NTA यूजीसी नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2023 (इतिहास)(Shift II)

Total Questions: 100

91. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए उपयुक्त विकल्प चुनिए:

भाऊ को दक्षिण से कोई अतिरिक्त पुनर्बलन नहीं प्राप्त हुआ था। उन्होंने जमुना के किले की पर्याप्त सुरक्षा नहीं करने तथा दक्षिण से संबंध बनाए रखने की भारी भूल की थी। इस युद्ध में मराठा बुरी तरह पराजित और बर्बाद हो गए थे।
उनके लिए यह आपदा थी। विश्वास राव और सदाशिव राव भाऊ की हत्या हो गई थी। अधिकांश अधिकारीगण पराजित हो गए थे। सैन्य बल का एक बड़ा हिस्सा नर संहार का शिकार हो गया था और पूर्णतः नष्ट हो गया था। शेष सैनिकों का पीछा कर उनकी हत्या कर दी गई थी। विजेताओं ने बड़े पैमाने पर धन को जब्त कर लिया था।
अनुमानतः मराठा को कुल 50,000 अश्व, 2,00,000 मवेशी, हजारों ऊँट, कई सौ गज और भारी मात्रा में नकद धनराशि और जेवर की हानि हुई थी।
निम्नांकित गद्यांश में किस महत्वपूर्ण युद्ध के बारे में उल्लेख है :

Correct Answer: (b) पानीपत का तीसरा युद्ध
Solution:

पानीपत का तृतीय युद्ध 14 जनवरी 1761 में मराठा सेना और अहमद शाह अब्दाली के मध्य हुआ था। इस युद्ध में मराठों को पराजय का सामना करना पड़ा। मराठों के सेनापति सदाशिव राव भाऊ, विश्वास राव, इब्राहिम गार्दी, जसवन्त राव, तुकोजी होल्कर आदि समेत अनुमानतः मराठों में कुल 50,000 अश्व, 2,00,000 मवेशी, हजारों ऊँट, कई सौ गज मारे गये। इस युद्ध में मराठों को भारी क्षति उठानी पड़ी।

92. निम्नांकित में से क्या मराठा के पराजय का कारण नहीं था।

Correct Answer: (c) मराठा युद्ध कर्म और गौरवपूर्ण कृत्य करने में कमजोर पड़ गए।
Solution:

पानीपत के तृतीय युद्ध (14 जनवरी 1761) में मराठों के पराजय के कारणों में उत्तर भारत के सभी मुस्लिम शासक मराठाओं के विरूद्ध एकजुट हो गए, सूरजमल जाट के अलावा हिन्दू शासकों ने इसमें भाग नहीं लिया और सदाशिवराव भाऊ का समर्थन भी नहीं किया, मराठा के प्रधानों में अभियान (मुहिम) की योजना के संबंध में मतांतर था, आदि शामिल था। नोट:- मराठा युद्ध कर्म और गौरवपूर्ण कृत्य करने में बहुत ही साहसी और मजबूत थे, इसी कारण सम्पूर्ण भारत को अपने नियंत्रण में लेना चाहते थे।

93. इस युद्ध के चश्मदीद गवाह कौन थे?

Correct Answer: (b) काशीराज पंडित
Solution:

पानीपत के तृतीय युद्ध (14 जनवरी 1761) के चश्मदीद गवाह काशीराज पंडित थे। क्योंकि इस युद्ध को काशीराज पंडित ने अपनी आँखों से देखा था।

पानीपत के तृतीय युद्ध में पराजय की सूचना एक व्यापारी ने पेशवा बालाजी बाजीराव को इस संदेश के रूप में दी- "दो मोती विलिन हो गए, बाईस सोने की मुहरें लुप्त हो गईं और चाँदी तथा ताबें की तो पूरी गणना ही नहीं की जा सकती।"

94. निम्नांकित में से क्या युद्ध का परिणाम नहीं था?

Correct Answer: (d) इसके फलस्वरूप अहमद शाह अब्दाली के लिए उत्तर भारत में साम्राज्य स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
Solution:पानीपत के तृतीय युद्ध (14 जनवरी 1761) के परोक्ष परिणाम अधिक रहे। दक्षिण में हैदरअली का उत्थान हुआ व पूरे भारत में अंग्रेजी साम्राज्य का उदय हुआ। मराठा ने उत्तर भारत में अपना समर्थन खो दिया।

मराठाओं को जनमानस, धन और सैन्य शक्ति की भारी क्षति हुई इस भयावह आपदा का समाचार सुनते ही पेशवा बालाजी बाजीराव का निधन (23 जून 1761) हो गया। अहमद शाह अब्दाली को इस विजय से कोई वास्तविक लाभ नहीं हुआ क्योंकि अब्दाली पंजाब पर अधिकार करना चाहता था न की मराठों से युद्ध जिसका कोई परिणाम नहीं निकला।

95. इस युद्ध में मुख्य सेनापति कौन था?

Correct Answer: (b) सदाशिव राव भाऊ
Solution:

पानीपत का तृतीय युद्ध (14 जनवरी 1761) को मराठा और अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली के मध्य हुआ। मराठा का सेनापति सदाशिव राव भाऊ था जबकि मराठा पेशवा बालाजी बाजीराव ने अपने 17 वर्षीय पुत्र विश्वासराव भाऊ के नेतृत्व में शक्तिशाली सेना भेजी थी।

सदाशिवराव भाऊ ने युद्ध क्षेत्र में सैनिकों के साथ उनकी पत्नियों एवं स्त्रियों को साथ ले जाने की प्रथा को बढ़ावा दिया। मराठों के पास इब्राहिम गार्दी के नेतृत्व में एक तोपखाना था। इब्राहिम गार्दी ने फ्रांस के बुसों से ट्रेनिग ली थी।

96. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए उपयुक्त विकल्प चुनिए :

भारत में 1857 में घटित क्रान्ति का दावा करने वाले लेखकों ने उसके होने के वास्तविक कारण पर चर्चा करने का प्रयास नहीं किया। सभी बड़ी धार्मिक और राजनीतिक क्रांतियों में उन सभी अंगों को एक साथ सशक्त करना असंभव है जिनकी पूरी समझ के बिना वे पूर्णतः असंगत हैं।

मैजिनी ने कार्ले द्वारा फ्रांस की क्रांति के बारे में अपने एक आलोचनात्मक लेख में कहा है कि प्रत्येक क्रांति का एक मूलभूत सिद्धांत होना चाहिए। क्रांतिकारी आंदोलन का आधार तुच्छ महत्त्वहीन और क्षणिक शिकायत नहीं हो सकता है। क्रांतिकारी युद्ध का इतिहास लिखने के क्रम में अंग्रेजी लेखकों ने किस प्रकार की गलतियाँ की है।

उनके विवरण और कथानक भ्रामक और अनुचित विचारों पर आधारित है। जिससे क्रांति की पूरी आत्मा या उसकी भावना पूर्णतः परिवर्तित हो जाती है या विरूपित हो जाती है इसकी युक्ति प्रस्तुत करने के लिए अंग्रेजी इतिहासकार उत्तरदायी है जिन्होंने चर्बीदार कारतूस के अफवाह को विद्रोह का तात्कालिक कारण बताया। इतना ही भ्रामक यह सिद्धांत है कि अवध को अपने राज्य में मिलाए जाने के कारण विद्रोह हुआ था।

महान सिद्धांत थे स्वधर्म और स्वराज । दीन-दीन की गर्जना जो धर्म की रक्षा के लिए उत्पन्न हुई जब धर्म के विरुद्ध चालाकी, खतरनाक और विध्नकारी आक्रमण जीवन से अधिक महंगा हो गया और भयावह रूप में इसमें स्वराज प्राप्ति की पावन कामना में गुलामी की जंजीर से बंधना पड़ा। स्वराज स्थापना की घोषणा में दिल्ली के शासक का कथन है भारत के हिन्दू और मुसलमान जागो जागो भाईयों। ईश्वर के सभी उपहारों में सर्वाधिक कृपापूर्ण ईश्वर का उपहार है।
 कार्ले द्वारा फ्रांस की क्रांति का आलोचनात्मक लेख कौन सा है -

Correct Answer: (c) मैजिनी
Solution:

मैजिनी ने कार्ले द्वारा फ्रांस की क्रान्ति के बारे में अपने एक आलोचनात्मक लेख में कहा है कि प्रत्येक क्रान्ति का एक मूलभूत सिद्धान्त होना चाहिए। क्रान्तिकारी आंदोलन का आधार तुच्छ महत्वहीन और क्षणिक शिकायत नहीं हो सकता है। मैजिमी ने 1831 ई. में 'यंग इटली' की स्थापना की।

97. निम्नलिखित में से क्या विद्रोह के इतिहास के बारे में सही नहीं है?

Correct Answer: (b) अंग्रेजी लेखकों ने विद्रोह का सही स्पष्टीकरण दिया है।
Solution:भारत में 1857 में घटित क्रांति का दावा करने वाले लेखकों ने उसके होने के वास्तविक कारण पर चर्चा करने का प्रयास नहीं किया। सभी बड़ी धार्मिक और राजनीतिक क्रान्तियों में उन सभी अंगों को एक साथ सशक्त करना असंभव है जिनकी पूरी समझ के बिना के वे पूर्णत असंगत हैं। 1857 के क्रांतिकारी आन्दोलन का आधार तुच्छ महत्वहीन और क्षणिक शिकायत नहीं हो सकता है। क्रांतिकारी युद्ध का इतिहास लिखने के क्रम में अंग्रेजी लेखकों ने विद्रोह का स्पष्टीकरण नहीं किया है।

98. स्वराज के लिए हिन्दुओं और मुस्लमानों को एक साथ खड़े होने के लिए किसने बुलाया?

Correct Answer: (c) बहादुर शाह जफर
Solution:

स्वराज के लिए हिन्दुओं और मुसलमानों को एक साथ खड़े होने के लिए बहादुर शाह जफर ने बुलाया था। 1857 के विद्रोह के महान सिद्धांत थे स्वधर्म और स्वराज । दीन दीन की गर्जना जो धर्म की रक्षा के लिए उत्पन्न हुई जब धर्म के विरूद्ध चालाकी खतरनाक और विध्वंसकारी आक्रमण जीवन से अधिक महंगा हो गया और भयानक रूप से इसमें स्वराज प्राप्ति की पावन कामना में गुलामी की जंजीर से बंधना पड़ा। स्वराज स्थापना की घोषणा में दिल्ली का शासक बहादुर शाह जफर का कथन है भारत के हिन्दू और मुसलमान जागो जागो भाइयों।

99. निम्नलिखित में से क्या विद्रोह का प्रेरक कारण था?

Correct Answer: (d) चरबी वाले कारतूस
Solution:

1857 के विद्रोह का प्रेरक चरबी वाले कारतूस था। 1857 के विद्रोह के तत्कालीन कारण चरबी वाले कारतूस थे। परम्परागत ब्राउन बैस के स्थान पर एनफील्ड रायफल का प्रयोग शुरू किया गया जिसमें कारतूस को लगाने से पूर्व दाँतों से खिंचना पड़ता था। कारतूस में गाय व सूअर की चरबी लगी होने से हिन्दू व मुसलमान दोनों भड़क गये। 1857 के विद्रोह के प्रतीक के रूप में 'कमल का फूल' और 'रोटी' को चुना गया था।

100. दीन-दीन का क्या अर्थ है। सही विकल्प पर निशान लगाइए:

Correct Answer: (c) किसी के खुद के धर्म की सुरक्षा
Solution:

दीन दीन का अर्थ किसी के खुद के धर्म की सुरक्षा है। दीन दीन की गर्जना जो धर्म की रक्षा के लिए उत्पन्न हुई जब धर्म के विरूद्ध चालाकी, खतरनाक और विध्वंसकारी आक्रमण जीवन से अधिक महंगा हो गया और भयानक रूप में इसमें स्वराज प्राप्ति की पावन कामना में गुलामी की जंजीर से बंधना पड़ा।