NTA यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 (इतिहास) (Shift-II)

Total Questions: 100

21. 18वीं शताब्दी में एशिया में भारतीय निर्यात का अभिमुखीकरण प्रत्यक्ष तरीकों से परिवर्तित हुआ।

A.  पूर्व में निर्यात व्यापार का अभिमुखीकरण पूर्वी एशिया की ओर था।
B. इन परिवर्तनों के पीछे का निहित कारक भारतीय मुगल साम्राज्य में व्याप्त भारी संकट था।
C.व्यापार के पारंपरिक केंद्रों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।
D. भारतीय प्रशासन के सीमा शुल्क प्रतिलेखों से इसके बारे में महत्वपूर्ण सूचनाएं प्राप्त होती हैं
E. बम्बई मद्रास और कलकत्ता व्यापार के नए केंद्र के रूप में उभर कर सामने आए
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल B, C, E
Solution:

18वीं शताब्दी के दौरान अन्य एशियाई देशों के साथ भारतीय व्यापार अर्थात् निर्यात का अभिमुखीकरण प्रत्यक्ष तरीकों से परिवर्तित हुआ। सूरत, कालीकट, हुगली और मसुलीपट्टनम जैसे व्यापार के पारम्परिक केन्द्र जो दीर्घकाल तक अस्तित्व में थे अब उनका स्थान बम्बई, मद्रास तथा कलकत्ता जैसे नये व्यापारिक केंद्रों ने ले लिया।

निर्यात व्यापार का रूझान जो पहले पश्चिम एशिया की ओर था (मुख्यतः फारस की खाड़ी और लाल सागर तक) अब यह रूझान पूर्व की ओर हो गया जिनमें प्रमुख केन्द्र चीन था। इस प्रक्रिया में व्यापार के पारम्परिक केन्द्रों पर विकसित हुए स्वदेशी व्यापार वर्ग को काफी नुकसान हुआ। नए शहरों में वहीं भारतीय व्यक्ति सफल रहा जो अंग्रेजों के साथ सामंजस्य बनाकर व्यापार कर रहा था।

सदी के उत्तरार्ध में विकसित हुए नये व्यापार पर निजी व्यापारी के रूप में व्यापार करने वाले ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंम्पनी के कर्मचारियों का वर्चस्व था। 18वीं सदी में उपर्युक्त महत्वपूर्ण परिवर्तन मुगल साम्राज्य में व्याप्त भारी संकट के कारण तीव्रता से हुआ।

उपर्युक्त परिवर्तनों के बारे में जानकारी का महत्वपूर्ण स्त्रोत भारतीय प्रशासन के सीमा शुल्क रिकॉर्ड (प्रतिलेखों) थे जो उपलब्ध नहीं है। अतः इस रिकॉर्ड की अनुपलब्धता के कारण कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी नहीं प्राप्त होती है।

22. सूची-I का सूची- II से मिलान कीजिए

सूची-Iसूची- II
A. 18781.  द्वितीय आंग्ल-अफगान युद्ध की शुरुआत
B. 18852. तृतीय आंग्ल-बर्मा युद्ध
C. 18793. गंडमक की संधि
D. 18724.  कूका विद्रोह

निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) A-I, B-II, C-III, D-IV
Solution:
सूची-Iसूची- II
1. 1878द्वितीय आंग्ल- अफगान युद्ध (शेर
अली खान तथा ब्रिटेन के मध्य)
2. 1885तृतीय आंग्ल- बर्मा युद्ध (कोनबौंग
राजवंश का पतन)
3. 1879गंडमक की संधि (ब्रिटिश भारत
तथा अफगान शासक अमीर याकूब
खान के मध्य)
4. 1872कूका विद्रोह (नेतृत्वकर्ता- बालक
सिंह तथा गुरू रामसिंह)

निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

23. 16वीं शताब्दी में सिख धर्म के उदय के संदर्भ में निम्नलिखित में कौन-से कथन सही हैं।

A. गुरु अर्जुन देव ने गुरु ग्रंथ साहिब का संकलन वर्ष 1604 में किया जिसमें नानक और बाद के गुरुओं के अलावा शेख फरीद, नामदेव, कबीर और रैदास के वाणियों को भी शामिल किया गया है।
B. गुरु नानक एक ईश्वर में विश्वास करते थे और उन्होंने ईश्वर और भक्त के बीच गहनतम जुड़ाव देखते थे। C. मोक्ष का एक प्रकार निर्वाण या सचखण्ड की प्राप्ति थी जिसका अभिप्राय व्यक्ति द्वारा ईश्वर के साथ एकाकार की स्थिति प्राप्त करना है।
D. गुरुओं की सैन्य शक्ति गुरु हरगोविंद के समय अपने चरम पर पहुँची।
E.  सिख धर्म पंजाब के जाट या किसानों के बीच विस्तारित हुआ।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल A, B, C, E
Solution:

16वीं शताब्दी में जिस समय सिख धर्म का उदय गुरू नानक जी के नेतृत्व में हो रहा था उसी समय भारत पर बाबर ने आक्रमण किया था। सिख धर्म का विस्तार पंजाब के जाट या किसानों तक विस्तृत हुआ। गुरू नानक देव (1469-1539 ई.) ने 1497 में ज्ञान प्राप्ति के पश्चात् अपने जीवन के 24 वर्ष यात्रा में व्यतीत किए। वे एक ईश्वर में विश्वास करते थे तथा ईश्वर एवं भक्त के बीच गहनतम जुड़ाव देखते थे।

उनका मानना था कि मनुष्य का मिलन जब ईश्वर के साथ हो जाता है (सचखण्ड) तब उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। इस प्रकार मोक्ष का एक प्रकार निर्वाण या सचखण्ड की प्राप्ति थी। गुरू अर्जुन ने सिख गुरूओं और सूफी भक्ति सन्तों की कविता का संकलन 1604 ई.में 'आदि ग्रंथ' के रूप में किया।

इसमें गुरू नानक की शिक्षाओं के अतिरिक्त बाबा फरीद, नामदेव, कबीर, रैदास और रामानन्द से सम्बन्धित 6000 पद संकलित है। 1604 में ही इसे (आदि ग्रंथ) हरमंदिर साहिब के अन्दर स्थापित किया गया था। जहाँगीर द्वारा गुरू अर्जुन देव को मृत्युदण्ड देने के कारण गुरू हरगोविन्द ने उम्र परम्परा की शुरुआत की अर्थात उन्होंने सिखों को लड़ाकू सैनिक के रूप में बदल दिया था।

सिख गुरूओं की सैन्य शक्ति गुरू गोविन्द सिंह के समय चरम पर पहुँच चुकी थी। दसवें गुरू गोविन्द सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना (1699 ई.) की। खालसा में सामान्य किसान एवं जमींदार वर्ग अधिक थे। खालसा पंथ मुगलों की सार्वभौमिकता का प्रतीक बन गया। 1688 ई. से 1705 ई. के दौरान गुरू गोविंद सिंह ने एक दर्जन से अधिक लड़ाई लड़ी। आगे चलकर रणजीत सिंह ने खालसा राज्य की स्थापना की।

24. शिवाजी के कृषि सुधार क्रांतिकारी थेः-

A. शिवाजी ने अपने अधिकारियों को कृषकों को दिन में दो बार पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
B. शिवाजी ने बैल एवं कृषि उपकरणों को खरीदने हेतु बिना ऋण के तगाई कही जाने वाले अग्रिम राशि को उपलब्ध करवाया।
C. शिवाजी ने कृषकों को अपने ऋण को 8 से 10 वर्षों में अदा करने की रियायत दी।
D. शिवाजी ने राजस्व का संग्रहण केवल नकद रूप में किया।
E. यह सूचना शिवाजी द्वारा रामोजी को लिखे पत्र में दी गयी है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल A, B, C, E
Solution:

शिवाजी को मलिक अम्बर की राजस्व व्यवस्था में एक आदर्श व्यवस्था दिखाई देता था। उन्होंने 1679 ई. में अन्नाजी दत्तो से एक विस्तृत भू-सर्वेक्षण करवाया। जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने नई राजस्व व्यवस्था का निर्धारण किया। उन्होंने भू-राजस्व की वसूली में बिचौलियों को समाप्त कर दिया और राजस्व की वसूली अधिकारी करने लगे।

कृषि उपज का 33% राजस्व के रूप में लिया जाता था जिसे बाद में बढ़ाकर 40% कर दिया गया। उन्होंने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे किसानों को दिन में दो बार पर्याप्त भोजन उपलब्ध करवायें। उन्होंने किसानों को बैल एवं कृषि उपकरण खरीदने के लिए बिना ऋण के तगाई कही जाने वाले अग्रिम राशि को उपलब्ध करवाया तथा किसानों को अपने ऋण को 8 से 10 वर्षों में अदा करने की रियायत दी।

इसके अतिरिक्त किसान अपने ऋण को दो या चार वार्षिक किश्तों में भी दे सकता था। किसानों को लगान नकद या अनाज के रूप में देना होता था। अकाल या फसल खराब होने की स्थिति में सरकार आर्थिक सहायता प्रदान करती थी। शिवाजी द्वारा किये गये कार्यों की सूचना उनके छोटे भाई रामोजी को लिखे गये एक पत्र से प्राप्त होता है।

25. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

कथन I : प्राचीन भारत में नाट्यशाला में मंच के पृष्ठ भाग में स्थित पर्दे को 'यवनिका' कहा जाता था, भारत में यूनानियों को अल्पअर्थ में प्रायः इसी रूप में जाना जाता था
कथन II : प्राचीन काल के ज्ञात नाटकों में अब जो नाटक टुकड़ों में उपलब्ध हैं वे अश्वघोष द्वारा लिखित नाटक की पांडुलिपि है जिसे मध्य एशिया के मरुस्थल में पाया गया
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) कथन I और II दोनों सही हैं
Solution:

प्राचीन भारत के संस्कृत नाटकों में पर्दे के लिए 'यवनिका' शब्द का प्रयोग किया जाता था जो यूनानियों के प्रभाव का परिणाम था। 326 ई.पू.में सिकन्दर के शिविर में झेलम नदी के तट पर एगेन नामक एक हास्य नाटक का मंचन हुआ था भारतीय भूमि पर मंचित यह प्रथम यूनानी नाटक था।

कुछ विद्वानों का मानना है कि यूनानियों के कारण भारतीय नाटकों का उदय हुआ था, किन्तु प्राप्त साहित्यिक स्रोतों से स्पष्ट होता है कि भारतीय नाटक का उद्भव 'नट' (नृत्य) से हुआ था जिसका मूल यम-यमी संवाद था।

प्राचीन काल के ज्ञात नाटकों में अब जो नाटकों के अवशेष उपलब्ध है वे अश्वघोष द्वारा लिखित नाटक की पांडुलिपि है जिसे मध्य एशिया के मरूस्थल (तुर्फान) में पाया गया था। उल्लेखनीय हैं कि अश्वघोष द्वारा लिखित शारिपुत्र प्रकरण संस्कृत भाषा और प्राचीन भारत का प्रथम अधूरा नाटक था।

कनिष्क के दरबारी कवि अश्वघोष ने बुद्धचरितम, सौन्दरानंदकाव्यम् एवं गंडीस्त्रोतकथा की रचना की थी। इसप्रकार दोनों कथन (1 और 2) सही हैं।

26. सूची- I का सूची- II से मिलान कीजिए

सूची- Iसूची- II
A. एकता (1942)1.जे.बी.एच. वाडिया
B. अपना देश (1949)2. वी. शांताराम
C. झाँसी की रानी (1953)3. सोहराब मोदी
D. रैथ (1931)4. आर.एस. चौधरी

निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) A-I, B-II, C-III, D-IV
Solution:सुमेलित सूची इस प्रकार है-
सूची- I (फिल्म)सूची- II (निर्देशक)
1. एकता (1942)- सिंधी फिल्म
(हिंदू-मुस्लिम एकता)
जे.बी.एच. वाडिया
अपना देश (1949) भारत-विभाजन  शान्ताराम
के बाद उत्पन्न समस्याओं को दर्शाया गया है।
वी. शांताराम
3. झाँसी की रानी (1953) (रानी
लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित)
सोहराब मोदी
4. रैथ (1931) (अस्पृश्यता पर आधारित)आर.एस. चौधरी

27. निम्नलिखित कथनों में से कौन-से कथन क्रांतिकारियों के चरणों के बारे में सही हैं?

A. अलोकप्रिय अंग्रेज अधिकारियों की हत्या अधिकारी-वर्ग के बीच भय उत्पन्न करने के लिए की जाती थी।
B. अलोकप्रिय अंग्रेज अधिकारियों की हत्या लोगों का डर और निष्क्रियता को समाप्त करने के लिए की जाती थी।
C. अलोकप्रिय अंग्रेज अधिकारियों की हत्या राष्ट्रीयता की भावना जगाने के लिए की जाती थी।
D. राष्ट्रवादी समाचार-पत्र युगांतर ने आह्वान किया कि "बल को बल से ही रोका जाना चाहिए।"
E. मद्रास में, भारत माता एसोसिएशन के वांची अय्यर ने एक अधिकारी की हत्या की, जो गरम दल के नेता चिदंबरम पिल्ले की गिरफ्तारी का विरोध कर रही भीड़ पर गोली चलवाने के लिए जिम्मेदार था।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल A, B, C, D
Solution:

1907 से भारतीय राजनीति में परिवर्तन आने लगा था। इस परिवर्तन को “पिस्तौल और बम" की राजनीति कहा गया। 1907 में बंगाली युवा वर्ग अंग्रेजों के भारत विरोधी कार्यों से दुःखी होकर आतंकवाद का रास्ता अपनाने लगे थे। 19वीं सदी में नरमपंथियों से उनका मोह भंग हो चुका था और गरमपंथियों से उन्हें निराशा हाथ लगी।

अतः उन्होंने अपने अखबार 'युगान्तर' के माध्यम से लिखा कि अंग्रेजी सरकार के दमन को रोकने के लिए भारत की 30 करोड़ जनता अपने 60 करोड़ हाथ उठायें। बल को बल (ताकत) से ही रोका जा सकता है। यह आह्वान अप्रैल, 1906 में बारीसाल सम्मेलन में पुलिस लाठी चार्ज के बाद किया गया था।

ब्रिटिश सरकार के विरोध में युवाओं ने आयरलैण्ड के राष्ट्रवादियों, रूसी निहिलिस्टों (विनाशवादियों) तथा पापुलिस्टों के संघर्ष के विधियों को अपना लिया था। इन युवाओं का मानना था कि बदनाम (अलोकप्रिय) अंग्रेज अधिकारियों की हत्या करने से जहाँ अंग्रेज अधिकारियों में भय उत्पन्न होगा वहीं भारतीय जनता के अन्दर व्याप्त भय तथा निष्क्रियता समाप्त हो जायेगी और लोगों में राष्ट्रीयता की भावना जायेगी।

मद्रास प्रांत में नीलकंठ ब्रह्मचारी और वांची अय्यर ने भारत माता एसोसिएशन की स्थापना की तथा 1911 में वांची अय्यर ने तिरूनेलवेली के जिला मजिस्ट्रेट ऐश की हत्या कर दी और बाद में आत्महत्या कर ली। यह हत्या अंग्रेजों को भारत से भगाने के लिए किया गया था।

ऐश की हत्या उस सयम किया गया जब वह तूतीकोरन जाने वाली 'बोट मेल' का इंतजार मयांची स्टेशन पर कर रहे थे। चिदम्बरम पिल्लई ने वर्ष 1906 में मद्रास का दौरा किया था और वह बाल गंगाधर तिलक तथा लाला लाजपत राय द्वारा प्रारम्भ किए गए स्वदेशी आंदोलन से जुड़े हुए थे।

28. निम्नलिखित में से कौन शिवाजी के राज्यारोहण (राज्याभिषेक) के समय उपस्थित नहीं था?

Correct Answer: (d) प्रतापराव गूजर
Solution:

शिवाजी ने 1674 ई. में छत्रपति के रूप में अपना औपचारिक राज्यभिषेक करवाया। उनका राज्याभिषेक स्थानीय ब्राह्मणों ने यह कह कर मना कर दिया कि वे उच्चकुल के क्षत्रिय नहीं है। उन्होंने अपना राज्याभिषेक काशी के पण्डित गंगाभट्ट से करवाया था। उनके राज्याभिषेक के समय उनकी माता जीजाबाई तथा ब्रिटिश दूत हेनरी ऑक्सेनडेन उपस्थित था।

राज्याभिषेक के पश्चात् शिवाजी का स्थान दक्षिण के सुल्तानों के समान हो गया। शिवाजी के राज्याभिषेक के समय प्रतापराव गूजर उपस्थित नहीं था। प्रतापराव गूजर शिवाजी की सेना का सेनापति था। उसने सलेहर के युद्ध में मुगलों को पराजित किया था। उसकी मृत्यु 24 फरवरी 1674 ई. में हो जाती हैं जबकि शिवाजी का राज्याभिषेक 6 जून 1674 ई. में होता है।

29. निम्नलिखित को कालक्रमानुसार ढंग से व्यवस्थित कीजिए।

A.  सम्मति-आयु अधिनियम
B.  प्रथम कारखाना अधिनियम
C.  डूरंड का काबुल के लिए मिशन
D.  तृतीय आंग्ल-बर्मा युद्ध
E.  बम्बई में प्लेग
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) B, D, A, C और E
Solution:

निम्नलिखित घटनाओं का कालक्रमानुसार व्यवस्थापनः-
1. प्रथम कारखाना अधिनियम- 1881 ई.
2. तृतीय आंग्ल वर्मा युद्ध - 1885 ई.
3. सम्मति आयु अधिनियम- 1891 ई.
4. डूरंड का काबुल के लिए मिशन- 1893 ई.
5. बम्बई में प्लेग- 1896 ई.

30. नीचे दो कथन दिए गए है

कथन I: वेल्लोर विद्रोह का मूल कारण अंग्रेजों के द्वारा सैन्य अनुशासन के बहाने (रुप में) के अंतर्गत भारतीय सैनिकों को ईसाई बनाने का अंग्रेजी निर्लज्ज प्रयास था।
कथन II: सिपाहियों को ईसाई धर्म में परिवर्तन करने हेतु भारतीयों द्वारा अपनायी गयी सिर पर पहना जाने वाला वस्त्र (पगड़ी) के रूप में उनकी पारंपरिक पगड़ी को बदल देने का आदेश भी दिया गया।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) कथन I और II दोनों सही हैं
Solution:

वेल्लोर (मद्रास) विद्रोह (1806 ई.) भारतीय सिपाहियों का विद्रोह था इस विद्रोह का मूल कारण धार्मिक भावनाओं को आघात पहुँचाना तथा सैन्य अनुशासन के बहाने भारतीय सैनिको को ईसाई बनाने का प्रयास था। सिपाहियों को आदेश दिया गया कि वे तिलक न लगाये, दाढ़ी न रखे, कानों में बालिया न पहने।

उन्हें यह भी आदेश दिया गया कि वे अपनी पारम्परिक पगड़ी को न पहन कर चमड़े से बनी टोपी को पहने। इस आदेश से सैनिकों में असन्तोष फैल गया और उन्होंने विद्रोह कर दिया। डॉ. ताराचन्द के अनुसार "इस प्रकार बारूद तैयार थी केवल चिन्गारी की देरी थी।" यह विद्रोह गवर्नर जनरल जॉर्ज बालों के समय हुआ था। विद्रोह के समय मद्रास सेना के कमाण्डर इन चीफ जनरल सर जॉन क्रैडॉक थे।