NTA यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 (इतिहास) (Shift-I)

Total Questions: 100

51. निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

A.  मास्की एवं गुर्जरा लघु शिला लेख के अतिरिक्त अशोक का उल्लेख अन्य सभी अभिलेखों में देवानामपिय एवं पियदस्सी के रूप में किया गया है।
B. तेरहवें शिलालेख में, अशोक ने कलिंग युद्ध के कारण उत्पन्न कष्टों के प्रति वास्तविक पश्चाताप को व्यक्त किया है।
C.  अरामेइक लिपि वाले अशोक के अभिलेख तक्षशिला एवं जलालाबाद में पाए गए हैं।
D. अशोक को पुरुगुप्त नामक बौद्ध भिक्षु द्वारा बौद्धधर्म में दीक्षित किया गया।
E. यूनानी (ग्रीक) एवं अरामेइक में लिखित अशोक का एक द्विभाषिक अभिलेख मैसूर स्थित कोपबल तालुक के गावीमठ एवं पलकीगुंडू से पाए गए हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) A, B, और C
Solution:

अशोक 273 ईसा पूर्व के लगभग मगध के राजसिंहासन पर बैठा था। मास्की एवं गुर्जरा लघु शिला लेख के अतिरिक्त अशोक का उल्लेख अन्य सभी अभिलेखों में 'देवानंपिय' एवं 'देवानंपियदसि' (देवताओं का प्रिय अथावा देखने में सुंदर) के रूप में किया गया है।

पुराणों में उसे 'अशोक वर्धन' कहा गया है। अपने अभिषेक के आठ वर्ष बाद अशोक ने कलिंग को जीता तथा तेरहवें शिलालेख में उसने कलिंग युद्ध के कारण उत्पन्न कष्टों के प्रति वास्तविक पश्चाताप को व्यक्त किया है। अरामेइक लिपि वाले अशोक के अभिलेख तक्षशिला (पाकिस्तान-रावलपिण्डी के निकट) एवं जलालाबाद (लघमान-पूर्वी अफगानिस्तान में स्थित) में पाए गए हैं।

सिंहली अनुश्रुतियों (दीपवंश और महावंश) के अनुसार अशोक को उसके शासन के चौथे वर्ष नियोध (सुसाम का पुत्र) नामक सात वर्षीय बौद्ध भिक्षु ने बौद्ध धर्म में दीक्षित किया था। यूनानी (ग्रीक) एवं अरामेइक में लिखित अशोक का एक द्विभाषिक अभिलेख 'शरए-कुना' (अफगानिस्तान के कन्धार से प्राप्त) से पाए गए हैं। इसका प्रकाशन सर्वप्रथम 'ईस्ट एण्ड वेस्ट' नामक पत्रिका में 1958 ई. में उमबट सिरैटो ने किया।

52. निम्नलिखित में से किसने हर्षवर्धन को उनके भाई की मृत्यु के पश्चात राजगद्दी संभालने के लिए आमंत्रित किया था?

Correct Answer: (b) पोनी
Solution:

हेनसांग ने अपनी रचना 'सी-यू की' में लिखा है कि पोनी (बोनि) ने हर्षवर्धन को उनके भाई राज्यवर्धन की मृत्यु के पश्चात् कन्नौज की राजगद्दी संभालने के लिए आमंत्रित किया था परंतु उसने अस्वीकार कर दिया। इस हेतु हर्ष ने अवलोकितेश्वर बोधिसत्व से परामर्श किया।

बोधिसत्व ने उन्हें कन्नौज के सिंहासन पर बैठने की तथा 'महाराज' की उपाधि ग्रहण न करने का परामर्श दिया। अतः हर्ष ने 'आर्यपुत्र' 'राजपुत्र' (कुमार) की उपाधि धारण कर अपना उपनाम 'शिलादित्य' रखा। लेकिन हर्ष ने कालान्तर में (612 ई.) अपनी प्रतिज्ञा का उल्लंघन कर 'महाराजाधिराज' की उपाधि (बांसखेड़ा ताम्रलेख) सहित पूर्ण राजकीय उपाधियों को ग्रहण कर लिया।

53. भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन एवं कार्यकलाप संबंधी पंचम प्रतिवेदन (फिफ्थ रिपोर्ट) के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

Correct Answer: (a) इसे ब्रिटिश संसद में वर्ष 1815 में प्रस्तुत किया गया था।
Solution:

भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन एवं कार्यकलाप संबंधी 'पंचम प्रतिवेदन' (फिफ्थ रिपोर्ट) सेलेक्ट कमेटी द्वारा ब्रिटिश संसद में वर्ष 1813 में प्रस्तुत की गई थी। यह रिपोर्ट 1002 पृष्ठों की थी तथा इसकी लगभग 800 पृष्ठ की परिशिष्ट थी जिसमें जमींदारों और रैय्यतों की याचिकाएँ, विभिन्न जिलों के कलेक्टरों की रिपोर्ट, राजस्व प्राप्तियों संबंधी सांख्यिकीय सारणियाँ और राजस्व तथा बंगाल और मद्रास के न्यायिक प्रशासन संबंधी अधिकारियों के लिखे गये नोट्स शामिल थे।

उस समय ब्रिटेन में लोगों के कई समूह भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के कामकाज से खुश नहीं थे। उन्होंने भारत और चीन के साथ व्यापार पर ईस्ट इंडिया कंपनी के एकाधिकार का विरोध किया। कई ब्रिटिश व्यापारी भारत में कंपनी के व्यापार में हिस्सेदारी चाहते थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय बाजार ब्रिटिश निर्माताओं के लिए खोला जाना चाहिए। परिणामस्वरूप ब्रिटिश संसद ने 18वीं शताब्दी के अंत में भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को विनियमित और नियंत्रित करने के लिए कई अधिनियम पारित किए।

54. निम्नलिखित में से किसने सम्राट मुहम्मदशाह से खालसा भूमि से इजारा प्रथा के उन्मूलन के लिए वकालत (निवेदन) किया?

Correct Answer: (a) शाह वली-उल्लाह
Solution:

शाह वली उल्लाह ने सम्राट मुहम्मदशाह से खालसा भूमि से इजारा प्रथा (हजारा) के उन्मूलन के लिए वकालत (निवेदन) किया था। शाह वली उल्लाह नक्शबंदी शाखा के प्रमुख संत थे तथा इनका जन्म 1703 ई. में दिल्ली में हुआ था।

इनका मानना था कि धार्मिक सुधार की नीति से मुस्लिम राजनीति को उसके पूर्व वैभव मे बहाल किया जा सकता है जो भारत की बदलती सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के साथ इस्लाम के धार्मिक आदर्शों के बीच सामंजस्य स्थापित करेगा।

55. राष्ट्रीय उन्नति की कुजी के रूप में वैज्ञानिक शिक्षा के संवर्धन हेतु वर्ष 1876 में 'इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस' की स्थापना किसने की थी?

Correct Answer: (a) मेहन्द्र लाल सरकार
Solution:

राष्ट्रीय उन्नति की कुंजी के रूप में वैज्ञानिक शिक्षा के संवर्धन हेतु वर्ष 1876 ई. में 'इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साईस' (IACS) की स्थापना प्रसिद्ध चिकित्सक और विद्वान महेन्द्र लाल सरकार ने की थी।

यह भारत के कोलकाता में स्थित एक प्रमुख शोध संस्थान है। सर सी.वी. रमन ने (IACS) में 'रमन प्रभाव' की ऐतिहासिक खोज की। यह भारत और विदेशों में अकादमिक और बौद्धिक उत्कृष्टता का परचम लहरा रहा है। इस महान संस्थान के हर कोने में विभिन्न प्रयोगशालाएँ अद्वितीय वैज्ञानिक उत्कृष्टता की शानदार विरासत से गूंजती हैं जिसके लिए इस शहर को गर्व है।

56. सूची I का सूची IIसे मिलान कीजिए

सूची- Iसूची- II
A. बौद्धधर्मI. स्कंद
B. मुरुगनII. शक्ति
C. नाथIII. तारा
D. कोरावईIV. सिद्ध

निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) A-III, B-I, C-IV, D-II
Solution:सही सूची समुलित इस प्रकार है -
सूची-Iसूची-II
A. बौद्धधर्मतारा
B. मुरुगनस्कंद
C. नाथसिद्ध
D. कोरावईशक्ति

57. सूची I का सूची II से मिलान कीजिए

सूची -Iसूची -II
A. पी आनंद चारलूI. मद्रास महाजन सभा
B. के. टी. तैलंगII. बाम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन
C. आनन्द मोहन बोसIII. इण्डियन एसोसिएशन
D. राजा राममोहन रॉयIV. आत्मीय सभा

निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) A-I, B-II, C-III, D-IV
Solution:सूची-I का सूची-II से सही मिलान इस प्रकार है-
सूची-I/-(संस्थापक)सूची-II/-(संगठन)
A. पी.आनंद चारलूमद्रास महाजन सभा
B. के.टी.तैलंगबाम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन
C. आनंद मोहन बोसइण्डियन एसोसिएशन
D. राजा राममोहन रॉयआत्मीय सभा

58. निम्नलिखित अधिकारियों में से कौन मुगल कालीन भारत में शहरों के प्रशासन से संबद्ध नहीं था?

Correct Answer: (a) नाजिम
Solution:

मुगल कालीन भारत में शहरों के प्रशासन से संबंधित नाजिम अधिकारी नहीं था। सिख राजा रणजीत सिंह ने अपने विस्तृत साम्राज्य को 4 प्रांतों में विभक्त किया था- कश्मीर (जन्नत-ए-नाजिर), मुल्तान (दारूल अमन)- पेशावर और लाहौर। प्रत्येक सूबा परगनों में विभक्त था, परगने तालुकों में तथा प्रत्येक तालुका माँजो में बँटा था जो 50 से 400 की संख्या में होते थे।

राजस्व की सुविधा एवं स्थानीय निवासियों के सांस्कृतिक एवं धार्मिक अस्तित्व को बनाये रखने की दृष्टि से यह व्यवस्था स्थापित की गयी थी। प्रत्येक सूबे का प्रमुख अधिकारी नाजिम कहलाता था। नाजिम योग्य एवं विश्वसनीय व्यक्ति को बनाया जाता था। नाजिम के अधीन कई सरदार होते थे। भू राजस्व वसूली पर नियंत्रण तथा सरदार मुकद्दम एवं पटवारी की नियुक्ति आदि नाजिम के महत्त्वपूर्ण कार्य थे।

59. निम्नलिखित विजयनगर शासकों को उनके शासन के सही कालक्रमानुसार ढंग में व्यवस्थित कीजिए।

A. अच्युतदेव राय
B. वेंकट प्रथम
C. कृष्णदेव राय
D. वीर नरसिंह
E. सदाशिव
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) D, C, A, B और E
Solution:निम्नलिखित विजयनगर शासकों को उनके शासन के कालक्रमानुसार व्यवस्थित किया गया है -
क्रम संख्याशासक का नामशासन करने का वर्ष
1.वीर नरसिंह1505 – 1509
2.कृष्णदेव राय1509 – 1529
3.अच्युतदेव राय1529 – 1542
4.वेंकट प्रथम1542
5.सदाशिव1543 – 1567

60. निम्नलिखित में से कौन शक शासक थे?

A. रुद्रदमन
B. चश्तान
C. माओस
D. गोन्डोफरेस
E. मिथिराडेटस
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल A, B और C
Solution:

तक्षशिला के प्रारम्भिक शक शासकों में माओस माउस मेडस (Maues) का नाम सर्वप्रमुख है। उनका समय काल 20 ईसा पूर्व से 22 ईस्वी तक माना जाता है। उसके पश्चिचमोत्तर प्रदेश में अनेक सिक्के मिलते है। उनकी पहचान तक्षशिला ताम्रपत्र के 'महाराज भोग' से की जाती है।

पश्चिमी भारत में शक शासक के नवीन राजवंश कार्दमक की स्थापना चष्टन चश्तान ने की थी। चष्टन की मृत्यु के पश्चात् उसका पौत्र रूददाम्न पश्चिमी भारत में शकों का राजा हुआ। जूनागढ़ अभिलेख से यह जानकारी मिलती है कि सभी जातियों के लोगों ने रुद्रदामन् को अपना रक्षक चुना था। गोन्डोफरेस (गोण्डोफर्नीज) पहलव वंश का शासक था जबकि मिथिराडेटस पोटिक राजवंश से संबंधित था।