NTA यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2022 (इतिहास) Shift-I

Total Questions: 100

41. मध्यकाल के दौरान तारीख तवारीख के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन से कथन सही हैं?

A. ये दरबारी इतिवृत्त थे।
B. बाबरनामा रोजनामचे (डायरियों) पर आधारित नहीं है।
C. फारसी परंपरा राजतंत्रीय संस्थाओं से प्रभावित नहीं थी।
D. वे स्मारक उपक्रम थे जिसने पुस्तक लेखन के लिए इतिहासलेखन को केन्द्रीय विषय बनाया।
E. यह पैटर्न सल्जूक साम्राज्य के इतिहास द्वारा प्रभावित था।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल A, D, E
Solution:

मध्यकाल के दौरान तारीख (एकवचन) तवारीख (बहुवचन) है जो सुल्तानों के शासनकाल में प्रशासन की भाषा फारसी में लिखे गये थे। यह एक दरबारी इतिवृत्त है। तवारीख के लेखक, सचिव, प्रशासक, कवि और दरबारियों जैसे सुशिक्षित व्यक्ति होते थे जो घटनाओं का वर्णन भी करते थे और शासकों को प्रशासन सम्बन्धी सलाह भी देते थे। वे न्याय शासन के महत्व पर बल देते थे।

वे स्मारक उपक्रम थे जिसने पुस्तक लेखन के लिए इतिहास लेखन को केन्द्रीय विषय बनाया। तवारीख के लेखक अक्सर अपने इतिहास सुल्तानों के लिए, उनसे ढेर सारे इनाम इकराम पाने की आशा में लिखा करते थे। यह पैटर्न सल्जूक साम्राज्य के इतिहास द्वारा प्रभावित था। जहीरुद्दीन मोहम्मद बाबर की आत्मकथा (तुर्की भाषा) तुजुक-ए-बाबरी (बाबरनामा) में रोजनामचे (डायरियों) पर आधारित है। बाबर ने भारत में तीन प्रकार की जलवायु और फलों में आम तथा पशुओं में हाथी को सर्वोत्तम बताया।

42. यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन से कथन सही हैं?

A. वर्ष 1605 में डचों ने अंबोनिया के पुर्तगाली दुर्ग पर कब्जा कर लिया।
B. वर्ष 1606 में डचों ने मसूलीपट्टम में एक फैक्ट्री स्थापित करने के लिए गोलकुण्डा के शासकों से फरमान प्राप्त किया।
C. डचों ने वर्ष 1617 में सूरत में अपनी फैक्ट्री स्थापित की।
D. अंग्रेजों ने सूरत में 1625 में पहले ही फैक्ट्री खोल दी थी।
E.  वर्ष 1639 में डचों ने मलक्का पर कब्जा किया।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-

Correct Answer: (c) केवल A, B, C
Solution:डचों ने मार्च 1602 में भारत से व्यापार करने के लिए संयुक्त डच ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना की। डचों ने गुजरात और कोरोमंडल तट से कपास से समान के लिए द्वीप समूह के मसालों का आदान-प्रदान किया था। डचों ने खुद को मसूलीपट्टम में स्थापित किया। 1606 में गोलकुण्डा के शासक से एक फरमान प्राप्त किया।

उन्होंने खुद को मसाला द्वीपों में भी स्थापित किया ताकि 1610 तक वे मसाले के व्यापार में प्रमुख हो जाए तत्पश्चात् डचों ने गुजरात में अपने व्यापार का विस्तार करना प्रारम्भ किया। 1617 ई. में सूरत में अपनी फैक्ट्री स्थापित की। 1639 ई.में डचों ने गोवा का घेरा डाला और 1641 ई. में पुर्तगालियों से मलक्का पर कब्जा कर लिया। उन्होंने 1653 ई.में चिन्सूरा और 1658 ई.में श्रीलंका से पुर्तगालियों को निकाल दिया। अंग्रेजों ने सूरत में 1613 ई. में पहली स्थायी फैक्ट्री स्थापित की जबकि 1611 ई. में मसूलीपट्टम में अपनी फैक्ट्री स्थापित कर चुके थे।

43. निम्नलिखित में से कौन-सही है?

A. वायुपुराण में वाकाटक राजवंश के संस्थापक, उसके पुत्र प्रवीर के बारे में संकेत मिलता है।
B. आरंभिक अभिलेखीय प्रलेखों में आभीरों को पश्चिमी भारत में स्थित शक महाक्षत्रपों के सेनापति के रूप में दर्शाया गया है।
C. कौटिल्य रचित अर्थशास्त्र में उल्लिखित इच्छवाकु वंशीय शासक मदुरई नगर से शासन करते थे।
D. राजवंश उस क्षेत्र में विकसित हुआ जो कभी चेर राजवंश के अधिकार क्षेत्र में हुआ करता था।
E. शासक करिकाल का सिलोन पर आक्रमण का उल्लेख नहीं मिलता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल A, B, E
Solution:वाकाटक राजवंश की स्थापना 255 ई. में विन्ध्यशक्ति नामक व्यक्ति ने की थी। विन्धशक्ति के पुत्र प्रवरसेन के बारे में वायुपुराण में उसे प्रवीर कहा गया है। प्रवरसेन वाकाटक शासकों में सम्राट की उपाधि धारण करने वाला एक मात्र शासक था।

पुराणों के मतानुसार सातवाहनों के पश्चात् 10 आभीर शासक हुए जिन्होंने 67 वर्षों तक शासन किया तथा आरंभिक अभिलेखीय प्रलेखों में आभीरों को पश्चिमी भारत में स्थित शक महाक्षत्रपों के सेनापति के रूप में दर्शाया गया है। इक्ष्वाकु वंश के शासकों की राजधानी नागार्जुनीकोण्डा (विजयपुरी) थी, पुराणों में इस वंश को श्रीपर्वतीय (प्रारम्भ में श्रीपर्वत के निवासी) तथा आन्ध्र भृत्य कहा गया है।

कुछ अनुश्रुतियों में चोल शासक कारिकल की सिंहल (सिलोन) विजय का वृत्तान्त मिलता है। लेकिन महावंश में कारिकाल का सिलोन पर आक्रमण का उल्लेख नहीं करता है।

44. निम्नलिखित में से कौन-सा सही हैं?

A. तंजौर स्थित बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण चोल शासकों द्वारा करवाया गया था।
B. मन्दिर की दीवारों पर चोल शासकों की चित्रकारी की गयी है।
C. त्रिपुरान्तक शिवजी का एक अन्य नाम है।
D. राजराजेश्वर मन्दिर चोल राजवंश की कला के महान चरण का प्रतीक है।
E. राजराज देवी दुर्गा के भक्त थे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए

Correct Answer: (*)
Solution:

तंजौर स्थित वृहदेश्वर या राजराजेश्वर का निर्माण चोल शासक राजराज प्रथम ने करवाया था। यह मन्दिर शिव को समर्पित है। इसका निर्माणकाल 1003 ई. से 1011 ई. के मध्य हुआ था। भारत के मन्दिरों में सबसे बड़ा व लम्बा यह मन्दिर, दक्षिण भारतीय स्थापत्य के चरमोत्कर्ष को व्यक्त करता है।

वृहदेश्वर मन्दिर की दीवार पर स्वयं राजराज प्रथम तथा उनके गुरु कुरुवर को दक्षिणमूर्ति शिव के प्रधान उपासक के रूप में चित्रित किया गया है। शिव के त्रिपुरांतक (तीन नगरों का संहार करने वाले) रूप में 30 प्रतिनिधि दृश्य जो विमान के दीवार से सम्पूर्ण ऊपरी हिस्से में उत्कीर्ण है। शिव के त्रिपुरान्तक स्वरूप को राजराज प्रथम द्वारा अपने साम्राज्य में शैव सम्प्रदाय को प्रतिष्ठित करने के प्रयास स्वरूप भी देखा जा सकता हैं।

दक्षिण के शैव नयनारों के भक्ति गीतों की प्रमुख कृति 'तेवरम' में त्रिपुरान्तक शिव की महिमा का सर्वाधिक वर्णन देखने को मिलता है। राजराज प्रथम देवी दुर्गा को नहीं शिव के परम भक्त था। नोट : NTA (UGC) आयोग ने इस प्रश्न को अपनी प्रश्न पुस्तिका से हटा दिया है।

45. निम्नलिखित में से कौन सही है?

A. नागार्जुनकोंडा अभिलेख से वर्ष 278 ईस्वी की तिथि प्राप्त होती है।
B. नागार्जुनकोंड अभिलेख में देव परमदेव की छवि के प्रति समर्पण के भाव का उल्लेख मिलता है।
C. अभीर शासक, वशिष्ठीपुत्र वसुसेन देवी दुर्गा के भक्त थे।
D. नागार्जुनकोंडा अभिलेख सर्वोच्च ईश्वर का आदि-पुरूष के रूप में उल्लेख करता है।
E. नागार्जुनकोंडा अभिलेख ईश्वर को रूम्बर-भव के रूप में वर्णित करता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल A, B, D, E
Solution:

इक्ष्वाकु वंश की स्थापना कृष्णा गुण्टुर क्षेत्र में श्रीशान्तिमूल ने की थी। अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित करने के उपलक्ष्य में अश्वमेध यज्ञ किया था। इसका पुत्र माठरीपुत्र, वीरपुरुषदत्त हुआ। इसके अमरावती तथा नागार्जुनीकोण्डा से लेख मिलते हैं। नागार्जुनीकोण्डा लेख के अनुसार उसने उज्जैन के शक नरेश रुद्रभट्टारिका से विवाह किया था। नागार्जुनीकोण्डा लेख से वर्ष 278 ई. की तिथि अंकित प्राप्त होती है जो उसके राज्याभिषेक को दर्शाती है।

इस लेख में देव परमदेव की छवि के प्रति समर्पण के भाव का उल्लेख मिलता है। इक्ष्वाकु वंश के शासक तो ब्राह्मण मत के पोषक थे, किन्तु उनकी रानियाँ बौद्ध धर्म की अनुयायी थी। इसी लेख में सर्वोच्च ईश्वर का आदि-पुरुष के रूप में उल्लेख मिलता है। इस वंश की राजधानी नागार्जुनीकोण्डा (प्राचीन नाम विजयपुरी) थी। नागार्जुनी अभिलेख में ईश्वर को रूम्बर-भव के रूप में भी वर्णित करता है। आभीर वंश का संस्थापक ईश्वरसेन था। जबकि वशिष्ठीपुत्र पुलमावी सातवाहन वंश का शासक था।

46. नौकरों एवं दासों की स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

'A. मोरलैण्ड ने 'इंडिया एट द डेथ ऑफ अकबर' में दासता को विस्तारपूर्वक निरूपित किया है।
B. फिरोज तुगलक एक मात्र शासक था जिसने दासों को निर्माण के उद्देश्य से प्रयुक्त किया था।
C.  पुर्तगालियों ने व्यापक पैमाने पर दासों की नियुक्ति की थी।
D. जेहा के तीर्थयात्री जहाज, दास व्यापार में लिप्त नहीं थे।
E.  अकबर ने युद्धबंदियों को दास बनाने की प्रथा को स्वीकृत किया।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:-

Correct Answer: (b) केवल A, B, C
Solution:

तुगलक वंश के शासक फिरोजशाह तुगलक को गुलामों का शौक था। अफीफ के अनुसार इसके पास 18,0000 गुलाम थे फिरोजशाह ने गुलामों के लिए एक पृथक विभाग दीवान-ए-बन्दगान की स्थापना की थी। दीवान-ए-बन्दगान में 12000 गुलाम शिल्पियों के रूप में कारखानों में काम करते थे।

इतिहासकार मोरलैण्ड ने अपनी पुस्तक 'इण्डिया एट द डेथ ऑफ अकबर' में दासता को विस्तारपूर्वक निरूपित किया है। अकबर ने जीते गये युद्ध में बनाये गये बन्दियों को दास बनाने की प्रथा को अस्वीकृत कर दिया तथा साथ ही साथ 1562 ई. में दास प्रथा पर प्रतिबन्ध भी लगा दिया। भारत की अपेक्षा विदेशों में मध्यकाल के दौरान दास प्रथा कठोर थी। पुर्तगालियों ने व्यापक पैमाने पर दासों की नियुक्ति करते थे। औपनिवेशिक प्रसार के कारण पुर्तगालियों की जनसंख्या घटती जा रही थी जिसके कारण 16वीं सदी में पुर्तगाल में दासों की माँग निरन्तर बढ़ती जा रही थी।

47. पुरंदर की संधि (1665) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?

A. शिवाजी द्वारा जीते गये 35 किलों में से 23 किले मुगलों को वापस कर दिये गये।
B. वापस किये गये किलों से प्रतिवर्ष चार लाख हूण का राजस्व प्राप्त होता था।
C.  शेष 12 किलों से प्राप्त दो लाख हूण की वार्षिक आय को शिवाजी के लिए छोड़ दिया गया था।
D. बीजापुरी कोंकेण में एकक्षेत्र शिवाजी को प्रदान किया गया था।
E. शिवाजी को 30 लाख हूण किश्तों में मुगलों को देना था।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल A, B,D
Solution:

मराठा शासक शिवाजी के 1664 ई. में सूरत की लूट से क्रोधित होकर मुगलशासक औरंगजेब ने राजा जयसिंह को शिवाजी के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए भेजा। जयसिंह सासवाद को अपना सैनिक केन्द्र बनाया तथा पुरन्दर को जीत लिया तथा रायगढ़ को घेर लिया जिससे विवश होकर शिवाजी ने जयसिंह से 24 जून, 1665 को पुरन्दर की सन्धि कर ली।

इस सन्धि के अनुसार शिवाजी ने चार हूण वार्षिक आय की भूमि वाले 23 दुर्गों को सम्राट को देना स्वीकार किया और सम्राट ने अन्य 12 दुर्गों पर जिनकी वार्षिक आय एक लाख थी, शिवाजी का अधिकार स्वीकार कर लिया। बालाघाट की जागीर शिवाजी अपने पास रखे लेकिन बदले में उसे 40 लाख हूण 13 किस्तों में देने होंगे। बीजापुरी कोंकण में एक क्षेत्र शिवाजी को प्रदान किया गया था। शिवाजी ने अपने पुत्र शम्भाजी के अधीन 5000 घोड़े के दल के साथ बादशाह की सेवा में रहना स्वीकार किया।

48. मध्यकाल में व्यापार के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?

A. कन्नौज, कड़ा और मानिकपुर से नमक राजधानी लाया जाता था।
B. पान का पत्ता उत्तर-पूर्वी भाग से आयातित किया जाता था।
C. दिल्ली को रसद की आपूर्ति काफी दूर के ग्रामीण क्षेत्रों से होती थी।
D. बरनी ने अलाउद्दीन खिलजी के कृषि एवं मूल्य नियंत्रण उपायों का विस्तारपूर्वक उल्लेख किया है।
E. इब्नबतूता से हमें ज्ञात होता है कि मुख्यतः गंगा के तट पर स्थित अमरोहा से अनाज की आपूर्ति होती थी।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (c) केवल C, D, E
Solution:

मध्यकाल में ऐसे तमाम विदेशी यात्रियों का आगमन हुआ जिन्होंने इस देश के भौगोलिक, ऐतिहासिक, राजनीतिक तथा व्यापारिक गतिविधियों का वर्णन किया है। इन विदेशी यात्रियों के अतिरिक्त हमे समकालीन फारसी ग्रन्थों से भी अर्थव्यवस्था एवं आर्थिक जीवन को समझने में पर्याप्त सहायता मिलती है। जियाउद्दीन बरनी ने अपनी पुस्तक तारीख-ए-फिरोजशाही में अलाउद्दीन खिलजी के कृषि एवं मूल्य नियंत्रण के उपायों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया है।

इब्नतबत्ता ने अरबी भाषा में रेहला नामक पुस्तक की रचना की है। इस अन्य से हमें ज्ञात होता है कि मुख्यतः अनाज की आपूर्ति गंगा के तट पर स्थित अमरोहा से होती थी। दिल्ली को रसद की आपूर्ति काफी दूर के ग्रामीण क्षेत्रों से होती थी। जिसे लाने के लिए बैलगाड़ी, ऊँट और खच्चर का प्रयोग करते थे। मालवा से पान दिल्ली पहुँचाया जाता था। जबकि कन्नौज से इत्र एवं शक्कर तथा कड़ा मानिकपुर से चावल, गेहूँ एवं शक्कर को राजधानी लाया जाता था।

49. निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?

A. 18 फरवरी, 1946 को एच.एम.आई.एस. तलवार से विरोध प्रारम्भ किया।
B. बॉम्बे में नौसैनिक विद्रोह का मुख्य कारण खराब भोजन और नस्लीय भेदभाव था।
C. नौसैनिक विद्रोह के दौरान बॉम्बे शहर शांत रहा था और जनता ने हड़ताल में भाग नहीं लिया।
D. बॉम्बे में शांति स्थापना के लिए एक मराठा बटालियन बुलाई गई थी।
E. कराची में भी हड़ताल फरवरी, 1946 में हुई।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल A, B, D और E
Solution:

रॉयल इण्डियन नेवी (नौसैनिक रेटिंग्स) के विद्रोह की शुरूआत 18 फरवरी, 1946 को हुई, जब बंबई में एच. एम. आई. एम. तलवार के 1100 नाविकों ने नस्लवादी भेदभाव और अखाद्य भोजन के प्रतिवाद में हड़ताल कर दी। कम्युनिस्ट पार्टी ने आम हड़ताल का आह्वान किया तो लाखों मजदूर अपने कारखाने छोड़कर सड़क पर निकल आये।

नाविक विद्रोह के बाद बंबई की जनता इस कदर उत्तेजित हो गयी कि सरकारी अनुमानों के अनुसार 30 दुकानों, 10 डाकघरों, 10 पुलिस चौकियों, 64 अनाज दुकानों और 200 बिजली के खंभों को बरबाद कर दिया गया। शहर की सामान्य दिनचर्या तो बिल्कुल ही अस्त-व्यस्त हो गई। इस मामले में कराची का नंबर बंबई के बाद ही था।

बंबई के नाविकों के विद्रोह की खबर अगले ही दिन, यानी 19 फरवरी को कराची पहुँच गयी जिसके बाद एच. एम. आई. एस. हिन्दुस्तान और एक अन्य जहाज के नाविकों और तीन तटवर्ती प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी। ब्रिटिशों द्वारा बंबई में शान्ति स्थापना के लिए एक मराठा बटालियन बुलाई तथा यह बटालियन ने बंबई में नाविकों को घेर लिया तथा उन्हें खदेड़कर उनके बैरकों तक पहुँचा दिया।

50. निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

A. डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने सिडेन्डैम कॉलेज में एक प्रोफेसर के रूप में पद ग्रहण किया था।
B. डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने इनडिपेन्डेंट लेबर पार्टी की स्थापना की थी।
C. इनडिपेन्डेंट लेबर पार्टी का लाल ध्वज है।
D. डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने दलित शूद्र पहचान संबंधी गैरआर्यन सिद्धांत का समर्थन नहीं किया था।
E.  डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने 1936 में 'द एनिहिलेशन ऑफ कास्ट' शीर्षक से पुस्तक प्रकाशित की थी।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) सभी A, B, C, D, E
Solution:

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर 1917 में लंदन से वापस आने के पश्चात् बंबई के सिडेन्डैम कॉलेज में 1918 में राजनीतिक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में पद ग्रहण किया। 1936 ई. में डॉ. अम्बेडकर ने अपनी पहली राजनीतिक पार्टी इंडिपेंडेट लेबर पार्टी का गठन किया। यह फैसला 1937 में होने वाले चुनावों के मद्देनजर रखते हुए किया गया था। इस पार्टी का ध्वज लाल था 1936 में ही डॉ. अम्बेडकर ने 'द एनिहिलेशन ऑफ कास्ट शीर्षक नाम से पुस्तक प्रकाशित की। डॉ. अम्बेडकर ने दलित शूद्र पहचान संबंधी गैर आर्यन सिद्धान्त का समर्थन नहीं किया। उन्होंने 1942 में शेड्यूल कास्टस फेडरेशन (एस.सी.एफ.) के नाम से एक नये संगठन का गठन किया।