NTA यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 (इतिहास) (Shift-I)

Total Questions: 100

81. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में:

अभिकथन A: जयसिंह I के राज्योहण के साथ कछवाहा शाही परिवार ने समृिद्ध की एक नई एवं अद्वितीय अवस्था में प्रवेश किया।
कारण R : जयसिंह का बीजापुर पर आक्रमण एक महान सैन्य सफलता थी।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (c) A सत्य है लेकिन R असत्य है।
Solution:जयसिंह 1 के राज्यारोहण के साथ कछवाहा शाही परिवार ने समृद्धि एवं प्रसिद्धि की एक नई एवं अद्वितीय अवस्था में प्रवेश किया था। इन्होंने 1621-1667 ई. तक आमेर राज्य की गद्दी संभाली थी और इन्होंने तीन मुगल शासक जहाँगीर, शाहजहाँ व औरंगजेब को अपनी सेवाएँ दी थी। 1665 ई. के आरंभ में औरंगजेब ने राजा जयसिंह के नेतृत्व में अपनी सेना शिवाजी का दमन करने के लिए भेजा था। राजा जय सिंह युद्ध और शांति दोनों ही कलाओं में निपुण था। वह बड़ा चतुर कूटनीतिज्ञ राजा था और उसने यह समझ लिया कि बीजापुर को जीतने के लिए शिवाजी से मैत्री करना आवश्यक है। अतः पुरन्दर के किले पर मुगलों की विजय और राजगढ़ की घेराबंदी के बावजूद उसने शिवाजी से पुरन्दर की संधि 1665 में की थी। यह संधि राजा जयसिंह की व्यक्तिगत विजय थी। वह न केवल शक्तिशाली शत्रु पर नियंत्रण पाने में सफल रहा अपितु उसने बीजापुर राज्य के विरूद्ध उसका सहयोग भी प्राप्त कर लिया था।

82. "कोई महिला एक शासिका के रूप में अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर सकती है क्योंकि उसमें बौद्धिक रूप से पर्याप्त रूप में न्यूनता (कमी) पायी जाती है"

उपरोक्त टिप्पाणी किस के द्वारा की गयी है?

Correct Answer: (c) इसामी
Solution:

इसामी ने दिल्ली सल्तनत की प्रथम व अंतिम महिला सुल्तान रजिया (जलालात उद-दिन रजिया) के बारे में लिखा है कि वह महिला एक शासक के रूप में अपने दायित्व का भलीभांति निर्वाह नहीं कर सकती थी क्योंकि मूलभूत रूप से उसमें बुद्धि सम्पन्नता की कमी है। रजिया सुल्तान को सिंहासन पर बैठने के बजाय चरखा सम्भालना चाहिए था।

83. निम्नलिखित में से कौन सा /से कथन सही हैं?

A.  यूरोप की तरह मुगलकालीन भारत में अभिजातवर्ग एक विविध कोटि थी।
B. मुगल अभिजात वर्ग उच्च स्तरीय प्रशासन के कार्यों में शामिल नहीं थे।
C.  वर्ष 1595 और 1656-57 के मध्य मुगल अभिजात वर्ग के संघटन में भी परिवर्तन हुआ।
D. इरानियों, तूरानियों और शेखजादे अभिजात वर्गों के मध्य सामाजिक पृथक्करण समाप्त हो गया था।
E.  वे अभिजात वर्ग जिनके पूर्वज पीढ़ियों से मुगल शाही सेवा में थे, उन्हें खानजादा कहा जाता था।
नीचे दिये गये विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल C और E
Solution:

यूरोप के समान मुगल कालीन भारत में अभिजात वर्ग एक विविध कोटि अर्थात एक कानूनी श्रेणी नहीं थी। मुगल अभिजात वर्ग उच्च स्तर पर सरकार के कार्यों में शामिल थे। मुगल साम्राज्य के सुदृढ़ीकरण के साथ ही इनकी संरचना और संख्या में बदलाव आने लगा था।

1595 ई.से 1656-67 ई. तक अभिजात वर्गों के संघटन में परिवर्तन आने लगा था जैसे उच्च मनसबदारों की संख्या 25 पर स्थिर रही किन्तु मध्यम मनसबदारों (500/1000 से 2500 तक) की संख्या 98 से दोगुनी से भी अधिक होकर 225 हो गई। ईरानियों, तूरानियों तथा शेखजादों (भारतीय मुस्लिम एवं राजपूत कुलीन वर्ग) जैसे अभिजात वर्गों के मध्य सामाजिक पृथक्करण बढ़ने लगा था।

औरंगजेब के शासन काल में ईरानी और तूरानी जैसे अभिजात वर्ग सबसे बड़े समूह बने रहे। मुगल मनसबदार के उत्तराधिकारी एवं सम्बन्धियों को अर्थात वे अभिजात वर्ग जिनके पूर्वज पीढ़ियों से मुगल शाही सेवा में थे, उन्हें 'खानजादा' कहा जाता था।

84. वर्ष 1819 में अफगानों से कश्मीर को किसने जीता था?

Correct Answer: (b) रंजीत सिंह
Solution:

अंग्रेजों से हुई अमृतसर की संधि (25 अप्रैल 1809 ई.) के अनुसार राजा रणजीत सिंह सतलुज नदी के पूर्व में अपना राज्य विस्तार नहीं कर सकते थे।

अतः उन्होंने उत्तर की ओर अपना अभियान प्रारम्भ किया। रणजीत सिंह ने पंजाब पर विजय प्राप्त कर लिया था और जम्मू-कश्मीर के नरेश जीत देव ने खिराज देना स्वीकार कर लिया था। 1812 में जम्मू की जागीर खड़क सिंह के नाम कर दिया गया तथा 1816 में रणजीत सिंह ने इसे अपने राज्य में मिला लिया।

कुछ समय पश्चात कश्मीर पर अफगानों ने अधिकार कर लिया था। अतः 1819 में राजा रणजीत सिंह ने अफगानों को पराजित कर कश्मीर राज्य का विस्तार किया। कश्मीर अभियान में गुलाब सिंह उनके साथी थे। 1820 में उन्होंने किशोर सिंह को यहाँ का राज्यपाल नियुक्त किया तथा इनके मृत्युपरांत गुलाब सिंह को 1822 में राज्यपाल नियुक्त किया गया।

85. निम्नलिखित में किस राजवंश द्वारा मंडासा एवं सान्ता- बोमाली अनुदान जारी किए गए?

Correct Answer: (b) कदम्ब
Solution:

सांता बोम्मली, मंदासा तथा मेडाग्राम अनुदान का परिचयात्मक भाग एक ही भाषा में लिखा गया था। ये सभी अनुदान जयंतीपुरा के कदम्ब प्रमुखों द्वारा जारी किये गये थे।

कदम्ब प्रमुख धर्मखेडी ने मंदासा तथा सांता-बोम्माली अनुदान 995-1018 ई. की अवधि में वज्रहस्ता अनियंकाभीम अंतवर्मन तथा देवेंद्रवर्मन के समय जारी किया था।

86. वर्ष 1923 में हिन्दू महासभा के विशेष सत्र की अध्यक्षता किसने की थी?

Correct Answer: (a) राजेन्द्र प्रसाद
Solution:

वर्ष 1922 में गया में हिन्दू महासभा की स्वागत समिति के अध्यक्ष के रूप में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को चुना गया था। इसके पश्चात् हिन्दूमहासभा ने वर्ष 1923 के विशेष सत्र में उन्हें अध्यक्ष नियुक्त किया।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद वर्ष 1917 में चम्पारण सत्याग्रह के समय गाँधी जी के साथ थे तथा उन्होंने1937-38 में खाद्य एवं कृषि मंत्री एवं 1946-48 में संविधान सभा के अध्यक्ष के पद को सुशोभित किया था।

नोट:- हिन्दू महासभा की स्थापना 1915 में हरिद्वार में कुंभ के मेले के समय मदन मोहन मालवीय ने किया था।

कुंभ मेला सम्मेलन में शामिल महात्मा गाँधी एवं स्वामी श्रद्धानंद ने इसका समर्थन किया था। वर्ष 1917 में हिन्दू महासभा ने हरिद्वार में विशेष सत्र का आयोजन कासिम बाजार के राजा मुनिन्द्र चन्द्र नन्दी की अध्यक्षता में किया था। इस सम्मेलन में काँग्रेस-मुस्लिम लीग समझौता तथा चेम्सफोर्ड योजना का विरोध किया गया था।

87. सूची I का सूची II से मिलान कीजिए

सूचीसूची-II
A. वरुणI. उषा-काल
B. मनुII. विश्वास (आस्था)
C. उषाIII. ऋत् के नियामक
D. श्रद्धाIV. क्रोध

निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) A-III, B-IV, C-I, D-II
Solution:सही सुमेलित सूची इस प्रकार हैं:-
सूची-Iसूची-II
A. वरुणऋत् का नियामक
B. मनुक्रोध
C. उषाउषा-काल (सूर्य की प्रथम किरण एवं पत्नी)
D. श्रद्धाविश्वास (आस्था)

88. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है। हैं?

A. दहशाला प्रणाली की शुरूआत अकबर द्वारा वर्ष 1579 में की गयी जो माप पर आधारित थी। B. फसल साझेदारी (बटाई) प्रणाली को दहशाला प्रणाली के क्रियान्वयन के पश्चात वापस ले लिया गया।
C.  पुरानी गज आधारित गज-ए-किदरी को एक नवीनगर आधारित गज-ए-इलाही से प्रतिस्थापित कर दिया गया।
D. मध्य प्रान्तों में कृषकों को भू- राजस्व नकद रूप में अथवा फसल स्वरूप देने
E.  दहशाला अथवा फसल रूप का विकल्प दिया गया था।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (e) (*)
Solution:

अकबर ने अपने शासन के 24 वें वर्ष (1580 ई.) में आइन-ए दहसाला प्रणाली को प्रारम्भ किया था। यह माप पर आधारित थी। अकबर ने सर्वप्रथम सम्पूर्ण साम्राज्य में एक समान मापन प्रणाली लागू करने के उद्देश्य से गज-ए-सिंकदरी (39 अंगुल या 32 इंच) के स्थान पर गज-ए-इलाही (41 अंगुल या 33.5 इंच) को लागू किया। दोनों के मध्य 39:41 का अन्तर था।

दहसाला प्रणाली का प्रारूप अर्थ मंत्री टोडरमल तथा उनके सहयोगी ख्वाजा शाह मंसूर ने तैयार किया था। इस व्यवस्था के अन्र्तगत राजस्व आकलन के तरीकों, जैसे फसल साझेदारी (बँटाई), नस्क, एवं जब्ती या नकदी, को यथावत बनाए रखा गया था।

जब्ती या नकदी (पैमाइश एवं फसलों की किस्म के आधार पर लगान निश्चित करना) व्यवस्था मध्य भारत अर्थात बिहार, इलाहाबाद, मालवा, अवध, आगरा, दिल्ली, लाहौर और मुल्तान में लागू किया गया था।

इस प्रकार मध्य प्रान्त में किसानों का भू-राजस्व दहसाला प्रणाली के अनुसार जिंस (फसल) के बजाय नकद निर्धारित किया गया था। वर्ष 1579 तक जमीन की पैदावार, स्थानीय कीमतों आदि के बारे में जानकारी इकट्ठा कर ली गयी थी।

नोट:- NTA ने इस प्रश्न का उत्तर 'C' माना है। सतीश चन्द्र ने अपनी पुस्तक मध्यकालीन भारत का इतिहास (मुगलकाल) में आईन-ए-दहसाला माप प्रणाली को लागू करने की तिथि 1579 ई. (24 वें वर्ष) लिखा है जबकि अन्य इतिहासकारों जैसे एल.पी. शर्मा, इम्तियाज अमहद,आशिर्वादी लाल श्रीवास्तव, पप्पू सिंह प्रजापत आदि ने अपनी पुस्तक मध्यकालीन भारत का इतिहास (मुगलकाल) में दहसाला प्रणाली को लागू करने की तिथि 1580 ई. स्वीकार किया है। इसके अतिरिक्त इग्नू के अध्याय (नोट्स में) मुगलकालीन अर्थव्यवस्था में भी 1580 तिथि मिलती है।

89. निम्नलिखित में से कौन से सही हैं?

A.  जब द्वितीय विश्व युद्ध की शुरूआत हुई, भारतीय साम्यवादियों ने सभी प्रकार के साम्राज्यवादी के प्रति अपनी संयुक्त मोर्चे की नीति को जारी रखा।
B. जब हिटलर ने सोवियत संघ पर आक्रमण किया तब भारत के साम्यवादियों ने एक विपरीत पक्ष अपना लिया एवं इस युद्ध को जन युद्ध (पीपल्स-वार) के रूप में पुनर्चिन्हित किया ।
C. भारत में साम्यवादीयों ने सभी संभावित समर्थन का विस्तार किया एवं 1942 मे लोकप्रिय विद्रोह को दबाने में अंग्रेजों के 'जासूसों' के रूप में कार्य तक किया।
D. भारत सरकार ने 1942 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सी.पी.आई.) को एक कानूनी संगठन घोषित करके पुरस्कृत किया।
E.यह स्पष्ट रुप से प्रदर्शित करता है कि सीपीआई के नीतिगत निर्णयों को बाहरी एवं अन्तर्राष्ट्रीय शक्तियों के माध्यम से अधिवेशित किया जाता था।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) केवल A, B, C और E
Solution:

जब द्वितीय विश्वयुद्ध प्रारम्भ हुआ तब रूस के आदेश पर भारतीय साम्यवादी नेताओं ने सभी प्रकार के साम्राज्यवाद (फासीवादी और नाजीवादी शामिल थे) के विरूद्ध अपनी संयुक्त मोर्चा नीति का अनुसरण करते हुए कांग्रेस से बाजी मार ले गये क्योंकि युद्ध के प्रति कांग्रेस का दृष्टिकोण स्पष्ट नहीं था केवल गाँधी जी ने इसे एक साम्राज्यवादी युद्ध घोषित किया था।

जून 1941 में हिटलर ने जब रूस पर आक्रमण कर दिया तब भारतीय साम्यवादियों ने परिस्थितियों को समझते हुए तुरंत द्वितीय विश्व युद्ध को जन-युद्ध (पीपल्स-वार) कहने लगे थे। इसके पूर्व इसे साम्राज्यवादी युद्ध कहते थे। साम्यवादियों ने अंग्रेजी-रूसी युद्धप्रयत्न (वार-इफोर्ट) में पूर्ण सहयोग देना प्रारम्भ कर दिया था।

अतः भारत सरकार ने पुरस्कार के रूप में साम्यवादी संस्था को कानूनी संगठन घोषित कर दिया। 1942 में जब भारत छोड़ो आन्दोलन प्रारम्भ हुआ तब साम्यवादियों ने अंग्रेजों के जासूस के रूप कार्य किया था। राष्ट्रवादियों ने साम्यवादियों की निंदा करना प्रारम्भ कर दिया था। स्पष्ट होता है कि साम्यवादियों की नीति का संचालन बाहरी एवं अन्तर्राष्ट्रीय शक्तियों के माध्यम से होता था।

90. मुस्लिम लीग के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा नहीं है?

Correct Answer: (d) मुस्लिम लीग का उद्देश्य मुसलमानों की आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं को उम्र एवं प्रतिशोध की भाषा में सरकार के समक्ष रखना था।
Solution:मुस्लिम लीग की स्थापना 30 दिसम्बर, 1906 को हुआ था। लीग के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित थे:

(1) भारतीय मुसलमानों में अंग्रेजी सरकार के प्रति राजभक्ति की भावना को जागृत करना तथा सरकार के किसी विचार के विषय में गलत धारणा उत्पन्न हो तो उसे दूर करना।

(2) भारतीय मुसलमानों के राजनैतिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य अधिकारों की रक्षा करना।

(3) भारतीय मुसलमानों की आकाँक्षाओं एवं आवश्यकताओं को मर्यादा पूर्वक सरकार के सामने प्रस्तुत करना।

(4) उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए मुसलमानों तथा अन्य भारतीय सम्प्रदायों के मध्य सद्भावना बढ़ाने का प्रयास करना।