Solution:द्वितीय संगम से संबंधित रचना (कृति) तोलकाप्पियम है। दक्षिण भारत का क्रमबद्ध इतिहास संगम साहित्य से ज्ञात होता है। संगम शब्द का अर्थ परिषद या गोष्ठी होता है जिसमें तमिल कवि एवं विद्वान एकत्र होते थे और अपनी रचनाओं को संगम के समक्ष प्रस्तुत करते थे, पाण्ड्य राजाओं के संरक्षण में कुल तीन संगम आयोजित किये गये-
1. प्रथम संगम का आयोजन मदुरा में किया गया इसकी अध्यक्षता अगस्त्य ऋषि ने की एवं इस संगम द्वारा संकलित ग्रन्थ अकट्टियम, परिपदाल, मुदुनारै थे।
2.द्वितीय संगम का आयोजन कपाटपुरम् (अलवै) में किया गया इसकी अध्यक्षता अगत्स्य ने किया तथा इस संगम द्वारा संकलित ग्रन्थों में एकमात्र 'तोल्काप्पियम्' है जो तमिल व्याकरण का ग्रन्थ है जिसकी रचना तोल्काप्पियर ने किया।
3. तृतीय संगम का आयोजन पाण्ड्य की राजधानी मदुरा में किया गया तथा इस संगम की रचनाये कुरुन्थौके, परिनुप्पट, परि- पादल है।