Solution:महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व के लगभग वैशाली के निकट कुण्डग्राम में हुआ था, महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे, इन्होंने जैन धर्म द्वारा स्थापित चार व्रतों में पाँचवाँ व्रत ब्रह्मचर्य को भी जोड़ दिया तथा इसका कठोरता से पालन करना अनिवार्य कर दिया।
महावीर द्वारा सिखाए गए सिद्धांत पूर्व नामक चौदह पुराने ग्रंथों में समाहित थे। पाटलिपुत्र में आयोजित जैन संगीति सभा में बारह अंग संकलित किए गए थे, लेकिन जैन धर्मग्रंथों का अंतिम संकलन वल्लभी में हुई संगीति परिषद् में किया गया था, यह सभा देवऋद्धिगणि (क्षमाश्रवण) की अध्यक्षता में संपन्न हुई थी।
महावीर की मृत्य के 200 वर्ष बाद मगध में अकाल पड़ा जिसके चलते भद्रबाहु दक्षिण भारत चले गए और इनके अनुयायी दिगंबर कहलाए, इसके विपरीत स्थूलभद्र के नेतृत्व में मगध में रहने वाले जैन अनुयायी श्वेतांबर कहलाए। भद्रबाहु महावीर द्वारा प्रदत्त पूब्बों या पूर्व को जानने वाले अंतिम व्यक्ति थे। नोट-आयोग ने इस प्रश्न का उत्तर अपनी अंतिम उत्तर कुंजी में D माना है, किंतु इस प्रश्न के सभी विकल्प सही हैं। स्रोत-के.सी. श्रीवास्तव ।