Solution:चीनी यात्री फाहियान ने अपने यात्रा के दौरान खोतान में लगभग 14 बौद्ध विहार को देखा था। पाणिनी की अष्टाध्यायी में शुद्रक, मालव, यौधेय, सत्वत, अंधक, वसाति, आर्जुनायन, शिवि, मरु आदि जनपदों का उल्लेख मिलता है। मालवों का मूल स्थान पंजाब था किंतु यहाँ से मालवों के एक बड़े हिस्से का प्रव्रजन राजस्थान क्षेत्र में हुआ।
उनकी राजधानी 'मालवनगर' थी जिसे आधुनिक नाम नागर (टोंक, राजस्थान) से अंकित किया जाता है। नागर में मालवों की टकसाल थी। यहां से 6 हजार ताम्र के सिक्के मिले है। मालव सिक्कों पर तत्कालीन शासकों के चिन्ह प्राप्त होते हैं। नागा जनजाति नागालैण्ड में निवास करती है। यह जनजाति नागों (सर्पों) की पूजा करने वाले प्राचीन भारतीय जनजाति थी।