Solution:भारतीय संस्कृति संस्कार प्रधान है। हमारे ऋषियों मुनियों ने मानव जीवन को चार पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) को प्राप्त करने का साधन माना है। चारों पुरुषार्थों को प्राप्त करने के लिए संस्कारवान् होना आवश्यक है अतः आचार्यों ने जन्म के पूर्व से लेकर मृत्युपर्यन्त संस्कारों की व्यवस्था दी है।
संस्कारों की संख्या पर शास्त्रों में मत विभिन्नता है। सामान्यतया 16 संस्कार माने गये हैं। संस्कारों को तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है यथा- पूर्वजन्म के संस्कार, जन्म के पश्चात के संस्कार, मृत्यु के पश्चात का संस्कार। पूर्व जन्म के संस्कार के अन्तर्गत गर्भाधान संस्कार, पुंसवन संस्कार और सीमान्तोत्रयन संस्कार आते हैं।