Solution:शेरशाह एक अनुभवी और कुशल प्रशासक था वह कर्तव्य भावना एवं असाधारण प्रतिभा से परिपूर्ण था। वह प्रशासनिक सिद्धांतों का नवप्रवर्तक था उसने अपने राजपथ या राजमार्ग के दोनों ओर फलदार और छायादार वृक्ष लगवाये थे तथा थोड़ी थोड़ी दूरी पर सराएँ बनवाई थी जिनकी कुल संख्या लगभग 1700 थी, जहाँ पर हिन्दुओं और मुसलमानों के लिए अलग-अलग खाने-पीने की और ठहरने की व्यवस्था थी।
उसने सिक्कों की ढ़लाई में भी सुधार किया। उसके दो प्रकार के सिक्के मुख्य रूप से प्रचलन में थे (1) चाँदी का रूपया 178 ग्रेन का था और तांबे का दाम 380 ग्रेन का था। शेरशाह ने मुगल शासक बाबर और हुमायूँ से अधिक बड़े भू- भाग पर शासन किया था उसका राज्य पूर्व में सुनारगाँव से लेकर उत्तर-पश्चिम में गक्खर क्षेत्र तक फैला हुआ था।
उसकी पश्चिमी सीमा-रेखा उत्तर में झेलम के किनारे स्थित बालनाथ जोगी और दक्षिण-पश्चिम में 100 मील की दूरी पर स्थित खुशाब को जोड़ती थी, और फिर झेलम के पार सिंध के किनारे किनारे होती हुई गक्खर तक गयी थी। अफगान सरदारों ने शेरशाह को सिंध समर्पित कर दिया था किंतु जैसलमेर का रेगिस्तानी इलाका और बीकानेर तथा जोधपुर के कुछ हिस्से सूर शासन के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहें।
दक्षिण में उसका इलाका विंध्याचल तक फैला हुआ था। पूरा का पूरा राजपुताना, मालवा और कालिंजर उसके नियंत्रण में थे लेकिन उड़ीसा उसके नियंत्रण में नहीं था। शेरशाह ने प्रशासन में हिन्दवी जबान, भाषा का प्रयोग किया जो कि उसकी व्यावहारिक समझ का परिचायक था। शेरशाह ने अपने साम्राज्य में सख्ती के साथ एवं व्यवस्था को लागू किया था।