NTA यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा, जून 2025 (इतिहास)

Total Questions: 100

61. गुरुमुखी लिपि में एक पंजाबी साप्ताहिक "स्वदेश सेवक" किसके द्वारा प्रकाशित किया गया था?

Correct Answer: (c) हरनाम सिंह
Solution:

गुरुमुखी लिपि में एक पंजाबी साप्ताहिक "स्वदेश सेवक बाबा हरनाम सिंह द्वारा प्रकाशित किया गया था। गुरुमुखी लिपि गुरु अंगद देव के द्वारा विकसित किया गया था। गुरुमुखी लिपि मुख्य रूप से पंजाबी लेखन में प्रयुक्त अधिकारिक लिपि का नाम है। स्वदेश सेवक नामक गुरुमुखी अखबार स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बैंकूवर से जीडी कुमार के द्वारा भी निकाला जाता था। इस अखबार के माध्यम से उन्होंने सामाजिक सुधार की बात करते थे तथा साथही-साथ भारतीय सैनिकों से ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह करने का आग्रह करते थे।"

62. नायकों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं?

A. नूनीज के अनुसार विजयनगर साम्राज्य में लगभग 300 नायक थे।
B. नूनीज के अनुसार वे भूमि के स्वामी नहीं थे।
C. स्टेन के अनुसार नायक अपने स्वयं के अधिकार में क्षेत्रीय शक्ति थे।
D.तमिलनाडु में नायक शासन आरंभिक 16वीं शताब्दी से 19वीं शताब्दी तक कायम रहा।
E. सेन्जी, तंजावुर और मदुरै तीन प्रमुख नायक थे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें-

Correct Answer: (c) केवल A, C, E
Solution:

दिल्ली सल्तनत की प्रांतीय व्यवस्था 'इक्ता व्यवस्था' पर टिकी थी। ठीक उसी प्रकार विजयनगर कालीन 'नायंकार व्यवस्था' प्रांतीय व्यवस्था का हिस्सा थी। इस व्यवस्था को सुदृढ़ीकरण करने का कार्य कृष्णदेवराय ने किया। 'नायक' सेनानायक थे जिन्हें वेतन के बदले भू-खंड राजा द्वारा प्राप्त होता था। नायक विजयनगर शासक के सहयोगी स्तंभ कहे जाते थे। नायकों के बारे में निम्नलिखित कथन सत्य हैं-
1. नूनीज़ के अनुसार विजयनगर साम्राज्य में लगभग 300 नायक थे, वे भूमि के स्वामी थे।
2. बर्टन स्टाइन (स्टेन) के अनुसार नायक अपने स्वयं के अधिकार में क्षेत्रीय शक्ति थे।
3. तमिलनाडु में नायकों का शासन 17 वीं शताब्दी में समाप्त हो गया। सेन्जी, तंजावुर और मदुरै तीन प्रमुख नायक थे।

63. निम्नलिखित में से किसने साप्ताहिक सद्धर्म प्रचारक शुरू किया था?

Correct Answer: (c) लाला मुंशीराम
Solution:

लाला मुंशीराम ने उर्दू में पत्रकारिता की शुरुआत की, क्योंकि पंजाब की बोलचाल की भाषा उर्दू थी। उन्होंने 'सद्धर्म प्रचारक' नामक एक साप्ताहिक पत्र निकाला और इस पत्र में अपनी भावनाओं और आर्य समाज के सिद्धांतों को व्यक्त किया। बाद में महात्मा मुंशीराम (लाला मुंशीराम) द्वारा इस पत्र की भाषा उर्दू से हिंदी कर दी गई।

64. 1857 के विद्रोह के बारे में किस इतिहासकार ने यह लिखा था?

"1857-58" की दयनीयता और रक्तपात भारत में स्वतंत्रता आंदोलन के जन्मदाता नहीं थे, किंतु अप्रासंगिक निरंकुशता और मध्ययुगीन केंद्रीयभिसारी सामंतवाद के मरणासन्न आर्तनाद थे।"

Correct Answer: (a) आर.सी. मजूमदार
Solution:

1857 के विद्रोह के बारे में इतिहासकार आरसी मजूमदार ने लिखा है कि "1857-58 की दयनीयता और रक्तपात भारत में स्वतंत्रता आंदोलन के जन्मदाता नहीं थे, बल्कि अप्रासंगिक निरंकुशता और मध्ययुगीन केंद्रीयभिसारी सामंतवाद के मरणासन्न आर्तनाद थे।” जवाहरलाल नेहरू ने 1857 के विद्रोह को "मूलतः एक सामंतीवाद विस्फोट था........।" कहा।

65. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित करें-

सूची–I (पुस्तक)सूची–II (लेखक)
A. खुलासात–उत–तवारीखI. खाफी खान
B. रियाज–उस–सलातिनII. गुलाम हुसैन सलीम
C. मुन्तखब–उल–लुबाबIII. सुजान राय
D. सियार–उल–मुतख्खिरिनIV. गुलाम हुसैन

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें-

Correct Answer: (a) A-III, B-II, C-I, D-IV
Solution:

सूचियों का सही सुमेलन निम्नलिखित है-

सूची–I (पुस्तक)सूची–II (लेखक)
A. खुलासात–उत–तवारीख (फारसी इतिहास की पुस्तक 17वीं शताब्दी में लिखी गई)सुजान राय भंडारी
B. रियाज–उस–सलातिनगुलाम हुसैन सलीम
C. मुन्तखब–उल–लुबाबखाफी खान
D. सियार–उल–मुतख्खिरिनगुलाम हुसैन

66. अपनी आत्मकथा में महात्मा गाँधी अपने ऊपर इस पुस्तक का जादुई प्रभाव इस प्रकार वर्णित करते हैं : "मैं भीर में उठा,और इन सिद्धांतों को व्यवहार में लागू करने के लिए तैयार था।"

Correct Answer: (b) जॉन रस्किन की अनटू दिस लास्ट
Solution:

अपनी आत्मकथा “सत्य के साथ मेरे प्रयोग (गुजराती भाषा में)" में महात्मा गाँधी ने अपने ऊपर जॉन रस्किन की पुस्तक 'अनटू दिस लास्ट' का जादू की तरह प्रभाव पड़ने का वर्णन किया है। वह कहते हैं कि "मैं भीर (भीड़) में उठा और इन सिद्धांतों को लागू करने के लिए तैयार था।" कहने का तात्पर्य है कि उस पुस्तक ने उन्हें बहुत प्रेरित किया और वह अपने जीवन में सत्य, अहिंसा और आत्म-नियंत्रण के सिद्धांतों को अपनाने के लिए प्रेरित हुए गाँधीजी को यह पुस्तक 1904 में हेनरी पोलाक से प्राप्त हुई। गाँधीजी द्वारा 1908 में इस पुस्तक का गुजराती भाषा में 'सर्वोदय' नाम से अनुवाद किया गया।

67. निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य है?

A. विष्णुगोप एक पल्लव राजा था।
B. कीर्तिवर्मन एक चालुक्य शासक था।
C. यशोविग्रह एक कल्चुरी राजा था।
D. इंद्र एक राष्ट्रकूट राजा था।
E. सिंहविष्णु एक पल्लव राजा था।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें-

Correct Answer: (c) केवल A, B, D, E
Solution:

दिए गए विकल्पों में सत्य कथन निम्नलिखित हैं-
I. विष्णुगोप एक पल्लव राजा था।
II.कीर्तिवर्मन एक चालुक्य शासक था।
III. इंद्र एक राष्ट्रकूट राजा था। (शासनकाल 670-690 ई.)
IV.सिंहविष्णु (575-600 ई.) एक पल्लव राजा था।
V. यशोविग्रह गढ़वाल वंश का संस्थापक था न कि कल्चुरी राजा था।

68. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित करें-

सूची–I (मराठा अधिकारी)सूची–II (उत्तरदायित्व)
A. चिटनिसI. घरेलू कार्य
B. दाबिरII. दानार्थ अनुदान
C. पंडितरावIII. पत्राचार
D. वाके–नवीसIV. विदेशी मामलों से संबंधित

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें-

Correct Answer: (b) A-III, B-IV, C-II, D-I
Solution:

सूचियों का सही सुमेलन निम्न है-

सूची–I (मराठा अधिकारी)सूची–II (उत्तरदायित्व)
I. चिटनिसन्यायाधीश
II. दाबिर (वकील)विदेशी मामलों से संबंधित
III. पंडितरावदानार्थ अनुदान
IV. सुमंतनविस (वाके–नवीस)घरेलू कार्य

69. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें-

सूची–Iसूची–II
A. पुंसवनI. गर्भ में बालक की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु अनुष्ठान
B. स्नातकII. वह, जिससे स्नान किया है
C. सीमन्तोन्नयनIII. पुरुष बालक प्राप्त करने का अनुष्ठान
D. समावर्तनIV. विशेष गृह आगमन अनुष्ठान

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें-

Correct Answer: (b) A-III, B-II, C-I, D-IV
Solution:

सूचियों का सही सुमेलन इस प्रकार है-

सूची–Iसूची–II
A. पुंसवनपुत्र/पुरुष बालक प्राप्त करने का अनुष्ठान
B. स्नातकवह, जिससे स्नान किया है
C. सीमन्तोन्नयनगर्भ में बालक की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु अनुष्ठान
D. समावर्तनविशेष गृह आगमन अनुष्ठान

70. वेदांतत्र पर रामानुजाचार्य की टीका, जिसने विशिष्टाद्वैत दर्शन को प्रतिपादित किया, क्या कहलाती है?

Correct Answer: (b) श्रीभाष्य
Solution:

वेदान्तसूत्र पर राजमानुजाचार्य की टीका, जिसने विशिष्टाद्वैतवाद दर्शन को प्रतिपादित किया, 'श्रीभाष्य' कहलाती है। यह टीका अद्वैत वेदांत के विचारों का खंडन करने के लिए उपयोगी है। वेदांत के प्रमुख आचार्य रामानुजाचार्य थे। रामानुज ने अपने 'श्रीभाष्य' में वेदांत के माया सिद्धांत का पुरजोर खंडन किया है। उन्होंने भगवद्‌गीता पर भाष्य लिखा जिसे 'गीता भाष्य' कहा जाता है।