A. गवर्नर जनरल परिषद के साधारण सदस्यों की संख्या बढ़ाकर पाँच की गई।
B. विधायन के लिए गवर्नर जनरल की परिषद् में छह से कम किंतु बारह से अधिक सदस्य जोड़े गए।
C. कोई भी विधेयक विधायी परिषद् में प्रस्तुत की जा सकती थी।
D. गवर्नर जनरल को आपातकाल में अपनी परिषद् की सहमति के बिना अध्यादेश जारी करने की शक्ति थी, जिनकी वैधता अधिकतम छह माह तक थी।
E. गवर्नर जनरल की अनुमति प्राप्त किए बिना विधायी परिषद् द्वारा पारित कोई भी एक्ट वैध नहीं होगा।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें-
Correct Answer: (b) केवल A, B, D, E
Solution:1853 के एक्ट से स्थापित व्यवस्था में बहुत सी त्रुटियाँ रह गयी थीं, इन्हीं त्रुटियों को दूर करने के लिए 1861 ई. में प्रथम भारतीय परिषद अधिनियम पारित किया गया। इस परिषद अधिनियम के तहत गवर्नर जनरल परिषद के साधारण सदस्यों की संख्या बढ़ाकर पाँच कर दी गयी, यह पाँचवाँ सदस्य विधिवेत्ता था। विधायन के लिए गवर्नर जनरल के परिषद में न्यूनतम 6 और अधिकतम 12 अतिरिक्त सदस्यों का प्रावधान किया गया। गवर्नर जनरल को संकटकालीन (आपातकाल) अवस्था में विधान परिषद की अनुमति के बिना ही अध्यादेश जारी करने की अनुमति दे दी गई। ये अध्यादेश अधिकाधिक 6 मास तक लागू रह सकते थे। गवर्नर जनरल की अनुमति प्राप्त किए बिना विधायी परिषद द्वारा पारित कोई भी एक्ट वैध नहीं होता था। कुछ विधेयकों को गवर्नर जनरल की अनुमति के पश्चात विधायी परिषद् में प्रस्तुत किए बिना ही पारित कर दिया जाता था। अतः कथन (c) सत्य नहीं है।