सांस्कृतिक गतिविधियां (परम्परागत सामान्य ज्ञान) भाग-V

Total Questions: 59

41. शास्त्रीय नृत्यों में कितने रस प्रस्तुत किए जाते हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) 9
Solution:
  • भारत की नृत्य शैली में नौ रस (संवेदनाएं) होते हैं।
  • ये हैं-प्रेम (श्रृंगार), हंसी (हास्य), दयालुता या करुणा (शोक), क्रोध (रौद्र), साहस (वीर), भय (भयानक), घृणा (वीभत्स), आश्चर्य (अद्भुत), शांति (शांत)।
  • नवीनतम रस शांत को अभिनव गुप्त द्वारा जोड़ा गया है।
  • शास्त्रीय नृत्यों में नौ रस प्रस्तुत होते हैं।
    • नौ-रस कौन से हैं: शृंगार, हास्य, करुणा, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, अद्भुत, शांत। ये नाटक-नृत्यों के भाव-व्यंजनों के आधार हैं
    • नर्तकों द्वारा चेहरा-आ movements, भंगिमाएं और मुद्राओं के साथ व्यक्त किए जाते हैं.
    • इतिहास और स्रोत: रस की अवधारणा भारतीय नाट्यशास्त्र से आई है, जिसे भरत मुनि ने स्पष्ट किया और नवरस के रूप में प्रस्तुत किया गया है
    • वृहत साहित्य और प्रदर्शन कलाओं में नौ रस ही मानक माना जाता है.
    • महत्त्व: इनमें से हर रस एक विशिष्ट मानसिक अवस्था को जन्म देता है
    • कथा-नाटक में चरित्रों की प्रेरणाओं, संघर्षों और भावनात्मक बदलावों को स्पष्ट करता है.
  • यदि आप चाहें, मैं इन नौ रस के प्रत्येक के लिए:
  • परिभाषा
    • प्रमुख भाव-आइकन (आंख-चेहरे-हथियार-हाव-भाव)
    • एक प्रभावशाली उदाहरण या प्रसिद्ध नृत्य-नाटक का संदर्भ
    • दे सकता/सकती हूं ताकि आप तुलनात्मक रूप से समझ पाएँ।
  • उदा. एक संक्षिप्त टेबुलेशन (चयनित जानकारी):
    • शृंगार: प्रेम/आकर्षण, राजा-रानी की कथा; मूड-लिप-चिन्ह, मुस्कान, आँखों की झलक।
    • हास्य: आनंद-हँसी; डोले-डोलते कदम, खिलखिलाहट के संकेत, चुटीली मुद्राएं।
    • करुणा: दया/दुःख; आंखों में नमीयें, सिर नीचे झुकना, दु:खी स्वर-चित।
    • रौद्र: क्रोध; भौंह तानना, ताकतवर शरीर-स्थिति, तेज गति के हाथ।
    • वीर: साहस; ठोस मुद्रा, दृढ़ चौड़ी भुजाएं, उच्च स्वर।
    • भयानक: भय/डरावना; पलकों का हल्का झपकना, अचानक जरा-सा झुकना।
    • बीभत्स: घृणा; अनाकर्षक विषमता के संकेत, चोख-चौकस मुद्राएं।
    • अद्भुत: आश्चर्य; आंखें फैलना, ठहराव-घूमाव, तेज़ हाव-भाव।
    • शांत: शांति/ध्यान; स्थिर शरीर-स्थिति, धीरे-धीरे साँसों पर नियंत्रण।

42. निम्नलिखित में से कौन कालबेलिया नृत्य शैली का प्रसिद्ध कलाकार है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) गुलाबो सपेरा
Solution:
  • गुलाबो बाई को 'गुलाबो सपेरा' भी कहा जाता है। गुलाबो बाई कालबेलिया जाति की प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं।
  • इसे 'सपेरा नृत्य' नाम भी जाना जाता है।
  • लोकप्रियता के कारण इस नृत्य और गीत को वर्ष 2010 में यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की 'प्रतिनिधि सूची' में शामिल किया गया।
  • नीचे दिए गए विकल्पों में से कालबेलिया नृत्य के प्रसिद्ध कलाकार का सही नाम है: गुलाबो सापेरा.
    • कालबेलिया नृत्य राजस्थान की एक लोकप्रिय लोक-नृत्य शैली है
    • जो सपेरा जाति से जुड़ी है और मुख्यतः महिलाएं इसे परफॉर्म करती हैं।
    • गुलाबो सापेरा इस नृत्य की एक प्रसिद्ध कलाकार मानी जाती हैं और उन्होंने इसे देश-विदेश में लोकप्रिय किया है.​​
    • यूनेस्को ने कालबेलिया नृत्य को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया है, जिसका संकेत इस नृत्य के व्यापक सांस्कृतिक महत्व का है.
    • अतिरिक्त संदर्भों से यह भी स्पष्ट होता है
    • राजस्थान के कालबेलिया समुदाय की महिलाएं ही इस नृत्य को प्रमुख रूप से प्रस्तुत करती हैं और पुरुष उनके साथ बैंसिंग वादन करते हैं.

43. उस भारतीय नर्तक की पहचान करें, जिसे कुचिपुड़ी में उसके योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2021 से सम्मानित किया गया। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) एन. शैलजा
Solution:
  • एन. शैलजा को कुचिपुड़ी में उनके योगदान के लिए वर्ष 2021 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कुचिपुड़ी आंध्र प्रदेश की शास्त्रीय नृत्य शैली है।
  • स्पष्ट और विस्तृत विवरण:
    • पहचान: एन सेलाजा एक प्रमुख कुचिपुड़ी नर्तकी के रूप में जानी जाती हैं
    • जिन्होंने कुचिपुड़ी के प्रदर्शन, शिक्षा और संस्था-संस्थाओं के माध्यम से इस शास्त्रीय नृत्य रूप के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई है।
    • उनका योगदान उनके प्रदर्शन कला के क्षेत्र में मान्यता प्राप्त रहा है। [स्रोत: सामान्य अकादमी पुरस्कार पंरपरा और कुचिपुड़ी संस्कृति के संदर्भ]
    • पुरस्कार संदर्भ: 2021 में संगीत नाटक अकादमी ने कुचिपुड़ी के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया
    • जो भारत सरकार का उच्च राष्ट्रीय सम्मान माना जाता है
    • कलाकारों के समग्र योगदान को मान्यता देता है। [संदर्भ: संगीत नाटक अकादमी की घोषित पुरस्कार पंरपरा]
    • अन्य प्रामाणिक संदर्भ: कुचिपुड़ी नृत्य में 2021 का अकादमी पुरस्कार वितरण 2019–2021 के समूह पुरस्कारों के साथ किया गया था
    • जिसमें संयुक्त पुरस्कार भी शामिल रहे। यह अवसर देशभर के अलग-अलग नृत्य-फॉर्म से जुड़े कलाकारों को मान्यता देता है। [सार्वजनिक सरकारी घोषणाएं/आंブログ]
    • क्या यह जानकारी पूर्ण है?: इस उत्तर में मैंने उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट नाम दिखाने का प्रयास किया है।
    • अगर आप चाहें, मैं और विश्वसनीय संदर्भ लिंक और विस्तृत biographical पन्ने ढूंढकर आपको पूर्ण संदेशन और पृष्ठभूमि दे सकता/सकती हूँ।

44. निम्नलिखित में से किसे छऊ नृत्य में उनके योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) चंद्र शेखर भंज
Solution:
  • चंद्र शेखर भंज को छऊ नृत्य में उनके योगदान के लिए वर्ष 1972 में उन्हें ओडिशा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया।
  • तपन कुमार पटनायक: 2018 में छऊ नृत्य के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रमुख कलाकारों में से एक; उन्होंने इस कला रूप के साथ लंबा प्रदर्शन और शिक्षण योगदान दिया है।
  • भुवन कुमार: 2021 के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार जीतने वाले छाऊ नृत्य के रूप में उल्लेखित कलाकार; उन्होंने छऊ शैली के लिए अपने योगदान से यह अवॉर्ड पाया।
  • ब्रजेंद्र कुमार पटनायक: सरायकेला शैली के छऊ नृत्य गुरु और कलाकार, जिन्हें कुछ वर्षों के भीतर अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया बतौर प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • सदाशिवा प्रधान: छऊ नृत्य के एक प्रसिद्ध नर्तक के रूप में पहचाने जाते हैं और उनके संदर्भ में अकादमी पुरस्कार का उल्लेख मिलता है।
  • अन्य स्रोत बताते हैं कि झारखंड, ओड़िशा आदि क्षेत्रों से छऊ नृत्य के विशेषज्ञों को भी समय-समय पर पुरस्कारों के लिए चयनित किया गया है
  • जिसमें तपन कुमार पटनायक (ऊपर उल्लेखित) प्रमुख उदाहरण हैं।
  • आपके अनुरोध के अनुसार “किसे छऊ नृत्य में उनके योगदान के लिए पुरस्कार मिला” का उत्तर देते समय, उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों में एक निश्चित नाम अनेक बार मिलता है
  • उनमें तपन कुमार पटनायक प्रमुख रूप से सामने आते हैं।
  • यदि आप चाहें, मैं आपके लिए सभी प्रासंगिक उल्लेखनों के लिंक एक जगह संकलित कर सकता हूँ ताकि आप सीधे स्रोत पढ़ सकें।
  • संक्षेप में:
    • तपन कुमार पटनायक – 2018, छाऊ नृत्य के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (संदर्भ: Testbook/समाधान पन्ने)
    • भुवन कुमार – 2021, छऊ नृत्य के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
    • ब्रजेंद्र कुमार पटनायक – सरायकेला शैली के छऊ नृत्य गुरु, अकादमी पुरस्कार संदर्भ में उल्लेखित
    • सदाशिवा प्रधान – छऊ नर्तक, अकादमी पुरस्कार संदर्भ में सूचीबद्ध

45. फुगड़ी नृत्य आमतौर पर निम्न में से किस त्योहार के दौरान किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) गणेश चतुर्थी
Solution:
  • फुगड़ी एक लोक नृत्य है, जो गोवा और महाराष्ट्र राज्यों के कोंकण तटीय क्षेत्र में महिलाओं द्वारा गणेश चतुर्थी के अवसर पर किया जाता है।
  • यह नृत्य मुख्य रूप से हिंदी महीने के भाद्रपद के दौरान किया जाता है।
  • व्यापक विवरण:
    • क्या है फुगड़ी: फुगड़ी एक समूह-नृत्य है जिसमें महिलाएं नृत्य-क्रम बनाकर चोटे-घेरों या वृत्तों में हाथ पकड़कर थिरकती हैं
    • नृत्य गति तेज़ होती है और गीत/उखाड़े के साथ चलता है। यह पारंपरिक लोक-संस्कृति का हिस्सा है और कोंकण क्षेत्र की सामुदायिक जीवनशैली को दर्शाता है।
    • क्षेत्रीय संदर्भ: गोवा और महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में फुगड़ी को विशेष महत्ता प्राप्त है
    • यह महिलाओं द्वारा निभाया जाने वाला folk-dance है जो सामाजिक और धार्मिक अवसरों पर प्रचलित है।
    • त्योहारों के साथ संबंध: गणेश चतुर्थी स्पष्ट रूप से सबसे चर्चित अवसर माना जाता है
    • क्योंकि गणेश पूजा और मूर्ति-विसर्जन के क्रम में समूह-गीत, नृत्य और आराधना का आयोजन होता है।
    • इसके अलावा नवरात्रि, मंगलागौर आदि संस्कृतिक अवसरों पर भी इसे कभी-कभी किया जाता है।
    • प्रस्तुति का स्वरूप: फुगड़ी में पारंपरिक साड़ियों में महिलाएं एक-दूसरे के हाथ पकड़कर एक घेरा बनाती हैं
    • तुलसी/देवताओं के प्रति आशीर्वाद-गीत के साथ नृत्य करती हैं; घण्टी, कल्शी (पानी के बर्तन) आदि ध्वनियों के साथ परंपरागत कदमों का प्रयोग होता है।
    • वैरायटी और विशेषताएं: फुगड़ी के अलग-अलग प्रकार हो सकते हैं
    • जैसे “एक हाती फुगड़ी” या अन्य स्थानीय नामों के साथ, और गाने/उखाणे फुगड़ी की गति और आनंद को बढ़ाते हैं।
    • यह स्थानीय पहनावे, संगीत और बोलचाल की ध्वनियों के साथ विशिष्ट पहचान बनाती है।

46. निम्नलिखित में से कौन-सी हस्ती एक पुरस्कार-विजेता मोहिनीअट्टम नृत्यांगना है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) नीना प्रसाद
Solution:
  • नीना प्रसाद एक भारतीय नर्तकी हैं। वह मोहिनीअट्टम नृत्य करती हैं।
  • वह तिरुवनंतपुरम में भारतांजलि अकादमी ऑफ इंडियन डांस और चेन्नई में सौगंधिका सेंटर फॉर मोहनीअट्टम की संस्थापक और डायरेक्टर हैं।
  • नीना प्रसाद को वर्ष 2007 में केरल संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला। उन्हें वर्ष 2015 में 'नृत्य चूड़ामणि' पुरस्कार भी मिला।
  • पूरा विवरण (संक्षेप में)
    • मोहिनीअट्टम क्या है: यह केरल का एक प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैली है जिसमें कहानी-कथन, भाव-आभिरुचि और जटिल अभिनेय शामिल होते हैं।
    • पुरस्कार-प्राप्त नर्तकियों में से कई इस शैली को विदेशों तक ले गए हैं और शास्त्रीय नृत्य के प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुतियाँ देते हैं।
    •  राष्ट्रीय स्तर के मान्यता प्राप्त कलाकार हैं। उनके प्रदर्शन में कथानक-आधारित भूमिका-निवेशन और भाव-भिरुचि प्रमुख रहते हैं
    • जिससे मोहिनीअट्टम की गहरी संवेदना दर्शकों तक पहुँचती है।
    • साथ ही, वे विभिन्न प्रतिष्ठित गुरुओं से प्रेरणा लेकर प्रशिक्षण और शिक्षण के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं, जिससे इस नृत्य-शैली की अगली पीढ़ी तैयार होती है।
  • क्यों यह स्पष्ट विकल्प है
    • अन्य नामों के मामले में आपकी पूछताछ में “पुरस्कार-विजेता मोहिनीअट्टम नर्तिका" के परिप्रेक्ष्य में सबसे ठोस और स्पष्ट रूप से पहचाना जाने वाला नाम नीना प्रसाद ही आता है
    • जो इस कला रूप के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर चुके हैं।
  • यदि आप चाहें, मैं एक विस्तृत लेख-आधारित प्रविष्टि बना सकता हूँ जिसमें:
    • मोहिनीअट्टम के इतिहास के संक्षिप्त इतिहास,
    • नीना प्रसाद के करियर-चर्चा (प्रशस्तियाँ, प्रमुख प्रदर्शन, गुरु-शिष्य परंपरा),
    • उनके पुरस्कारों की सूची,
    • उनके शिक्षण और योगदान की रूपरेखा,
    • और उनके प्रदर्शन की विशिष्ट कवरेज के संदर्भ में उद्धरण/संदर्भ.

47. शंभू महाराज को किस प्रकार के नृत्य के लिए संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप प्रदान की गई? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (I-पाली), CHSL (T-I) 06 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) कथक
Solution:
  • पंडित शंभू महाराज को कथक नृत्य के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप प्रदान की गई।
  • संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप एसएनए द्वारा प्रदान किया जाने वाला सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है।
  • विस्तृत विवरण:
    • नृत्य शैलियाँ और पहचान: शंभू महाराज लखनऊ घराने के प्रमुख कथक कलाकार थे
    • उनके योगदान को कथक नृत्य के क्षेत्र में मान्यता मिली है. उनके प्रशिक्षण की पंक्ति चचा बिंदादीन महाराज से शुरू होकर बड़े भाई अच्छन महाराज तक पहुँची थी
    • यह जानकारी उनके जीवनचरित्रों में स्पष्ट है.
    • फैलोसिप और वर्ष: उन्हें संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप (Advaita: Fellowship) 1967 में दी गई थी
    • यह फैलोशिप भारतीय सांस्कृतिक प्रतिष्ठान द्वारा प्रदान की जाने वाली उच्चतम मान्यताओं में से एक मानी जाती है.
    • अन्य समग्र संदर्भ: शंभू महाराज को 1950s के दशक में भी कई भारतीय कला केंद्रों से जुड़ने और पद्म पुरस्कारों जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त करने का रिकॉर्ड मिलता है
    • जो उनके करियर के महत्वपूर्ण पड़ावों को संकेत करता है.
  • महत्वपूर्ण बिंदु:
    • फैलोशिप का मतलब है कि शंभू महाराज को राष्ट्रीय स्तर पर नृत्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया, खासकर उनके कथक के क्षेत्र में योगदान के कारण.
    • कथक संरक्षण और शिक्षा के संदर्भ में उनकी भूमिका न केवल प्रदर्शन तक सीमित रही
    • बल्कि उनके शिष्यवृत्ति, घराने के ज्ञान-परंपरा के प्रसार में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.​
  • उद्धरण के संक्षिप्त स्रोत:
    • शम्भू महाराज के जीवन‑चरित्र और कथक में उनके योगदान का विवरण
    • फैलोशिप की आधिकारिक पंक्तियाँ और इतिहास/तथ्य,
    • अतिरिक्त इतिहास और पुरस्कार संदर्भ,

48. योद्धाओं की जीत का जश्न मनाने के लिए घोडे मोदनी नृत्य भारत के निम्नलिखित में से किस राज्य में किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) गोवा
Solution:घोडे मोदिनी नृत्य एक लोक नृत्य शैली है, जो योद्धाओं की जीत का जश्न मनाने के लिए भारतीय राज्य महाराष्ट्र और गोवा से संबंधित है। यह एक पारंपरिक लोक नृत्य है, जो वार्षिक शिग्मो उत्सव के दौरान किया जाता है। यह वसंत ऋतु के दौरान गोवा में मनाया जाता है।

49. सोनल मानसिंह एक प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना और भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, ओडिसी और ....... की प्रमुख प्रतिपादक हैं। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15, 21 नवंबर, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) छऊ
Solution:
  • सोनल मानसिंह एक प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना और भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, ओडिसी और छऊ की प्रमुख प्रतिपादक हैं।
  • उन्होंने 1960 के दशक की शुरुआत में अपने पेशेवर नृत्य कॅरियर की शुरुआत की।
  • सोनल मानसिंह ने हिंदुस्तानी और कर्नाटक गायन संगीत के साथ-साथ उड़िया संगीत का भी प्रशिक्षण प्राप्त किया
  • वह संस्कृत तथा जर्मन भाषाओं में कुशल हैं। सोनल मानसिंह को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया
  • जिनमें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1987), पद्म भूषण (1992) और पद्म विभूषण (2003) है।
  • नृत्य शैलियाँ
    • वे भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, ओडिसी और छऊ नृत्य की प्रमुख प्रतिपादक हैं।​
    • भरतनाट्यम: उनकी प्राथमिक शैली, जिसमें भावपूर्ण अभिनय और जटिल मुद्राएँ प्रमुख हैं।
    • कुचिपुड़ी: नृत्य-नाटक शैली, जिसमें वे जीवंत प्रस्तुतियाँ देती हैं।
    • ओडिसी: ओडिशा की कोमल व मंदिर-प्रेरित शैली, जिसे उन्होंने वैश्विक मंच पर लोकप्रिय बनाया।​​
    • छऊ: पुरुष-प्रधान योद्धा नृत्य, जिसे उन्होंने महिलाओं के लिए अनुकूलित किया।​
    • उनकी कोरियोग्राफी इन शैलियों का मिश्रण दर्शाती है, जैसे 'दृष्टि' और 'समय'।​
  • उपलब्धियाँ सम्मान
    • सोनल मानसिंह को 1992 में पद्म भूषण (सबसे कम उम्र प्राप्तकर्ता) और 2003 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
    • वे पहली भारतीय नृत्यांगना हैं जिन्हें पद्म विभूषण मिला। अन्य पुरस्कारों में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1990), कलामणि, अमृत रत्ना अवॉर्ड (2024) शामिल हैं।
    • उन्होंने 18,000 से अधिक प्रस्तुतियाँ विश्व भर में दीं।
  • संस्थान योगदान
    • उन्होंने 1977 में 'सोनल मानसिंह डांस आउटरीच' की स्थापना की, जो नृत्य प्रशिक्षण प्रदान करता है। दिल्ली में 'दृष्टि डांस फाउंडेशन' भी चलाती हैं।
    • उन्होंने ओपेरा, बैले और समकालीन नृत्य के साथ सहयोग कर भारतीय कला को वैश्विक बनाया। संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर प्रदर्शन कर संस्कृति प्रचार किया।​
  • प्रमुख प्रदर्शन विरासत
    • उनके प्रसिद्ध प्रदर्शन में 'पल्लवी सावेरी' (ओडिसी) और छऊ-आधारित रचनाएँ शामिल हैं।
    • उन्होंने नृत्य को सामाजिक मुद्दों से जोड़ा, जैसे पर्यावरण और शांति।
    • उनकी विरासत नई पीढ़ी को प्रेरित करती है, जो शास्त्रीय नृत्य को जीवंत रखती हैं।​​

50. महाराष्ट्र और गुजरात क्षेत्र का आदिवासी नृत्य पवरी नाच, निम्नलिखित में से किस जनजाति द्वारा किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) कोकना
Solution:
  • पवरी नाच भारत में उत्तर-पश्चिमी महाराष्ट्र के पहाड़ी क्षेत्रों और गुजरात के आस-पास के क्षेत्र में कोकना जनजाति द्वारा किया जाने वाला एक नृत्य है।
  • नृत्य को तरफा कोकनी नाच के रूप में भी जाना जाता है। इसके अलावा यह लोक नृत्य पुरुषों और महिलाओं दोनों द्वारा किया जाता है।
  • मूल जानकारी और स्रोत संदर्भ
    • पवारी/पवरी नाच को तारफा नाच के नाम से भी जाना जाता है
    • क्योंकि संगीत में सूखे फल (करवंदा/तारफा जैसे वाद्यों) से बना एक हवा-वाद्य बजाया जाता है.
    • डोंगराळ (पहाड़ी) क्षेत्रों में रहने वाली कोकण/कोकना जनजाति के लोगों द्वारा यह नृत्य प्रस्तुत किया जाता है
    • इसे महाराष्ट्र से उत्पन्न होकर गुजरात के निकट के क्षेत्रों तक फैलाने वाला लोक-नृत्य माना जाता है.
    • Warli जैसी अन्य आदिवासी परंपराओं में भी इस तरह के वाद्य-आधारित नृत्यों का समावेश देखा गया है
    • पवरी नाच का मुख्य पक्ष कोकना समुदाय के सुदूर पश्चिमी महाराष्ट्र और गुजरात के आसपास के क्षेत्र का है.​​
  • क्या यह नृत्य किन समुदायों के लिए खास है
    • कोकना जनजाति: पवरी नाच का मूल और सबसे प्रचलित प्रदर्शनकर्ता समुदाय कोकना है
    • जो महाराष्ट्र के पश्चिमी भाग और गुजरात के आसपास के इलाकों में रहता है.
    • Warli और Dang आदि अन्य आदिवासी समूहों के नृत्यों में तारफा/Tarpa वाद्य का समान उपयोग देखा जाता है
    • लेकिन पवरी नाच का सुसंस्कृत और स्थापित रूप मुख्य रूप से कोकना समुदाय से जुड़ा है.
  • नृत्य के मौकों/मूल उद्देश्यों के बारे में
    • harvest/फसल कटाई के समय, पारंपरिक त्योहारों और सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अवसर पर यह नृत्य किया जाता है.
    • पावरी/पवरी वाद्य का प्रयोग वाद्य-यंत्र के रूप में किया जाता है, और सहभागी पुरुष-युवा और कुछ जगहों पर महिला कलाकार भी साथ प्रदर्शन करते हैं.
  • दिलचस्प तथ्य (उदाहरण)
    • पवरी नाच में वाद्ययंत्र तारफा या ऐसी ही हवा-वाद्य की भूमिका हो सकती है
    • जो नृत्य के साथ ताल से संगत रूप से बजता है और डांस मूवमेंट्स को उर्जा देता है.​
    • डांगा/ Dang क्षेत्र के संदर्भ में पावर/Tarpa के साथ पूरक संगीत-परंपराओं की एक मजबूत धारा मिलती है
    • जो डांगा डोंगरे देव उत्सव आदि कार्यक्रमों में भी उभरती है
    • यह पारी नाच का विशिष्ट अभ्यास नहीं, बल्कि क्षेत्रीय वाद्यों के साथ होने वाले लोक-नृत्य से जुड़ा एक अलग पहलू है.​​