Solution:ऐतरेय और शतपथ ब्राह्मण में पर राजा के नाम का उल्लेख मिलता हैं, जिन्होंने इन्द्र महाभिषेक के साथ-साथ अश्वमेध यज्ञ करवाया था। ऋग्वेद ब्राह्मणों में ऐतरेय ब्राह्मण का प्रमुख स्थान है, इसमें इन्द्र महाभिषेक तथा चक्रवर्ती नरेशों के महाभिषेक का ऐतिहासिक वर्णन है।
ऐतरेय ब्राह्मण में शुनः शेप आख्यान का भी वर्णन मिलता है। शतपथ ब्राह्मण के प्रवचनकर्ता वाजसनेय याज्ञवल्क्य है। इस ग्रंथ के 14 काण्डों में प्रारम्भ के नौ काण्डों में यज्ञ विवरण है। दसवें में अग्निरहस्य, ग्यारहवें काण्ड में अग्निचयनविषयक चर्चा, बारहवें में प्रायश्चित, तेरहवें में अश्वमेध नरमेधादि का वर्णन है। शतपथ ब्राह्मण का चौदहवाँ काण्ड आरण्यक है। सभी ब्राह्मणों में शतपथ ब्राह्मण सबसे महत्वपूर्ण तथा विशाल है शतपथ ब्राह्मण को लघु वेद की संज्ञा दी गयी है।