हाइड्रोकार्बन (कार्बनिक रसायन)

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1. अनुकारित आदिम भूमि परिस्थितियों में निम्नलिखित के प्रादुर्भाव का सही अनुक्रम कौन-सा है? [I.A.S. (Pre) 1994]

Correct Answer: (a) मीथेन, हाइड्रोजन सायनाइड, नाइट्राइल, एमीनो अम्ल
Solution: मीथेन, हाइड्रोजन सायनाइड, नाइट्राइल, एमीनो अम्ल। मिलर-उरे प्रयोग जैसे अध्ययनों ने यह दर्शाया कि आदिम पृथ्वी के वातावरण में मीथेन (CH₄) और अमोनिया (NH₃) जैसी गैसें मौजूद थीं। इन गैसों से बिजली और पराबैंगनी किरणों की ऊर्जा के कारण हाइड्रोजन सायनाइड (HCN) और नाइट्राइल (R-C≡N) जैसे सरल कार्बनिक यौगिकों का निर्माण हुआ। इन यौगिकों से अंततः एमीनो अम्ल जैसे अधिक जटिल अणु बने, जो प्रोटीन के निर्माण खंड हैं और जीवन के लिए आवश्यक हैं। यह अनुक्रम रासायनिक विकास के सिद्धांत से मेल खाता है।

2. सभी जैव यौगिक का अनिवार्य मूल तत्व है- [U.P.U.D.A./L.D.A. (Pre) 2001 56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015]

Correct Answer: (c) कार्बन
Solution:कार्बन सभी जैव यौगिकों का अनिवार्य मूल तत्व है क्योंकि इसमें एक अद्वितीय गुण होता है जिसे 'श्रृंखलन' (catenation) कहा जाता है। इस गुण के कारण कार्बन परमाणु आपस में मिलकर लंबी, स्थिर श्रृंखलाएँ और वलय बना सकते हैं। इन श्रृंखलाओं और वलयों में हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और अन्य तत्वों के परमाणु जुड़कर विभिन्न प्रकार के जटिल जैविक अणु जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल बनाते हैं। ये सभी अणु जीवन के लिए मूलभूत संरचनाएं और कार्य प्रदान करते हैं। इसलिए, कार्बन को जीवन का आधार माना जाता है।

3. सभी जैव-यौगिकों में सर्वाधिक आवश्यक मूल तत्व है- [U.P.P.C.S. (Mains) 2015]

Correct Answer: (b) कार्बन
Solution:सभी जीवित जीवों में मौजूद सभी जैव-यौगिकों के लिए कार्बन सबसे महत्वपूर्ण और आवश्यक मूल तत्व है। कार्बन की यह विशिष्टता उसके चार संयोजी इलेक्ट्रॉनों (valence electrons) के कारण है, जो उसे अन्य कार्बन परमाणुओं और अन्य तत्वों जैसे हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, और सल्फर के साथ मजबूत सहसंयोजक बंधन बनाने की अनुमति देते हैं। इस क्षमता के कारण, कार्बन जटिल और विविध जैविक अणुओं की एक विशाल श्रृंखला का आधार बन सकता है, जो जीवन के लिए आवश्यक हैं। इस प्रकार, कार्बन को जीवन का 'रीढ़' कहा जा सकता है।

4. निम्नलिखित तत्व समूहों में से कौन-सा एक पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के लिए मूलतः उत्तरदायी था? [I.A.S. (Pre) 2012]

Correct Answer: (b) कार्बन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन
Solution:पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के लिए जिम्मेदार आदिम वातावरण में ये तीन तत्व सबसे महत्वपूर्ण थे। कार्बन, जैसा कि पहले बताया गया है, जैविक अणुओं की रीढ़ है। हाइड्रोजन इन अणुओं को बनाने के लिए आवश्यक है, और नाइट्रोजन प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल (डीएनए और आरएनए) जैसे महत्वपूर्ण जैविक अणुओं का एक अनिवार्य घटक है। ऑक्सीजन भी महत्वपूर्ण है, लेकिन आदिम पृथ्वी पर मुक्त ऑक्सीजन नहीं थी; यह पानी (H₂O) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) जैसे यौगिकों में मौजूद थी। इसलिए, इन तीन तत्वों का संयोजन जीवन की रासायनिक उत्पत्ति के लिए सबसे आवश्यक था।

5. हाइड्रोकार्बनों के अणुभारों के बढ़ते अनुक्रम के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा सही क्रम है? [I.A.S. (Pre) 2001]

Correct Answer: (a) मीथेन, एथेन, प्रोपेन और ब्यूटेन
Solution:हाइड्रोकार्बन कार्बन और हाइड्रोजन परमाणुओं से बने होते हैं। एक हाइड्रोकार्बन के अणुभार की गणना उसके अणुओं में कार्बन और हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या से की जाती है।

मीथेन (CH₄): 1 कार्बन, 4 हाइड्रोजन। अणुभार सबसे कम होता है।
एथेन (C₂H₆): 2 कार्बन, 6 हाइड्रोजन। अणुभार मीथेन से अधिक होता है।
प्रोपेन (C₃H₈): 3 कार्बन, 8 हाइड्रोजन। अणुभार एथेन से अधिक होता है।
ब्यूटेन (C₄H₁₀): 4 कार्बन, 10 हाइड्रोजन। अणुभार सबसे अधिक होता है। अतः, कार्बन परमाणुओं की संख्या बढ़ने के साथ अणुभार भी बढ़ता है, जिससे यह अनुक्रम सही है।

6. एक हाइड्रोकार्बन, जिसमें कार्बन के दो परमाणु द्विबंध द्वारा जुड़े हों, कहलाता है- [63rd B.P.S.C. (Pre) 2017]

Correct Answer: (b) एल्कीन
Solution:हाइड्रोकार्बन को उनके कार्बन-कार्बन बंधों के प्रकार के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

एल्केन (Alkane): इनमें कार्बन परमाणुओं के बीच एकल बंध (single bond) होता है। इनका सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ₊₂ होता है।
एल्कीन (Alkene): इनमें कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक द्विबंध (double bond) होता है। इनका सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ होता है।
एल्काइन (Alkyne): इनमें कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक त्रिबंध (triple bond) होता है। इनका सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ₋₂ होता है। चूंकि प्रश्न में द्विबंध की बात की गई है, इसलिए सही उत्तर एल्कीन है।

7. सिगरेट लाइटर में निम्नलिखित में से कौन-सी गैस प्रयुक्त होती है? [56th to 59th B.P.S.C. (Pre) 2015]

Correct Answer: (a) ब्यूटेन
Solution:ब्यूटेन (C₄H₁₀) एक अत्यधिक ज्वलनशील, रंगहीन और आसानी से द्रवीकृत होने वाली गैस है। यह कम दबाव पर तरल में बदल जाती है और जब इसे लाइटर के वाल्व से छोड़ा जाता है, तो यह तुरंत गैस में बदल जाती है और चिंगारी के संपर्क में आने पर जल उठती है। इसकी उच्च ज्वलनशीलता और भंडारण में आसानी के कारण, इसे सिगरेट लाइटर और पोर्टेबल गैस स्टोव जैसे उपकरणों में ईंधन के रूप में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

8. भोपाल गैस त्रासदी निम्नलिखित में से किसके रिसाव के कारण हुई? [Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2012]

Correct Answer: (a) मिथाइल आइसोसायनेट
Solution:भोपाल गैस त्रासदी 2-3 दिसंबर 1984 की रात को हुई थी। यह त्रासदी यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (UCIL) के कीटनाशक संयंत्र से मिथाइल आइसोसायनेट (MIC) नामक एक अत्यधिक जहरीली गैस के रिसाव के कारण हुई थी। इस गैस के संपर्क में आने से हजारों लोगों की तुरंत मृत्यु हो गई और लाखों लोग गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हुए। यह घटना दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में से एक मानी जाती है।

9. भोपाल गैस दुर्घटना का कारण था- [U.P.P.C.S. (Pre) 2017]

Correct Answer: (a) मिथाइल आइसोसायनेट का रिसाव
Solution:भोपाल में हुई त्रासदी का मुख्य कारण यूनियन कार्बाइड कारखाने से मिथाइल आइसोसायनेट (MIC) गैस का रिसाव था। यह गैस कीटनाशक सेविन (carbaryl) के उत्पादन में एक मध्यवर्ती उत्पाद के रूप में उपयोग की जाती थी। संयंत्र में सुरक्षा उपायों की कमी और रखरखाव में लापरवाही के कारण, एक टैंक में पानी घुस गया, जिससे एक ऊष्माक्षेपी प्रतिक्रिया (exothermic reaction) शुरू हुई। इस प्रतिक्रिया ने टैंक का दबाव बढ़ा दिया और अंततः गैस रिसाव का कारण बना, जिसके परिणामस्वरूप एक बड़ी मानवीय और पर्यावरणीय आपदा हुई।

10. मोपाल गैस त्रासदी कब हुई ? [M.P.P.C.S. (Pre) 2013]

Correct Answer: (a) 2-3 दिसंबर, 1984
Solution:यह त्रासदी 2 दिसंबर, 1984 की आधी रात के बाद शुरू हुई और 3 दिसंबर की सुबह तक जारी रही। यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (UCIL) के कीटनाशक संयंत्र से मिथाइल आइसोसायनेट (MIC) गैस का रिसाव हुआ था। इस भयावह घटना ने हजारों लोगों की जान ली और लाखों लोगों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव डाला। इस तिथि को भारत के औद्योगिक इतिहास में एक काला अध्याय माना जाता है और यह औद्योगिक सुरक्षा के महत्व पर एक गंभीर अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है।