NTA यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2022 (इतिहास) Shift-I

Total Questions: 100

1. धम्मपद, थेरागाथा, थेरीगाथा और जातक ग्रंथ निम्नलिखित में से किस बौद्ध धर्म ग्रंथ समूह से संबंधित हैं?

Correct Answer: (d) खुद्दक निकाय
Solution:

खुद्दक निकाय बौद्ध धर्म का एक ग्रंथ है। यह 15 लघु ग्रंथों का संग्रह है, जिसमें धम्मपद, थेरागाथा, थेरीगाथा, जातक, सुत्तनिपात, खुद्दक पाठ तथा बुद्धवंश में प्रमुख रूप से लघु ग्रंथों का उल्लेख मिलता है।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रंथ जैन परपरा से संबंधित है?

Correct Answer: (c) पउमचरियम
Solution:

जैन कवि स्वयंभू ने पउमचरियम/पउमचरिउ (पद्म चरित) नामक ग्रंथ अपभ्रंश में लिखा है। यह ग्रंथ रामायण का जैन रूपान्तरण है। जैनियों ने राम को पद्म (पउम) की संज्ञा दी और रामकथा का प्रवर्तन किया था। बौद्धों ने राम को बोधिसत्व मान कर कर अपनी जातक कथाओं में इन्हें प्रतिष्ठित किया।

3. गुप्तवंश के शासकों का पारिवारिक (कुल) चिह्न क्या था?

Correct Answer: (b) गरुड़
Solution:

गुप्त वंश के शासकों का पारिवारिक (कुल) चिन्ह गरुड़ था। समुद्रगुप्त के प्रयाग प्रशस्ति की एक पंक्ति में उल्लेख किया गया है कि गरूड़ गुप्तवंश का राज-लांछन था और वे उसका प्रयोग अपने शासनों को अभिप्रमाणित करने के लिए मुद्रित किया करते थे।

4. प्रबोध चन्द्रोदय नामक ग्रंथ के लेखक कौन हैं?

Correct Answer: (a) कृष्ण मिश्र
Solution:

प्रबोध चन्द्रोदय एक संस्कृत नाटक है तथा इसके लेखक कृष्ण मिश्र है। चंदेल राजवंश के शासक कीर्तिवर्मन (1060- 1100 ई.) की राजसभा में प्रसिद्ध राजकवि कृष्ण मिश्र निवास करते थे। इस नाटक में विष्णु भक्ति के साथ-साथ कीर्तिवर्मन के सचिव अनन्त की वीरता तथा उसकी निपुणता का वर्णन किया गया है। 1851 ई. में इस ग्रंथ का मराठी भाषा में अनुवाद अमरापुरकर बापट ने किया।

5. ऐतरेय और शतपथ ब्राह्मण में किस राजा के नाम का उल्लेख मिलता है, जिन्होंने इन्द्र महाभिषेक के साथसाथ अश्वमेध यज्ञ करवाया था, वह थे :

Correct Answer: (a) पर
Solution:

ऐतरेय और शतपथ ब्राह्मण में पर राजा के नाम का उल्लेख मिलता हैं, जिन्होंने इन्द्र महाभिषेक के साथ-साथ अश्वमेध यज्ञ करवाया था। ऋग्वेद ब्राह्मणों में ऐतरेय ब्राह्मण का प्रमुख स्थान है, इसमें इन्द्र महाभिषेक तथा चक्रवर्ती नरेशों के महाभिषेक का ऐतिहासिक वर्णन है।

ऐतरेय ब्राह्मण में शुनः शेप आख्यान का भी वर्णन मिलता है। शतपथ ब्राह्मण के प्रवचनकर्ता वाजसनेय याज्ञवल्क्य है। इस ग्रंथ के 14 काण्डों में प्रारम्भ के नौ काण्डों में यज्ञ विवरण है। दसवें में अग्निरहस्य, ग्यारहवें काण्ड में अग्निचयनविषयक चर्चा, बारहवें में प्रायश्चित, तेरहवें में अश्वमेध नरमेधादि का वर्णन है। शतपथ ब्राह्मण का चौदहवाँ काण्ड आरण्यक है। सभी ब्राह्मणों में शतपथ ब्राह्मण सबसे महत्वपूर्ण तथा विशाल है शतपथ ब्राह्मण को लघु वेद की संज्ञा दी गयी है।

6. राजपुरा और द्वारका नगर निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में स्थित थे?

Correct Answer: (a) कंबोज
Solution:

राजपुर और द्वारका नगर कम्बोज महाजनपद के महत्वपूर्ण नगर थे। इसकी जानकारी बौद्धग्रंथ से मिलती है। कम्बोज दक्षिणी-पश्चिमी कश्मीर तथा काफिरिस्तान (कपिशा-हिन्दूकुश पर्वत से लेकर काबुल तक का प्रदेश) के भाग को मिलाकर प्राचीन काल में कम्बोज महाजनपद बना था। इसकी राजधानी राजपुर अथवा हाटक थी एवं यह गांधार का पड़ोसी राज्य था।

7. ओट्टक्कुट्टन ने निम्नलिखित में से किस शासक के बारे में नहीं लिखा है?

Correct Answer: (a) राजराज - प्रथम
Solution:

ओट्टक्कुट्टन (ओ कुट्टम) द्वारा रचित उलायें जिसमें विक्रम चोल, कुलोत्तुंग द्वितीय तथा राजराज द्वितीय सम्बन्धित श्रृंगार प्रधान जीवन चरित का वर्णन किया गया हैं। संगम साहित्य के अध्ययन से हम प्रारम्भिक चोल शासक करिकाल के उपलब्धियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

चोल साम्राज्य की महत्ता का वास्तविक संस्थापक परान्तक द्वितीय (सुन्दर चोल) का पुत्र अरिमोलिवर्मन था जो 985 ई. के मध्य राजराज के नाम से गद्दी पर बैठा था।

8. उस अभिलेख का नाम बताइए जो पूजा-शिला-प्राकार की रचना (निर्माण) से संबंधित है?

Correct Answer: (d) घोसुंडी अभिलेख
Solution:

द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व का संस्कृत भाषा और ब्राह्मी लिपि वाला हाथी बाड़ा घोसुंडी अभिलेख राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के पास प्राप्त हुआ है। यह ब्राह्मी लिपि में प्राप्त संस्कृत भाषा का प्राचीनतम अभिलेख है। घोसुंडी अभिलेख में भागवत धर्म के प्रचार, अश्वमेध यज्ञ के प्रचलन तथा भगवान बासुदेव की मान्यता आदि का महत्व वर्णित है। इस अभिलेख में गजवंश के सर्वतात (पाराशरी का पुत्र) शासक द्वारा अश्वमेध यज्ञ और विष्णु मंदिर की चारदीवारी बनवाने का उल्लेख मिलता है।

9. चरिया-पिटक निम्नांकित में से किसका एक संग्रह (संकलन) है?

Correct Answer: (b) पद्य में रचित 35 जातकों का
Solution:

चरिया-पिटक ग्रंथ में बुद्ध के पिछले जन्म की पैंतीस जातक पद्य में कहानियों का संकलन है, जिसे पूज्य सारिपुत्र के निवेदन पर पुनः कही गयी है। चरिया-पिटक के बोधिसत्वों का वर्णन इस प्रकार है- बोधिसत्वों का दस गुणों से सम्पन्न होना तथा अनिश्चित कालीन समय रखने की बात कही गयी है।

चरिया-पिटक में प्रथम वग्ग की दस गाथायें भोजन दान से सम्बन्धित मानी जाती है, दूसरा वग्ग जिसके अन्तर्गत भी दस कहानियाँ हैं जिसमें नैतिकता एवं शुद्धता के प्रयास पर बल देने की बात की गयी है। अन्तिम वग्ग में 15 कहानियाँ हैं जिनमें से पाँच का सम्बन्ध संन्यास से तथा एक का सम्बन्ध दृढ़ इरादों तथा 6 का सम्बन्ध मैत्री और करुणा से तथा दो का सम्बन्ध दया से तथा एक का सम्बन्ध समाचित्तता से है।

10. लंकावतार निम्नलिखित में किससे संबंधित है?

Correct Answer: (a) वैपुल्यसूत्र
Solution:

लंकावतार वैपुल्य सूत्र ग्रंथ से संबंधित है। महायान बौद्ध धर्म प्रमुखतः शून्यवाद और विज्ञानवाद नाम के दो निकायों में विभाजित है। प्रज्ञापारमिता सूत्र-ग्रंथों में शून्यवाद-सिद्धांत का अवलोकन किया गया है।

विज्ञानवाद का प्रारंभ शून्यवाद के बाद और शून्यवाद के विरोध में हुआ। लंकावतार-सूत्र नामक वैपुल्य सूत्र ग्रंथ विज्ञानवाद का मूल ग्रंथ है। विज्ञान ही सत्य है, विज्ञान से भिन्न वस्तु की सत्ता नहीं है। यह इस वाद की मान्यता है।