NTA यूजीसी नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2023 (इतिहास)(Shift II)

Total Questions: 100

71. मानव शास्त्र निम्नलिखित से सम्बद्ध है -

Correct Answer: (d) मानव के क्रम विकास, वर्धन तथा विक
Solution:

मानवशास्त्र मानव के क्रम विकास, वर्धन तथा विकास से सम्बद्ध है। यह मानव की अनुवांशिकी, संस्कृति तथा समाज की वैज्ञानिक और समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण का अध्ययन है।

इसके अंतर्गत मनुष्य के समाज के अतीत और वर्तमान के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जाता है। सामाजिक नृविज्ञान और सांस्कृतिक नृविज्ञान के तहत मानदंडों तथा समाज के मूल्यों का वर्णन इसमें मिलता है।

72. तालीकोटा का युद्ध किस वर्ष लड़ा गया था?

Correct Answer: (c) 1565
Solution:

तालीकोटा का युद्ध जनवरी 1565 में लड़ा गया था। इस युद्ध को राक्षस या राक्षसी तंगड़ी का युद्ध और बन्नीहट्टी का युद्ध के नाम से भी जाना जाता है। इसमें विजयनगर साम्राज्य के विरोधी महासंघ में अहमदनगर, बीजापुर, गोलकुण्डा और, बीदर शामिल थे।

इस युद्ध में बरार शामिल नहीं था। इस युद्ध के समय सदाशिव राय विजयनगर साम्राज्य के शासक थे। सदाशिव राय का मंत्री रामराय इस युद्ध में मारा गया। विजयनगर की सेना इस युद्ध में पराजित हुई थी।

73. अकबर ने बैरम खाँ के पतन के तत्काल बाद वकील के पद पर किसे नियुक्त किया था?

Correct Answer: (c) मुनीम खान
Solution:

अकबर ने बैरम खाँ के पतन के तत्काल बाद वकील के पद पर मुनीम खान को 1560 में नियुक्त किया था। अकबर ने इन्हें खान-ए-खाना (खानों का खान) की उपाधि दी थी। 1564 में मुनीम खान को जौनपुर का सूबेदार बनाया गया। मुनीम खान एक फारसी तुर्क थे जिनके पूर्वज मूल रूप से वर्तमान उज्बेकिस्तान, के अंडीजान शहर के रहने वाले थे। उनके पिता का नाम मीरान बेग अंदिजानी था और उनके पालक भाई मिर्जा अस्करी थे।

74. पालखेड़ के युद्ध में हैदराबाद के निजाम को किसने पराजित किया था?

Correct Answer: (a) पेशवा बाजीराव I
Solution:

1728 ई. में पेशवा बाजीराव प्रथम ने पालखेड़ के युद्ध में हैदराबाद के निजाम निजामुल मुल्क को पराजित किया था। इसके पश्चात 6 मार्च 1728 ई. को मुंशी शिवगाँव की सन्धि हुई जिसमें निजाम ने मराठों को चौथ व सरदेशमुखी देना स्वीकार किया। इस संधि से दक्कन में मराठों की सर्वोच्चता स्थापित हो गई।

75. भारत से बाहर हिन्दू उपनिवेशों की स्थापना निम्नांकित में से किनके प्रयासों की परिणति हैः

A.पल्लव
B. चोल
C. विजयनगर के शासक
D. खिलजी
E.  मौर्य
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) A, B, C, Е
Solution:

भारत से बाहर हिन्दू उपनिवेशों की स्थापना मौर्य शासक, चोल शासक, पल्लव शासक एवं विजय नगर के शासक आदि के प्रयासों की परिणति है। मौर्यकाल में चीन, लंका, नेपाल आदि पड़ोसी देशों एवं साथ ही साथ सीरिया मिस्र, फारस की खाड़ी, अदन, पश्चिमी देशों आदि के साथ व्यापार होता था।

चोलकाल में वर्मा, सुमात्रा (द.पू. एशिया), श्रीलंका जैसे विदेशी व्यापारिक केन्द्रों से व्यापार होता था। पल्लव काल में दक्षिण सुदूर तक व्यापार होता था। विजयनगर का विदेशी व्यापार मलाया, वर्मा, चीन, अरब, ईरान आदि देशों के साथ होता था।

76. कालामुख निम्नलिखित में से किससे जुड़ा संप्रदाय है?

Correct Answer: (b) शैव धर्म
Solution:कालामुख सम्प्रदाय शैव धर्म से सम्बधित थे। कालामुख सम्प्रदाय के लोग मानव खोपड़ी में भोजन करना, मनुष्य का मांस खाना, शरीर पर शमशान की भस्म रगड़ने जैसे कार्य करते थे। यह सम्प्रदाय 11वीं से 14वीं शताब्दियों के मध्य कर्नाटक क्षेत्र में सक्रिय था। बेलगाँव का केदारेश्वर मंदिर (शिमोगा-कर्नाटक) इनका प्रमुख केन्द्र था।

77. आरंभिक काल से ही भारत कृषि आधारित उद्योगों में विश्वास करता था इसका कारण निम्नांकित में से किन क्षेत्रों में वृद्धि थी :

A. कृषि उत्पाद
B. धातुकर्म उद्योग
C. कुटीर उद्योग
D. विदेशी मुद्रा संचय
E.  एक-एक व्यक्ति की आवश्यकता पर आधारित
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (e) c & d
Solution:

आरम्भिक काल से ही भारत कृषि आधारित उद्योगों में विश्वास करता था, इसका कारण कृषि उत्पाद, कुटीर उद्योग, धातुकर्म उद्योग एक-एक व्यक्ति की आवश्यकता पर आधारित आदि क्षेत्रों में वृद्धि से थी। प्राचीन भारत की कृषि व्यवस्था उस समय के लोगों के जीवन-यापन और आर्थिक स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण साधन था। कालिदास ने उल्लेख किया है कि राज्य के आर्थिक विकास में कृषि और पशुपालन का बहुत महत्व था। धातु उद्योग (लोहा उद्योग) के कारण ही कृषि में व्यापक रूप से वृद्धि हुई थी।

नोट- विकल्प C और D दोनों उत्तर समान हैं, इसलिए U.G.C. ने अपने अन्तिम उत्तरकुंजी में इस प्रश्न का उत्तर विकल्प (c & d) माना है।

78. नीचे दो कथन दिये गये हैं : एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में :

अभिकथन A : नवपाषाण काल में ही मानव मात्र का स्थापन प्रतिरूप अस्तित्व में आया।
कारण R : पूर्व पाषाण काल और मध्य पाषाण काल में संभवतः मानव ने एक स्थान पर बसने के बारे में नहीं सोचा था।
उपरोक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सहीं व्याख्या है।
Solution:

नवपाषाण काल में ही मानव मात्र का स्थापन प्रतिरूप अस्तित्व में आया क्योंकि पूर्व पाषाण काल और मध्य पाषाण काल में सभवतः मानव ने एक स्थान पर बसने के बारे नहीं सोचा था। पुरापाषाण कालीन लोग आखेट पर निर्भर थे तथा वे खानाबदोश (घुमक्कड़) जीवन व्यतीत करते थे।

इस काल में मानव खाद्य पदार्थों का उपभोक्ता मात्र था, उत्पादक नहीं था। सर्वप्रथम नवपाषाण काल में कृषि की शुरूआत हुई तथा मानव स्थाई रूप से एक जगह निवास करने लगा था। इस प्रकार A और र दोनों सही हैं और R, Aकी सही व्याख्या है।

79. मुगल शासक बाबर के समय का प्रमुख चित्रकार निम्नलिखित में से कौन था ?

Correct Answer: (c) बिहज़ाद
Solution:

मुगल शासक जहीरूद्दीन मुहम्मद बाबर ने अपनी पुस्तक तुजुक-ए-बाबरी में एकमात्र चित्रकार बिहजाद के नाम का उल्लेख किया है। बिहजाद फारस का प्रसिद्ध चित्रकार था. तथा उसे 'पूर्व का राफेल' कहा जाता था।

अबुल हसन एवं मंसूर जहाँगीर के काल में प्रमुख चित्रकार थे, जबकि अकबर के शासनकाल में फारूख बेग, दसवन्त, बसावन आदि महत्वपूर्ण चित्रकार थे।

80. सिंधु घाटी के उत्खनन में पाई गई नर्तकी का संबंध है:

A. ताम्र पाषाण युग
B.  तत्कालीन धातुकर्म का उदाहरण
C. सौन्दर्य का उदाहरण
D. ताम्र युग
E.  पुरापाषाण काल
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल B, C, D, E
Solution:सिन्धु घाटी की कलाकृतियों में सर्वोत्कृष्ट कृति एक नाचती हुई लड़की यानी नर्तकी की कांस्य प्रतिमा है, जिसकी ऊँचाई लगभग चार इंच है। मोहनजोदड़ों में पाई गई यह मूर्ति तत्कालीन ढलाई कला का एक उत्तम नमूना है।

यह मूर्ति, तत्कालीन धातुकर्म का उदाहरण, सौन्दर्य का उदाहरण, ताम्र युग एवं पुरापाषाण काल से सम्बन्धित है। पुरापाषाण काल के सन्दर्भ में इस तरह की कलाकृति शुक्र की मूर्ति ऑस्ट्रियाई शहर क्रेम्स के पास खोजी गई जिसे विलेफोर्ड का शुक्र मूर्ति के रूप में जाना जाता है।

इस मूर्ति के विशाल लटकते स्तन, विस्तारित पेट और अतिरंजित नितंब हैं। इसी तरह प्रागैतिहासिक प्लास्टिक कला का सबसे पुराना ज्ञात नमूना फ्रांस से प्राप्त मोनपाजियर का शुक्र की मूर्ति है जो आमतौर पर स्टीटाइट वीनस की मूर्ति के रूप में जानी जाती है जिसके बढ़े हुए नितंब, पेट एवं योनि को दर्शाया गया है।