Solution:भारत के धन का अविरल प्रवाह इंग्लैण्ड की ओर था, जिसके बदले भारत को पर्याप्त आर्थिक, व्यापारिक अथवा भौतिक फल नहीं मिला, ऐसे धन को भारतीय राष्ट्रीय नेताओं तथा अर्थशास्त्रियों ने धन के निकासी की संज्ञा दी है। आर्थिक निकासी (निष्कासन) के घटकों में विदेशो से लिए गए लोक ऋण पर ब्याज, इंग्लैण्ड में भंडार खरीदना, विदेशी पूंजी निवेश पर ब्याज, विदेशी बैंकिंग बीमा और पोत परिवहन कंपनियाँ आदि शामिल है।
नोट - आर्थिक निष्कासन के घटकों में ईस्ट इण्डिया कंपनी के शेयर धारकों का लाभांश शामिल है न कि ब्रिटिश ताज के शेयर धारकों का लांभाश है।