NTA यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा (निरस्त), जून-2024 (इतिहास)

Total Questions: 100

11. कौटिल्य के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा 'चतुरअंगबल' का मुख्य अवयव नहीं है?

Correct Answer: (c) ऊँट
Solution:

कौटिल्य के अनुसार सप्तांग राज्य के अंतर्गत दुर्ग चौथा तत्व था। दुर्गों का अधिकारी अंतपाल कहलाता था। दुर्गो की रक्षा के लिए अश्वसेना, पैदल सेना, रथसेना और हस्ति सेना चारों मुख्य थी। कौटिल्य ने स्थायी सैन्य संरचना की कल्पना की है जो पूरीतरह से राज्य के द्वारा नियुक्त किया जाता हो और राज्य के द्वारा ही जिसका भरण-पोषण किया जाता हो। ऊँट चतुरअंगबल का अंग नहीं था।

12. अवध के अधिग्रहण के खिलाफ हुए व्यापक विरोध केबारे में निम्नलिखित में से कौन-सा सही नहीं है?

Correct Answer: (a) राजा को कलकत्ता निर्वासित नहीं किया गया था।
Solution:

1856 ई. में अवध रियासत को औपचारिक रूप से ब्रिटिश साम्राज्य का अंग घोषित कर दिया गया। लॉर्ड डलहौजी द्वारा किये गये इस अधिग्रहण से तमाम इलाकों और रियासतों में गहरा असंतोष था। यहाँ के नवाब वाजिद अली शाह को यह कहते हुए हटा कर कलकत्ता निष्कासित कर दिया गया था कि वे अच्छी तरह शासन नहीं चला रहे थे।

अवध के ताल्लुकदारों की जागीरें और किले बिखरे हुए थे। अंग्रेज इन ताल्लुकदारों की सत्ता को बर्दाश्त करने के लिए कतई तैयार नहीं थे। अधिग्रहण के तुरंत बाद ताल्लुकदारों की सेनाएँ भंग कर दी गई तथा उनके दुर्ग ध्वस्त कर दिये गये।

13. निम्नलिखित को कालक्रमानुसार व्यवस्थित करें:

A.  प्रथम आंग्ल अफगान युद्ध
B.  प्रथम आंग्ल - सिक्ख युद्ध
C. लॉर्ड डलहौजी द्वारा गवर्नर जनरल के रूप में कार्यभार ग्रहण
D. द्वितीय आंग्ल - बर्मा युद्ध
E. संथाल विद्रोह
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) A, B, C, D, E
Solution:

कालक्रमानुसार इस प्रकार है-
A- प्रथम आंग्ल - अफगान युद्ध → (1834 ई.- 1842 ई.)
B - प्रथम आंग्ल सिक्ख युद्ध → (1845 ई. - 1846 ई.)
C - लॉर्ड डलहौजी द्वारा गवर्नर जनरल के रूप में कार्यभार ग्रहण → (1848 ई. - 1856 ई.)
D - द्वितीय आंग्ल बर्मा युद्ध → (1852 ई.)
E - संथाल विद्रोह → (1855 ई. - 1856 ई.)

14. निम्नलिखित में से कौन-सा स्तूप से संबद्ध नहीं है?

Correct Answer: (a) यह पृथ्वी के सामान्य अर्द्धआयताकार टीले के रूप में उदित हुआ।
Solution:

स्तूप (संस्कृत अर्थ टीला) का जन्म एक गोलार्ध लिए हुए मिट्टी के टीले से हुआ जिसे बाद में अंड कहा गया। धीरे-धीरे इसकी संरचना ज्यादा जटिल हो गई जिसमें कई चौकोर और गोल आकारों का सन्तुलन बनाया गया।

अंड के ऊपर एक हर्मिका होती थी। यह छज्जे जैसा ढाँचा देवताओं के घर का प्रतीक था। हर्मिका से एक मस्तूल निकलता था जिसे यास्ति कहते थे जिस पर अक्सर एक छत्री लगी होती थी।

15. बिना किलेबंदी वाली व्यापारिक चौकियों, जो पुर्तगाली नौसेना बेड़े के लिए रणनीतिक ठिकाने का कार्य भी करती थी, को क्या कहा जाता है?

Correct Answer: (a) फेईटोरिआ
Solution:

बिना किलेबंदी वाली व्यापारिक चौकियों, जो पुर्तगाली नौसेना बेड़े के लिए रणनीतिक ठिकाने का कार्य करती थी उन्हें फेईटोरिआ कहा जाता था। पुर्तगाली फेईटोरिआ ज्यादातर तटीय क्षेत्रों में बसे किलेबंद व्यापारिक चौकियाँ थी, जिन्हे पुर्तगाली साम्राज्य के साथ उत्पादों के स्थानीय व्यापार को केंद्रीकृत करने और हावी होने के लिए बनाया गया था।

वे एक साथ बाजार गोदाम, सीमा शुल्क के लिए सहायता के रूप में कार्य करते थे। विदेशों में पहला पुर्तगाली फेईटोरिआ 1445 ई. में हेनरी द नेविगेटर द्वारा मॉरिटानिपा के तट अर्गुइम द्वीप पर बसाया गया।

16. 'सातवाहन' कौन थे?

Correct Answer: (a) ऊपरी दक्कन के शासक
Solution:

ईसा पूर्व प्रथम सदी में विन्ध्यपर्वत के दक्षिण में दो शक्तियाँ प्रबल हुईं- ऊपरी दक्कन के सातवाहन तथा कलिंग के चेदि, इनमें चेदियों की शक्ति अल्पकालीन थी किन्तु सातवाहन शक्ति का तीन शदियों तक निरन्तर उत्कर्ष होता रहा उनकी सत्ता किसी न किसी रूप में साढ़े चार शताब्दियों तक बनी रही।

सातवाहन साम्राज्य के अन्तर्गत समस्त दक्षिणापथ सम्मिलित था। सातवाहन सम्राटों ने न केवल विदेशियों के विरुद्ध अपनी स्वाधीनता की रक्षा की अपितु साहित्य, कला, व्यापार, वाणिज्य आदि को प्रोत्साहन प्रदान कर अपनी प्रजा की भौतिक एवं सांस्कृतिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया।

17. निम्नलिखित मुगल दास्तानों और संस्मरणों को कालक्रमानुसार व्यवस्थित करें :

A. लाहौरी द्वारा बादशाह नामा के पहले दो दफ्तरों की रचना ।
B. अबुल फजल द्वारा अबकर नामा की रचना पर कार्य।
C. तुर्की भाषा में बाबर के संस्मरण की पाण्डुलिपि पारिवारिक संकलन का हिस्सा बनती है।
D.  गुलबदन बेगम द्वारा हुमायूँ नामा की रचना आरंभा
E. बाबर नामा के नाम से फारसी में बाबर के संस्मरण का अनुवाद
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (e) (*)
Solution:सही क्रम इस प्रकार है :-

तुर्की भाषा में बाबर के संस्मरण की पाण्डुलिपि पारिवारिक संकलन का हिस्सा बनती है। → (1530 ई.)

गुलबदन बेगम द्वारा हुमायूँनामा की रचना आरंभ । → (1587 ई.)

बाबरनामा के नाम से फारसी में बाबर के संस्मरण का अनुवाद → (1589)

अबुल फजल द्वारा अबकरनामा की रचना पर कार्य। → (1589- 1602)

लाहौरी द्वारा बादशाहनामा के पहले दो दफ्तरों की रचना। → (1627-47 ई.के मध्य)

नोट - दिए गए विकल्पों में कोई भी विकल्प सही नहीं है।

18. कलिंग नरेश खारवेल किस धर्म का घनिष्ठ अनुयायी था?

Correct Answer: (b) जैन
Solution:

कलिंग के चेदि राजवंश का संस्थापक महामेघवाहन नामक व्यक्ति था। इस वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली राजा खारवेल हुआ। खारवेल जैन धर्म का अनुयायी था, उसने जैन साधुओं को संरक्षण प्रदान किया।

अपने राज्यभिषेक के तेरहवें वर्ष उसने भुवनेश्वर के पास उदयगिरि तथा खण्डगिरि की पहाड़ियों को कटवा कर जैन भिक्षुओं के आवास के लिए गुहा विहार बनवाये थे।

19. किस अधिनियम ने भारत से बर्मा को अलग किया और सिंध एवं ओड़िशा के रूप में दो नए प्रांतों के निर्माण का सुझाव दिया?

Correct Answer: (c) भारत सरकार अधिनियम, 1935
Solution:

1919 ई. के सुधार भारतीय नागरिकों को सन्तुष्ट न कर सके थे और गांधी-इरविन समझौता या गोलमेज सम्मेलन के बाद फरवरी 1935 ई. में एक श्वेतपत्र अंग्रेजी सरकार ने जारी किया जिसमें नये सुधारों का उल्लेख किया गया।

इसी सुधारों की योजना के अंतर्गत अगस्त 1935 ई. में भारत सरकार अधिनियम 1935 पारित किया गया, इस कानून के द्वारा बर्मा तथा अदन को भारत के शासन से पृथक् कर दिया गया तथा सिन्ध और उड़ीसा के रूप में दो नवीन प्रान्त बनाये गये और उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत दो गवर्नर के अधीन रखा गया। भारत शासन अधिनियम 1935 के अन्तर्गत एक संघीय न्यायालय की स्थापना की गई तथा एक केन्द्रीय बैंक की स्थापना की गई, जो भारतीय रिजर्व बैंक कहलाया।

20. 'आनंद कारज' किससे संबंधित था?

Correct Answer: (a) विवाह
Solution:

सिख विवाह, जिसे 'आनंद कारज' के रूप में जाना जाता है, जिसका अर्थ है 'आनंदमय मिलन' आनंद कारज की शुरुआत सिख धर्म के तीसरे गुरु 'गुरु अमरदास' ने की थी। सिख विवाह समारोह गुरु ग्रंथ साहिब की उपस्थिति में आयोजित किया जाता है। आनंद कारज आमतौर पर एक गुरुद्वारा में आयोजित किया जाता है जो सिखों के लिए पूजा का केंद्रीय स्थान है।