1857 की क्रांति एवं अन्य जन आंदोलन (आधुनिक भारतीय इतिहास)

Total Questions: 24

21. गारो जनजाति का संबंध भारत के किस क्षेत्र से है? [MTS (T-I) 12 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) उत्तर-पूर्वी
Solution:

गारो जनजाति का संबंध भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र से है।

  • गारो जनजाति मुख्य रूप से मेघालय राज्य में निवास करती है, जहाँ वे गारो पहाड़ियों में रहते हैं।
  • यह जनजाति मेघालय की तीन प्रमुख जनजातियों (गारो, खासी और जयंतिया) में से एक है।
  • मेघालय उत्तर-पूर्वी भारत का एक अभिन्न अंग है।
  •  गारो जनजाति :-
    •  यह मुख्य रूप से भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में पाई जाती है, विशेष रूप से मेघालय के गारो हिल्स जिले में।
    •  गारों जनजाति मेघालय की प्रमुख जनजातियों में से एक है और यह असम और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में भी पाई   जाती है।
    •  गारों भाषा तिब्बती-बर्मन भाषा परिवार के बोडो-कचारी समूह से संबंधित है।
    •  गारो जनजाति के पास एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है और यह अपने पारंपरिक नृत्य रूपों और संगीत के लिए जानी   जाती है।
    •  गारो जनजाति "सोंगसारेक' नामक एक अनोखे धर्म का पालन करती है, जिसमें विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा शामिल   है।
      Other Information
  •  भारत का पश्चिमी क्षेत्र :-
    • यह अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है और भील, गरासिया और वाली जैसे विभिन्न आदिवासी समुदायों का घर है।
  • भारत का दक्षिणी क्षेत्र :-
    • यह अपने विविध जनजातीय समुदायों जैसे इरुलास, टोडास और कोटास के लिए भी जाना जाता है।
  •  भारत का दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र :-
    •  यह मुख्य रूप से कोंकणी, तुलुवास और कन्नाडिगा जैसे तटीय समुदायों के लिए जाना जाता है।

22. 'पाथरूघाट विद्रोह' किससे संबंधित है? [MTS (T-I) 26 अक्टूबर, 2021 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) किसानों के विद्रोह
Solution:
  • पाथरूघाट विद्रोह' किसानों के विद्रोह से संबंधित है।
  • यह विद्रोह 1894 में ब्रिटिश सरकार की भूमि करों को बढ़ाने की नीति के विरोध में असम के दरंग जिले के पाथरूघाट नामक गाँव में हुआ था।
  • गुस्साई भीड़ ने टैक्स बढ़ाने के फैसले का विरोध किया, जिसके बाद ब्रिटिश पुलिस ने अंधाधुंध गोलियाँ चलाईं, जिसमें कई किसान मारे गए। इस घटना को पाथरूघाट का किसान विद्रोह या पाथरूघाट की लड़ाई के नाम से जाना जाता है।
  •  अंग्रेज़ सरकार ने किसानों की शिकायतें सुनने से इनकार कर दिया और भारतीय किसानों के शांतिपूर्ण विराम को राजद्रोह   मानते हुए लाठीचार्ज और बाद में गोलीबारी कर दी।
  •  इस घटना में आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 15 किसान मारे गए जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि करीब 100 से अधिक किसानों की मौत हुई। यह विद्रोह जलियांवाला बाग हत्याकांड से लगभग 25 साल पहले हुआ था
  • इसे असम का जलियांवाला बाग कहा जाता है। पाथरूघाट विद्रोह सविनय अवज्ञा आंदोलन का अग्रदूत था, जिससे भारत के स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा मिली।
  • अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ यह एक अखिल भारतीय साम्राज्यवाद-विरोधी आंदोलन था, जिसमें किसानों ने बिना किसी नेतृत्व के खुद को संगठित कर ब्रिटिश शासन का विरोध किया था।
  • इस विद्रोह की आज भी असम में याद की जाती है और वहां शहीद स्मारक भी स्थापित है।​​
  • पाथरूघाट विद्रोह की पृष्ठभूमि
    • 1826 में ब्रिटिशों द्वारा असम पर कब्जा करने के बाद भूमि का बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण शुरू हुआ। इस आधार पर भूमि करों की वसूली शुरू हुई, जो पहले नकद के बजाय वस्तु या सेवाओं के रूप में भुगतान होते थे।
    • 1893 में ब्रिटिश सरकार ने कर अधिभार 70-80% तक बढ़ा दिया, जिससे किसानों में भारी असंतोष और आक्रोश फैला।
    • किसान बिना किसी नेतृत्व के रायज मेलों में एकत्रित होकर कर वृद्धि के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करते रहे, लेकिन ब्रिटिश अधिकारी उन्हें देशद्रोही मानकर उनसे भिड़ गए।
  • विद्रोह का विस्तार
    • 28 जनवरी 1894 को ब्रिटिश अधिकारियों ने किसानों की सुनवाई करने से मना कर दिया। इसके बाद पुलिस ने पहले लाठीचार्ज किया जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया और फिर सैनिकों को किसानों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया।
    • यह गोलीबारी किसानों की बड़ी संख्या में मौत का कारण बनी। इस विद्रोह का ऐतिहासिक महत्व इसलिए भी है
    • क्योंकि इसे भारत में सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रारंभिक रूप माना जाता है, जो बाद में महात्मा गांधी के नेतृत्व में व्यापक हुआ।
  • महत्व
    • पाथरूघाट विद्रोह ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ किसानों और आम जनता की जागरूकता और संघर्ष को बढ़ावा दिया।
    • यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है,
    • जो असम के लोगों की बहादुरी और शोषण के विरुद्ध लड़ाई को दर्शाती है। इसका स्मारक आज भी मौजूद है और हर साल इस दिन शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
    • इस प्रकार, पाथरूघाट विद्रोह असम में ब्रिटिश अत्याचार के विरुद्ध किसानों का एक महत्वपूर्ण और जनजातीय आंदोलन था, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी

23. अल्लूरी सीताराम राजू भारत के किस राज्य के आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी थे? [MTS (T-I) 06 जुलाई, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) आंध्र प्रदेश
Solution:
  • अल्लूरी सीताराम राजू भारत के आंध्र प्रदेश राज्य के आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी थे।
  • उन्होंने मद्रास प्रेसीडेंसी के गोदावरी एजेंसी क्षेत्र में आदिवासियों को संगठित किया और 1922-1924 के दौरान रम्पा विद्रोह (Rampa Rebellion) या मन्यम विद्रोह का नेतृत्व किया।
  • उनका संघर्ष ब्रिटिश वन कानूनों और शोषणकारी नीतियों के विरुद्ध था, जो आदिवासियों के वन अधिकारों को छीन रहे थे। उनकी तुलना अक्सर रॉबिन हुड से की जाती थी।
  • अल्लूरी सीताराम राजू भारत के एक क्रांतिकारी थे जो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय थे।
  • राजू असहयोग आंदोलन से प्रेरित थे और उन्होंने दूसरों को खादी पहनने और शराब से दूर रहने के लिए प्रेरित किया।
  • उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत को केवल बल प्रयोग से ही आजाद कराया जा सकता है, अहिंसा से नहीं।
  • स्वराज प्राप्त करने के लिए, विद्रोहियों ने पुलिस स्टेशनों पर हमला किया, ब्रिटिश अधिकारियों को मारने की कोशिश की और गुरिल्ला युद्ध में लगे रहे।
  • 1924 में राजू को पकड़ लिया गया और फांसी दे दी गई, और वह समय के साथ एक लोक नायक बन गए।
    Other Information
  •  4 जुलाई, 1897 को उनका जन्म अल्लूरी वेंकट राम राजू और सूर्यनारायणम्मा के घर हुआ था। वह आज भी आंध्र प्रदेश की जनजातियों के बीच पूजनीय हैं।
  •  जब ब्रिटिश सरकार ने 1882 के वन अधिनियम को लागू किया, तो इसने किसानों को स्थानांतरित फसल की पारंपरिक कृषि तकनीक का पालन करने से रोक दिया, जिससे उन्हें विशिष्ट फसलें उगाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
  • लड़ाई लड़ी और हमेशा जीत हासिल की।
  •  इससे उन्हें "मन्यम वीरुडु" या "जंगल हीरो' उपनाम मिला। अंग्रेज़ उन्हें पकड़ने और पराजित करने पर आमादा थे।
  •  ब्रिटिश-तैनात असम राइफल बटालियन ने उन्हें पकड़ लिया।
  • 1986 में, भारतीय डाक विभाग ने स्वतंत्रता के लिए उनके संघर्ष की स्मृति में एक डाक टिकट जारी किया।

24. पूर्वी गोदावरी क्षेत्र में कोया विद्रोह किस वर्ष हुआ था? [Phase-XI 28 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 1879-1880
Solution:
  • पूर्वी गोदावरी क्षेत्र में कोया विद्रोह मुख्य रूप से 1879-1880 में हुआ था।
  • यह विद्रोह आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी क्षेत्र में कोया आदिवासियों द्वारा किया गया था।
  • कोया विद्रोह मन्यम विद्रोह की श्रृंखला का एक हिस्सा था, जिसका कारण ब्रिटिश सरकार द्वारा उनके वन क्षेत्रों में हस्तक्षेप, नए नियमों का लागू होना और साहूकारों द्वारा किया जाने वाला शोषण था।
  • जिसका नेतृत्व टोम्मा सोरा ने किया था। इस चरण में कोया आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ अपने पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए विद्रोह किया, लेकिन टोम्मा सोरा के पुलिस की गोली लगने के बाद यह विद्रोह समाप्त हो गया।
  • दूसरा चरण 1882 से 1886 के बीच हुआ, जब अनन्त शैयार ने नेतृत्व संभाला और राम सेडू नामक विद्रोही सेना का गठन किया। इस चरण में कई गोरिल्ला युद्ध लड़े गए और विद्रोह ने अधिक सक्रिय रूप धारण किया।
  • कोया विद्रोह के कारणों में ब्रिटिश सरकार द्वारा आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों का हनन, पुलिस और साहूकारों के अत्याचार, और ताड़ी पर आबकारी अधिनियम लागू करना शामिल थे।
  • अंग्रेजों ने इस विद्रोह को दबाने के लिए मद्रास इंफैंट्री की छह रेजिमेंटों की मदद ली थी। यह विद्रोह पूर्वी गोदावरी जिले के आसपास के क्षेत्र में हुआ था और इसमें कोया, कोंडा सोरा तथा सोरा जनजातियों ने भाग लिया था।
  • यह विद्रोह ब्रिटिश शासन के खिलाफ आदिवासियों की एक महत्वपूर्ण लड़ाई मानी जाती है जो 1803 से लेकर 1886 के बीच कई बार भड़क उठी थी, लेकिन मुख्य रूप से 1879-80 और 1882-86 के बीच सक्रिय रही थी.​
  • संक्षेप में, कोया विद्रोह 1879-80 और 1882-86 के वर्षों में पूर्वी गोदावरी क्षेत्र में हुआ और यह ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ आदिवासी जनजातियों का संघर्ष था।