Solution:जॉन स्टुअर्ट मिल (1806-1873 ई.) एक अंग्रेजी दार्शनिक, अर्थशास्त्री और उपयोगितावाद के सिद्धान्त के प्रतिपादक थे। 19वीं शताब्दी के सुधार युग में एक प्रचारक के रूप में वे प्रमुख थे। दार्शनिक जेरेमी बेथम के उपयोगितावाद के मूल सिद्धान्त को विस्तार करते हुए जे.एस. मिल इस पर तीन सिद्धान्त दिये हैं -
(1) आनंद या खुशी ही एकमात्र ऐसी चीज है जिसका सच्चा आंतरिक मूल्य है।
(2) क्रियाएँ उस हद तक सही हैं जहाँ तक वे खुशी को बढ़ावा देती हैं, गलत जहाँ तक वे दुख पैदा करती हैं।
(3) सबकी खुशी बराबर मायने रखती है। मिल ने अपने 1861 के निबंध उपयोगितावाद में इन सिद्धान्तों का समर्थन किया है। इनकी महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं ऑन लिबर्टी, ए सिस्टम ऑफ लॉजिक, द सब्जेक्शन ऑफ वीमेन और यूटिलिटेरियनिज्म । शुरूआती अर्थशास्त्रियों में डेविड रिकार्डो और एडम स्मिथ के सिद्धान्तों पर विस्तार से मिल ने अवसर लागत पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं और व्यापार में तुलनात्मक लाभ जैसी आर्थिक अवधारणाओं को विकसित करने में मदद की है।