Solution:1953 में जी. एस. धुर्य ने (अपनी पुस्तक "इंडियन साधूज, 1953 में) भारतीय साधुओं का अध्ययन किया। धुर्ये एक भारतीय समाजशास्त्री और मानवविज्ञानी थे जिन्होंने भारतीय समाज और संस्कृति के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।उन्होंने भारतीय समाज और संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर कई पुस्तकें और लेख लिखे तथा उनकी कृतियों को समाजशास्त्र और मानव विज्ञान के क्षेत्र में मौलिक माना जाता है।
इनकी महत्वपूर्ण पुस्तकेः-
- महादेव कोलीस
- इंडियन साधूज
- रिलिजीयंस काश्यन्स
- सोशल टेंशन्स इन इंडिया और टू ब्राह्मनिकल इंस्टिच्यूशन्स ।