Solution:सूची -
| विद्वान
(Scholar) | ग्रंथ (Text) |
|---|
| A | पाणिनि | (iv) अष्टाध्यायी |
| B | भर्तृहरि | (iii) वाक्यपदीय |
| C | कणाद | (ii) वैशेषिक-सूत्र |
| D | पतंजलि | (i) महाभाष्य |
• अष्टाध्यायी संस्कृत व्याकरण का एक प्रसिद्ध ग्रंथ है, जिसे महर्षि पाणिनि ने 6वीं से 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में लिखा था, जिसमें आठ अध्याय (अष्ट-अध्याय) हैं और यह संस्कृत भाषा के नियमों का एक व्यवस्थित संग्रह है, जिसमें 'सूत्र' विधि का प्रयोग किया गया है, जो संस्कृत व्याकरण की संरचना और उत्पत्ति को दर्शाता है और इसके लेखक पाणिनि हैं।
• वाक्यपदीय, भर्तृहरि द्वारा रचित संस्कृत का एक महान व्याकरण-दर्शन ग्रंथ है, जो भाषा के दर्शन और स्फोटवाद (शब्द का अर्थ उत्पन्न करने वाली ध्वनि की शक्ति) पर केंद्रित है, और इसमें तीन कांड (ब्रह्मकांड, वाक्यकांड, पदकांड) हैं।
• वैशेषिक-सूत्र: परंपरा के अनुसार, ऋषि कणाद (कश्यप) को वैशेषिक सूत्र का रचयिता माना जाता है, जिन्होंने इस दर्शन की नींव रखी। यह दर्शन 'पदार्थ' नामक अस्तित्व की श्रेणियों का विश्लेषण करता है, जिसमें द्रव्य (पदार्थ), गुण (विशेषताएँ), कर्म (क्रिया), सामान्य (जाति), विशेष (विशिष्टता), समवाय (अविभाज्य संबंध), और अभाव (गैर-अस्तित्व) शामिल हैं, जो यथार्थ को समझने में मदद करते हैं। यह दर्शन मानता है कि सभी भौतिक पदार्थ अविभाज्य कणों (परमाणुओं) से बने हैं, जो अग्नि या ताप के प्रभाव से अलग-अलग होकर फिर से जुड़ सकते हैं (जैसे 'पीलुपाक' सिद्धांत में घड़े का पकना)।
• महाभाष्य, पतंजलि द्वारा रचित संस्कृत व्याकरण का एक महान ग्रंथ है, जो पाणिनि की अष्टाध्यायी और कात्यायन के वार्तिकों पर एक विस्तृत टीका (भाष्य) है और व्याकरण के नियमों को स्पष्ट करता है।