Solution:असहयोग आंदोलन की असफलता के पश्चात, स्वराजवादियों ने अपरिवर्तनकारियों के विरोध के बावजूद परिषद में प्रवेश करके काँग्रेस के लिए एक अलग गुट बनाया जिसे 'स्वराज पार्टी' कहते हैं। गया काँग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता देशबन्धु चितरंजन दास ने किया था।
इस अधिवेशन में परिषद् (कौंसिल) के प्रवेश को लेकर प्रश्न उठाया गया था। अतः श्रीनिवास अय्यंगर और मोतीलाल नेहरू के प्रभावपूर्ण भाषणों के बावजूद परिषद में प्रवेश को लेकर विरोध करने वालों की संख्या अधिक थी किन्तु इसकी परवाह न करते हुए 1923 में सी.आर. दास (चितरंजन दास) तथा मोतीलाल नेहरू ने स्वराज पार्टी का गठन किया।
इसके प्रमुख नेताओं में मदन मोहन मालवीय, विठ्ठलभाई पटेल, डॉ. एम. आर. जयकर आदि थे। अपरिवर्तन कारियों (गाँधी जी के पक्षधर) में राजेन्द्र प्रसाद, बल्लभभाई पटेल, राजगोपालचारी, सेठ जमना लाल बजाज आदि प्रमुख थे। स्वराज पार्टी का प्रथम अधिवेशन मार्च 1923 में इलाहाबाद (प्रयागराज) में हुआ था।
नवम्बर 1923 के चुनाव में स्वराज पार्टी को सफलता मिली। 1925 में विठ्ठलभाई पटेल को केन्द्रीय विधान सभा का अध्यक्ष चुना गया था। इस पद पर नियुक्त होने वाले वे प्रथम गैर सरकारी व्यक्ति थे। 1919 में उदारवादी नेता सुरेन्द्र नाथ बनर्जी ने इण्डियन लिबरल फेडरेशन का गठन किया था। प्रमुख नेताओं में श्रीनिवास शास्त्री, एम.आर. जयकर, तेजबहादुर सप्रू आदि इसमें शामिल थे।