Correct Answer: (3) रूपक "नील परिघान बीच सुकुमार खुल रहा मृदुल-अधखुला अंग।" खिला हो ज्यों' विजली का फूल मेघवन बीच गुलाबी रंग।।"
Solution:सुबरन को खोजत फिरत, कवि, व्यभिचारी, चोर, वाक्य में श्लेष अलंकार है। यहाँ सुबरन का प्रयोग एक बार किया गया है, किन्तु पंक्ति में प्रयुक्त सुबरन शब्द के तीन अर्थ हैं; कवि के सन्दर्भ में सुबरन का अर्थ अच्छे शब्द, व्यभिचारी के सन्दर्भ में सुबरन अर्थ सुन्दर वर, चोर के सन्दर्भ में सुबरन का अर्थ सोना है।
• संध्या घनमाला की सुंदर ओढ़े रंग बिरंगी छींट, में मानवीकरण अलंकार है।
• जब जड़ पदार्थों और प्रकृति के अंग (नदी, पर्वत, पेड़, लताएँ, झरने, हवा, पत्थर, पक्षी) आदि पर मानवीय क्रियाओं का आरोप लगाया जाता है अर्थात् मनुष्य जैसा कार्य व्यवहार करता हुआ दिखाया जाता है तब वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
• "नील परिधान बीच सुकुमार, खुल रहा मृदुल अधखुला अंग। खिला हो ज्यों बिजली का फूल मेघ बन बीच गुलाबी रंग।" - उक्त पंक्ति में उपमा अलंकार है।
• 'पीपर पात सरिस मन डोला।' पंक्तियों में उपमा अलंकार है। यहाँ मन उपमेय, पीपर पात उपमान, सरिस वाचक पद एवं डोला साधारण धर्म है। जब किसी व्यक्ति या वस्तु की तुलना किसी दूसरे व्यक्ति या वस्तु से की जाए वहाँ पर उपमा अलंकार होता है।
• समानता के कारण उपमेय में उपमान का आरोप कर अभेद स्थापित किया जाए वहाँ रूपक अलंकार होता है।