Solution:1907 से भारतीय राजनीति में परिवर्तन आने लगा था। इस परिवर्तन को “पिस्तौल और बम" की राजनीति कहा गया। 1907 में बंगाली युवा वर्ग अंग्रेजों के भारत विरोधी कार्यों से दुःखी होकर आतंकवाद का रास्ता अपनाने लगे थे। 19वीं सदी में नरमपंथियों से उनका मोह भंग हो चुका था और गरमपंथियों से उन्हें निराशा हाथ लगी।
अतः उन्होंने अपने अखबार 'युगान्तर' के माध्यम से लिखा कि अंग्रेजी सरकार के दमन को रोकने के लिए भारत की 30 करोड़ जनता अपने 60 करोड़ हाथ उठायें। बल को बल (ताकत) से ही रोका जा सकता है। यह आह्वान अप्रैल, 1906 में बारीसाल सम्मेलन में पुलिस लाठी चार्ज के बाद किया गया था।
ब्रिटिश सरकार के विरोध में युवाओं ने आयरलैण्ड के राष्ट्रवादियों, रूसी निहिलिस्टों (विनाशवादियों) तथा पापुलिस्टों के संघर्ष के विधियों को अपना लिया था। इन युवाओं का मानना था कि बदनाम (अलोकप्रिय) अंग्रेज अधिकारियों की हत्या करने से जहाँ अंग्रेज अधिकारियों में भय उत्पन्न होगा वहीं भारतीय जनता के अन्दर व्याप्त भय तथा निष्क्रियता समाप्त हो जायेगी और लोगों में राष्ट्रीयता की भावना जायेगी।
मद्रास प्रांत में नीलकंठ ब्रह्मचारी और वांची अय्यर ने भारत माता एसोसिएशन की स्थापना की तथा 1911 में वांची अय्यर ने तिरूनेलवेली के जिला मजिस्ट्रेट ऐश की हत्या कर दी और बाद में आत्महत्या कर ली। यह हत्या अंग्रेजों को भारत से भगाने के लिए किया गया था।
ऐश की हत्या उस सयम किया गया जब वह तूतीकोरन जाने वाली 'बोट मेल' का इंतजार मयांची स्टेशन पर कर रहे थे। चिदम्बरम पिल्लई ने वर्ष 1906 में मद्रास का दौरा किया था और वह बाल गंगाधर तिलक तथा लाला लाजपत राय द्वारा प्रारम्भ किए गए स्वदेशी आंदोलन से जुड़े हुए थे।