Solution:तुर्क विजेता 12वीं सदी के अन्त में जो स्थापत्य कला भारत में लाये थे, उसे सरासैनिक या इस्लामिक कला कहा जाता है। इस विदेशी स्थापत्य कला की मुख्य विशेषताओं में गुम्बद, मेहराब, ऊँची मीनारें, मेहराबी डाटदार छतें आदि हैं।
इस्लामी भवनों में तुर्क सुल्तान मेहराब एवं गुम्बद का प्रयोग व्यापक पैमाने पर करते थे। तथा तुर्क शासक अपने भवनों में चूना गारा का सीमेन्ट के रूप में प्रयोग करते थे। इमारतों की अठपहला/ अष्टकोणीय रूपरेखा, गुम्बद आदि का जन्म (नवाचार) तो वैसे भारत में हुआ था पर उनका पूर्ण विकास ईरान में हुआ। तुर्क शासक अपने भवन में स्लैब और बीम विधि का प्रयोग करते है। अलाउद्दीन खिलजी द्वारा निर्मित अलाई दरवाजा भारत की प्रथम इमारत है। जहाँ केवल इस्लामी पद्धतियों का प्रयोग हुआ है।