Solution:दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय संस्कृति का व्यापक प्रभाव था। इसके अन्तर्गत जावा, कम्बोडिया (कम्बुज), चम्पा, बोर्नियो, बर्मा, स्याम (थाईलैण्ड) आदि देश आते हैं। इस सम्पूर्ण क्षेत्र को 'सुवर्णभूमि' तथा 'सुवर्ण द्वीप' कहा जाता था। यह द्वीप गरम मसाले, स्वर्ण, बहुमूल्य धातुओं तथा खनिज संसाधनों के लिए प्रसिद्ध था।
इससे प्रभावित होकर भारतीय व्यापारी धन की लालसा से यहाँ आये। उन्होंने न केवल यहाँ पर अपना उपनिवेश बनाया बल्कि स्वतंत्र हिन्दू राज्य की स्थापना भी की। दक्षिण-पूर्व एशिया के विभिन्न राज्यों में भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार हुआ। यहाँ के विभिन्न राज्यों में संस्कृत भाषा का व्यापक प्रचार-प्रसार था।
इन देशों में वेद, वेदान्त, रामायण, महाभारत आदि ब्राह्मण ग्रंथों के साथ-साथ बौद्ध एवं जैन ग्रंथों का अध्ययन किया जाता था। यहाँ पर ब्राह्मण एवं बौद्ध धर्म का व्यापक प्रचार-प्रसार था। पौराणिक देवताओं में शिव, विष्णु तथा ब्रह्मा सर्वाधिक लोकप्रिय थे।
जावा के डिएंग पठार में स्थित मंदिर भगवान शिव को समर्पित था तथा यहाँ पर स्थित बोरोबुदुर का विशाल बौद्ध स्तूप प्राचीन विश्व की उत्कृष्ठ रचना है। दक्षिण-पूर्व एशिया के कम्बोज में स्थित अंकोरवाट का मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। अतः A असत्य है तथा सत्य है।