सैंधव सभ्यता एवं संस्कृति (Part-2)

Total Questions: 42

31. निम्नलिखित में से कौन-सा/से लक्षण सिंधु सभ्यता के लोगों का सही चित्रण करता है/करते हैं? [I.A.S. (Pre) 2013]

1. उनके विशाल महल और मंदिर होते थे।
2. वे देवियों और देवताओं, दोनों की पूजा करते थे।
3. वे युद्ध में घोड़ों द्वारा खींचे गए रथों का प्रयोग करते थे।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही कथन/कथनों को चुनिए।

Correct Answer: (b) केवल 2
Solution:

वर्तमान तक सिंधु घाटी सभ्यता के स्थलों की खुदाई में किसी मंदिर अथवा पूजा स्थल के साक्ष्य प्राप्त नहीं हुए हैं। अतः इस सभ्यता के धार्मिक जीवन का एकमात्र स्रोत यहां पाई गई मिट्टी और पत्थर की मूर्तियां एवं मुहरें हैं। इनसे यह ज्ञात होता है कि यहां मातृदेवी, पशुपति शिव तथा लिंग एवं योनि की पूजा और पीपल, नीम आदि पेड़ों एवं नाग आदि जीव-जंतुओं की उपासना प्रचलित थी। पशुओं में हाथी, बाघ, भैंसा, गैंडा और घड़ियाल के चित्र मिले हैं, लेकिन घोड़े के चित्र का अभाव है। हालांकि घोड़े की अस्थियां, घोड़े की मृण्मूर्ति लोथल, सुरकोटडा एवं कालीबंगा इत्यादि स्थलों से प्राप्त हुई हैं, फिर भी घोड़े का. उपयोग युद्ध के रथ को खींचने में किया जाता था, ऐसे साक्ष्य का अभाव है। अतः विकल्प (b) उचित उत्तर है।

32. सिंधु घाटी सभ्यता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए । [I.A.S. (Pre) 2011 & M.P.P.C.S. (Pre) 2012]

1. यह प्रमुखतः लौकिक सभ्यता थी तथा उसमें धार्मिक तत्व, यद्यपि उपस्थित था, वर्चस्वशाली नहीं था।
2. उस काल में भारत में कपास से वस्त्र बनाए जाते थे।
उपर्युक्त में से कौन-सा /कौन-से कथन सही है/है ?

Correct Answer: (c) 1 और 2 दोनों
Solution:

सिंधु घाटी सभ्यता के संदर्भ में सामान्यतः माना जाता है कि यह प्रधानतया लौकिक सभ्यता थी। इसमें धार्मिक तत्व यद्यपि उपस्थित थे; किंतु वर्चस्वशाली नहीं थे। सिंधु सभ्यता में अनेक स्थलों से कपास के रेशों से निर्मित वस्त्र के साक्ष्य मिले हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि वहां के लोग इसका निर्माण करते थे।

33. निम्न स्थानों पर किस एक स्थान पर सिंधु घाटी सभ्यता से संबद्ध विख्यात वृषभ-मुद्रा प्राप्त हुई थी? [R.A.S./R.T.S. (Pre) 2008]

Correct Answer: (d) मोहनजोदड़ो
Solution:

सिंधु घाटी सभ्यता की कला का एक उत्कृष्ट नमूना, जिसे विख्यात वृषभ-मुद्रा (Bull Seal) कहा जाता है, मोहनजोदड़ो की खुदाई से प्राप्त हुई थी। यह मुद्रा मुख्य रूप से सेलखड़ी से निर्मित है, जिस पर एक कूबड़ वाले बैल का अत्यंत प्रभावशाली और सजीव चित्रण किया गया है।

इस मुद्रा की सबसे बड़ी विशेषता बैल के शरीर की मांसपेशियों और अंगों का सूक्ष्म चित्रण है, जो तत्कालीन कलाकारों की उच्च कोटि की समझ को दर्शाता है। बैल के ऊपर सिंधु लिपि के कुछ अक्षर अंकित हैं, जो संभवतः किसी व्यक्ति या व्यापारिक श्रेणी की पहचान थे। इतिहासकारों का मानना है कि इस प्रकार की मुद्राओं का उपयोग व्यापारिक सामानों की गांठों पर मुहर लगाने के लिए किया जाता था, ताकि उनकी शुद्धता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह वृषभ-मुद्रा न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती थी, बल्कि यह सिंधु सभ्यता के मेसोपोटामिया जैसे सुदूर देशों के साथ होने वाले व्यापारिक संबंधों का भी एक महत्वपूर्ण साक्ष्य है।

34. सिंधु सभ्यता से प्राप्त मुहरों में कौन-से वृक्ष की आकृति मिलती है? [M.P.P.C.S. (Pre) 2021]

Correct Answer: (b) पीपल
Solution:

सिंधु सभ्यता की मुहरों और मृदभांडों (Pottery) पर पीपल के वृक्ष का अंकन बहुत ही स्पष्ट और व्यापक रूप से मिलता है। एक प्रसिद्ध मुहर में तो पीपल के वृक्ष की दो शाखाओं के बीच एक देवता को खड़ा दिखाया गया है, जिसके सामने एक उपासक नतमस्तक है। यह इस बात का पुख्ता साक्ष्य है कि सिंधु घाटी के लोग प्रकृति के उपासक थे और पीपल को एक पवित्र वृक्ष मानकर उसकी पूजा करते थे। पीपल के अलावा कुछ मुहरों पर बबूल और खजूर जैसे वृक्षों के चित्रण भी मिलते हैं, लेकिन धार्मिक महत्व और प्रधानता की दृष्टि से पीपल का स्थान सर्वोच्च था। आज भी भारतीय संस्कृति में पीपल की पूजा की जो परंपरा प्रचलित है, उसकी जड़ें संभवतः इसी प्राचीन सभ्यता में समाहित हैं।

35. निम्नलिखित में से किस पशु का अंकन हड़प्पा संस्कृति की मुहरों पर नहीं मिलता है? [U.P.P.C.S.(Spl.) (Mains) 2009]

Correct Answer: (c) घोड़ा
Solution:

हड़प्पा संस्कृति की मुहरों पर घोड़े का अंकन नहीं मिलता है। जबकि मुहरों पर एक-सींग वाला गैंडा (यूनिकॉर्न) बैल, हाथी, बाघ और भैंस जैसे जानवरों का चित्रण बहुतायत में पाया गया है घोड़ा और गाय का अंकन न के बराबर है। हड़प्पा के लोग संभवतः घोड़े से परिचित नहीं थे।

36. किस पशु के अवशेष सिंधु घाटी सभ्यता में प्राप्त नहीं हुए हैं? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2011]

Correct Answer: (a) शेर
Solution:

दिए गए विकल्पों में से गाय और हाथी के अवशेष तो सिंधु घाटी सभ्यता से प्राप्त हुए हैं; किंतु घोड़े के अवशेष सिंधु घाटी की सभ्यता से प्राप्त होने के संबंध में विद्वानों में मतभेद है। आधुनिक उत्खनन के निष्कर्षों के आधार पर अनेक प्रख्यात विद्वानों ने घोड़े के अवशेषों के सिंधु घाटी की सभ्यता से प्राप्त होने के अभिमत की पुष्टि की है। दूसरी ओर सिंधु घाटी के सभ्यता के उत्खनन से शेर के अवशेषों की प्राप्ति का उल्लेख नहीं प्राप्त होता है। अतः इस प्रश्न का उत्तर विकल्प (a) अभीष्ट होगा।

37. निम्नलिखित में से कौन-सा जानवर सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों को नहीं पता था? [69th B.P.S.C (Pre) 2023]

Correct Answer: (b) घोड़ा
Solution:

प्रश्नगत विकल्पों में सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों को बैल तथा हाथी की जानकारी थी, परंतु घोड़े के अस्तित्व के विषय में विद्वानों में मतभेद है। हड़प्पा के विभिन्न स्थलों से प्राप्त अस्थियां गधखुर (इक्वयहेमिलोनस खुर) की है या पालतू घोड़े (इक्वय कबालस) की हैं, यह निश्चित कर पाना कठिन है। हड़प्पा, लोथल, सुरकोटदा, कुंतसी एवं कालीबंगा से अश्व या उसी प्रजाति की अन्य जातियों के अवशेषों के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। सेन्दोर बोकोनी द्वारा सुरकोटदा से प्राप्त तथाकथित अश्व अवशेषों में से छः को लगभग 3000 ई.पू. से 2000 ई.पू. के मध्य का वास्तविक अश्व अवशेष बताया गया है। वर्ष 1974 में एएसआई के जे.पी. जोशी तथा ए.के. शर्मा ने यहां से 2100-1700 ई.पू. के मध्य प्रत्येक स्तर पर अश्व अस्थियां प्राप्त होना प्रतिवेदित की है। यद्यपि रामशरण शर्मा, रोमिला थापर तथा मेंडो और पटेल आदि इस तथ्य को नहीं मानते हैं। इसी प्रकार ब्रिगेडियर रौस के द्वारा राना धुंडई के प्रारंभिक हड़प्पा स्तर से जो घोड़े के दांत बताए गए हैं, उसे ज्यूनर महोदय अप्रमाणिक मानते हैं। अतः घोड़े के विषय में यही कहना समीचीन होगा कि हड़प्पा सभ्यता में इसके अस्तित्व को पूर्ण रूप से नकारा नहीं जा सकता, यद्यपि इसका उपयोग अत्यंत सीमित रहा होगा। बिहार लोक सेवा आयोग ने इसका उत्तर विकल्प (b) को माना है।

38. आई.आई.टी. खड़गपुर के अध्ययन दल की रिपोर्ट के अनुसार, लगातार कितने वर्षों की न के बराबर वर्षा का होना सिंधु घाटी सभ्यता के पतन का कारण रहा था? [B.P.S.C. (Pre) 2018]

Correct Answer: (d) 900 वर्ष
Solution:

आई.आई.टी. खड़गपुर के अध्ययन दल की रिपोर्ट के अनुसारलगभग 900 वर्षों तक न के बराबर या बहुत कम वर्षा (सूखा) होने के कारण सिंधु घाटी सभ्यता का पतन हुआ था। यह सूखा 4,350 साल पहले शुरू हुआ थाजिसने कृषि-आधारित सभ्यता को धीरे-धीरे नष्ट कर दिया और निवासियों को पूर्व और दक्षिण की ओर प्रवास करने के लिए मजबूर किया।

39. मृण-पट्टिका पर उत्कीर्ण सींगयुक्त देवता की कृति प्राप्त हुई है- [U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2008]

Correct Answer: (b) कालीबंगा से
Solution:

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित कालीबंगा से मिट्टी की एक ऐसी पट्टिका मिली है जिसके एक ओर सींग वाले देवता का चित्र अंकित है और दूसरी ओर एक व्यक्ति को बकरी (पशु) लाते हुए दिखाया गया है, जो संभवतः पशु बलि की प्रथा की ओर संकेत करता है। इसके अलावा, इसी तरह की सींग वाले देवता की आकृतियाँ लोथल से भी प्राप्त हुई हैं। इन चित्रों में देवता के सिर पर दो सींग और बीच में एक टहनी जैसी आकृति दिखाई देती है, जो इन्हें प्रकृति और पशुओं के रक्षक के रूप में दर्शाती है।

40. निम्नलिखित में से कौन-सी सभ्यता नील नदी के तट पर पनपी ? [U.P.P.C.S. (Mains) 2004]

Correct Answer: (d) मिस्र की सभ्यता
Solution:

मिस्र की सभ्यता का विकास नील नदी की द्रोणी में हुआ। नील नदी विश्व की इस प्राचीन सभ्यता का आधार थी। मिस्र को नील नदी का वरदान / उपहार कहा जाता है; क्योंकि इस नदी के अभाव में यह भू-भाग रेगिस्तान होता। मिस्र अफ्रीका महाद्वीप में स्थित है। इसकी समकालीन सभ्यताएं सिंधु घाटी सभ्यता (भारत) तथा मेसोपोटामिया की सभ्यता (इराक) थी।