Solution:अशोक 273 ईसा पूर्व के लगभग मगध के राजसिंहासन पर बैठा था। मास्की एवं गुर्जरा लघु शिला लेख के अतिरिक्त अशोक का उल्लेख अन्य सभी अभिलेखों में 'देवानंपिय' एवं 'देवानंपियदसि' (देवताओं का प्रिय अथावा देखने में सुंदर) के रूप में किया गया है।
पुराणों में उसे 'अशोक वर्धन' कहा गया है। अपने अभिषेक के आठ वर्ष बाद अशोक ने कलिंग को जीता तथा तेरहवें शिलालेख में उसने कलिंग युद्ध के कारण उत्पन्न कष्टों के प्रति वास्तविक पश्चाताप को व्यक्त किया है। अरामेइक लिपि वाले अशोक के अभिलेख तक्षशिला (पाकिस्तान-रावलपिण्डी के निकट) एवं जलालाबाद (लघमान-पूर्वी अफगानिस्तान में स्थित) में पाए गए हैं।
सिंहली अनुश्रुतियों (दीपवंश और महावंश) के अनुसार अशोक को उसके शासन के चौथे वर्ष नियोध (सुसाम का पुत्र) नामक सात वर्षीय बौद्ध भिक्षु ने बौद्ध धर्म में दीक्षित किया था। यूनानी (ग्रीक) एवं अरामेइक में लिखित अशोक का एक द्विभाषिक अभिलेख 'शरए-कुना' (अफगानिस्तान के कन्धार से प्राप्त) से पाए गए हैं। इसका प्रकाशन सर्वप्रथम 'ईस्ट एण्ड वेस्ट' नामक पत्रिका में 1958 ई. में उमबट सिरैटो ने किया।