NTA यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2022 (इतिहास) Shift-I

Total Questions: 100

51. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

A. कलकत्ता स्थित टाउन हॉल में आयोजित एक बैठक में बहिष्कार और स्वदेशी पर प्रस्ताव को अंगीकार किया गया था।
B.  खुदीराम बोस को 30 अप्रैल 1908 को फाँसी दे दी गई थी।
C. अरुन्डेल समिति ने अपनी रिपोर्ट लॉर्ड इरविन को प्रस्तुत की थी।
D. श्यामजी कृष्ण वर्मा ने फरवरी 1906 में लंदन में इंडिया होमरूल सोसायटी की स्थापना की थी।
E.  मदन लाल धींगरा ने एक जुलाई 1909 को लंदन में कर्जन वाइली को गोली चला कर मार दिया था।
नीचे दिये गये विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (*)
Solution:

सही कथन इस प्रकार है -

(1) फरवरी 1905 में श्यामजी कृष्ण वर्मा ने भारत की स्वतन्त्रता के लिए कार्य करने के उद्देश्य से लंदन में इण्डिया होम रूल सोसायटी की स्थापना की।

(2) 7 अगस्त, 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में एक ऐतिहासिक बैठक में स्वदेशी आन्दोलन की घोषणा की गयी तथा बहिष्कार प्रस्ताव को स्वीकार किया गया।

(3) अरुन्डेल समिति की स्थापना 1906 में लॉर्ड मिण्टो द्वारा की गयी थी। अरुन्डेल समिति ने अपनी रिपोर्ट लॉर्ड मिण्टो को प्रस्तुत की।

(4) खुदीराम बोस को 11 अगस्त 1908 ई. को फाँसी दे दी गयी थी। (5) इण्डिया हाउस के सदस्य मदन लाल धींगरा ने जुलाई 1909 को भारत सचिव के राजनीतिक सलाहकार कर्जन वाइली की गोली मारकर हत्या कर दी।

नोट: NTA (UGC Net) आयोग ने इस प्रश्न को मूल्यांकन से बाहर कर दिया है।

52. निम्नलिखित में से कौन से कथन सही है?

A. कॉर्नवालिस के पहुँचने से भी पूर्व 1770 से एलेक्जेंडर डाऊ, हेनरी पैटुलो और फिलिप फ्रांसिस भूमि कर को स्थायी रूप से निर्धारित कर देने की पैरवी कर रहे थे।
B. फिजियोक्रेटिक विचार-सम्प्रदाय ने देश की अर्थव्यवस्था में कृषि को प्रमुखता प्रदान की थी।
C. स्थायी भूमि बंदोबस्त (भूमि व्यवस्था) ने सदैव के लिए भूमि मूल्यांकन किया था।
D. स्थायी भूमि बंदोबस्त के अंतर्गत मूल्यांकन भ्रष्टाचार की गुंजाइश को कम करेगा।
E. यह आशा की गई थी कि भूमि बंदोबस्त (भूमि व्यवस्था) के अंतर्गत जमींदार भूमि के सुधार लाने में निवेश नहीं करेंगे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (c) केवल A, B, C, D
Solution:कॉर्नवालिस के पहुँचने से भी पूर्व 1770 से एलेक्जेंडर डाऊ, हेनरी पैटुलों और फिलिप फ्रांसिस भूमिकर को स्थायी रूप से निर्धारित कर देने की पैरवी कर रहे थे। फिजियोक्रेटिक विचारधारा ने देश की अर्थव्यवस्था में कृषि को महत्व दिया। इसका मानता था कि राष्ट्रों का धन केवल कृषि योग्य भूमि के विकास तथा कृषि उत्पादों के मूल्य से प्राप्त होता है।

इसलिए कृषि अधिशेष को बढ़ाने के लिए स्थायी बन्दोबस्त को आवश्यक समझा गया। स्थायी भूमि बन्दोबस्त (भूमि व्यवस्था) ने सदैव के लिए मूल्यांकन किया था। स्थायी बन्दोबस्त व्यवस्था बंगाल, बिहार, उड़ीसा व उत्तर प्रदेश के वाराणसी तथा उत्तरी कर्नाटक क्षेत्र में भारत के 19 प्रतिशत क्षेत्रों में लागू की गयी थी। इस व्यवस्था के अन्तर्गत मूल्यांकन भ्रष्टाचार की गुंजाइश को कम करेगा। कॉर्नवालिस ने यह आशा की थी कि भूमि बन्दोबस्त के अन्तर्गत जमींदार भूमि के सुधार लाने में निवेश तथा उसका विकास करेंगे।

53. निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?

A.  हिन्दी-उर्दू विवाद 1860 के दशक के आसपास के समय में उत्तर-पश्चिमी प्रांतों और अवध में शुरू हुआ था।
B.  इस आंदोलन ने 1893 में नागरी प्रचारणी सभा' की स्थापना के साथ अधिक तीव्रता पकड़ी।
C. हिन्दी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है, इसलिए इसमें संस्कृत शब्दों की बृहत्तर जिंदादिली रहती है। D.उर्दू, फारसी लिपि में लिखी जाती है, इसलिए इसमें अधिक फारसी और अरबी शब्द है।
E. उत्तर-पूर्वी प्रांत की सरकार और अवध ने अप्रैल, 1900 में एक प्रस्ताव के माध्यम से नागरी के साथ संस्कृत को समान आधिकारिक दर्जा प्रदान किया।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (c) केवल A, B, C, D
Solution:हिन्दी-उर्दू विवाद 1860 के दशक के आस-पास के समय में उत्तर-पश्चिमी प्रान्तों और अवध में शुरू हुआ था। 1893 में वाराणसी में बाबू श्याम सुन्दर दास ने 'नागरी प्रचारणी सभा' की स्थापना की तथा इसी के साथ यह आन्दोलन अधिक तीव्र हो गया। नागरी प्रचारणी सभा, हिन्दी भाषा और साहित्य तथा देवनागरी लिपि की उन्नति एवं प्रचार और प्रसार करने वाली भारत की अग्रणी संस्था है।

हिन्दी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है, इसलिए इसमें संस्कृत शब्दों की वृहत्तर जिन्दादिली रहती है। उर्दू फारसी लिपि में लिखी जाती है, इसलिए इसमें अधिक फारसी और अरबी शब्द है। नागरी प्रचारणी सभा के सात साल बाद संयुक्त प्रान्तों में सभी प्रान्तीय कार्यालयों व न्यायालयों में उर्दू के साथ इसके प्रयोग को अधिकाधिक अनुमति मिल गई, लेकिन हिन्दुस्तानी पुल के रूप में जोड़ने का काम कर रही थी क्योंकि तीन प्रभावशाली उत्तर भारतीय समूह कायस्थ, खत्री व कमीश्नरी पंडित फारसी व उर्दू दोनों को हिन्दुस्तानी माना गया।

नोट- मदन मोहन मालवीय जैसे राष्ट्रवादी नेताओं के जुड़ाव ने हिन्दी (नागरी) को एक स्पष्ट राजनीतिक रंग दे दिया। अतः अप्रैल 1900 मे, उत्तर-पश्चिमी प्रांत और अवध की सरकार ने नागरी को उर्दू के बराबर आधिकारिक दर्जा दे दिया।

54. निम्नलिखित में कौन से कथन सत्य नहीं हैं?

A. दारा शिकोह ने उपनिषदों का फारसी भाषा में अनुवाद किया।
B. यह कार्य वर्ष 1657 ई. में पूर्ण हुआ।
C.  दारा शिकोह ने 1860 ई. में योग वशिष्ठ के अनुवाद का पर्यवेक्षण किया।
D. दारा शिकोह का सि-ए-अकबर भगवद गीता का फारसी रूपांतरण हैं।
E.  मज्म-अल-बहरीन दारा शिकोह की रचना नहीं थी।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए -

Correct Answer: (c) केवल C, D, E
Solution:

दारा शिकोह का जन्म 1615 ई. में अजमेर में हुआ था। दारा के पिता का नाम शाहजहाँ एवं माता का नाम मुमताज था। दारा अकबर के भाँति उदार विचार का था तथा वह कादिरी सम्प्रदाय के सन्त मुल्ला शाह का शिष्य था। उसे शाहजहाँ ने 'शाह बुलन्द इकबाल' की उपाधि दी थी।

दारा ने काशी के पण्डितों के सहयोग से 52 उपनिषदों का सिर्र-ए-अकबर नाम से फारसी अनुवाद (1657 में पूर्ण) करवाया तथा मज्म अल-बहरीन (दो समुद्रों का संगम) नामक पुस्तक की रचना की। दारा शिकोह की अन्य रचनाओं में सफीनत उल औलिया, तरीकत उल हकीकत, सकीनत उल औलिया महत्वपूर्ण है। दारा ने भगवत गीता व योग वशिष्ट का फारसी (1656) अनुवाद करवाया था।

55. निम्नलिखित में से कौन से सही है?

A.  शंकराचार्य के द्वारा रचित प्रस्थानत्रयी में उपनिषद, ब्रह्मसूत्र और भगवद्‌गीता शामिल हैं।
B. शंकराचार्य मण्डन मिश्र के शिष्य थे।
C.  जयेष्ठेश्वर मंदिर श्रीनगर में स्थित है।
D.  शंकराचार्य अपने बौद्धिक विरोधियों द्वारा क्रिप्टो - बुद्धिष्ट (प्रच्छन्न बौद्ध) कहे जाते थे।
E.  शंकराचार्य ने मण्डन मिश्र के साथ दार्शनिक शास्त्रार्थ किया था।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-

Correct Answer: (b) केवल A, C, D, E
Solution:

प्राचीन भारत के दार्शनिकों एवं धर्माचार्यों में शंकराचार्य का नाम अग्रगण्य है। उनका जन्म 788 में केरल के कलादी नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम शिवगुरु तथा माता का नाम आर्यम्बा था। शंकराचार्य गृह त्याग के पश्चात् सर्वप्रथम नर्मदा नदी के तट पर आये जहाँ गौडपाद के शिष्य गोविन्द योगी को उन्होंने अपना प्रथम गुरु बनाया और उनका उपदेश ग्रहण करने के पश्चात् गुरु ने उन्हें परमहंस की उपाधि दी। शंकराचार्य महात्मा बनने के बाद नर्मदा नदी के तट पर माहिष्मती में उनका मण्डन मिश्र तथा उनकी पत्नी के साथ शास्त्रार्थ हुआ।

इन दोनों ने अपनी पराजय स्वीकार करने के बाद शंकर के शिष्य बन गये। शंकराचार्य का दर्शन अद्वैतवाद के नाम से विख्यात हुआ। प्रस्थानत्रयी अर्थात् उपनिषद, ब्रह्मसूत्र तथा गीता पर लिखे गये भाष्यों के माध्यम से शंकर ने अपने मत का प्रतिपादन एवं समर्थन किया। अनेक विद्वान शंकराचार्य को बौद्ध शून्यवाद के रूप में देखते हैं तथा उन्हें प्रच्छन्न बौद्ध की संज्ञा से विभूषित करते हैं। जयेष् श्वर मंदिर (शिव मंदिर) श्रीनगर में स्थित है।

56. निम्नांकित में कौन से कथन सही हैं?

A.  बौद्ध, निर्वाण प्राप्त करने हेतु बुद्ध, धम्म और संघ नामक त्रिरत्नों में विश्वास रखते हैं।
B.  सारिपुत्र और तथागत दो भिन्न व्यक्ति हैं।
C. थेरवादी एवं महायानवादी बुद्ध की शिक्षाओं को मानते हैं।
D.  महात्मा बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश बोधगया में दिया था।
E.  अशोक का सिंह स्तंभ शीर्ष पहली बार वाराणसी के नजदीक स्थित सारनाथ में संस्थापित हुआ था।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए -

Correct Answer: (b) केवल A, C, E
Solution:

ज्ञान प्राप्त करने के पश्चात् गौतम बुद्ध ने अपने मत के प्रचार का निश्चय किया। वे सर्वप्रथम ऋषिपत्तन (सारनाथ) आये और यहाँ इन्होंने पाँच ब्राह्मण संन्यासियों को अपना पहला उपदेश दिया। इस प्रथम उपदेश को 'धर्मचक्रप्रर्वतन' की संज्ञा दी जाती है। यह उपदेश दुःख, दुःख के कारणों तथा उनके समाधान से सम्बन्धित था। इसे चार आर्य सत्य कहा जाता है।

गौतम बुद्ध निर्वाण प्राप्त करने हेतु त्रिरत्न बुद्ध, धम्म और संघ में विश्वास रखते थे। सारिपुत्र बुद्ध का प्रबुद्ध और प्रज्ञावान शिष्य था। सारिपुत्र जाति से ब्राह्मण था और राजगृह निवासी था। इसके लिए बुद्ध का कहना था मेरे द्वारा संचालित चक्र अनुपम धर्मचक्र को तथागत का अनुजात सारिपुत्र अनुचालित कर रहा था। बौद्ध धर्म के दो सम्प्रदाय हीनयान (थेरावादी) एवं महायान बुद्ध के शिक्षाओं को मानते थे।

नोट: अशोक का सिंह स्तम्भ शीर्ष पहली बार वाराणसी के नजदीक स्थित सारनाथ में संस्थापित हुआ था।

57. महाराजा जयसिंह और राजकुमार मोहम्मद आजम के मध्य हुई संधि की शर्तों में निम्नलिखित में से कौन-सी शामिल नहीं थीं?

A. महाराजा जय सिंह ने मंडल, पुर और बदनौर परगने मुगलों को सौंपे ।
B. उपर्युक्त की एवज में जय सिंह के राज्य मेंजजिया लागू हुआ।
C. उन्हें 5000 का मंसब दिया गया।
D. जय सिंह मारवाड़ के राणा के रूप में नहीं माने जायेंगे।
E.  जयसिंह को 7000 का मंसब दिया गया।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (*)
Solution:

औरंगजेब ने शहजादा आजम को अकबर को वापस लाने के लिए उसके पीछे भेजा तथा अकबर को बन्दी बनाने की सलाह दी। औरंगजेब शाहबुद्दीन खाँ, शाहआलम, कुली खाँ आदि को अकबर का पीछा करने की आज्ञा देकर स्वयं अजमेर लौट आया और जयसिंह से सुलह कर लेना ठीक समझा।

24 जून, 1681 को राजसमुन्द्र पर शहजादा आजम तथा महाराजा जयसिंह के बीच सन्धि हो गयी। इस सन्धि के मुख्य शर्तों में महाराजा जयसिंह जजिया के बदले में मंडल, पुर और बदनौर के परगने बादशाह को सौंप देगा, बादशाह मेवाड़ से अपना दखल हटा देगा, महाराजा जयसिंह राठौरो (मारवाड़) को सहायता नहीं देगा। जयसिंह को पाँच हजार का मनसब दिया गया।
नोट : कोई भी विकल्प सही न होने के कारण NTA (UGC) आयोग ने इस प्रश्न को मूल्यांकन से बाहर कर दिया है।

58. नीचे दो कथन दिए गए हैं :

कथन I:  चन्देल शासक, यशोवर्मन खजुराहो में वैकुण्ठ विष्णु के लक्ष्मण (वैकुण्ठ) मंदिर का निर्माण करवाया जिसे वह प्रतिहार शासक, देवपाल से प्राप्त किया था।
कथन II : कलचुरी शासक, लक्ष्मण राज I ने विग्रह राजवंश से कृष्ण की एक छवि (चित्र) को प्राप्त किया था।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) कथन I सत्य है, लेकिन कथन II असत्य हैं
Solution:

चन्देल शासक हर्ष के बाद उसका पुत्र यशोवर्मन (लक्ष्मणवर्मन) 930 ई. में गद्दी पर बैठा। वह एक साम्राज्यवादी शासक था। वह विजेता होने के साथ-साथ एक महान निर्माता भी था जिसने खजुराहो के प्रसिद्ध विष्णु-मन्दिर का निर्माण करवाया। इस मन्दिर में उसने वैकुण्ठ की मूर्ति स्थापित करायी थी जिसे उसने प्रतिहार शासक देवपाल से प्राप्त किया था।

लक्ष्मणराज प्रथम कलचुरि वंश का शक्तिशाली शासक था जिसने कलचुरि साम्राज्य का चतुर्दिक विस्तार किया। बिल्हरी तथा गोहरवा के लेखों से उसकी विजयों के विषय में सूचना प्राप्त होती है। बिल्हरी लेख के अनुसार युवराज ने कौशलराज को जीतते हुए आगे बढ़कर उड़ीसा के राजा से रत्न और स्वर्ण से जटिल कलिय (नाग) की प्रतिमा प्राप्त की। इस प्रकार कथन । सत्य है लेकिन कथन II असत्य है।

59. भक्ति आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन से कथन सही हैं?

A. रामानुजम ने भक्तिपरक गीत लिखे और लोगों के बीच भक्तिपरक वैष्णव धर्म के प्रसार को प्रेरित किया।
B. बासव ने ब्राह्मण विरोधी लिंगायत आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए तांत्रिक कर्म एवं मंदिर अनुष्ठान की वकालत की।
C. वल्लभाचार्य ने कृष्ण भक्ति की महत्ता हेतु जागरूकता उत्पन्न की।
D. रामदास ने विष्णु के रामावतार के रूप में उनकी पूजा को लोकप्रिय बनाया।
E. नामदेव बंगाल के एक प्रसिद्ध संत थे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) केवल A, B, C, D
Solution:प्रसिद्ध वैष्णव आचार्य रामानुज (1017-1137 ई.) ने सगुण ईश्वर की उपासना पद्धति पर जोर दिया। वे विशिष्टाद्वैतवाद मत के संस्थापक थे। उन्होंने लोगों के अन्दर भक्ति की भावना जगाने के उद्देश्य से कई भक्तिपरक गीत लिखें और भक्तिपरक वैष्णव धर्म के प्रचार-प्रसार को बढ़ाने में सहयोग किया। बल्लभचार्य जी शुद्धाद्वैत मत के संस्थापक थे उन्होंने कृष्ण की भक्ति को जग-प्रसिद्ध बना दिया था।

महाराष्ट्र के संत रामदास ने 12 वर्ष की उम्र से प्रभु श्री राम की कठोर तपस्या की तथा उन्होंने विष्णु के रामावतार के रूप में उनकी पूजा को लोकप्रिय बना दिया। संत नामदेव महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत थे। संत ज्ञानेश्वर की मृत्यु के पश्चात् उन्होंने पंजाब के गुरुदासपुर जिले में स्थित घोमन गाँव को अपना निवास स्थान बनाया। बासवन्ना (बासव) कलचुरी राजा के दरबार में एक मंत्री थे। उन्होंने ब्राह्मण विरोधी लिंगायत आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए तांत्रिक कर्म एवं मंदिर अनुष्ठान की वकालत की।

60. निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?

A. रानी जिंदन को बनारस में एक कैदी के रूप में रखा गया था।
B. रानी जिंदन ने नेपाल के राजा से उसे आश्रय देने की प्रार्थना की थी।
C. दलीप सिंह ने 1853 में ईसाई धर्म को अपनाया था।
D. दलीप सिंह ने ईसाई धर्म त्याग दिया था और सिख आस्था को पुनः अपनाया था।
E. दलीप सिंह की लंदन में मृत्यु हुई थी।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (c) केवल A, B, C, D
Solution:

प्रथम आंग्ल-सिक्ख युद्ध का अंत लाहौर की संधि (9 मार्च, 1946 ई.) के साथ हुआ था। इस संधि के तहत लाल सिंह को दलीप सिंह का मंत्री और रानी जिंदन को उसका संरक्षक नियुक्त किया गया। द्वितीय आंग्ल-सिक्ख युद्ध (1848-49 ई.) के दौरान रामनगर, सादुलपुर तथा चिनाब नदी के किनारे गुजरात के युद्ध में सिक्खों की पराजय होती है।

अतः लॉर्ड डलहौजी ने 1849 में पंजाब का विलय ब्रिटिश साम्राज्य में कर लिया और उसने रानी जिंदन को बनारस में एक कैदी के रूप में रखने का आदेश दिया तथा उनके सहयोगी मूलराज को फाँसी दे दी गई। बनारस से भागकर रानी जिंदन नेपाल चली गईं और वहाँ के राजा से आश्रय माँगने लगी। लॉर्ड डलहौजी ने दलीप सिंह को शिक्षा ग्रहण करने के लिए 5 लाख रुपये वार्षिक पेंशन देकर इंग्लैंड भेज दिया।

यहाँ पर डॉ. लगून के प्रभाव के कारण दलीप सिंह ने 1853 ई.में ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया किन्तु वापस पंजाब लौटने पर पुनः उन्होंने सिक्ख धर्म को अपना लिया था। उनका अंतिम समय फ्रांस में व्यतीत हुआ और यहीं पर अक्टूबर, 1893 ई.को उनकी मृत्यु हो गई।