Solution:चित्रित धूसर मृदभाण्ड (पी.जी. डब्ल्यू) की खोज सर्वप्रथम बी.बी. लाल ने किया था। इस मृद्भाण्ड की पहचान सर्वप्रथम 1940 के दशक में अहिछत्र (बरेली) से हुई। लेकिन इस मृद्भाण्ड की पूरी महत्ता हस्तिनापुर के उत्खनन (1954) के बाद ही उजागर हो पायी।
यह मृद्भाण्ड भगवानपुरा (हरियाणा) हस्तिनापुर, दधेरी (पंजाब), माण्डा (कश्मीर), उज्जैन, आलमगीरपुर,कम्पिल, नोह, कौशाम्बी, आदि स्थलों से भी पाया गया है लेकिन उड़ीसा के तटीय क्षेत्रों थापली एवं पुरोला से नहीं पाया गया है।
1980 के दशक में माखन लाल द्वारा कानपुर जिले (उत्तर प्रदेश) में किए गए अध्ययन ने पी.जी. डब्ल्यू स्थली एवं उनके अधिवास प्रतिरूपों को प्रकाश में लाया। पी.जी.डब्ल्यू संस्कृति विकसित ग्रामीण संस्कृति को अभिव्यक्त करती है। इसका प्रारम्भ बुद्धकाल से पूर्व हुआ था। नागदा ताम्रपाषाणिक संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है।