B. हाइड्रोजन और उसके यौगिक

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21. जल किसी अन्य द्रव की अपेक्षा अधिक पदार्थों को घोल सकता है: क्योंकि - [I.A.S. (Pre) 2021]

Correct Answer: (a) इसकी प्रकृति द्विध्रुवीय है
Solution:जल को एक सार्वभौमिक विलायक (universal solvent) कहा जाता है क्योंकि यह किसी भी अन्य द्रव की तुलना में अधिक पदार्थों को घोल सकता है। इसका मुख्य कारण इसकी द्विध्रुवीय प्रकृति (polar nature) है। जल का अणु () एक 'V' आकार का होता है, जिसमें ऑक्सीजन परमाणु पर आंशिक नकारात्मक आवेश (negative charge) और हाइड्रोजन परमाणुओं पर आंशिक सकारात्मक आवेश (positive charge) होता है। इस ध्रुवीयता के कारण, जल का अणु एक छोटे चुंबक की तरह व्यवहार करता है, जो आयनिक और ध्रुवीय यौगिकों के सकारात्मक और नकारात्मक भागों को अपनी ओर खींचता है और उन्हें घोल देता है। इसी गुण के कारण जल लवणों, शर्करा और कई अन्य पदार्थों को आसानी से घोल पाता है।

22. अशुद्ध जल से बड़ी मात्रा में पेयजल तैयार किया जाता है- [Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2005]

Correct Answer: (a) निर्लवणीकरण द्वारा
Solution:अशुद्ध जल, जैसे समुद्री जल, से बड़ी मात्रा में पेयजल तैयार करने की प्रक्रिया को निर्लवणीकरण (Desalination) कहा जाता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें खारे पानी से लवण और अन्य खनिजों को हटाया जाता है ताकि वह पीने योग्य बन सके। निर्लवणीकरण के लिए कई तकनीकें उपलब्ध हैं, जिनमें उत्क्रम परासरण (Reverse Osmosis), आसवन (Distillation) और विद्युत पृथक्करण (Electrodialysis) प्रमुख हैं। इन विधियों से जल को शुद्ध करके उसे मानव उपभोग, कृषि और औद्योगिक उपयोग के लिए उपयुक्त बनाया जाता है।

23. निम्नलिखित में से कौन-सी गैस पीने के पानी को शुद्ध करने के लिए प्रयोग में लाई जाती है? [Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013]

Correct Answer: (b) क्लोरीन
Solution:पीने के पानी को शुद्ध करने के लिए सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली गैस क्लोरीन है। क्लोरीन एक प्रभावी कीटाणुनाशक (disinfectant) है जो पानी में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देती है, जिससे पानी पीने के लिए सुरक्षित हो जाता है। जल शोधन संयंत्रों में पानी में क्लोरीन गैस या उसके यौगिक (जैसे सोडियम हाइपोक्लोराइट) मिलाए जाते हैं। हालांकि क्लोरीन का उपयोग कुछ स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को भी जन्म दे सकता है, लेकिन यह जल-जनित बीमारियों को रोकने में बहुत प्रभावी साबित हुआ है।

24. समुद्री जल को शुद्ध जल में किस प्रक्रिया द्वारा बदला जा सकता है? [R.A.S./R.T.S. (Pre) 2008]

Correct Answer: (d) उत्क्रम परासरण
Solution:समुद्री जल को शुद्ध जल में बदलने के लिए कई प्रक्रियाएं उपयोग की जाती हैं, लेकिन सबसे आधुनिक और प्रभावी तरीका उत्क्रम परासरण (Reverse Osmosis) है। परासरण (Osmosis) में, एक अर्धपारगम्य झिल्ली (semipermeable membrane) के माध्यम से कम सांद्रता वाले घोल से पानी उच्च सांद्रता वाले घोल की ओर जाता है। उत्क्रम परासरण में, इस प्रक्रिया को उलट दिया जाता है। समुद्री जल पर उच्च दबाव डाला जाता है, जिससे पानी के अणु अर्धपारगम्य झिल्ली से गुजरकर लवण और अन्य अशुद्धियों को पीछे छोड़ देते हैं। इस तरह, खारे पानी को पीने योग्य शुद्ध पानी में परिवर्तित किया जाता है।

25. खारे पानी को शुद्ध पानी में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को कहते हैं- [U.P.P.C.S. (Mains) 2013]

Correct Answer: (d) उत्क्रम परासरण
Solution:खारे पानी (समुद्री जल) को शुद्ध पानी में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को उत्क्रम परासरण (Reverse Osmosis) कहते हैं। यह प्रक्रिया पानी के अणुओं को एक अर्धपारगम्य झिल्ली (semipermeable membrane) से गुजारकर लवणों और अन्य अशुद्धियों को अलग करती है। इस प्रक्रिया में खारे पानी पर दबाव डाला जाता है जो परासरण के प्राकृतिक प्रवाह को उलट देता है। उत्क्रम परासरण एक प्रमुख तकनीक है जिसका उपयोग दुनिया भर में जल शुद्धिकरण संयंत्रों में किया जाता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ ताजे पानी के स्रोत सीमित हैं।

26. फिटकरी गंदले पानी को किस प्रक्रिया द्वारा स्वच्छ करती है? [R.A.S./R.T.S. (Pre) 2000]

Correct Answer: (c) स्कंदन
Solution:फिटकरी (पोटैशियम एल्युमिनियम सल्फेट) गंदले पानी को स्कंदन (Coagulation) की प्रक्रिया द्वारा स्वच्छ करती है। गंदले पानी में मिट्टी, धूल और अन्य सूक्ष्म कण होते हैं, जो नकारात्मक आवेशित होते हैं और एक दूसरे को प्रतिकर्षित (repel) करते हैं, जिससे वे पानी में घुले रहते हैं। जब फिटकरी को पानी में मिलाया जाता है, तो इसके एल्युमिनियम आयन (Al³⁺) इन कणों के आवेश को उदासीन कर देते हैं। इससे ये छोटे कण आपस में मिलकर बड़े और भारी कणों (flocs) का निर्माण करते हैं, जो गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे बैठ जाते हैं। इस तरह, पानी ऊपर से साफ हो जाता है।

27. वनस्पति तेल से वनस्पति घी बनाने में प्रयुक्त होने वाली गैस है- [B.P.S.C. (Pre) Exam, 2016 U.P.P.C.S. (Mains) 2013]

Correct Answer: (a) हाइड्रोजन
Solution:वनस्पति तेल से वनस्पति घी (डालडा) बनाने की प्रक्रिया को हाइड्रोजनीकरण (Hydrogenation) कहते हैं। इस प्रक्रिया में वनस्पति तेल में हाइड्रोजन गैस प्रवाहित की जाती है। वनस्पति तेलों में असंतृप्त वसा (unsaturated fats) होती है, जिसमें कार्बन-कार्बन द्वि-बंध होते हैं। हाइड्रोजनीकरण की प्रक्रिया के दौरान, इन द्वि-बंधों को तोड़कर हाइड्रोजन परमाणुओं को जोड़ा जाता है, जिससे असंतृप्त वसा संतृप्त वसा (saturated fats) में बदल जाती है। इसके परिणामस्वरूप, तेल तरल से ठोस या अर्ध-ठोस रूप में परिवर्तित हो जाता है, जिसे वनस्पति घी कहते हैं।

28. वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण में निम्नलिखित में से किस उत्प्रेरक का उपयोग किया जाता है? [U.P.P.C.S. (Mains) 2010, 2016]

Correct Answer: (c) निकेल
Solution:वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण की प्रक्रिया को तेज करने और नियंत्रित करने के लिए एक उत्प्रेरक (catalyst) का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में सबसे अधिक उपयोग होने वाला उत्प्रेरक निकेल है। उत्प्रेरक का काम रासायनिक अभिक्रिया की दर को बढ़ाना होता है, लेकिन वह स्वयं अभिक्रिया में भाग नहीं लेता। निकेल की उपस्थिति में, हाइड्रोजन गैस असंतृप्त वसा के द्वि-बंधों के साथ तेजी से अभिक्रिया करती है, जिससे वनस्पति तेल वनस्पति घी में परिवर्तित हो जाता है। इसके अतिरिक्त, कुछ मामलों में प्लैटिनम और पैलेडियम जैसे उत्प्रेरकों का भी उपयोग किया जाता है।