
  • विशेषताएँ और शैली
    • यह नृत्य संगीत, अभिनय, नृत्य और गायन का अनूठा मिश्रण है
    • जिसमें जटिल पैरों का काम (नृत्य), तेज गतियाँ, अभिव्यंजक हस्तमुद्राएँ और नेत्राभिनय प्रमुख हैं।
    • प्रदर्शन में तांडव (शक्तिशाली) और लास्य (कोमल) दोनों का समावेश होता है
    • कलाकार अक्सर पीतल की थाली पर संतुलन बनाते हुए नृत्य करते हैं
    • मंडूक शब्दम (मेंढक की भाँति भंगिमाएँ) दिखाते हैं।
    • वाद्ययंत्रों में मृदंगम, झांझ, वीणा, बांसुरी और तंबूरा का उपयोग होता है, जो कर्नाटक शास्त्रीय संगीत पर आधारित होता है।
  • प्रदर्शन प्रारूप
    • पारंपरिक कुचिपुड़ी एक समूह नृत्य-नाटक होता था, जैसे भामा कलापम, लेकिन आधुनिक समय में एकल नृत्य अधिक प्रचलित हैं।
    • यह नाट्यशास्त्र पर आधारित है और वैष्णव भक्ति कथाओं, विशेषकर कृष्ण लीला पर केंद्रित रहता है।
    • वेशभूषा जीवंत होती है—स्त्रियों के लिए घाघरा जैसी लहंगा, पुरुषों के लिए धोती; मेकअप नाटकीय होता है।
  • विकास और आधुनिक स्थिति
    • 20वीं शताब्दी में महिलाओं ने इसे अपनाया, आज वे प्रमुख कलाकार हैं, जैसे यामिनी कृष्णमूर्ति और शोभा नायडू।
    • भारत के आठ मान्यता प्राप्त शास्त्रीय नृत्यों में शामिल कुचिपुड़ी वैश्विक मंचों पर लोकप्रिय है
    • लेकिन अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है। यह कुचेलापुरम की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखता है।

15. निम्नलिखित में से किस राज्य में वसंत उत्सव के रूप में 'झोड़ा' नृत्य किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) उत्तराखंड
Solution:
  • 'झोड़ा' उत्तराखंड का एक सामुदायिक नृत्य है। यह मेलों में नृत्य के साथ बढ़ने वाले गायन की संगत में किया जाता है।
  • 'झोड़ा' की उत्पत्ति उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र से हुई है। इसे गढ़वाली और कुमाऊंनी लोक नृत्य रूपों का संयोजन कहा जाता है।
  • 'झोड़ा' एक समूह नृत्य शैली है, जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों भाग लेते हैं।
  • नृत्य शैली और प्रदर्शन
    • इस नृत्य में पुरुष व महिलाएँ एक गोल वृत्त बनाकर कंधे से कंधा जोड़ते हैं
    • थोड़ा आगे झुककर हल्की छलांगों के साथ कदम उठाते हैं। गर्दन व कंधों की लयबद्ध गतियाँ इसे जीवंत बनाती हैं
    • जबकि केंद्र में हुड़का (ढोल) बजाते हुए मुख्य गायक गीत की पहली पंक्ति गाता है
    • बाकी लोग उसे दोहराते हैं। यह शादियों, मेलों व त्योहारों में भी लोकप्रिय है, जहाँ सामूहिक एकता व भाईचारे का संदेश देता है।
  • सांस्कृतिक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • झोड़ा उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति का अभिन्न अंग है
    • जो सामाजिक सौहार्द्र व उत्सवपूर्णता को दर्शाता है।
    • कुमाऊँ के बागेश्वर, अल्मोड़ा व पिथौरागढ़ जैसे जिलों में माघ की चांदनी रातों या उत्तरायणी मेलों में इसे जीवंत रूप से देखा जा सकता है।
    • यह नृत्य न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि शुभ कार्यों व मंगलकामनाओं से भी जुड़ा हुआ है।
  • अन्य अवसर विविधताएँ
    • वसंत के अलावा, झोड़ा चांचरी के साथ जागर, बनौत्सव व सामूहिक आयोजनों में होता है।
    • उत्तराखंड के अन्य लोक नृत्यों जैसे छोलिया या चांचरी से यह अपनी सामूहिकता में भिन्न है।
    • आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में यह परंपरा जीवित है, जो राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत रखती है।​

16. सफल शिकार क्रियाकलाप का जश्न मनाने के लिए सिद्दी धमाल निम्नलिखित में से किस राज्य में नृत्य के रूप में किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) गुजरात
Solution:
  • सिद्दी, गुजरात के प्रमुख आदिवासी समुदायों में से एक है। उनका नृत्य और संगीत काफी उत्तम है।
  • धमाल एक ऐसी नृत्य शैली है, जो शिकार के प्रति सिद्दियों के जुनून को दर्शाती है।
  • यह नृत्य एक सफल शिकार अभियान से लौटने के बाद सिद्दियों द्वारा किया जाता था।
  • पूरा विवरण
    • क्या है सिद्धि धमाल: सिद्धि धमाल (जिसे शीदी या हबशी के नाम से भी जाना जाता है
    • गुजरात के प्रमुख आदिवासी समुदायों में से एक का परंपरागत लोक-नृत्य है।
    • इस नृत्य में समुदाय की वीरता, समुदायिक एकता और शिकार की परंपरागत कहानियाँ प्रदर्शन के माध्यम से प्रस्तुत की जाती हैं।
    • गुजरात के कई आदिवासी समूह इस नृत्य को अपने उत्सवों और सामाजिक समारोहों में करते हैं, विशेषकर Hunting या success celebration के संदर्भ में।
    • सांस्कृतिक संदर्भ: सिद्धि धमाल को गुजरात में समुदायों का अभिन्न हिस्सा माना जाता है
    • जो उपमहाद्वीप के दक्षिणी/पूर्वी अफ्रीकी प्रभावों के साथ जुड़े ऐतिहासिक अस्तित्व के हिस्से के रूप में भी समझा जाता है।
    • नृत्य की प्रस्तुति में पारंपरिक वेश-भूषा, गीत और ताल की विशेषताओं पर जोर होता है, जो इलाके की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं।
    • अन्य तथ्य: सिद्धि शब्द का पर्याय “शीदी” और “हब्शी” भी कहा जाता है
    • जो इन समुदायों के संबन्ध और इतिहास से जुड़ा एक भाग है।
    • गुजरात के अलावा कुछ सीमित क्षेत्रों में इन समुदायों के अन्य चिह्न भी मिलते हैं
    • शुद्ध नृत्य रूप के रूप में गुजरात से उनका सबसे मजबूत लिंक माना जाता है।

17. भरतनाट्यम की उत्पत्ति निम्न में से किस राज्य से हुई है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) तमिलनाडु
Solution:
  • भरतनाट्यम को सबसे प्राचीन शास्त्रीय नृत्य माना जाता है। इस नृत्य को तमिलनाडु में देवदासियों द्वारा विकसित व प्रसारित किया गया था।
  • भरतनाट्यम के दो भाग होते हैं तथा साधारणतया दो अंशों में संपन्न किया जाता है
  • पहला नृत्य और दूसरा अभिनय। नृत्य शरीर के अंगों से उत्पन्न होता है। इसमें रस, भाव और काल्पनिक अभिव्यक्ति जरूरी है।
  • नृत्य की संरचना
    • भरतनाट्यम का नाम 'भरत' (नाट्यशास्त्र के रचयिता भरत मुनि से), 'नाट्यम' (नृत्य), 'रागम' (संगीत), 'तालम' (लय) और 'भावम' (अभिव्यक्ति) से मिलकर बना है।
    • यह नृत्य तीन प्रमुख अंगों पर आधारित है: नृत्य (शारीरिक गतियां), नृत (भावपूर्ण अभिनय) और नाट्य (कथा वर्णन)।
    • एक पूर्ण प्रदर्शन में अलारिप्पू (प्रवेश), जटिस्वरम (तांत्रिक चालें), वर्णम (केंद्रीय भावपूर्ण भाग), पदम (भक्ति भजन) और तिल्लाना (समापन) जैसे भाग शामिल होते हैं।
  • पुनरुद्धार और प्रसिद्ध नर्तक
    • 20वीं शताब्दी में ई. कृष्णा अय्यर और रुक्मिणी देवी अरुंडेल ने इसे मंदिरों से बाहर लाकर आधुनिक मंच पर प्रतिष्ठित किया।
    • प्रसिद्ध नर्तकियां जैसे यामिनी कृष्णमूर्ति, पद्मा सुब्रमण्यम, मृणालिनी साराभाई और लक्ष्मी विश्वनाथन ने इसे वैश्विक पहचान दी।
    • संगीत नाटक अकादमी द्वारा इसे आठ प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों में से एक घोषित किया गया है।​
  • पोशाक और संगीत
    • पारंपरिक पोशाक में रंगीन साड़ी, आभूषण, घुंघरू और माथे पर बिंदी प्रमुख हैं। यह मुख्य रूप से कार्नाटक संगीत पर आधारित होता है
    • जिसमें वीणा, मृदंगम, वायलिन और कंघीरा जैसे वाद्ययंत्रों का प्रयोग होता है।
    • तंजौर की नाट्यशाला परंपरा ने इसके 400 से अधिक मूल भाव (हस्तमुद्राओं) को संरक्षित किया है।

18. निम्नलिखित में से किसे भारतीय लोक और जनजातीय नृत्य से संयुक्त भारतीय शास्त्रीय नृत्य के लिए यूरोपीय नाट्य तकनीकों को अपनाने के द्वारा संलयन कला बनाने के लिए जाना जाता था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) उदय शंकर
Solution:
  • उदय शंकर एक भारतीय नर्तक और कोरियाग्राफर थे
  • जिन्हें नृत्य की एक संलयन शैली बनाने, यूरोपीय नाट्य तकनीकों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य में ढालने, भारतीय शास्त्रीय लोकनृत्य के तत्वों से ओत-प्रोत करने के लिए जाना जाता है।
  • वर्ष 1971 में भारत सरकार ने इन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।
  • संलयन कला के संदर्भ में वह कलाकार जो भारतीय लोक/जनजातीय नृत्यों से संयुक्त भारतीय शास्त्रीय नृत्य के लिए यूरोपीय नाट्य तकनीकों को अपनाने के लिए विशेष रूप से पहचाने जाते हैं
  • वह उदय शंकर हैं। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय और लोक नृत्यों के तत्वों को पश्चिमी बैले-नाट्य तकनीकों के साथ मिलाकर आधुनिक नृत्य की एक नई धारा स्थापित की
  • जिसे व्यापक रूप से संलयन कला (fusion) के तौर पर जाना जाता है
  • उदय शंकर ने नृत्य की कई रचनाओं में क्षैतिज रूप से पश्चिमी तकनीकों और भारतीय कथा-नृत्य परंपराओं को समाहित किया
  • जिससे भारतीय नृत्य की वैश्विक पहचान बनी. उनकी शिक्षाओं और प्रदर्शन-count के बीच यह अनुभव हुआ
  • पश्चिमी नाट्य तकनीकें स्थानीय भारतीय भाव-भंगिमाओं और रस-व्यंजना के साथ बैठती हैं
  • परिणामतः एक नया, समकालीन नृत्य रूप उभरा जिसे आज भी संलयन कला के उदाहरण के रूप में उद्धृत किया जाता है.

19. पद्मश्री, 2022 पुरस्कार से सम्मानित राम सहाय पांडे मध्य प्रदेश के बेदिया समुदाय के निम्नलिखित में से किस नृत्य शैली से संबंधित हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) राय
Solution:
  • राम सहाय पांडे मध्य प्रदेश के सागर जिले के एक 'राय नर्तक' हैं। 'राय' नृत्य पारंपरिक रूप से बेदिया समुदाय के साथ जुड़ा हुआ है।
  • हालांकि वह समुदाय के सदस्य नहीं थे, उन्होंने अपना पूरा जीवन 'राय' नृत्य का अभ्यास और प्रदर्शन करने तथा नृत्य रूप के लिए स्वीकृति और सम्मान हासिल करने के लिए समर्पित कर दिया।
  • वर्ष 2022 में भारत सरकार ने राम सहाय पांडे को कला में उनके योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया।
  • विस्तृत उत्तर
    • कौन सा नृत्य: राई/राई नृत्य, जो बुंदेलखंड क्षेत्र की पारंपरिक लोक नृत्य है और बेड़िया समुदाय के साथ गहरा संबंध रखता है।​
    • प्रयोजन और भूमिका: राई नृत्य स्थानीय कथाओं, प्रकृति, प्रेम और समुदाय जीवन की कहानियों को हाथ-पांव की हरकतों और ताल-धुनों के माध्यम से प्रस्तुत करता है
    • यह नृत्य क्षेत्रीय त्योहारों और सामाजिक अवसरों पर किया जाता है।​
    • राम सहाय पांडे का योगदान: उन्होंने राई नृत्य को व्यापक मंच पर प्रस्तुत किया
    • इसकी वैधता व मान्यता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उसे राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में मदद की; इसी योगदान के लिए उन्हें 2022 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
    • संदिग्ध विकल्पों के स्पष्टीकरण: राई के अलावा अन्य नृत्य जैसे Karma, Ravala, Badhai बेड़िया समुदाय से संबद्ध नहीं हैं
    • उनसे अलग धारणाओं के साथ जुड़ते हैं; पांडे जी का उल्लेखित कार्य राई नृत्य के संरक्षण और प्रचार से जुड़ा है।
  • उद्धरण और स्रोत
    • Rai/Raai नामक नृत्य की स्पष्ट रूपरेखा भी Bundelkhand क्षेत्र के लोक नृत्य के रूप में दी गई है
    • यह बेडिया समुदाय के परंपरा से जुड़ा माना जाता है.​

20. पुरुलिया के भुबन कुमार किस नृत्य शैली के पुरस्कृत नर्तक हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 03 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) छऊ
Solution:
  • पुरुलिया के भुबन कुमार छऊ नृत्य शैली के नर्तक हैं।
  • संक्षेप में उत्तर: भुबन कुमार Purulia (पुरुलिया) क्षेत्र के छौ (Chhau) नृत्य के पुरस्कार विजेता कलाकार हैं।
  • विस्तृत विवरण:
    • नृत्य शैली पहचान: भुबन कुमार Purulia क्षेत्र की छौ (Chhau) नृत्य परख-पुरुषों में प्रसिद्ध हैं।
    • जो युद्ध/कथात्मक कथन को नृत्य-आकृति में प्रस्तुत करती है.​​
    • पुरस्कार पहचान: उनके नाम राष्ट्रपति पुरस्कार जैसे उच्च सम्मानों से मान्यता मिल चुकी है, जो भारतीय छऊ कला के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.
    • कलाकृतियों के क्षेत्र: Purulia छौ विशेषकर मुखौटा-नृत्य और पारंपरिक हथकंडों के साथ ऊर्जावान प्रदर्शन के लिए जाना जाता है
    • भुबन कुमार की प्रस्तुति इसी धारा की प्रतिनिधि मानी जाती है.​​
    • पृष्ठभूमि और प्रभाव: Purulia छौ के कलाकारों में परिवारिक विरासत और क्षेत्रीय परंपराओं का गहरा योगदान होता है
    • भुबन कुमार इस परंपरा के समकालीन उन्नयनों में माने जाते हैं
    • उनके प्रदर्शन ने लोक-नाटक के अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की पहचान को प्रोत्साहित किया है.​​
  • एक दृष्टांत:
    • उदाहरण के तौर पर Purulia छौ में मुखौटे और हैरतअंगेज डांस-चालों के कारण यह नृत्य एकदम दृश्य-आक्रामक और साहसी बन जाता है
    • इस संदर्भ में भुबन कुमार की भूमिकाएं इस शैली की ध्वनि और गति-शैली को दिखाती हैं.