स्थानीय स्वशासन

Total Questions: 8

1. भारत के संविधान का ....... संशोधन ग्राम सभा को राज्य विधानमंडल द्वारा सौंपे गए कार्यों और शक्तियों को निष्पादित करने के लिए पंचायत राज प्रणाली की स्थापना के रूप में परिकल्पित करता है। [CGL (T-I) 13 अप्रैल, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) 73वां
Solution:
  • भारत के संविधान का 73वां संशोधन ग्राम सभा को राज्य विधानमंडल द्वारा सौंपे गए कार्यों और शक्तियों को निष्पादित करने के लिए पंचायत राज प्रणाली की स्थापना के रूप में परिकल्पित करता है।
  • सही विकल्प
    • भारत के संविधान का 73वाँ संशोधन अधिनियम, 1992 ग्राम सभा को राज्य विधानमंडल द्वारा सौंपे गए कार्यों और शक्तियों को निष्पादित करने के लिए पंचायत राज प्रणाली की नींव के रूप में परिकल्पित करता है।​
    • इसी संशोधन के द्वारा पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद) को संवैधानिक दर्जा मिला और ग्राम सभा की भूमिका को स्पष्ट रूप से मान्यता दी गई।​
  • 73वें संशोधन की मुख्य बातें
    • 73वें संशोधन से संविधान में नया भाग IX जोड़ा गया, जिसमें अनुच्छेद 243 से 243-O तक पंचायतों की रचना, अधिकार, चुनाव, आरक्षण आदि का प्रावधान है।​
    • इसी संशोधन के तहत ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसमें 29 विषय दिए गए हैं जिन पर पंचायतों को प्रशासनिक व विकासात्मक कार्य सौंपे जा सकते हैं।​
  • ग्राम सभा की भूमिका
    • अनुच्छेद 243A के तहत ग्राम सभा को ग्राम स्तर पर वे शक्तियाँ और कार्य करने की क्षमता दी गई है जिन्हें राज्य विधानमंडल कानून द्वारा सौंपे।​
    • ग्राम सभा को पंचायती राज व्यवस्था की “नींव” माना गया है, क्योंकि यह सीधे गाँव के मतदाताओं की संस्था है
    • जो स्थानीय योजनाओं, विकास कार्यों और सामाजिक नियंत्रण में भाग लेती है।​
  • पंचायत राज व्यवस्था की स्थापना
    • 73वाँ संशोधन 1992 में पारित होकर 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ, और इसी को प्रायः “पंचायती राज अधिनियम
    • ग्रामीण स्थानीय स्वशासन का संवैधानिक आधार माना जाता है।​
    • इस संशोधन से त्रि-स्तरीय पंचायत राज प्रणाली (ग्राम, मध्य/ब्लॉक, जिला स्तर) सभी राज्यों में लगभग बाध्यकारी रूप से स्थापित की गई
    • कुछ छोटे राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के लिए उपयुक्त अपवाद रखे गए।​

2. भारत के संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा संशोधन 1993 में नगरपालिका सरकारों को संवैधानिक रूप से मान्यता देने के लिए अधिनियमित किया गया था? [CGL (T-I) 21 अप्रैल, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 74वां संविधान संशोधन अधिनियम (CAA), 1992
Solution:
  • इस अधिनियम के द्वारा संविधान में एक नया भाग-9क तथा 243त्त से 243य छ तक 18 नए अनुच्छेद एवं नई अनुसूची (बारहवीं अनुसूची) जोड़कर नगरीय निकायों के विषय में विस्तृत प्रावधान किए गए हैं।
  • संशोधन का उद्देश्य
    • 74वें संशोधन ने शहरी स्थानीय स्वशासन को मजबूत बनाने के लिए संविधान में भाग IX-A जोड़ा, जिसमें अनुच्छेद 243P से 243ZG तक प्रावधान हैं।​
    • इसने नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम जैसी संस्थाओं को त्रि-स्तरीय संरचना प्रदान की तथा राज्य विधानमंडलों को इनके लिए कानून बनाने का अधिकार दिया।​
      संशोधन का मुख्य लक्ष्य विकेंद्रीकरण था, जिससे शहरी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर निर्णय लेना संभव हो सके।​
  • मुख्य प्रावधान
    • अनुच्छेद 243Q: नगरपालिकाओं के प्रकार (नगर पंचायत ग्रामीण-शहरी संक्रमण क्षेत्रों के लिए, नगर परिषद छोटे शहरी क्षेत्रों के लिए, नगर निगम बड़े शहरी क्षेत्रों के लिए) की स्थापना।​
    • अनुच्छेद 243R: सदस्यों का प्रत्यक्ष चुनाव वार्डों से, महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण, तथा SC/ST/OBC के लिए जनसंख्या अनुपात में आरक्षण।​
    • अनुच्छेद 243S: बड़े नगरों में वार्ड समितियों का गठन।​
    • अनुच्छेद 243W: राज्य विधानमंडल द्वारा 12वीं अनुसूची के 18 विषयों (जैसे शहरी नियोजन, जल आपूर्ति, स्वच्छता, आवास आदि) पर नगरपालिकाओं को शक्तियाँ सौंपना।​
    • अनुच्छेद 243Y: राज्य वित्त आयोग का गठन हर पाँच वर्ष में नगरपालिकाओं के वित्तीय संसाधनों की सिफारिश के लिए।​
  • महत्वपूर्ण संस्थाएँ
    • जिला नियोजन समिति (अनुच्छेद 243ZD): जिला स्तर पर ग्रामीण-शहरी योजनाओं का एकीकरण।​
    • महानगर नियोजन समिति (अनुच्छेद 243ZE): 10 लाख से अधिक आबादी वाले महानगरों के लिए।​​
    • हर पाँच वर्ष में नियमित चुनाव, राज्य चुनाव आयोग द्वारा पर्यवेक्षण (अनुच्छेद 243ZA)।​
  • कार्यान्वयन और प्रभाव
    • संशोधन 1992 में पारित हुआ लेकिन 1993 में लागू हुआ, जिसने नगरपालिकाओं को संवैधानिक आधार दिया, हालांकि व्यावहारिक क्रियान्वयन राज्यों पर निर्भर है।​​
    • इससे JNNURM, AMRUT, स्मार्ट सिटीज जैसे कार्यक्रमों को बल मिला।​
    • 73वें संशोधन (पंचायतों के लिए) के समानांतर, यह ग्रामीण-शहरी संतुलन स्थापित करता है।​​

3. पंचायतों से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख भारतीय संविधान के किस भाग में किया गया है? [MTS (T-I) 20 जून, 2023 (III-पाली), MTS (T-I) 16 जून, 2023 (III-पाली), CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) भाग IX
Solution:
  • पंचायतों से संबंधित प्रावधनों का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग IX में किया गया है।
  • इसे 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 में जोड़ा गया तथा इसमें एक नई अनुसूची '11वीं अनुसूची' भी जोड़ी गई।
  • भारतीय संविधान के भाग IX में पंचायतों से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।
  • जो ग्रामीण स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से लाया गया।​
  • भाग IX का परिचय
    • भाग IX अनुच्छेद 243 से 243O तक फैला हुआ है और पंचायती राज व्यवस्था की संरचना, संरक्षण तथा शक्तियों को परिभाषित करता है।
    • इस संशोधन ने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा प्रदान कर ग्रामीण भारत में विकेंद्रीकृत लोकतंत्र की नींव रखी।
    • ग्यारहवीं अनुसूची में 29 विषयों की सूची दी गई है, जिन्हें पंचायतों को हस्तांतरित किया जा सकता है।​
  • त्रिस्तरीय संरचना
    • अनुच्छेद 243B के अनुसार, प्रत्येक राज्य में ग्राम स्तर (ग्राम पंचायत), मध्यवर्ती स्तर (पंचायत समिति या ब्लॉक पंचायत) तथा जिला स्तर (जिला परिषद) पर पंचायतों का गठन अनिवार्य है।
    • 20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों में मध्यवर्ती स्तर वैकल्पिक है।
    • ग्राम सभा को पंचायत प्रणाली की आधारशिला माना गया है।​
  • प्रमुख प्रावधान
    • आरक्षण: महिलाओं, SC/ST के लिए सीटों तथा पदों में आरक्षण अनिवार्य (अनुच्छेद 243D)।
    • कार्यकाल: पंचायतों का कार्यकाल 5 वर्ष (अनुच्छेद 243E)।
    • वित्तीय शक्तियां: राज्य वित्त आयोग की स्थापना (अनुच्छेद 243I) तथा कर लगाने का अधिकार।
    • चुनाव: राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा स्वतंत्र चुनाव (अनुच्छेद 243K), जिसमें अदालती हस्तक्षेप सीमित (अनुच्छेद 243O)।​

4. द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की कौन-सी रिपोर्ट पंचायती राज की सिफारिशों से संबंधित है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) छठी
Solution:
  • द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की छठी रिपोर्ट पंचायती राज (Local Governance) की सिफारिशों से संबंधित है।
  •  यह रिपोर्ट "Local Governance: An Inspiring Journey into the Future" शीर्षक से जून 2007 में प्रस्तुत की गई थी।
  • आयोग ने पंचायती राज को मजबूत बनाने के लिए व्यावहारिक और संरचनात्मक सुधारों की विस्तृत रूपरेखा तैयार की।​
  • आयोग का पृष्ठभूमि
    • द्वितीय ARC का गठन 31 अगस्त 2005 को वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता में हुआ था
    • जिसका उद्देश्य लोक प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और क्षमता बढ़ाना था। आयोग ने कुल 15 रिपोर्टें जून 2006 से मई 2009 तक प्रस्तुत कीं।
    • छठी रिपोर्ट ने विशेष रूप से पंचायती राज और स्थानीय शासन पर ध्यान केंद्रित किया, जो 73वें संविधान संशोधन के बाद की चुनौतियों को संबोधित करती है।​
  • प्रमुख सिफारिशें
  • रिपोर्ट में पंचायती राज को सशक्त बनाने के लिए निम्नलिखित सिफारिशें की गईं:
    • राज्य विधानमंडलों को उपयुक्त स्तर पर पंचायतों की स्थापना सुनिश्चित करनी चाहिए और उन्हें स्वशासन की शक्तियां प्रदान करनी चाहिए।
    • प्रत्येक जिले में एक जिला परिषद का गठन, जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्र शामिल हों।
    • राज्य सरकारें स्थानीय निकायों की जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए लेखा परीक्षा समितियां स्थापित करें।
    • पंचायतों को वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करने हेतु कर लगाने और राजस्व वसूली के अधिकार बढ़ाए जाएं।​
  • क्रियान्वयन और प्रभाव
    • ये सिफारिशें पंचायती राज को सत्ता के विकेंद्रीकरण के सिद्धांत पर मजबूत बनाती हैं
    • जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 40 (DPSP) और भाग IX में वर्णित है।
    • रिपोर्ट ने ग्राम सभाओं को सक्रिय बनाने, ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने तथा सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
    • कई राज्य सरकारों ने इन सुझावों को अपनाया, जिससे ग्रामीण विकास में सुधार हुआ।​

5. किस संविधान संशोधन अधिनियम ने भारतीय संविधान में नगरपालिकाओं से संबंधित उपबंधों को जोड़ा था? [CHSL (T-I) 16 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) 74वां संशोधन अधिनियम, 1992
Solution:
  • 74वें संविधान संशोधन अधिनियम ने भारतीय संविधान में नगरपालिकाओं से संबंधित उपबंधों को जोड़ा था।
  • जिसके अंतर्गत संविधान के भाग 9क में 'नगरपालिकाओं' के बारे में प्रावधान किया गया तथा एक नई अनुसूची '12वीं अनुसूची' जोड़ी गई।
  • संशोधन का परिचय
    • यह अधिनियम 1 जून 1993 को लागू हुआ और शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया।
    • संविधान के भाग IX-A (अनुच्छेद 243P से 243ZG) को जोड़ा गया, जिसे "नगरपालिकाएं" कहा जाता है। साथ ही, 12वीं अनुसूची में 18 विषय शामिल किए गए
    • जैसे शहरी नियोजन, जल आपूर्ति, स्वच्छता और सड़कें।​
  • मुख्य प्रावधान
    • अधिनियम ने नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत और क्षेत्र पंचायत जैसे निकायों का गठन अनिवार्य किया। प्रत्येक नगरपालिका में वार्ड समितियों का प्रावधान है
    • महिलाओं व आरक्षित वर्गों के लिए सीटें सुनिश्चित की गईं। राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराता है, तथा वित्त आयोग फंड आवंटन सुझाता है।​
  • महत्वपूर्ण तिथियां
    • 1992 में संसद द्वारा पारित, यह 73वें संशोधन (पंचायतों के लिए) के समानांतर लाया गया।
    • महानगर नियोजन समितियों और जिला नियोजन समितियों का गठन भी निर्देशित किया। भारत का पहला नगर निगम 1688 में मद्रास में स्थापित हुआ था।​
  • प्रभाव और कार्यक्रम
    • इसने शहरी विकास को बढ़ावा दिया, जैसे JNNURM, AMRUT और स्मार्ट सिटी मिशन।
    • त्रिस्तरीय शासन (संघ, राज्य, नगरपालिका) मजबूत हुआ। अधिनियम ने विकेंद्रीकरण को बुनियादी आधार दिया।

6. दिसंबर, 2021 में सर्वोच्च न्यायालय ने निम्नलिखित में से किस राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए ओबीसी (OBC) कोटा निलंबित कर दिया था? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश
Solution:
  • दिसंबर, 2021 में उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कोटा निलंबित कर दिया था।
  • इस निर्णय ने स्थानीय शासन में आरक्षण नीतियों एवं सामाजिक न्याय तथा प्रतिनिधित्व पर उनके सम्यक प्रभाव के बारे में महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है।
  • सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय
    •  यह फैसला 2010 के अपने पूर्व निर्णय में निर्धारित "ट्रिपल टेस्ट" के अनुपालन न होने के आधार पर लिया गया
    • जिसमें पिछड़ेपन का अनुभवजन्य डेटा संग्रह, आरक्षण का मात्रात्मक आकलन और 50% आरक्षण सीमा का पालन शामिल है।​
  • ट्रिपल टेस्ट की आवश्यकता
    • ट्रिपल टेस्ट राज्य सरकारों को OBC आरक्षण प्रदान करने से पहले तीन शर्तें पूरी करने के लिए बाध्य करता है।
    • महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश ने पर्याप्त डेटा के अभाव में OBC कोटा लागू किया, जिसके कारण अदालत ने राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया
    • सीटों को सामान्य श्रेणी में परिवर्तित कर चुनाव कराए जाएं। यह कदम संवैधानिक 50% आरक्षण सीमा की रक्षा के लिए आवश्यक था।​
  • महाराष्ट्र में प्रभाव
    • महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव OBC कोटा विवाद के कारण लंबे समय से अटके रहे। अदालत ने स्पष्ट किया
    • बिना वैज्ञानिक आंकड़ों के 27% OBC आरक्षण लागू नहीं हो सकता
    • जिससे चुनाव प्रक्रिया सामान्य श्रेणी सीटों पर आधारित हुई। बाद में 2022 में अदालत ने इस आदेश पर पुनर्विचार किया
    • लेकिन प्रारंभिक निलंबन दिसंबर 2021 का ही था।​
  • मध्य प्रदेश में प्रभाव
    • मध्य प्रदेश में भी समान आदेश जारी हुआ, जहां OBC आयोग की रिपोर्ट के बावजूद ट्रिपल टेस्ट पूरा न होने से कोटा निलंबित रहा।
    • अदालत ने OBC सीटों को सामान्य श्रेणी में अधिसूचित करने का निर्देश दिया। 2021 में गठित आयोग की रिपोर्ट बाद में स्वीकार की गई
    • लेकिन दिसंबर 2021 का निलंबन प्रमुख था।​
  • बाद के विकास
    • इस फैसले ने कई राज्यों में OBC आरक्षण पर बहस छेड़ दी, जिसमें ओडिशा उच्च न्यायालय ने भी समान कदम उठाया।
    • 2021 के OBC विधेयक ने राज्यों को सूची तैयार करने का अधिकार बहाल किया, लेकिन स्थानीय निकायों में सतर्कता बरतने का संदेश दिया।
    • महाराष्ट्र में चुनाव 2025-26 तक चले, लेकिन मूल निलंबन 2021 का था।​

7. भारत में राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति ....... द्वारा की जाती है। [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (II-पाली), MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) राज्यपाल
Solution:
  • भारत में राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
  •  यह प्रावधान भारतीय संविधान के भाग नौए (अनुच्छेद 243 से 243-ओ) के अंतर्गत आता है, जो पंचायतों और नगरपालिकाओं से संबंधित है।
  • राज्यपाल इस नियुक्ति के माध्यम से राज्य निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करते हैं।​
  • संवैधानिक आधार
    • राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति अनुच्छेद 243K(2) के तहत राज्यपाल द्वारा होती है।
    • यह आयोग पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों का संचालन करता है
    • जो मुख्य चुनाव आयोग के समानांतर कार्य करता है। सेवा शर्तें और कार्यकाल भी राज्यपाल राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानून के अनुसार निर्धारित करते हैं
    • जो आमतौर पर 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक रहता है।​
  • हटाने की प्रक्रिया
    • राज्य चुनाव आयुक्त को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह ही हटाया जा सकता है
    • अर्थात् राज्यपाल द्वारा राज्य विधानसभा के विशेष बहुमत वाले प्रस्ताव के आधार पर।
    • यह प्रावधान आयोग की स्वायत्तता को मजबूत बनाता है और राज्य सरकार के मनमाने हस्तक्षेप को रोकता है।
    • राष्ट्रपति या केंद्र सरकार का इसमें कोई भूमिका नहीं है।​
  • मुख्य चुनाव आयोग से अंतर
    • मुख्य चुनाव आयोग (ईसीआई) के आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है
    • जिसमें हालिया 2023 अधिनियम के तहत चयन समिति (प्रधानमंत्री, विपक्ष नेता, केंद्रीय मंत्री) सिफारिश करती है।
    • राज्य स्तर पर यह प्रक्रिया सरल रखी गई है ताकि स्थानीय स्वशासन मजबूत हो।
    • अनुच्छेद 324 राष्ट्रीय चुनावों को कवर करता है, जबकि 243K स्थानीय निकायों के लिए।​
  • महत्वपूर्ण उदाहरण
    • उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाएं इसी प्रक्रिया से कार्यरत हैं, जहां आयुक्त स्थानीय चुनावों की निगरानी करते हैं।
    • 73वें और 74वें संविधान संशोधन (1992) ने इन आयोगों को संवैधानिक दर्जा दिया, जिससे ग्रामीण और शहरी स्थानीय चुनाव निष्पक्ष हुए।​

8. ....... एक पंचायत के क्षेत्र में रहने वाले सभी वयस्कों की सभा होती है। [MTS (T-I) 12 मई, 2023 (I-पाली), MTS (T-I) 20 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) ग्राम सभा
Solution:
  • ग्राम सभा एक पंचायत के क्षेत्र में रहने वाले सभी वयस्कों की सभा होती है।
  • संविधान के अनुच्छेद 243ख में पंचायतों के गठन के बारे में प्रावधान दिया गया है। ग्राम सभा एक कॉर्पोरेट निकाय है
  • जिसमें ऐसे सभी लोग शामिल हैं, जिनके नाम पंचायत की निर्वाचन सूची में ग्राम स्तर पर शामिल रहते हैं।
  • यह पंचायती राज व्यवस्था का आधारभूत हिस्सा है, जहां गांव के 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी पंजीकृत मतदाता भाग लेते हैं।​
  • ग्राम सभा की परिभाषा
    • ग्राम सभा ग्राम पंचायत के क्षेत्र में रहने वाले सभी वयस्क सदस्यों की सामूहिक बैठक होती है, जिनका नाम गांव की मतदाता सूची में दर्ज होता है।
    • यह केवल एक गांव या कुछ गांवों को कवर कर सकती है और इसका क्षेत्र पूर्ण ग्राम पंचायत होता है। ग्राम सभा पंचायत को लोकतांत्रिक रूप से जवाबदेह बनाती है।​
  • महत्वपूर्ण भूमिकाएं
    • ग्राम सभा सरकार की योजनाओं से ग्रामीणों को अवगत कराती है और उनके लाभों की जानकारी देती है।
    • यह पंचायत के पूर्व कार्यों का ब्यौरा प्रस्तुत करती है, क्षेत्र की समस्याओं पर चर्चा करती है तथा भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा रखती है।
    • साथ ही, यह पंचायत को मनमाने कार्यों और धन के दुरुपयोग से रोकती है।​
  • कानूनी आधार
    • भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 ने पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा दिया
    • जिसमें भाग IX (अनुच्छेद 243 से 243O) और 11वीं अनुसूची शामिल है।
    • यह 29 विषयों पर पंचायतों के अधिकार क्षेत्र को परिभाषित करता है। ग्राम सभा सामाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम है।​
  • सदस्यता और बैठकें
    • सदस्य वे वयस्क होते हैं जिनकी आयु 18 वर्ष या अधिक हो और नाम मतदाता सूची में हो। सरपंच को सभी वर्गों
    • विशेषकर अनुसूचित जाति/जनजाति और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। बैठकें नियमित होती हैं जहां शिकायतें सुनी जाती हैं।​