सैंधव सभ्यता एवं संस्कृति (Part-2)

Total Questions: 42

21. हड़प्पन संस्कृति के संदर्भ में शैलकृत स्थापत्य के प्रमाण कहां से मिले हैं? [U.P.P.C.S. (Pre) 2006]

Correct Answer: (b) धौलावीरा
Solution:

गुजरात के कच्छ जिले में खादिर बेत द्वीप पर स्थित धोलावीरा हड़प्पा सभ्यता का एक अनूठा नगर है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का त्रि-स्तरीय नगर नियोजन (Fort, Middle Town, Lower Town) और पत्थरों का रचनात्मक उपयोग है। शैलकृत स्थापत्य के अंतर्गत यहाँ 16 से अधिक विशाल जलाशय मिले हैं, जिन्हें चट्टानों को काटकर और तराशकर बनाया गया था। ये जलाशय शहर की पानी की कमी को पूरा करने के लिए वर्षा जल को एकत्रित करते थे। धोलावीरा की इन भव्य पत्थर की संरचनाओं और उन्नत इंजीनियरिंग के कारण ही इसे यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है।

22. धौलावीरा जिस राज्य में स्थित है, वह है- [U.P.P.C.S. (Mains) 2010]

Correct Answer: (a) गुजरात
Solution:

धौलावीरा हड़प्पा सभ्यता की भारत में स्थित दूसरी सबसे बड़ी (प्रथम राखीगढ़ी) बस्ती है। यह गुजरात के कच्छ के रन में अवस्थित है। यहां से उत्खनन के परिणामस्वरूप हड़प्पा सभ्यता की अनेक महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त की गईं। इन खोजों में शैलकृत जलकुंड (Rock-cut Reservoir) महत्वपूर्ण हैं।

23. कौन-सा हड़प्पीय (Harappan) नगर तीन भागों में विभक्त है? [U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2013]

Correct Answer: (c) धौलावीरा
Solution:

सिंधु घाटी सभ्यता के अधिकांश नगर सामान्यतः दो भागों—पश्चिमी टीला (दुर्ग) और पूर्वी टीला (निचला नगर)—में विभाजित थे, लेकिन धोलावीरा इस मामले में पूरी सभ्यता में अद्वितीय है क्योंकि यह नगर तीन स्पष्ट भागों में विभक्त था। गुजरात के कच्छ जिले में स्थित यह नगर दुर्ग (Citadel), मध्यम नगर (Middle Town) और निचला नगर (Lower Town) में बंटा हुआ था।

इन तीनों भागों के चारों ओर पत्थरों की विशाल किलेबंदी की गई थी, जो सुरक्षा के साथ-साथ उनके उत्कृष्ट स्थापत्य कौशल को भी दर्शाती है। दुर्ग और मध्यम नगर के बीच एक बहुत बड़ा खुला मैदान मिला है, जिसे इतिहासकारों ने एक स्टेडियम या 'उत्सव स्थल' के रूप में पहचाना है। मध्यम नगर की उपस्थिति धोलावीरा की सबसे बड़ी विशेषता है, क्योंकि हड़प्पाकालीन किसी अन्य स्थल पर समाज के बीच के वर्ग (जैसे प्रशासनिक अधिकारी या बड़े व्यापारी) के लिए इस तरह के अलग और नियोजित शहरी भाग के साक्ष्य नहीं मिलते हैं।

24. निम्नलिखित में से कौन-से स्थल में तीन नगरों के अवशेष प्राप्त हुए हैं? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2015]

Correct Answer: (d) धौलावीरा
Solution:उपरोक्त प्रश्न की व्याख्या देखें ।

25. निम्नलिखित में से कौन-सा प्राचीन नगर अपने उन्नत जल संचयन और प्रबंधन प्रणाली के लिए सुप्रसिद्ध है, जहां बांधों की श्रृंखला का निर्माण किया गया था और संबद्ध जलाशयों में नहर के माध्यम से जल को प्रवाहित किया जाता था? [I.A.S. (Pre) 2021]

Correct Answer: (a) धौलावीरा
Solution:

'धौलावीरा' नामक प्रमुख हड़प्पाई पुरास्थल गुजरात राज्य के कच्छ जनपद में स्थित है। धौलावीरा नियोजित नगर का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। धौलावीरा नगर में अत्यंत नियोजित ढंग से अलग-अलग नगरीय आवासीय क्षेत्र विकसित किए गए थे, जो संभवतः विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों और एक वर्गीकृत समाज पर आधारित थे। यह प्राचीन नगर अपने उन्नत जल संचयन और प्रबंधन प्रणाली के लिए सुप्रसिद्ध है, यहां पर बांधों की श्रृंखलाओं का निर्माण किया गया था तथा संबद्ध जलाशयों में नहर के माध्यम से जल को प्रवाहित किया जाता था। यहां से जल संचयन प्रणालियों तथा जल निकासी प्रणालियों के साथ-साथ वास्तुशिल्प एवं तकनीकी रूप से विकसित सुविधाओं में नजर आने वाली उत्कृष्ट तकनीकी प्रगति, स्थानीय सामग्री की डिजाइन, कार्यान्वयन और प्रभावकारी उपयोग में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।

26. एक उन्नत जल-प्रबंधन व्यवस्था का साक्ष्य प्राप्त हुआ है- [U.P.P.C.S. (Mains) 2010]

Correct Answer: (b) धौलावीरा से
Solution:

उपरोक्त प्रश्न की व्याख्या देखें ।

27. निम्नलिखित में से किस स्थल से द्वि-शव संस्कार (डबल बरिअल) का प्रमाण मिला है? [U.P.P.C.S (Mains) 2016]

Correct Answer: (d) (b & c)
Solution:

लोथल से सर्वाधिक तीन द्वि-शव समाधीकरण के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। कालीबंगा से भी एक युगल समाधीकरण का प्रमाण मिला है। राखीगढ़ी से भी युगल समाधि प्राप्त हुई है। यदि संख्या को आधार माना जाए, तो सही उत्तर विकल्प (c) होगा; किंतु यदि प्रमाण को आधार माना जाए, तो सही उत्तर विकल्प (b) एवं (c) दोनों होंगे।

28. हड़प्पन स्थल सनौली के अभी हाल में उत्खननों से प्राप्त हुए हैं- [U.P. Lower (Sub.) (Pre) 2004]

Correct Answer: (a) मानव शवाधान
Solution:

सनौली का उत्खनन भारतीय पुरातत्व के इतिहास में एक क्रांतिकारी मोड़ माना जाता है। यहाँ से लगभग 126 मानव समाधान प्राप्त हुए हैं, लेकिन जो बात इसे सबसे अलग बनाती है, वह है यहाँ से मिले तीन तांबे से सुसज्जित रथ (Copper-decorated Chariots)। यह खोज इस धारणा को चुनौती देती है कि हड़प्पा काल के लोग रथों और युद्ध कला से परिचित नहीं थे। इसके अलावा, यहाँ से तांबे की तलवारें, ढाल, और हेलमेट जैसे युद्ध उपकरण भी मिले हैं, जो एक 'योद्धा श्रेणी' (Warrior Class) के अस्तित्व की ओर इशारा करते हैं। यहाँ के ताबूत (Coffins) भी विशिष्ट हैं; वे तांबे की ज्यामितीय आकृतियों से सजे हुए हैं और पैरों वाले (Legged Coffins) हैं, जो मेसोपोटामिया की सभ्यता में मिलने वाले ताबूतों से समानता रखते हैं।

29. हड़प्पा सभ्यता का स्थल मांडी, भारत के किस राज्य में स्थित है? [U.P.P.C.S. (Pre) 2021]

Correct Answer: (d) उत्तर प्रदेश
Solution:

यह स्थल उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में स्थित है। यह मुख्य रूप से वर्ष 2000 में चर्चा में आया था जब एक खेत की जुताई के दौरान यहाँ से भारी मात्रा में प्राचीन आभूषण और सिक्के (हड़प्पा कालीन मनके और गहने) प्राप्त हुए थे। इतिहासकारों का मानना है कि यह स्थल केवल एक सामान्य बस्ती नहीं थी, बल्कि यह हड़प्पा काल का एक प्रमुख 'ट्रेजरी' (खजाना) या आभूषण निर्माण का केंद्र रहा होगा। पास ही स्थित सनौली (Sinauli) और हुलास (Hulas) की तरह, मांडी भी उत्तर-हड़प्पा (Late Harappan) संस्कृति के महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत करता है, जो गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में इस सभ्यता के प्रसार को दर्शाता है।

30. वस्त्रों के लिए कपास की खेती का आरंभ सबसे पहले किया गया- [U.P.P.C.S. (Pre) 2006]

Correct Answer: (d) भारत में
Solution:

वस्त्रों के लिए कपास की खेती का आरंभ सबसे पहले भारत (India) में किया गया था। कपास (Cotton) की खेती और उससे सूत कातकर वस्त्र बनाने की कला का श्रेय सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों को जाता है। पुरातात्विक खुदाई के दौरान मोहनजोदड़ो से सूती कपड़े के अवशेष और चांदी के एक बर्तन में लिपटे हुए सूती कपड़े के साक्ष्य मिले हैं। इसके अलावा, यहाँ से बड़ी संख्या में तकली (Spindle whorls) भी प्राप्त हुई हैं, जो यह दर्शाती हैं कि कताई और बुनाई उस समय का एक प्रमुख घरेलू उद्योग था। मेसोपोटामिया के लोग सिंधु सभ्यता से प्राप्त होने वाली कपास को 'सिन्डन' (Sindon) कहते थे, जो 'सिंधु' शब्द से ही निकला है। यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि प्राचीन विश्व में भारत ही कपास का मूल स्रोत था।