Solution:मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था कृषि उत्पाद धातुकर्म उद्योग, वस्त्र उद्योग, बावड़ी उत्खनन (कुएं आदि पर आधारित थी। कौटिल्य ने कृषि को सबसे अच्छा उद्योग माना है। मौर्यकाल में लौह उद्योग (धातुकर्म उद्योग) भी अत्यन्त विकसित अवस्था में था।
यूनानी लेखक कर्टियस ने श्वेत लौह से बनी तलवारों का उल्लेख किया है। इस काल में सबसे प्रधान उद्योग सूत कातने तथा बुनने का था। अर्थशास्त्र में सूत उत्पादन (वस्त्र उद्योग) को राजकीय उद्योग बताया गया है। मौर्यकाल में सिंचाई के लिए झील, तालाब, नहरें, कुएं (वावड़ी) आदि का प्रयोग किया जाता था।