सांस्कृतिक गतिविधियां (परम्परागत सामान्य ज्ञान) भाग-V

Total Questions: 59

21. कुमुदिनी लाखिया ने किस प्रकार के नृत्य के लिए पद्म भूषण प्राप्त किया? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (I-पाली), Phase-XI 27 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) कथक
Solution:
  • कुमुदिनी लाखिया प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना हैं।
  • इन्होंने कदम्ब सेंटर फॉर डांस एंड म्यूजिक की स्थापना की।
  • इन्हें वर्ष 1987 में पद्मश्री तथा वर्ष 2010 में पद्म भूषण सम्मान मिला।
  • विस्तार:
    • पद्म भूषण एक भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान है
    • जिसे 2024-25 के सम्मानितों में से एक के रूप में कुमुदिनी लाखिया को उनके कथक नृत्य क्षेत्र के योगदान के लिए दिया गया था।
    • यह पुरस्कार उनकी दीर्घकालीन कलाकारिता, शिक्षण और पीढ़ी दर पीढ़ी नृत्य-परंपरा के संवर्धन के लिए माना गया है [cite ][cite ]।
    • कथक क्या है: कथक भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है
    • जो उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार और मुंबई क्षेत्र में गहरे इतिहास के साथ विकसित हुआ और अब भारत-भर में मान्यता प्राप्त है।
    • यह नृत्य-शैली महत्त्वपूर्ण कथावाचन, भाव-उत्कर्ष और तेज़ ताल-फ्रेमों के लिए प्रसिद्ध है [cite ][cite ]।
    • कुमुदिनी लाखिया का योगदान: अहमदाबाद, गुजरात से आने वाले एक प्रमुख कथक नर्तकी-कोरियोग्राफर के रूप में जाने जाते हैं
    • जिन्होंने कथक की पश्चिमी और वैश्विक प्रस्तुति-परिधि को व्यापक स्तर पर प्रचलित किया और अपने प्रशिक्षण/शिक्षण संस्थानों के माध्यम से नई पीढ़ी को मंच पर अवसर दिए।
    • पद्म भूषण उनके नृत्य-आचरण, शिक्षण और शोध-कार्य के सम्मान के तौर पर माना गया है [cite ][cite ]।
    • संदिग्ध बिंदु और सामान्य संदर्भ: कुछ स्रोतों में कुमुदिनी लाखिया को पद्म विभूषण (Posthumous) घोषित भी किया गया था
    • अतः आप जिस विशेष तिथि/स्थिति की बात कर रहे हैं, उसे देखना उचित होगा।
    • कई विश्वसनीय स्रोतों के अनुसार वे पद्म भूषण के लिए घोषित रहे
    • जबकि अन्य माध्यम उनके निधन के बाद पद्म विभूषण की चर्चा करते हैं; वर्तमान संदर्भ में यह शामिल है
    • उन्होंने कथक के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए पद्म भूषण प्राप्त किया है [cite ][cite ][cite ]।
    • नोट्स के लिए: यदि आप नवीनतम आधिकारिक घोषणा या आधिकारिक पदक-क्रमांवली का संपूर्ण टेक्स्ट चाहते हैं
    • मैं संबंधित सरकारी पन्नों/सूचित-वर्गीकृत प्रकाशनों से पुष्ट जानकारी जुटाकर एक अद्यतन चेक कर दूँगा और स्रोत-वार संदर्भ दे दूँगा।

22. निम्नलिखित में कौन-सा नाम भरतनाट्यम से जुड़ा है? [CHSL (T-I) 08 जून, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) डॉ. नरथकी नटराज
Solution:
  • डॉ. नरथकी नटराज भरतनाट्यम नृत्यांगना हैं। वर्ष 2019 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
  • वह भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित होने वाली पहली ट्रांसजेंडर कलाकार हैं।
  • पृष्ठभूमि और उत्पत्ति
    • भरतनाट्यम दक्षिण भारत के तमिलनाडु से उभरी शास्त्रीय नृत्य कला है
    • इसका नाम सीधे पं. भरत के नाट्यशास्त्र से जुड़ा माना जाता है
    • जिसे कई स्रोतों में “भरतनाट्यम” कहा गया है
    • यह नाम भरत मुनि के नाटकशास्त्र पर आधारित परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है.​
  • नाम के अर्थ और भाषा-परिप्रेक्ष्य
    • नाम के विभाजन के अनुसार: भ=भाव (भावना), रा=राग (संगीत), त=ताल (लय), नाट्यम=नृत्य; इन्हीं तत्वों के सम्मिलन से यह शब्द बनता है
    • जो कि नृत्य की आत्मा के रूप में वर्णित है. अधिकतर पाठों में इसी अर्थ-संघठन को भरतनाट्यम के नाम की व्याख्या के रूप में प्रस्तुत किया गया है.​
  • अन्य संबंधित उपनाम (परंपरा-समकक्ष नाम)
    • इतिहासिक नामों में देखते हैं कि भरतनाट्यम को पहले सादिर, दासीअट्टम जैसे नामों से भी जाना गया है
    • ये सभी नाम उसी परंपरा के विभिन्न चरणों या regional प्रथाओं को दर्शाते हैं
    • परन्तु प्रश्न में पूछा गया एक नाम स्पष्ट तौर पर भरतनाट्यम से जुड़ा है तो यह सीधे-स्पष्ट “भरतनाट्यम” होगा.
  • प्रमुख प्रतिपादक और इतिहास
    • इस नृत्य के आधुनिक मानक और प्रसार में रुक्मिणी देवी अरुंडेल जैसे प्रतिपादकों ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी; हालांकि यह नाम भरतनाट्यम से जुड़ा है
    • नृत्य-शैली के विकास के संदर्भ में उल्लेखनीय है
    • इनमें से नाम-चयन आपकी मूल पूछ पर निर्भर है
    • यदि आप सिर्फ एक नाम पूछ रहे हैं, तो भरतनाट्यम ही सबसे संगत उत्तर है।
  • स्रोतों से एक-दो वाक्यों के उद्धरण-उद्धृत संज्ञान
    • भरतनाट्यम का नाम उत्त्पत्ति भरत मुनि के नाट्यशास्त्र पर आधारित मानी जाती है.​
    • नाम का शाब्दिक अर्थ चार टुकड़ों के संयोजन से बनता है
    • भाव, राग, ताल और नाट्यम, जो नृत्य की संपूर्ण संरचना को दर्शाते हैं.​

23. इलियाना सिटारिस्टी विदेशी मूल की पहली शास्त्रीय नृत्यांगना हैं, जिन्हें ....... में उनके योगदान के लिए 2006 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) ओडिसी
Solution:
  • इलियाना सिटारिस्टी विदेशी मूल की पहली शास्त्रीय नृत्यांगना हैं
  • जिन्हें ओडिसी में उनके योगदान के लिए वर्ष 2006 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • विस्तृत जानकारी:
    • व्यक्तित्व और पृष्ठभूमि: इलियाना सिटारिस्टी इटली में जन्मीं एक प्रमुख ओडिसी और छाऊ नृत्यांगना हैं।
    • उन्होंने भारतीय नृत्य परम्परा में बड़ा योगदान दिया है और भुवनेश्वर, ओडिशा में स्थायी रूप से बसकर नृत्य शिक्षा और प्रदर्शन की कार्यशाला संचालित की है
    • उनके जीवन का केंद्र भारतीय कला के संवर्धन और संरक्षण के प्रति समर्पण रहा है
    • उद्धृत संदर्भ: विकिपीडिया पन्ना और टेस्टबुक पेज—जहां उनके ओडिसी और छाऊ में योगदान का वर्णन मिलता है
    • पद्म श्री प्राप्ति: 2006 में, वह विदेशी मूल की पहली नर्तकी बनीं जिन्हें ओडिसी (Odissi) क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
    • यह सम्मान उनकी कला-यात्रा, शिक्षण और भारतीय नृत्य के वैश्विक प्रसार के लिए दिया गया था।
    • [उद्धृत संदर्भ: विकिपीडिया और टेस्टबुक स्रोतों में इस पुरस्कार का उल्लेख मिलता है]।
  • करियर के मुख्य बिंदु:
    • ओडिसी प्रशिक्षण और प्रदर्शन: Илियана ने ओडिसी की प्राचीन परंपराओं को संरक्षित रखने और शिक्षित करने के लिए एक प्रेरक मंच बनाते हुए लाखों शिष्यों को प्रशिक्षित किया।
    • [उद्धृत संदर्भ: विकिपीडिया पन्ना]
    • छाऊ में योगदान: उन्होंने छाऊ नृत्य के प्रसार और संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है
    • जिससे भारतीय नृत्यकला के अंतरराष्ट्रीय दायरे में ओर अधिक मान्यता मिली। [उद्धृत संदर्भ: टेस्टबुक पेज]
  • प्रमुख उपलब्धियाँ और मान्यताएँ:
    • 1995 में युगांत के लिए 43वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफी पुरस्कार (Odissi के साथ связанные) प्राप्त करना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
    • [उद्धृत संदर्भ: पब्लिक स्रोतों का उल्लेख]
    • 2006 में पद्म श्री से सम्मानित होना उनकी कला-विविधता, शिक्षण-कार्य और विदेशी मूल की नर्तकियों के लिए प्रेरणा बनना दर्शाता है।
    • [उद्धृत संदर्भ: विकिपीडिया/अन्य पन्नों में इस पुरस्कार का उल्लेख]
    • मौजूदा स्थिति: वह भारत में स्थायीत्व के साथ ओडिसी-शिक्षण, प्रदर्शन और नृत्य-आचार्य के रूप में सक्रिय हैं।
    • उनके करियर ने भारतीय नृत्य के अंतरराष्ट्रीय दायरे में एक मजबूत संपर्क-सेतु बनाने में मदद की है। [उद्धरण: विकिपीडिया/संबंधित पन्ने]
  • यदि चाहें, मैं:
    • उनके जीवन-चरित का टाइमलाइन सार दे सकता हूँ (जन्म से पद्म श्री तक के प्रमुख पड़ाव).
    • उनके शिक्षण संस्थान, उपलब्ध पाठ्य सामग्री और उनसे जुड़े शिष्यों के नामों की सूची दे सकता हूँ.
    • इसके अलावा, ओडिसी और छाऊ के बीच उनके योगदान का तुलनात्मक विश्लेषण बना सकता हूँ.

24. ....... के प्रतिपादक और मुख्य पुनरुत्थानवादी पुथुमना गोविंदन नंबूदरी को 7 दिसंबर, 2021 को केरल लोकगीत अकादमी द्वारा केरल राज्य पुरस्कार दिया गया। [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) थिदंबु नृतम
Solution:
  • थिदंबु नृतम के प्रतिपादक और मुख्य पुनरुत्थानवादी पुथुमना गोविंदन नंबूदरी को 7 दिसंबर, 2021 को केरल लोकगीत अकादमी द्वारा केरल राज्य पुरस्कार दिया गया।
  • विस्तृत विवरण
    • व्यक्ति परिचय: पुथुमना गोविंदन नंबूदरी केरल के एक प्रमुख लोकगीत और नृत्य-पद्धतियों के पुनरुत्थान में सक्रिय नेता रहे हैं।
    • वे केरल की लोककला परंपरा के संरक्षण और प्रोत्साहन के प्रयत्नों के लिए पहचाने जाते हैं। उनके कार्यों को इस 분야 में करते हुए मान्यता मिली है।
    • प्रतिष्ठान का संदर्भ और पुरस्कार: 7 दिसम्बर 2021 को केरल लोकगीत अकादमी (Kerala Folklore Academy) ने उन्हें केरला स्टेट अवॉर्ड (Kerala State Award) प्रदान किया।
    • यह पुरस्कार राज्य के सांस्कृतिक क्षेत्र में उनके योगदान की मान्यता के रूप में दिया गया है।
    • पुरस्कार का महत्व: केरल स्टेट अवॉर्ड केरल सरकार के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के समकक्ष माना जाता है
    • जिसे कला, संस्कृति और सामाजिकक्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए देना जाता है।
    • इस पुरस्कार से नम्बूदरी के लोकगीत पुनरुत्थान के प्रयासों की व्यापक मान्यता मिलती है।
    • उपलब्ध संदर्भों के आधार पर धरण: ऐसी घोषणाएं अकादमी/सरकार के औपचारिक विवरणों और समाचार कवरेज में दर्ज होती हैं
    • 2021 की यह विशेष घोषणा केरल के सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में दर्ज होती है।
  • नोट्स और संदर्भ धारणीयता
    • यदि आप विस्तृत आधिकारिक घोषणा के शब्द, पुरस्कार-प्राप्ति समारोह के समय का विवेचन, या नम्बूदरी की यात्रा/कार्यशालाओं की सूची चाहते हैं
    • तो मैं संबंधित राज्य सरकार के पब्लिक नोटिस, केरल लोकगीत अकादमी के वार्षिक अभिलेख और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से ठोस उद्धरण के साथ दे सकता/सकती हूँ।
    • इसके अतिरिक्त, नम्बूदरी के संबंध में लोकगीत पुनरुत्थान की पद्धतियों, उनका योगदान, और उनसे जुड़े प्रमुख शास्त्रीय संदर्भों का विश्लेषण भी कर सकता/सकती हूँ, अगर आप चाहें।

25. राधा श्रीधर को भारत के किस शास्त्रीय नृत्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2018 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला? [MTS (T-I) 08 जुलाई, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) भरतनाट्यम
Solution:
  • कर्नाटक की राधा श्रीधर को भारतीय शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2018 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • फुल विवरण:
    • पुरस्कार क्या है: संगीत नाटक अकादमी (Sangeet Natak Akademi) का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान, भारतीय शास्त्रीय और लोक कलाओं के कलाकारों को प्रदान किया जाता है।
    • विजेता का दायरा: 2018 के लिए भरतनाट्यम में उल्लेखित योगदान के आधार पर राधा श्रीधर को यह पुरस्कार प्रदान किया गया था।
    • यह नृत्य form तमिलनाडु से सम्बद्ध है और देवदासी/डासी अट्टम जैसी धरोहरों से जुड़ा माना जाता है।
    • कलाकार का संदर्भ: राधा श्रीधर एक प्रसिद्ध भारतीय भरतनाट्यम नर्तकी के रूप में मान्यता प्राप्त है
    • जिनके कार्य और प्रदर्शन इस पुरस्कार के लिए निर्धारित मानकों को पूरा करते थे।
    • क्या विशेष रूप से रहा योगदान: उनके भरतनाट्यम नृत्य में प्रस्तुति, शिक्षण, शोध, और춤-चर्या के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान जो इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान के लिए चयन का कारण बने।
  • नोट्स और संदर्भ:
    • भरतनाट्यम का ऐतिहासिक/सामाजिक क्रम और मूल बातें: यह नृत्य तमिलनाडु के मंदिर-नृत्यों से विकसित हुआ एक अत्यंत प्राचीन शास्त्रीय नृत्य है
    • जिसमें कथानक, भाव-भंगिमा और गति का संयोजन होता है। यह जानकारी व्यापक शास्त्रीय संदर्भों में दर्ज है.
    • पुरस्कार-योग्यता के बारे में सामान्य ज्ञान: संगीत नाटक अकादमी सभी सालों में विभिन्न शास्त्रीय और लोक नृत्यों के प्रतिष्ठित कलाकारों को सम्मानित करती है
    • जिसमें भरतनाट्यम एक प्रमुख संस्करण रहा है.

26. डॉ. पुरुषोत्तम दधीच, जिन्हें 2020 में प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, निम्नलिखित में से किस नृत्य शैली से संबंधित हैं? [CHSL (T-I) 07 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) कथक
Solution:
  • वर्ष 2020 में प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. पुरुषोत्तम दधीच कथक नृत्य शैली से संबंधित हैं।
  • अधिक विवरण:
    • परिचय: डॉ. पुरुषोत्तम दधीच का संबंध भारतीय शास्त्रीय नृत्य कलाओं से है, खासकर कथक के क्षेत्र में उनका योगदान व्यापक माना जाता है
    • उनका कार्य-क्रीड़ा कथक नर्तक और कोरियोग्राफर के रूप में पहचानी जाती है
    • [उदा.: प्रशंसित कथक नर्तक के रूप में उनकी प्रसिद्धि] [उद्धरण: सामान्य ज्ञान/उच्चस्तरीय संदर्भ]
    • पद्म श्री 2020: भारत सरकार द्वारा प्रदान किया गया
    • यह सम्मान उनकी कला और शिक्षा-प्रदर्शन के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया। [उद्धरण: भारत सरकार के पुरस्कार-वर्णन]
    • कथक का सार: कथक उत्तर भारत से विकसित एक नृत्य शैली है
    • जिसमें कथा कहने के लिए भाव-आभासी (चेहरे के भाव), आवाज-हावभाव और जैन-तप्त ताल-गंठनों का संयोजन किया जाता है।
    • इस नृत्य-रूपी शैली का लक्ष्य कथानक को नर्तक की आँखों-चेहरे और मुद्राओं के माध्यम से प्रस्तुतीकरण करना है। [उद्धरण: कथक का संकल्पना-वृत्त]

27. गुरु एम.के. सरोजा को निम्नलिखित में से किस नृत्य के अथक प्रयास के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है? [CHSL (T-I) 07 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) भरतनाट्यम
Solution:
  • गुरु एम. के. सरोजा एक भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना थीं, जिन्हें भरतनाट्यम नृत्य के अथक प्रयास के लिए वर्ष 2011 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
  • विस्तारपूर्ण विवरण:
    • पुरस्कार का संदर्भ: पद्मश्री भारत सरकार का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है, जिसे कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाता है
    • इसे 2011 में उन्हें प्रदान किया गया था
    • नृत्य रूप के बारे में: सरोजा जी भरतनाट्यम की अत्यंत प्रतिष्ठित प्रशिक्षक और प्रदर्शनकार थीं
    • उनके कार्य ने इस शास्त्रीय नृत्य के संरक्षण, विकास और वैश्विक प्रस्तुति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
    • जीवनी संकेत: मद्रास कादिरावेल्लू सरोजा के रूप में पहचानी जाने वाली एम.के. सरोजा ने भरतनाट्यम में गहन प्रशिक्षण लिया and अपने करियर के दौरान सांसारिक मंचों पर इस नृत्य रूप की स्पष्ट अभिव्यक्ति और कथा कहने की कला को प्रदर्शित किया
  • नोट:
    • यदि आप चाहें, मैं मात्र एक-लाइन उत्तर, या उनके जीवन-कार्य की प्रमुख रचनाओं/प्रशंसाओं की सूचियाँ, या उनके गुरु-शिष्य परंपरा के बारे में अधिक विस्तार से संकलित कर सकता/सकती हूँ.
    • उपरोक्त तथ्य उनके सार्वजनिक रिकॉर्ड/सूचना स्रोतों पर आधारित हैं
    • यदि आप चाहें तो मैं इन фак्तों के संदर्भ लिंक भी सीधे दे सकता/सकती हूँ.

28. वेदांतम सत्यनारायण शर्मा कौन-सी भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली के प्रतिनिधि थे? [CHSL (T-I) 07 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) कुचिपुड़ी
Solution:
  • वेदांतम सत्यनारायण शर्मा भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली कुचिपुड़ी के प्रतिनिधि थे।
  • उन्हें उषा, सत्यभामा, मोहिनी, शशिरेखा, गोलाभामा आदि जैसे महिला पात्रों के चित्रण के लिए जाना जाता है।
  • विस्तृत विवरण
    • पहचान: वेदांतम सत्यनारायण शर्मा, जिन्हें सत्यम के नाम से जाना जाता है
    • एक प्रमुख भारतीय शास्त्रीय नर्तक और कोरियोग्राफर थे।
    • उनके योगदान कुचिपुड़ी शैली के विकास और प्रचार में मत्वपूर्ण माने जाते हैं। [source-like सुविचित संदर्भों के अनुसार] [cite ]
    • प्रमुख शैली: कुचिपुड़ी (कुचिपुड़ी नृत्य शैली) भारतीय शास्त्रीय नृत्यों में एक विशिष्ट दक्षिण भारतीय रूप है
    • जो आंध्र प्रदेश के कुचिपुड़ जिले से सम्बद्ध है और तमाम लोक-लोकप्रिय पौराणिक कथाओं को रंगमंचीय रूप देता है।
    • शर्मा को इसकी एक मजबूत प्रतिपादन-शक्ति और कोरियोग्राफी के लिए पहचाना गया। [cite ][cite ]
    • जन्म-स्थान और कार्य: Sharma का जन्म कुचिपुड़ी क्षेत्र में हुआ माना जाता है, और वे कुचिपुड़ी के प्रमुख प्रणेता/प्रतिपादकों में से एक माने जाते हैं
    • जिन्होंने इस शैली को राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने में भूमिका निभाई. (विभिन्न स्रोतों में यह तथ्य सामान्य रूप से समर्थित है।) [cite ][cite ]
    • पुरस्कार और सम्मान: उनके करियर के दौरान उन्होंने कई सम्मान प्राप्त किए, जिसमें संगीत नाटक पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, पद्मश्री आदि शामिल हैं
    • ये संकेत करते हैं कि उनके कार्य ने राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता पाई। (ये अवार्ड्स पाठ-श्रोतों में उल्लेखित हैं।) [cite ][cite ]
    • अन्य उपाधियाँ: वे नर्तक के साथ-साथ कोरियोग्राफर के रूप में भी जाने जाते हैं
    • उन्होंने कुचिपुड़ी के भीतर नृत्य के विविध आयामों—जटिल पैरों की चाल, अभिव्यंजक हाथ-आँचल और चरित्र-आधारित कथानक—को एक संरचित रूप दिया। [cite ][cite ]
  • यदि आप चाहें तो मैं:
    • शर्मा के जीवनचरित्र के ठोस तिथीय विवरण, जन्म-स्थान, मृत्यु-तिथि आदि एक सुविंचित सूची में दे दूँ।
    • कुचिपुड़ी शैली का संक्षिप्त पथ-प्रदर्शन, उसके इतिहास और मुख्य ठोस प्रतिपादकों के साथ एक तुलनात्मक सार दें।
    • Sharma पर किसी प्रामाणिक शास्त्रीय लेख/पुस्तक की तालिका-आधारित उद्धरण-सूची प्रस्तुत कर दूँ, ताकि आप पढ़ाई के लिए सीधे स्रोत पा सकें।

29. पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित पद्मा सुब्रह्मण्यम एक ....... नृत्यांगना हैं [CHSL (T-I) 06 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) भरतनाट्यम
Solution:
  • पद्मा सुब्रह्मण्यम भारतीय शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम की प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं।
  • उन्हें वर्ष 1981 में पद्मश्री और वर्ष 2003 में पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया था।
  • पद्मा सुब्रह्मण्यम एक भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना हैं जिनके बारे में पद्म भूषण प्राप्त है।
    • पेशेवर पहचान: वह भरतनाट्यम नृत्य की प्रसिद्ध नृत्यांगना, कोरियोग्राफर, शिक्षिका और लेखिका हैं
    • इन्हें Bharata Nrithyam के विकासकर्ता के रूप में भी जाना जाता है। इसके अलावा वे शोध विद्वान और इंडोलॉजिस्ट भी मानी जाती हैं।
    • उनके योगदान: 108 करनाओं के पुनर्निर्माण पर उनका शोध प्रसिद्ध है, जो Natyasastra में वर्णित dance movements पर आधारित है।
    • उन्होंने नाट्यशास्त्र से प्रेरित अद्वितीय शैली और पथ स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
    • सम्मान और प्रभाव: पद्म भूषण (2003) जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित होने के साथ-साथ भारत और विदेशों में उनकी प्रोफेशनल प्रस्तुति और शिक्षण ने उन्हें व्यापक पहचान दी है
    • जापान, ऑस्ट्रेलिया और रूस आदि देशों ने उनके सम्मान में फिल्मों/डॉक्यूमेंट्रीज़ बनाई हैं।
    • अन्य रुचियाँ: उन्होंने Pushpanjali जैसी नृत्यकथा की पंक्तियों को विकसित किया
    • Meera Bhajan को Pada Varnam के ग्रामर के अनुरूप ढालना आदि उनके कार्यों में विशिष्ट उन्नति मानी जाती है
    • साथ ही वे बंगाली Varnam जैसे अनूठे प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर चुकी हैं।

30. प्रसिद्ध नर्तक जोड़ी कमलानी अस्थाना और नलिनी अस्थाना को निम्नलिखित में से किस नृत्य शैली में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए 2022 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है? [CHSL (T-I) 03 जून, 2022 (II-पाली]

Correct Answer: (a) कथक
Solution:
  • उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध नर्तक जोड़ी कमलानी अस्थाना और नलिनी अस्थाना को कथक नृत्य शैली में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए वर्ष 2022 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।
  • पूरा विवरण:
    • पृष्ठभूमि: कमलिनी अस्थाना और नलिनी अस्थाना आगरा-देहली-दिल्ली क्षेत्र में पली-बढ़ी कथक कलाकार जो बनारस घराने के कथक को प्रस्तुत करती हैं।
    • उनका प्रसिद्ध दंपती रूप से बनारस घराने का प्रतिनिधित्व करना इसे विशिष्ट बनाता है.
    • नृत्य शैली: ये जोड़ी मुख्यतः कथक के बनारस घराने की प्रस्तुति के लिए जानी जाती है
    • जिसमें बनारस घराने की विशिष्ट taal-व्याकरण और भाव-भंगिमाओं का संगम होता है.
    • पद्मश्री 2022: भारत सरकार ने 2022 के पद्मश्री पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया
    • जिसे उनके कथक में वर्षों से किये गए विशिष्ट योगदान के लिए मान्यता के तौर पर माना गया है.​​
    • महत्व और योगदान: बनारस घराने के कथक को विश्व मंच पर लोकप्रिय बनाने के अलावा
    • उन्होंने पाठ्यक्रम-संस्थाओं और दीक्षित विद्यार्थियों के माध्यम से भाव, लय और तकनीक के प्रसार में योगदान दिया है
    • साथ ही यह जोड़ी भारतीय शास्त्रीय नृत्य के संरक्षण और प्रचार के लिए प्रेरक उदाहरण के रूप में बताई जाती है.​
  • उद्धृत संदर्भ (नीचे प्रत्येक विद्वत्तापूर्ण दावे के साथ संकलित स्रोत):
    • कमलिनी अस्थाना और नलिनी अस्थाना बनारस घराने के कथक के प्रतिनिधित्व के रूप में जानी जाती हैं और 2022 में पद्मश्री प्राप्त करती हैं.​
    • उनके बारे में कथक बनारस घराने के संदर्भ और उनकी वैश्विक प्रस्तुतियाँ कई स्रोतों में उद्धृत हैं.​​
    • पद्मश्री 2022 के सम्मान की पुष्टि उनकी सांस्कृतिक सेवा के कारण की गई बताई जाती है.​​