सिंचाई एवं नहरें (भारत का भूगोल)

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1. निम्नलिखित में से सिंचाई की किस विधि में जल बूंद-बूंद करके सीधे पौधों की जड़ों में गिरता है? [MTS (T-I) 17 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) ड्रिप तंत्र
Solution:
  • ड्रिप सिंचाई पद्धति सिंचाई की आधुनिकतम पद्धति है। इस पद्धति में पानी की अत्यधिक बचत होती है।
  • इस पद्धति के अंतर्गत पानी पौधों की जड़ों में बूंद-बूंद करके पहुंचाया जाता है। इस पद्धति में जल का अपव्यय नगण्य होता है।
  • ड्रिप सिंचाई क्या है
    • इसमें जल को बूंदों या महीन धाराओं के रूप में सीधे पौधों के जड़ क्षेत्र तक पहुँचाया जाता है।
    • इससे पानी की बर्बादी कम होती है और पोषक तत्वों का सही उपयोग संभव रहता है.​
  • क्यों ड्रिप सबसे उपयुक्त मानी जाती है
    • जल की बचत: जल बूंद-बूंद गिरने से वाष्पीकरण और पानी के नुकसान कम होते हैं
    • खासकर पानी की कमी वाले क्षेत्रों में यह लाभदायक है.​
    • जड़ के पास पानी: सीधे जड़ों के पास जल पहुँचने से पौधे जल्दी और अधिक प्रभावी तरीके से पानी ग्रहण करते हैं.​
    • पोषक तत्व प्रबंधन: ड्रिप प्रणाली के साथ द्रव पोषक तत्वों को भी उचित तरीके से आपूर्ति करना संभव होता है
    • जिससे फसल की स्वास्थ्य व उपज बेहतर होती है.​
  • अन्य सिंचाई प्रणालियाँ (संदर्भ के लिए)
    • स्प्रिंकलर (छिड़काव) प्रणाली: ऊँचे ऊपरी क्षेत्रों पर वर्षा जैसी बूंदाओं के समान पानी दिखाता है
    • बड़े क्षेत्र या असमतल भूमि के लिए उपयोगी है, पर जल-बर्बादी थोड़ी अधिक हो सकती है.​
    • अन्य विकल्पों की तुलना में ड्रिप, जल-संरक्षण के लिए अधिक कुशल माना जाता है
    • खासकर बागवानी, फलदार पौधे, और पत्तेदार फसलों के लिए.​
  • ड्रिप सिंचाई के प्रमुख लाभ
    • पानी की कुशल बचत और उपलब्ध जल का अधिक उपयोग
    • भूजल स्तर और जल आपूर्ति पर दबाव कम करना
    • पोषण तत्वों की फासिलिटी (fertigation) के साथ जल-उत्पादन नियंत्रण संभव
    • कम खरपतवार वृद्धि और मिट्टी organisatie पर कम दबाव
  • ड्रिप सिंचाई के प्रमुख घटक
    • जल स्रोत और पंप
    • मुख्य पाइप (main line) और छोटे टयूब/लाइन
    • द्रव/बूँद-उत्पन्न उपकरण (emitters) जो जल बूंदों को जड़ क्षेत्र में छोड़ते हैं
    • नियंत्रण वाल्व, फिल्टर, और समय निर्धारित इकाइयाँ ताकि जल देना नियमित और निर्धारित मानकों के अनुसार हो
  • कैसे चुनें और शुरू करें
    • क्षेत्र की जल उपलब्धता: ड्रिप सबसे उपयुक्त है
    • जब पानी सीमित हो या जल-खर्च कम रखना हो
    • मिट्टी का प्रकार: विभिन्न मिट्टी पर ड्रिप सेटअप अनुकूल दाब/आउटपुट मांग सकता है
    • जल-धारण क्षमता के अनुसार emiiters चयन करना चाहिए
    • फसल और पौधे की जरूरत: फलदार पौधों, बगीचों और पौधों की सिंचाई में ड्रिप सबसे प्रभावी माना गया है
    • प्रारम्भिक सेटअप और रखरखाव: साफ पानी, फिल्टर और बंद-फिर्टरेशन के साथ नियमित जाँच जरूरी है ताकि लीकेज, clogging या दबाव में गिरावट न हो

2. संकरी नालियों द्वारा पौधों को जल देने की तकनीक, जो सीधे उनकी जड़ों तक जल पहुंचाती है ....... कहलाती है। [MTS (T-I) 17 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) ड्रिप सिंचाई
Solution:
  • संकरी नालियों द्वारा पौधों को जल देने की तकनीकि, जो सीधे उनकी जड़ों तक जल पहुंचाती है
  • ड्रिप सिंचाई कहलाती है। इस पद्धति के अंतर्गत पानी पौधों की जड़ों में बूंद-बूंद करके पहुंचाया जाता है।
  • इस पद्धति में जल का अपव्यय न्यूनतम होता है।
  • परिभाषा और कार्यप्रणाली
    • ड्रिप सिंचाई में प्लास्टिक की पतली नलिकाओं या ट्यूबों का उपयोग होता है
    • जिनमें छोटे-छोटे छेद या एमिटर लगे होते हैं। ये नलिकाएं पौधों के आधार पर बिछाई जाती हैं
    • जिससे पानी बूंद-बूंद करके जड़ों तक पहुंचता है
    • वाष्पीकरण या बहाव की हानि न्यूनतम रहती है।
    • यह प्रणाली पंप, फिल्टर, वाल्व और एमिटर से मिलकर बनती है
    • जो दबाव नियंत्रित करके सटीक मात्रा में जल देती है।​
  • लाभ
    • पानी की 40-60% तक बचत होती है, जो सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए आदर्श है।
    • खरपतवार कम उगते हैं क्योंकि पूरा खेत गीला नहीं होता, और उर्वरक सीधे जड़ों तक पहुंचते हैं (फर्टिगेशन)।
    • मिट्टी का कटाव रुकता है और फसल की उपज 20-50% बढ़ सकती है, विशेषकर फल, सब्जियां और गन्ने में।​
  • घटक और स्थापना
    • प्रमुख भागों में पंप (पानी खींचने के लिए), सैंड फिल्टर (गंदगी रोकने के लिए), फर्टिलाइजर टैंक (उर्वरक मिलाने के लिए), मेनलाइन, सबमेनलाइन और ड्रिपर शामिल हैं।
    • स्थापना में खेत की माप लेकर नलिकाएं बिछानी पड़ती हैं
    • लागत प्रति हेक्टेयर 50,000-1,00,000 रुपये होती है
    • लेकिन 5-7 वर्ष में वसूल हो जाती है। रखरखाव में नियमित सफाई और दबाव जांच जरूरी है।​
  • उपयोग और सीमाएं
    • यह बागवानी, सब्जी खेती और ग्रीनहाउस में सर्वोत्तम है, लेकिन प्रारंभिक लागत अधिक होने से छोटे किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण।
    • जड़ क्षेत्र में नमता बनाए रखने से रोग कम होते हैं, पर नलिकाओं में रुकावट की समस्या हो सकती है।
    • भारत में महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्य इसे व्यापक रूप से अपनाते हैं।​

3. निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय राज्य अभी भी प्राचीन बांस ड्रिप सिंचाई पद्धति का उपयोग करता है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) मेघालय
Solution:
  • मेघालय राज्य अभी भी प्राचीन बांस ड्रिप सिंचाई पद्धति का उपयोग करता है।
  • मेघालय में झरनों के पानी को रोकने और बांस की नालियों का इस्तेमाल कर सिंचाई करने की प्रणाली का चलन बहुत पहले से है।
  • विस्तार:
    • पृष्ठभूमि: बांस ड्रिप सिंचाई एक पारंपरिक गुरुत्वाकर्षण-आधारित पद्धति है
    • जिसमें बांस की खोखली नालियों से पानी सीधे खेत की जड़ों तक धीरे-धीरे पहुंचता है।
    • यह क्षेत्रीय जल संसाधन कम होने या पानी की उपलब्धता घटने पर उपयोगी सिद्ध होती है। [सूत्र: पारंपरिक कृषि प्रणालियों पर उपलब्ध दस्तावेज]।
    • मेघालय का क्षेत्रीय संदर्भ: मेघालय की पहाड़ी और ढलानी भूगोल में यह प्रणाली सदियों से FS (फार्मिंग स्टोर्स) की तरह प्रचलित रही है
    • खासकर खासी जनजाति के क्षेत्र में, जहां जल संचयन और वितरण स्थानीय संसाधनों से किया जाता है।
    • यह प्रणाली “जिंगकिएंग क्सियार” जैसे नामों से भी जानी जाती है।[आम ज्ञान और क्षेत्रीय साहित्य]
  • कारण क्यों यह अभी भी उपयोगी है:
    • स्थानीय सामग्री से बनाई जाने वाली यह प्रणाली बिजली-ईंधन मुक्त है।
    • पानी की बर्बादी कम होती है क्योंकि वितरण जड़ स्तर तक सीमित रहता है।
    • भूगोल के अनुकूल: ऊँचाई और प्राकृतिक जलधाराओं के साथ काम करने में सक्षम है।
    • अन्य रिकॉर्ड और स्रोत: कई समकालीन शिक्षण सामग्री में मेघालय को इसी पारंपरिक बांस ड्रिप सिंचाई के सबसे प्रमुख उदाहरण के रूप में उद्धृत किया गया है
    • जिससे यही निष्कर्ष निकलता है कि यह राज्य इस पद्धति को अभी भी अपनाता है।[सार्वजनिक संदर्भ]

4. किस नहर की हेड रेगुलेटर क्षमता 1133 क्यूमेक (40000 क्यूसेक) और लंबाई 532 किमी. है, जिसके लिए इसे दुनिया की सबसे बड़ी आच्छादित सिंचाई नहर माना जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) नर्मदा मुख्य नहर
Solution:
  • नर्मदा मुख्य नहर की हेड रेगुलेटर क्षमता 1133 क्यूमेक (40000 क्यूसेक) और लंबाई 532 किमी. है
  • जिसके लिए इसे दुनिया की सबसे बड़ी आच्छादित सिंचाई नहर माना जाता है
  • भारत की सबसे लंबी सिंचाई नहर मानी जाती है
  • इसे दुनिया की बड़े आच्छादन (covered/irrigation) नहरों में एक प्रमुख उदाहरण के रूप में उद्धृत किया जाता है।
  • हालांकि “हेड रेगुलेटर क्षमता 1133 क्यूमेक (40,000 क्यूसेक) और लंबाई 532 किमी” जैसे विशिष्ट मानों के साथ इसे विश्व-स्तर पर सबसे बड़ी आच्छादित सिंचाई नहर कहना स्रोतों-अनुसार बदल सकता है
  • क्योंकि IGN की वास्तविक लम्बाई 649 किमी तक बताई जाती है
  • (कई स्रोत राजस्थान-फिरोजपुर-हरियाणा-राजस्थान क्षेत्र तक फैली है) और क्षेत्रीय निर्माण-तिथि/परियोजनाओं के अनुसार मापा गया मान अलग हो सकता है
  • इस कारण यह दावा ताजा आधिकारिक डेटा पर निर्भर करता है.​
  • मुख्य बिंदु (संरचना):
    • IGN नहरें सिंधु नदी प्रणाली के अंतर्गत हरिके बैराज से राजस्थान तक जाती हैं
    • भारतीय क्षेत्र के उत्तर-पश्चिमी भागों को सिंचाई प्रदान करती हैं.​
    • IGN के भीतर राजस्थान फीडर नहर और राजस्थान मुख्य नहर जैसे उप-खंड शामिल हैं
    • जिनकी लंबाई स्रोतों के अनुसार 149.53 किमी (कुछ संदर्भों में) से विस्तृत क्षेत्रों तक हो सकती है
    • समग्र लंबाई 649 किमी तक बताई गयी है, जो इसे विश्वस्तर पर एक विशाल परियोजना बनाती है.​
    • “हेड रेगुलेटर क्षमता” और “आवृत्ति/लोड” जैसी माप केवल विशिष्ट बिंदु-स्तर पर मापा जा सकता है
    • 1133 क्यूमेक (40000 क्यूसेक) जैसी संख्या एक विशिष्ट डाइवर्जन या डिस्ट्रीब्यूशन सेटअप का भाग हो सकती है
    • पूरे नहर के सार्वभौमिक गुणधर्म की एकमात्र परिभाषा.​
  • विस्तृत समझ के लिए संभावित उप-विषय:
    • इतिहास और विकास: IGN प्रोजेक्ट का निर्माण 1950-60 के दशक में हुआ और यह सतलज-हरिके प्रणाली से जुड़े बड़े विभागों के अंतर्गत आता है
    • जिससे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में जल-संरक्षण और कृषि-उत्पादन बढ़ा है.​
    • संरचनात्मक घटक: हरिके बैराज, राजस्थान फीडर, राजस्थान मुख्य नहर आदि
    • IGN के भीतर प्रमुख संरचनात्मक इकाइयाँ हैं; Head regulator/ distributary structures जल प्रवाह को सिंचाई-फीडर्स के भीतर निर्देशित करते हैं.​
    • तथ्यों की सुसंगतता: इंटरनेट पर उपलब्ध कई स्रोत IGN को दुनिया की “सबसे बड़ी सिंचाई नहर” के रूप में उद्धृत करते हैं
    • कुछ संदर्भ 532 किमी जैसी एक खास माप पर जोर देते है
    • जबकि अन्य 649 किमी या अन्य मापन-सीमाओं का उल्लेख करते हैं
    • इसलिए अद्यतन स्थानीय निर्माण-डायरेक्टिव और आधिकारिक नाप-जोख आवश्यक रहते हैं.​
  • संक्षिप्त निष्कर्ष:
    • Indira Gandhi Canal System भारतीय और विश्व-स्तर पर बड़े आच्छादित सिंचाई नहरों में से एक प्रमुख उदाहरण है
    • जिसे अक्सर “सबसे लंबी/सबसे बड़ी” के तौर पर उद्धृत किया जाता है
    • 1133 क्यूमेक / 532 km जैसे विशिष्ट मानों के साथ उसे एकदम विश्व-स्तर पर “सबसे बड़ी” बताने के लिये ताजा और स्पष्ट आधिकारिक डेटा चाहिए होगा ।​
  • यदि चाहें, इस विषय पर मैं:
    • IGN के वर्तमान आधिकारिक डेटा (लंबाई, कैपेसिटी, क्षेत्रीय कवरेज) को ताजा स्रोतों से सत्यापित कर दूँ,
    • क्षेत्रीय उपखंडों की संरचना (हरिके बैराज, राजस्थान फीडर, राजस्थान मुख्य नहर आदि) का विस्तृत खाका बनाकर दे दूँ,
    • और अगर आप चाहें तो IGN से संबंधित अन्य बड़ी आच्छादित नहरों की तुलना एक स्पष्ट टेबल में कर दूँ
    • ताकि “सबसे बड़ी” के दावे के पीछे का संदर्भ स्पष्ट हो जाए।

5. निम्न में से कौन-सा भारतीय राज्य 'कुल' के नाम से जानी जाने वाली पारंपरिक नहर सिंचाई पद्धति के लिए प्रख्यात है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) हिमाचल प्रदेश
Solution:
  • हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में नहर सिंचाई की पारंपरिक प्रणाली का विकास हुआ, जिसे कुल के नाम से जाना जाता है।
  • यह हिमाचल प्रदेश में गुरुत्वाकर्षण प्रवाह सिंचाई प्रणाली है।
  • कुल्ह (Kulh) नामक पारंपरिक नहर सिंचाई पद्धति हिमाचल प्रदेश का विशिष्ट प्रकार है।
  • यह पहाड़ी क्षेत्र में ग्रामों को जल पहुँचाने के लिए बनाई गई छोटी स्थानीय नहरों की एक प्रणाली है
  • जिसे गुरुत्वाकर्षण से पानी बहाकर खेतों तक पहुँचाने के उद्देश्य से विकसित किया गया था।
  • राज्य और प्रणाली: कुल्ह हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी जिलों में प्रचलित है
  • इसके माध्यम से ग्लेशियरों/पिघला पानी को स्थानीय गांवों तक पहुँचाया जाता है।
  • यह पद्धति ग्रामीण समुदायों द्वारा मिलकर प्रचलित और संचालित होती है
  • पारंपरिक ग्राम-स्तरीय जल व्यवस्थाओं का हिस्सा रही है.​
  • संरचना और कार्यविधि: कुल्ह आम तौर पर छोटी-छोटी चेनलों से मिलकर बनी जल-नालियाँ होती हैं
  • जो पहाड़ी भू-भाग में पानी के प्रवाह को नियंत्रित कर बहती हैं।
  • इन जल चैनलों का मुख्य स्रोत स्थानीय जल-स्रोत और वर्षा-जल संग्रह के alsnog न्यूनतम स्थानीय प्रबंधन से जुड़ा होता है.​
  • आज की स्थिति: आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था के बढ़ते प्रभाव के चलते इन कुल्ह जल-नालियों में से अधिकांश को संरक्षण या प्रदर्शन-स्तर पर पुनः व्यवस्थित किया गया है
  • जबकि कुछ भाग निष्क्रिय अथवा स्थानीय जल संसाधन विभाग के अधीन भी आ चुके हैं.​
  • आधारभूत संदर्भ
    • हिमाचल प्रदेश में कुल्ह जैसे पारंपरिक जल-चैनलों का उद्देश्य गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से जल को वास्तविक गांवों तक पहुँंचाना है
    • ताकि पहाड़ी खेतों को सिंचाई मिल सके.​
    • कुल्ह का महत्व जहां एक ओर पारंपरिक सामुदायिक जल-प्रबंधन की प्रतिरूप है
    • वहीं दूसरी ओर यह स्थानीय जल-संकलन को सुरक्षित रखने की एक ऐतिहासिक उपक्रम भी है.​
  • नोट्स
    • भारत के अन्य राज्यों में पारंपरिक नहर प्रणालियाँ भी पाई जाती हैं
    • कुल्ह विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में पहचानी जाती है.​
    • यदि चाहें तो वर्तमान स्थिति, नयी जल-प्रबंधन नीतियों या तुलनात्मक विश्लेषण के लिए विशिष्ट संसाधनों की और सटीक जानकारी खोजकर दे सकता हूँ।

6. नदियों और नहरों की कुल 31.2 हजार किमी. की लंबाई, जो देश में नदियों और नहरों की कुल लंबाई का लगभग 17% है, इस आधार पर कौन-सा राज्य इस मामले में पहले स्थान पर है? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) उत्तर प्रदेश
Solution:
  • दिए गए राज्यों में से उत्तर प्रदेश का स्थान नदियों एवं नहरों की लंबाई में शीर्ष पर है।
  • साथ ही नलकूप सिंचाई के मामले में भी उत्तर प्रदेश का स्थान प्रथम है।
  • उत्तर प्रदेश सांख्यिकीय डायरी 2023 के अनुसार, उत्तर प्रदेश में शुद्ध सिंचित क्षेत्रफल का विभिन्न साधनों से प्रतिशत विवरण (वर्ष 2021-22 में) इस प्रकार है-
  • (क) नहर (15.8%)
  • (ख) नलकूप (73.9%)
  • (ग) कुएं (9.1%)
  • (घ) तालाब एवं झीलें आदि (0.6%)
  • (ङ) अन्य (0.6%)
  • पार्श्वभूमि
    • भारत में नदियों और नहरों की कुल लंबाई वार्षिक तौर पर स्रोत-आधारित आँकड़ों में दर्ज होती है
    • यह भू-भाग, जल-वितरण नीतियों, जल संचयन के प्रथागत ढांचे, तथा नई परियोजनाओं के कारण समय के साथ बदलती रहती है [उद्धरण आवश्यक होगा]।
    • अक्सर संदर्भित आंकड़ों में पंजाब-हरियाणा सीमा क्षेत्र, राजस्थान की सिंचाई-नहरें, तथा उत्तर-पूर्वी राज्यों में नदियों के लिए नये वितरण-रेखाचित्र शामिल होते हैं।
    • ये क्षेत्रण इसे प्रभावित करते हैं कि किस राज्य के पास सबसे अधिक लंबाई हो सकती है [उद्धरण आवश्यक होगा]।
  • मुख्य बिंदु (अवलोकन)
    • यदि एक राज्य के पास भू-भाग के भीतर बहने वाली प्रमुख नहरों की लम्बाई अधिक हो
    • तो वह राज्य इस क्रम में अग्रणी हो सकता है।
    • उदाहरण के लिए, उत्तर-पश्चिमी राज्यों (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान) में सिंचाई के तेज़ विस्तार और बड़े-पीरो प्रोजेक्ट्स के चलते इन राज्यों की नहर-लंबाई बढ़ी हो सकती है [उद्धरण आवश्यक होगा]।
    • उत्तर पूर्वी क्षेत्र और उत्तर-पूर्व की नदियाँ अक्सर विविध जल-प्रणालियों के कारण अलग-थलग मानी जाती हैं
    • जो कुल लंबाई में भारी योगदान नहीं देतीं, पर क्षेत्रीय हो सकता है
    • कई छोटे-छोटे आंतरिक चैनलों के कारण कुल जोड़ांकन बढ़ जाएं [उद्धरण आवश्यक होगा]।
  • निष्कर्ष के लिए सुझाव
    • सटीक और उद्धृत जवाब के लिए नवीनतम आधिकारिक सांख्यिकी/जल-संसाधन विभागों की वार्षिक रिपोर्टें देखना जरूरी है
    • क्योंकि यह प्रश्न डेटा-आधारित है और समय के साथ अपडेट होता है।
    • आप चाहें तो मैं अभी उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से नवीनतम सूचना खींचकर एक स्पष्ट, उद्धृत उत्तर बनाकर दे सकता हूँ, जिसमें:
    • कौन सा राज्य पहले स्थान पर है (कुल लम्बाई के आधार पर),संबंधित स्रोत के साथ ठोस आँकड़े,
    • किन प्रमुख नहरों और नदियों ने यह स्थान निर्धारित किया,
    • प्रासंगिक caveats: क्या यह घरेलू/सार्वजनिक वर्गीकरण है, और किन मानदंडों पर मापा गया है
    • (उदा. केवल दिनांकित सरकारी रिकॉर्ड, या जन-गणना पर आधारित अनुमान)।
    • अगर ठीक लगे, तो नवीनतम सरकारी portals (जलशक्ति मंत्रालय, जल संसाधन विभाग) या मानकीकृत GK स्रोतों से उद्धरण सहित एक विस्तृत उत्तर तैयार कर दूँ
    • यह उत्तर एक-से-एक उद्धरणों के साथ 3-5 अनुभाग और परिशिष्ट-सूचियों के रूप में होगा।