Correct Answer: (c) राशिद अली
Solution:आजाद हिंद फौज के सैनिकों एवं अधिकारियों को गिरफ्तार कर ब्रिटिश सरकार ने नवंबर, 1945 में दिल्ली के लाल किले में उन पर मुकदमा चलाया। इसमें तीन अभियुक्तों प्रेम सहगल, गुरबख्श सिंह ढिल्लों एवं शाहनवाज को फांसी की सजा तथा राशिद अली को 7 वर्ष के कारावास का दंड दिया गया। इनके बचाव के लिए कांग्रेस ने आजाद हिंद फौज बचाव समिति का गठन किया, जिसमें भूलाभाई देसाई के नेतृत्व में तेज बहादुर सप्रू, कैलाश नाथ काटजू, आसफ अली और जवाहरलाल नेहरू प्रमुख वकील थे। सरकार के निर्णय के विरुद्ध पूरे देश में तेज प्रतिक्रिया हुई, अंत में विवश होकर वायसराय लॉर्ड वेवेल ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए मृत्युदंड की सजा को माफ कर दिया।