NTA यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2024 इतिहास

Total Questions: 100

51. निम्नलिखित घटनाओं को कालानुक्रमिक रूप में व्यवस्थित कीजिए :

A. लोकोपकार
B. उदियादित्य अलंकार
C.  मल्लिनाथ पुराण
D. त्रिशास्ति लक्षण महापुराण
E. मदन विजय
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) D, A, C, B, Е
Solution:घटनाओं का सही कालक्रम इस प्रकार है-
सूची Iसूची II
A.त्रिशास्ति लक्षण महापुराण978 ई.
B.लोकोपकार1025 ई.
C.मल्लिनाथ पुराण1105 ई.
D.उदियादित्य अलंकार1150 ई.
E.मदन विजय1235 ई.

52. निम्नलिखित भारतीय इतिहास लेखन की परम्पराओं को प्राचीनतम के क्रम में सजाएं:

A. मार्क्सवादी भारतीय इतिहास लेखन
B.  भारतीय राष्ट्रवादी इतिहास लेखन
C. सब अल्टर्न (उपाश्रयी) अध्ययन
D.  प्राच्यवादी इतिहास लेखन
E.  ब्रिटिश साम्राज्यवादी इतिहास लेखन
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) D, E, B, A, C
Solution:भारतीय इतिहास लेखन की परम्पराओं का प्राचीन से नवीनतम का सही क्रम इस प्रकार है-

A. प्राच्यवादी इतिहास लेखन (अठ्ठारहवीं शताब्दी)

B. ब्रिटिश साम्राज्यवादी इतिहास लेखन (19वी शताब्दी में)

C. भारतीय राष्ट्रवादी इतिहास लेखन (19वी शताब्दी के अन्त एवं 20वीं शताब्दी के शुरू में)

D. मार्क्सवादी भारतीय इतिहास लेखन (20वी शताब्दी के मध्य में)

E. सब अल्टर्न (उपाश्रयी) अध्ययन (1980 के दशक में अर्थात 20वी शताब्दी के अन्त में)

53. कलिंग में चोल के आक्रमण का मुख्य कारण_________ था

Correct Answer: (b) मसूनीदेश से चुनौती
Solution:

कलिंग में चोलों के आक्रमण का मुख्य कारण मसूनीदेश से मिलने वाली चुनौती थीं। राजेन्द्र प्रथम के तिरुमलाई शिलालेख से इस विजय की जानकारी प्राप्त होती है। इसी अभिलेख में उल्लेख मिलता है चोल सेना वेंगी को जीतने के बाद कलिंग में प्रवेश कर विजयादित्य के मित्र कलिंग के पूर्वी गंग शासक मधुका मानव को दण्डित किया।

नीलकंठ शास्त्री के अनुसार राजेन्द्र की कलिंग विजय का उद्देश्य गंगा घाटी की ओर अभियान करके अपनी विशाल शक्ति का प्रदर्शन करना था। राजेन्द्र प्रथम के अतिरिक्त राजराज प्रथम तथा कुलोतुंग प्रथम ने भी कलिंग पर आक्रमण कर विजय प्राप्त किया था।

54. निम्नलिखित में से कौन दिल्ली सल्तनत के सुल्तान के विशेषाधिकार में सम्मलित नहीं था?

Correct Answer: (d) मस्जिद का निर्माण
Solution:

दिल्ली सल्तनत के सुल्तानों के विशेषाधिकार में अपने नाम से सिक्कों का चलाना, खुतबा पढ़ना, तथा हाथी पर सवार होना आदि सम्मिलित था। जबकि मस्जिद का निर्माण इनके विशेषाधिकार में सम्मलित नहीं थे। दिल्ली सुल्तान जनहित के लिए नागरिक और राजनीतिक नियम बनाते थे। खुतबा और सिक्के प्रभुसत्ता के प्रतीक समझे जाते थे।

खुतबा एक औपचारिक धर्मोपदेश है जो शुक्रवार के समय पढ़ा जाता है। इसमें सुल्तान का नाम समुदाय के प्रमुख के रूप में लिया जाता था। सिक्कों को जारी करना भी राजसत्ता का अधिकार था। सिक्कों पर सुल्तान का नाम खुदा रहता था।

55. वर्ष 1857 के पूर्व ब्रिटिश काल के दौरान विद्रोहों पर विचार करें और उन्हें प्राचीनतम से प्रारम्भकर क्रमवार सजाएं

A. बंगाल तथा बिहार के संथालों का विद्रोह
B. बंगाल का संन्यासी विद्रोह
C. कोल्हापुर विद्रोह
D. वेल्लौर में सिपाही विद्रोह
E. विशाखापत्तनम विद्रोह
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) B, D, E, C, A
Solution:वर्ष 1857 के पूर्व ब्रिटिश काल के दौरान विद्रोहों का प्राचीनतम से लेकर प्रारम्भ का सही क्रम इस प्रकार है-
सूची Iसूची II
A.बंगाल का संन्यासी विद्रोह1763-1800
B.वेल्लौर में सिपाही विद्रोह1806
C.विशाखापत्तनम विद्रोह1830-34
D.कोल्हापुर विद्रोह1844
E.बंगाल तथा बिहार के संथालों का विद्रोह1855-56

56. आधुनिकोत्तर इतिहास लेखन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

Correct Answer: (b) इतिहास लिखने के लिए कार्य-कारण संबंध तथा कालानुक्रम आवश्यक है।
Solution:

आधुनिकोत्तर इतिहास लेखन, जिसे पोस्टमार्डन हिस्टोरियोग्राफी भी कहा जाता है। इतिहास लेखन की एक ऐसी विधा है जो पारंपरिक इतिहास लेखन की मान्यताओं और तरीकों को चुनौती देती है। यह इतिहास को केवल घटनाओं का क्रम न मानकर इसे भाषा, संस्कृति और संबंधों द्वारा निर्मित एक कहानी के रूप में देखता है।

इस विचारधारा में इतिहास लेखन के कार्य कारण संबंध तथा कालानुक्रम को आवश्यक नहीं माना गया है, बल्कि अतीत को परिलक्षित करने वाले स्रोत हमेशा किसी अन्य के दृष्टिकोण से लिखित होते हैं, साथ ही इतिहास लेखन में अनुक्रमिक काल के विचार को छोड़ा जा सकता है और ऐतिहासिक स्रोतों के स्थायी तथा अपरिवर्तनीय अर्थ नहीं होते।

57. सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए :

सूची-I लेखकसूची-II पुस्तक
A.एच. एच. डाडवेलI.रेबेलियन 1857: ए सिम्पोजियम
B.बी.बी.मिश्रII.दि एडमिनिस्ट्रेटिव हिस्ट्री ऑफ इंडिया
C.पी.सी. जोशीIII.दि एपिक स्ट्रगल
D.बिपन चंद्रIV.दि कैम्ब्रिज हिस्ट्री ऑफ इंडिया

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) A-IV, B-II, C-I, D-III
Solution:सूचियों का सही मिलान इस प्रकार है-
सूची-I लेखकसूची-II पुस्तक
A.एच. एच. डाडवेलदि कैम्ब्रिज हिस्ट्री ऑफ इंडिया
B.बी.बी. मिश्रदि एडमिनिस्ट्रेटिव हिस्ट्री ऑफ इंडिया
C.बी.सी. जोशीरेबेलियन 1857 : ए सिम्पोजियम
D.बिपन चंद्रदि एपिक स्ट्रगल

58. नीचे दिए गए विकल्पों में से दो सही मिलान चुनें

सूची Iसूची II
A.मुहता नैणसी री ख्यातराजस्थान
B.अमीर खुसरोनूह सिपिहर
C.राजतरंगिनीमालवा
D.मलिक मुहम्मद जायसीचन्तायन
E.मुल्ला दाऊदपद्मावत

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल A, B
Solution:नीचे दिये गये विकल्पों का सही मिलान इस प्रकार है-
सूची Iसूची II
A.मुहता नैणसी री ख्यातराजस्थान
B.अमीर खुसरोनूह सिपिहर
C.राज तरंगिनीकश्मीर
D.मलिक मुहम्मद जायसीपद्मावत (पद्मावत)
E.मुल्ला दाऊदचन्तायन

59. सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए :

सूची-Iसूची-II
A.कलतिकाI.कवयित्री जिसने सम्राट आदिगैमन की प्रशंसा की थी
B.क नटिकानII.प्रमुख मुंशी
C.पोलशेलईIII.अधिकारी जो मोती मत्स्य पालन का निरीक्षण करता था
D.ओवेयरIV.पांड्या शासक मुदुकुडुमी की पदवी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) A-III, B-II, C-IV, D-I
Solution:सूचियों का सही मिलान इस प्रकार है-
सूची-Iसूची-II
A.कलतिकाअधिकारी जो मोती मत्स्य पालन का निरीक्षण करता था
B.कनटिकानप्रमुख मुंशी
C.पोलशेलईपांड्या शासक मुदुकुडुमी की पदवी
D.ओवेयरकवयित्री जिसने सम्राट आदिगैमन की प्रशंसा की थी

60. निम्नलिखित में किसको नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों को बेहताशा विनाश करने वाला कहा जाता है ?

Correct Answer: (c) बख्तियार खिलजी
Solution:

बख्तियार खिलजी को नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों को बेहताशा विनाश करने वाला कहा जाता है। बख्तियार खिलजी ने पूर्वी भारत की ओर अभियान करते हुए ओदन्तपुरी, विक्रमशिला तथा नालन्दा के विश्वविद्यालयों को ध्वस्त कर दिया तथा मात्र 18 घुड़सवारों के साथ सौदागरों के छम वेष में सेनों की राजधानी नदिया पर धावा बोल दिया। राजा लक्ष्मणसेन भाग खड़ा हुआ तथा आक्रान्ताओं ने वहाँ अधिकार करने के बाद भारी लूट-पाट की इस प्रकार तुर्क साम्राज्य प्रायः सम्पूर्ण उत्तरी भारत में छा गया।