भारतीय इतिहास की दिशा बदलने वाली सिंधु घाटी सभ्यता की खोज का श्रेय मुख्य रूप से दयाराम साहनी और आर. डी. बनर्जी को जाता है। 1920 के दशक की शुरुआत में, जब दयाराम साहनी ने रावी नदी के तट पर हड़प्पा के टीलों की खुदाई शुरू की, तो उन्होंने भारत की सबसे प्राचीन नगरीय सभ्यता के पहले साक्ष्य दुनिया के सामने रखे। इसके ठीक एक साल बाद, राखाल दास बनर्जी ने मोहनजोदड़ो की खोज की, जहाँ मिले विशाल स्नानागार और नियोजित नगरों ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत की सभ्यता हजारों साल पुरानी और अत्यंत विकसित थी। इन दोनों भारतीयों के कठिन परिश्रम और शोध के कारण ही आज हम गर्व से विश्व की महानतम प्राचीन सभ्यताओं में अपनी गणना करते हैं।