Solution:वासुदेव बलवंत फड़के सर्वप्रथम 'ग्रेट इण्डियन पेनिसुला' रेलवे में भर्ती हुए तत्पश्चात् मैंट मेडिकल कालेज में क्लर्क बन गए और फिर 'मिलट्री फाइनेंस डिपार्टमेंट (कमिसेरियट) में नौकरी करने लगे। यहाँ उन्होंने 15 वर्ष से भी अधिक समय तक कार्य किया।
वह महादेव गोविंद रानाडे से सर्वाधिक प्रभावित हुए और देश में स्वशासन लाने की शपथ ले ली। उनका मानना था कि अंग्रेजों के खिलाफ केवल अखबार में लेख लिखने से कुछ नहीं होगा, बल्कि उन्हें उन्हीं की भाषा में (सशस्त्र क्रांति) जवाब देना होगा।
उनका मानना था कि भारत की दुर्दशा विदेशी शासन का परिणाम है। फड़के अपने लक्ष्य के प्रति 'धांगड़ों की निष्ठा से प्रभावित थे। उन्होंने 'रामोसी' नामक संगठन की स्थापना की। अंग्रेजों के खिलाफ एक राष्ट्रीय विद्रोह को संगठित करने के प्रयास में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 1879 में अदन (यमन) के जेल में भेज दिया गया।
यहीं पर भूख हड़ताल के कारण 17 फरवरी, 1883 को उनका निधन हो गया। फड़के ने अपनी आत्मकथा में लिखा था कि भारतीय, अंग्रेजों के राज में भुखमरी से मौत के मुँह में जा रहे हैं।" उन्होंने अपनी आत्मकथा एक मंदिर में शरण लेने के दौरान लिखा था।