सांस्कृतिक गतिविधियां (परम्परागत सामान्य ज्ञान) भाग-V

Total Questions: 59

51. निम्नलिखित में से कौन-सा जनजातीय नृत्य त्रिपुरा में मोग समुदाय द्वारा किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 3 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) संगराई
Solution:
  • संगराई नृत्य बंगाली कैलेंडर वर्ष के चैत्र महीने के दौरान संगराई त्योहार के अवसर पर मोग आदिवासी समुदाय द्वारा किया जाने वाला एक पारंपरिक भारतीय नृत्य है।
  • इसकी उत्पत्ति त्रिपुरा (भारत) में हुई थी। मोग बौद्ध धर्म को मानने वाले हैं।
  • 26 जनवरी, 2018 को भारत के गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर पहली बार त्रिपुरा के मोग जनजाति का पारंपरिक नृत्य संगराई प्रस्तुत किया गया था।
  • पारंपरिक परिप्रेक्ष्य
    • मोग (Mog) जनजाति त्रिपुरा के प्रमुख आदिवासी समूहों में से एक है
    • जिनकी सांस्कृतिक पहचान नृत्यों, गीतों और जीविका-आधारित रीतिरिवाजों से जुड़ी है।
    • संगराई एक प्रमुख त्योहार के रूप में उनके जीवन में खास स्थान रखता है
    • उसी अवसर पर संगराई नृत्य प्रस्तुति होती है
    • यह नृत्य समुदाय की खुशी, समृद्धि और नई फसल के स्वागत का प्रतीक माना जाता है ।
  • संगराई नृत्य के 특징
    • कब और कैसे किया जाता है: संगराई त्योहार के अवसर पर मोग समुदाय के युवा घर-घर जाते हैं
    • सिर पर एक पवित्र या आशीर्वाद देने वाले पेड़/संकेत स्वरूप पर रखा गया सामान लेकर नृत्य करते हैं
    • यह एक सामाजिक-धार्मिक संचलन है जो समुदाय में एकता और बंधुत्व को बढ़ावा देता है ।​
    • उपकरण और आभूषण: नृत्य के दौरान गीतों के साथ ढोल-नगाड़े जैसे वाद्ययंत्र बजते हैं
    • नर्तक सिर पर साधारण सामान/हैंडलूम वस्तुएँ रखे दिखते हैं, जिससे यह प्रदर्शन विशिष्ट बनता है ।​
    • वाद्य-संगीत: संगराई नृत्य में पारंपरिक गीत, पर्यायवाची धुनें और समुदाय के पुरखों के गीत शामिल होते हैं
    • गायन का हिस्सा नृत्य के साथ अत्यंत संगत रहता है ।​
    • सामाजिक महत्व: यह नृत्य केवल मनोरंजन नहीं होता; यह परंपरा, रीति-रिवाज और नई फसल के समय शुभकामनाओं को संजोने का एक माध्यम है
    • जिससे प्रवास-नृत्य और स्थानीय परिचय मजबूत होते हैं ।​
  • तुलनात्मक नोट
    • त्रिपुरा के अन्य प्रमुख नृत्यों के साथ अंतर यह है कि होजागिरी सबसे प्रसिद्ध रियांग समुदाय का नृत्य है
    • जबकि संगराई specifically मोग समुदाय के संगराई त्योहार से जुड़ा विशेष नृत्य है
    • हालांकि दोनों में समूह-गायन और समूह-नृत्य की संगतता दिखती है, संगराई मोग का विशिष्ट त्योहार-आधारित प्रतीक है ।
  • एक उदाहरण
    • मान लें त्रिपुरा के मोग समुदाय के लोग संगराई त्योहार मनाते हैं।
    • इस मौके पर युवा टोली अपने सिर पर पवित्र प्रतीक लेकर एक पारंपरिक क्रम में नृत्य करती है
    • जबकि समूह गान-वाद्यों के साथ एक साथ चलता है।
    • यह दृश्य समुदाय की सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक समागम का प्रमाण है ।​

52. भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवाओं की अधिकारी शोवना नारायण ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नृत्य के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए कई पुरस्कार जीते हैं और हाल ही में एक फिल्म में अभिनय किया है। वह निम्नलिखित में से किस नृत्यरूप की प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) कथक
Solution:
  • शोवना नारायण एक भारतीय 'कथक नर्तकी' तथा भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवाओं की अधिकारी हैं।
  • वह भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करती है तथा उन्हें वर्ष 1992 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।
  • उन्होंने बिरजू महाराज से प्रशिक्षण लिया है। इसके अलावा उन्होंने हाल ही में एक फिल्म में अभिनय भी किया है।
  • प्रारंभिक जीवन और प्रशिक्षण
    • बचपन से ही नृत्य के प्रति समर्पित, उन्होंने नौकरीपेशा जीवन के साथ-साथ नृत्य को भी उतने ही समर्पण से अपनाया, जो उन्हें अद्वितीय बनाता है।
  • नृत्य करियर और उपलब्धियां
    • शोवना नारायण ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असंख्य प्रदर्शन किए हैं
    • जिसमें कई राष्ट्राध्यक्षों के समक्ष कत्थक प्रस्तुतियां शामिल हैं।
    • उन्हें नृत्य में योगदान के लिए पद्म श्री (1992) और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मान मिले हैं।
    • वे कोरियोग्राफर के रूप में भी विख्यात हैं, जिन्होंने पश्चिमी बैले, स्पेनिश फ्लैमेन्को और भारतीय शास्त्रीय नृत्यों के साथ अभिनव संयोजन रचे, जैसे 'द डॉन आफ्टर' (1994)।
    • राष्ट्रमंडल खेल 2010 के उद्घाटन और समापन समारोहों की क्रिएटिव डायरेक्टर के रूप में उनका योगदान अविस्मरणीय है।​
  • अभिनय और अन्य योगदान
    • हाल ही में उन्होंने एक फिल्म में अभिनय किया, जो उनके बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।
    • एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में, उन्होंने कर्गिल युद्ध, सुनामी और बाढ़ प्रभावितों के लिए नृत्य आयोजन किए।
    • वे 'ललितार्पण फेस्टिवल' और 'आसावरी फेस्टिवल' जैसी वार्षिक आयोजनों की संचालिका हैं, जो युवा कलाकारों को प्रोत्साहित करती हैं।​​
  • कत्थक नृत्य की विशेषताएं
    • कत्थक मुख्य रूप से उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश) का शास्त्रीय नृत्य है
    • जो कथावाचक कथाकारों से विकसित हुआ। इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं:​
    • जटिल तालबद्ध पदकदम (टुकड़े, तोड़े, परन)।
    • अभिनयपूर्ण मुद्राएं और चेहरे के भाव (अंगिका, भाविका)।
    • लयकारी (घुंघरू की बोलों से ताल का संवाद)।
    • शोवना नारायण ने इसे आधुनिक विषयों जैसे महिला मुद्दों और दार्शनिक कथाओं से जोड़ा, जैसे 'कादंबरी: द पोएट्स म्यूज'।​

53. उत्तर-पश्चिम भारत के उस लोकप्रिय नृत्य का नाम बताएं जिसमें नर्तक कांच की बोतलों के ऊपर या पीतल की प्लेट के रिम पर खड़े होकर अपने सिर पर कई बर्तन या घड़े संतुलित करते हैं- [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) भवाई
Solution:
  • भवाई नृत्य कुशल विशेषज्ञों द्वारा किया जाने वाला नृत्य का एक बहुत ही कठिन रूप है।
  • इस नृत्य में नर्तक कांच की बोतलों के ऊपर या पीतल की प्लेट के रिम पर खड़े होकर अपने सिर पर कई बर्तन या घड़े संतुलित करते हैं।
  • इस. नृत्य की उत्पत्ति गुजरात में मानी जाती है। यह मूल रूप से राजस्थान के जाट, भील, मीना, कुम्हार और कालबेलिया समुदायों की महिलाओं द्वारा किया जाता है।
  • भवाई नृत्य का इतिहास
    • लेकिन यह उत्तर-पश्चिम भारत के राजस्थान में भी व्यापक रूप से अपनाया गया।
    • यह जाट, भील, रायगर, मीना, कुम्हार और कालबेलिया समुदायों की महिलाओं (और कभी-कभी पुरुषों) द्वारा किया जाता है।​​
    • यह नृत्य खानाबदोश कलाकारों की परंपरा से जुड़ा है, जो अपनी फुर्ती और संतुलन कौशल से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते हैं।
    • सदियों पुरानी यह कला अब संरक्षण की जरूरत महसूस कर रही है।​
  • प्रदर्शन की विशेषताएं
    • नर्तकियां सिर पर 7 से 9 मिट्टी के घड़े या पीतल के बर्तन रखती हैं, जिन्हें रंग-बिरंगे फूलों या डिजाइनों से सजाया जाता है।
    • वे नंगे पैर कांच की बोतलों के मुंह पर, टूटी कांच की परत पर, तलवार की धार पर या पीतल की थाली के किनारे खड़ी होकर तेज लय में झूमती हैं।
    • यह संतुलन का अद्भुत प्रदर्शन है, जो वर्षों की कठिन साधना का नतीजा होता है।​
    • प्रदर्शन धीरे-धीरे शुरू होता है—पहले 1-2 घड़े, फिर संख्या बढ़ाकर 9 तक, जो दर्शकों को रोमांचित रखता है।​
  • संगीत और वेशभूषा
    • भवाई तेज लोक धुनों पर होता है, जिसमें ढोलक, झांझर, पखावज, सारंगी और हारमोनियम प्रमुख हैं।​
    • नर्तकियां रंग-बिरंगी घाघरा-चोली पहनती हैं, जिनमें आईने के काम और भारी आभूषण होते हैं।
    • घड़ों में कभी जल या दीया भी रखा जाता है, जो नृत्य को और जोखिमपूर्ण बनाता है।​
  • सांस्कृतिक महत्व
    • यह नृत्य राजस्थान की रंगीन संस्कृति का प्रतीक है, जो दैनिक जीवन (पानी ढोना) को कला में बदल देता है।
    • त्योहारों, विवाहों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रस्तुत किया जाता है।​
    • सरकार इस लुप्तप्राय परंपरा को जीवित रखने के प्रयास कर रही है
    • जैसे प्रशिक्षण केंद्र और उत्सवों का आयोजन।
    • भवाई नृत्य न केवल मनोरंजन, बल्कि धैर्य, कुशलता और साहस का प्रतीक है।​

54. त्योहार और संबंधित राज्य के गलत युग्म का चयन कीजिए। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) सरहुल - तमिलनाडु
Solution:
  • सरहुल त्योहार झारखंड के आदिवासी समुदायों का एक प्रमुख पर्व है, जो मुख्य रूप से झारखंड एवं ओडिशा के आदिवासी क्षेत्रों में मनाया जाता है।
  • इस पर्व को मुख्य रूप से मुंडा, हो और उरांव आदिवासियों द्वारा मनाया जाता है। यह उनके महत्वपूर्ण उत्सवों में से एक है।
  • सामान्य गलत युग्म का उदाहरण
    • एक क्लासिक उदाहरण "सागानावा - असम" है, जो गलत है। सागानावा (या सागा दावा) वास्तव में सिक्किम का प्रमुख बौद्ध त्योहार है
    • जहां भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण का उत्सव मनाया जाता है।
    • यह महायान बौद्ध अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र है और बड़े हर्षोल्लास से वार्षिक रूप से आयोजित होता है। असम से इसका कोई संबंध नहीं।​
  • अन्य सही युग्म (संदर्भ के लिए)
    • वांगाला - मेघालय: गारो जनजाति का धान फसल का त्योहार।
    • भूमचू - सिक्किम: कंचनजंगा झील से जुड़ा लोकप्रिय उत्सव।
    • ओणम - केरल: राजा महाबली की स्मृति में नाव दौड़ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों वाला पर्व।​
  • भारत के प्रमुख त्योहारों की राज्यवार सूची
    • नीचे प्रमुख त्योहारों और उनके संबंधित राज्यों की विस्तृत तालिका दी गई है।
    • यह सूची विभिन्न स्रोतों से संकलित है और परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सामान्य युग्मों को कवर करती है।
    • गलत युग्म पहचानने के लिए, हमेशा त्योहार की उत्पत्ति और क्षेत्रीय विशेषता जांचें।
  • aगलत युग्म क्यों महत्वपूर्ण?
    • प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे SSC, UPSC, राज्य PSC) में ऐसे प्रश्न सामान्य होते हैं
    • जहां विकल्पों में एक युग्म जानबूझकर गलत रखा जाता है। उदाहरणस्वरूप:
    • सही: ओणम-केरल, लेकिन यदि कोई कहे "ओणम-असम" तो गलत।
    • सागानावा को असम से जोड़ना भ्रम पैदा करता है, क्योंकि असम के प्रमुख त्योहार हैं बिहू, अंबुबाची मेला आदि।
  • अतिरिक्त टिप्स और विस्तार
    • क्षेत्रीय विविधता: कई त्योहार बहु-राज्यीय होते हैं, जैसे लोसार (सिक्किम, हिमाचल, लद्दाख), लेकिन उनका मुख्य केंद्र एक राज्य होता है।​
    • आदिवासी त्योहार: छत्तीसगढ़ का बस्तर दशहरा या झारखंड का करम उत्सव स्थानीय देवताओं से जुड़े हैं।​
    • राष्ट्रीय महत्व: दीपावली, होली राष्ट्रीय हैं, लेकिन राज्य-विशेष रूप (जैसे गुजरात का दीपोत्सव) पर फोकस करें।
    • परीक्षा तैयारी के लिए: हमेशा त्योहार की धार्मिक/कृषि पृष्ठभूमि याद रखें।
    • गलत युग्म अक्सर भौगोलिक निकटता (जैसे सिक्किम का असम से जोड़ना) पर आधारित होते हैं।​

55. डोल्लू कुनिथा, कर्नाटक क्षेत्र का एक उच्च ऊर्जा वाला लोकप्रिय लोक नृत्य मुख्य रूप से निम्नलिखित में से किस देवता के लिए किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) भगवान शिव
Solution:
  • डोल्लू कुनिथा, कर्नाटक क्षेत्र का एक उच्च ऊर्जा वाला लोकप्रिय लोक नृत्य है।
  • यह श्री बीरलिंगेश्वर की पूजा से जुड़ा एक लोकप्रिय लोक नृत्य है, जिन्हें भगवान शिव का एक रूप माना जाता है
  • जिसकी उत्पत्ति उत्तरी कर्नाटक के कुरुबा गौड़ा समुदाय के अनुष्ठानों से हुई थी।
  • यह नृत्य कुरुबा गौडा समुदाय के पुरुषों के बीच प्रचलित है
  • त्योहार, मंदिर अनुष्ठानों तथा सामुदायिक कार्यक्रमों में भक्ति और मनोरंजन दोनों का मिश्रण पेश करता है।
  • इस नृत्य में big drums (डोलू) को टक-टकी तालों के साथ बजाकर समूह में नृत्य किया जाता है
  • परंपरागत पद्धतियों के अनुसार देवता की पूजा-अर्चना की जाती है।
  • इस नृत्य के पीछे की पौराणिक कथा Halumatha Purana/Kuruba Purana से जुड़ी रवानी भी सामने आती है
  • जिसमें ドोल्लु कुनिथा के प्रतीक के रूप में डोलू Drum का देव-रूप के साथ संबंध दर्शाया गया है।
  • इसलिए सही उत्तर है: यह मुख्य रूप से कर्नाटक राज्य के लिए किया जाता है
  • Beereshwara Beeralingeswara (Shiva-धर्मिक) देवता की पूजा के साथ जुड़ा रहता है।

56. प्रायः शस्योत्सव और नवरात्रि के दौरान किया जाने वाला कुम्मी नृत्य किस दक्षिणी राज्य का लोकप्रिय नृत्य है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) तमिलनाडु
Solution:
  • कुम्मी तमिलनाडु और केरल का एक लोकप्रिय लोक नृत्य है। कुम्मी का प्रदर्शन गोलाकार रूप में खड़ी महिलाओं द्वारा किया जाता है।
  • कुम्मी नृत्य की खासियत है कि इसका प्रदर्शन बिना संगीत के केवल लयबद्ध ताली बजाकर किया जाता है।
  • कुम्मी का प्रदर्शन पोंगल (यह एक शस्योत्सव है) और नवरात्रि जैसे समारोहों और त्योहारों के दौरान किया जाता है। इस नृत्य में महिलाओं द्वारा घेरे में नृत्य भी किया जाता है।
  • उत्पत्ति और इतिहास
    • जब वाद्य यंत्रों का आविष्कार नहीं हुआ था, इसलिए इसमें केवल तालियों की लय पर प्रदर्शन होता है।
    • तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों में यह सबसे पुराने नृत्यों में गिना जाता है
    • तमिल संस्कृति को जीवंत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    • कुछ स्रोतों में इसे केरल और आंध्र प्रदेश से भी जोड़ा जाता है
    • लेकिन कटाई उत्सवों और नवरात्रि के संदर्भ में तमिलनाडु ही इसका प्रमुख केंद्र है।
  • प्रदर्शन शैली
    • यह नृत्य गोल वृत्त या पंक्तियों में किया जाता है, जहां महिलाएं हाथों से लयबद्ध तालियां बजाती हैं
    • लोक गीत गाती हैं। कोई संगीत वाद्य नहीं होता; केवल तालियों की थाप और मुखर गायन पर निर्भर रहता है।
    • नर्तकियां फसलों की कटाई जैसी हरकतें करती हैं, चेहरे के भावों पर जोर दिया जाता है
    • एक महिला नेतृत्व में गीत गाती है जबकि अन्य दोहराती हैं। जब सभी थक जाते हैं
    • नृत्य समाप्त हो जाता है। यह सरलता और सामूहिक एकता का प्रतीक है।​
  • प्रमुख अवसर
    • कुम्मी नृत्य पोंगल (शस्योत्सव), ओणम, नवरात्रि, शादियों, जन्मदिनों और मंदिर उत्सवों पर लोकप्रिय है।
    • विशेष रूप से पोंगल के दौरान 'कोलट्टम' या 'पीनल कोलाट्टम' के नाम से जाना जाता है।
    • नवरात्रि में देवी पूजा के रूप में 'सेवई कुम्मी' किया जाता है, जबकि 'वीरा कुम्मी' वीरता का उत्सव मनाता है।
  • प्रकार और विविधताएं
    • वीरा कुम्मी: साहस और वीरता पर आधारित, पुरुषों द्वारा भी कभी-कभी किया जाता है।
    • सेवई कुम्मी: पूजा-अर्चना से जुड़ा, नवरात्रि में प्रचलित।
    • कोलट्टम: पोंगल विशेष, कटाई का आनंद मनाने वाला।
      तमिलनाडु के अलावा केरल में भी समान शैली देखी जाती है, लेकिन तमिल संस्कृति में यह अधिक गहराई से जुड़ा है।​
  • सांस्कृतिक महत्व
    • यह नृत्य तमिलनाडु की सामुदायिक एकता, कृषि संस्कृति और मौखिक परंपराओं को दर्शाता है।
    • युवा पीढ़ी को सिखाकर इसे जीवित रखा जा रहा है। आधुनिक समय में भी त्योहारों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इसका प्रदर्शन होता है
    • जो तमिल विरासत को संरक्षित करता है। कुम्मी जैसे नृत्य दक्षिण भारत की लोककलाओं को वैश्विक मंच पर ले जाते हैं।​​

57. निम्नलिखित में से कौन-सा नृत्य आंध्र प्रदेश के आदिवासी लोगों द्वारा किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) धीमसा
Solution:
  • धीमसा एक आदिवासी नृत्य है, जो मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश में पोरजा जाति की महिलाओं द्वारा किया जाता है।
  • धीमसा नृत्य पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए है। यह नृत्य विशाखापत्तनम का आधिकारिक नृत्य माना जाता है
  • इसे अक्सर शादियों में प्रस्तुत किया जाता है। इस नृत्य में वाद्ययंत्रों में मोरी, किरीडी, थुडुमा और डापू शामिल हैं।
  • संभाव्य विकल्प: आंध्र प्रदेश के आदिवासी नृत्यों में प्रमुख रूप से धीम्सा (Dhimsa) नृत्य माना जाता है। नीचे विस्तृत जानकारी है:
  • खासकर ऑंगोल/डूर्ग शहरों के आस-पास के क्षेत्रों में और आंध्र प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में यह परंपरा प्रमुख रूप से निभाई जाती है।
  • यह नृत्य वर्षा ऋतु या त्योहारों के अवसर पर प्रदर्शन के लिए खासा प्रसिद्ध है। [-web स्रोतों के अनुसार सामान्य जानकारी]
  • स्थान और समुदाय: धीम्सा आंध्र प्रदेश के कुछ जनजातीय समुदायों के भीतर सामाजिक/धार्मिक आह्वान, बारिश की इच्छा, और फसल-समृद्धि के अनुरोध के साथ जोड़ा जाता है
  • प्रस्तुत场 में महिलाएं और पुरुष एक साथ भाग लेते हैं। [web स्रोत]
  • प्रदर्शन के संकेत: पारंपरिक गीत, ताल और ड्रम (डहप, ड्रम आदि) के साथ नृत्य होता है; यह समूह-नृत्य होता है
  • जिसमें एक चालक दल चक्र बनाकर घूमता है और विभिन्न कदम-ताल दिखाते हैं।
  • यह समुदाय के समारोहों में सामाजिक एकीकरण और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। [web स्रोत]
  • वैकल्पिक आदिवासी नृत्य: आंध्र प्रदेश में अन्य आदिवासी/लोकनृत्यों में डम्पी/घंटामर्दाला, कुचिपुड़ी (यह शास्त्रीय भी है
  • कुछ समुदायों में लोक-रूप में अभ्यास होता है), ढ़िम्सा के अलावा बोनालू, धीम्सा, कुम्मी आदि उल्लेखनीय हैं।
  • हालाँकि, इनकी प्रस्तुति और क्षेत्रीयता स्थानीय समुदायों के अनुसार भिन्न हो सकती है। [web स्रोत]
  • सांस्कृतिक महत्व: धीम्सा नृत्य न केवल मनोरंजन है बल्कि समुदाय की परंपरागत कथाओं, पूजा-अर्चना, और सामाजिक सहभागिता को भी दर्शाता है
  • यह आदिवासी इतिहास और जीवनशैली के अभिन्न अंग के रूप में माना जाता है। [web स्रोत]

58. असम का निम्नलिखित में से कौन-सा नृत्य सर्पदेवी मनसा की पूजा से जुड़ा है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) देवधानी
Solution:
  • देवधानी नृत्य भारत के असम राज्य में किया जाने वाला एक लोक नृत्य है।
  • यह नृत्य 'मनसा पूजा' या नाग देवी (सर्प देवी) की पूजा के समय किया जाता है।
  • देवधानी नृत्य का प्रदर्शन केवल महिलाओं द्वारा किया जाता है। यह एकल या समूह प्रदर्शन के रूप में किया जाता है।
  • विस्तारपूर्ण विवरण:
    • संदर्भ और पहचान: असम की पारंपरिक सांस्कृतिक परंपराओं में मनसा देवी (नाग देवी) की पूजा के साथ जुड़े नृत्यों में देवधनी प्रमुख रूप से पहचाना जाता है।
    • देवधनी एक अनुष्ठानिक नृत्य है जो नाग देवी मनसा की पूजा से निकटता से जुड़ा माना जाता है।
    • यह जानकारी असमिया लोक संस्कृति और धार्मिक प्रथाओं के स्रोतों में परिलक्षित होती है। [उद्धरण: सामान्य पाठ्य-स्रोत]
    • देवधनी क्या है: यह एक आध्यात्मिक और कथनात्मक नृत्य शैली है जिसमें कलाकार देवी का आह्वान करता है
    • उनकी उपस्थिति का प्रतीकात्मक प्रदर्शन करता है।
    • नृत्य के दौरान मूक-आदर्श स्थिति, शारीरिक मुद्रा और गति देवी-आस्था को व्यक्त करने के लिए प्रयोग की जाती हैं। [उद्धरण: सामान्य पाठ्य-स्रोत]
    • मनसा पूजा का संदर्भ: मनसा देवी की पूजा (Mansa Puja) पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में सांपों से जुड़ी आस्था के केन्द्र में है
    • शामयित वातावरण, मंदिरों और गांवों में आयोजित अनुष्ठानों के साथ इसे जोड़ा गया है।
    • देवधनी का हिस्सा होने के कारण यह नृत्य नाग देवी की शक्तियों, सांपों के साथ उनके संबंध और सुरक्षा से जुड़े प्रतीकों को भी दर्शाता है। [उद्धरण: सामान्य पाठ्य-स्रोत]
    • अन्य नृत्यों से तुलना: असम में बिहू एक प्रसिद्ध लोक नृत्य है जो बिहू उत्सव के साथ जुड़ा है
    • ऋतु-आधारित बदलावों को दर्शाता है; जबकि देवधनी एक विशिष्ट अनुष्ठानिक-धार्मिक नृत्य है जो मनसा पूजा से जुड़ा है।
    • इस प्रकार दोनों में उद्देश्य और प्रस्तुति संदर्भ अलग हैं। [उद्धरण: सामान्य पाठ्य-स्रोत]
    • सांस्कृतिक महत्त्व: देवधनी असम की सांस्कृतिक धरोहर का भाग है
    • नाग देवी मनसा के प्रतीक के रूप में लोक आस्था को व्यक्त करता है।
    • यह नृत्य स्थानीय मंदिरों, गांवों और त्योहारों पर प्रस्तुति के रूप में प्रचलित रहा है। [उद्धरण: सामान्य पाठ्य-स्रोत]
    • सावधानी: नाग-देवी मनसा संबंधित प्रथाओं के कई रूप हैं
    • कुछ समुदायों में इनमें सांपों के साथ अनुष्ठानिक-क्रीड़ाओं से जुड़ी क्रियाएं भी शामिल हो सकती हैं
    • इन सबका प्रस्तुति-आयोजन और स्थानीय मान्यताओं पर निर्भर होता है।
    • स्थानीय स्रोतों से सत्यापित जानकारी देखना उपयोगी रहता है। [उद्धरण: सामान्य पाठ्य-स्रोत]

59. निम्नलिखित में से कौन-सा नृत्य उत्तर भारत की रासलीला से प्रभावित था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) कथक
Solution:
  • शास्त्रीय नृत्य कथक का विकास उत्तर भारत की ब्रज की रासलीला से हुआ है।
  • नटवारी नृत्य या वृंदावन का रासलीला को पुनर्जीवित करने में उमा शर्मा का विशेष योगदान रहा।
  • यही नृत्य (नटवारी नृत्य या वृंदावन की रासलीला) आगे चलकर शास्त्रीय नृत्य कथक के रूप में विकसित हुई।
  • रासलीला का परिचय
    • यह भगवान कृष्ण और गोपियों की दिव्य लीलाओं, प्रेम क्रीड़ाओं और भक्ति भाव पर आधारित है।
    • नाट्यशास्त्र में इसे 'रासक' या 'हल्लीसक' के रूप में उल्लेखित उपरूपक माना गया है, जिसमें नृत्य प्रधानता होती है।
    • यह परंपरा जन्माष्टमी जैसे पर्वों पर मंचित होती है, जिसमें बृजभाषा के भजन, पद और संवादों का प्रयोग होता है।
    • रासलीला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अभिव्यक्ति है, जो सूरदास और अष्टछाप कवियों के रचनाओं से प्रेरित है।​
  • कथक पर प्रभाव
    • कथक उत्तर भारत का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है, जो ब्रज की रासलीला और वृंदावन की नटवारी शैली से सीधे प्रभावित है।
    • इसमें रासलीला के तत्व जैसे नित्यरास के 'परमेलू' पदन्यास, भ्रमरी (चक्कर), गतभाव नृत्य, नेत्र और भौंहों की नयनरम्य चालें स्पष्ट दिखती हैं।
    • कथक को 1960 के दशक में उमा शर्मा जैसी नृत्यांगनाओं ने नटवारी रूप में पुनर्जीवित किया।
    • इसके नृत्य में कृष्ण लीला के प्रसंग, जैसे मंडल रासक, ताल रासक और दंडक रासक, शामिल हैं। ब्रज गायकी और तबला की तालें भी रासलीला से ली गई हैं।
  • अन्य प्रभावित नृत्य रूप
    • रासलीला का प्रभाव देशभर फैला:
    • मणिपुरी रास: पूर्वोत्तर भारत में 18वीं शताब्दी से प्रचलित, पूरी तरह कृष्ण-राधा लीला पर आधारित शास्त्रीय नृत्य।​
    • गरबा (गुजरात): नवरात्रि में किया जाने वाला लोक नृत्य, रास के घेरा-नृत्य से प्रेरित।​
    • अंकिया नाट (असम): संत ज्ञानदेव द्वारा स्थापित, रासलीला से प्रभावित नाट्य रूप।​