Correct Answer: (a) हिमाचल प्रदेश
Solution:- 'नाटी' भारत के 'हिमाचल प्रदेश' राज्य का एक लोक नृत्य है। यह एक पारंपरिक लोक नृत्य है, जो राज्य में विभिन्न त्योहारों और समारोहों के दौरान किया जाता है।
- उत्पत्ति और क्षेत्र
- नाटी मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, शिमला, सिरमौर, चंबा और किन्नौर जिलों में प्रचलित है।
- यह नृत्य गद्दी या हिमाचली खानाबदोश समुदायों की परंपराओं से जुड़ा हुआ है
- कभी-कभी उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों जैसे उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल में भी देखा जाता है
- लेकिन मूल रूप से यह हिमाचली है। त्योहारों, मेलों और विवाह समारोहों के दौरान इसे बड़े उत्साह से प्रस्तुत किया जाता है।
- प्रदर्शन शैली
- नाटी एक समूहिक नृत्य है जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों भाग लेते हैं, जो अक्सर एक घेरे में हाथ पकड़कर नाचते हैं।
- नृत्य की शुरुआत धीमी गति (ढीली नाटी) से होती है और धीरे-धीरे तेज हो जाती है।
- नेतृत्व आमतौर पर चंवर (पंखा) पकड़े एक पुरुष नर्तक करता है, जबकि संगीतकारों को "टूनिस" कहा जाता है।
- वाद्य यंत्र और संगीत
- इसमें पारंपरिक वाद्य यंत्र जैसे ढोल, नगाड़ा, शहनाई, बांसुरी, नरसिंहा और करनाल का उपयोग होता है।
- संगीत हिमाचली लोक धुनों पर आधारित होता है, जो नृत्य को जीवंत बनाता है।
- प्रदर्शन के अंत में नर्तक देवी-देवताओं को श्रद्धांजलि देते हुए एक यज्ञ भी करते हैं।
- पोशाक और विशेषताएं
- नर्तक रंग-बिरंगे पारंपरिक हिमाचली परिधान पहनते हैं, जो पहाड़ी संस्कृति को दर्शाते हैं
- पुरुषों के लिए घाघरा-चोली जैसी पोशाकें या खानाबदोश शैली।
- नृत्य अपनी ऊर्जावान गतियों, सामूहिक तालमेल और उत्साहपूर्ण वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।
- सांस्कृतिक महत्व
- नाटी हिमाचल की सामाजिक एकता का प्रतीक है, जो पीढ़ियों से चला आ रहा है।
- यह कुल्लू दशहरा जैसे प्रमुख उत्सवों में प्रमुख आकर्षण होता है।
- राज्य में अन्य नाटी रूप जैसे कुल्लू नाटी, छंबा नाटी और किन्नौरी नाटी भी हैं
- जो क्षेत्रीय विविधता दिखाते हैं। यह नृत्य भारत की लोक कला को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।