Solution:कराची कांग्रेस संकल्प 1930 के, 29 मार्च 1931 को कराची में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में पारित किया गया था। कराची अधिवेशन का आयोजन गाँधी-इरविन समझौते (दिल्ली समझौता) को मंजूरी देने के लिए किया गया था। कराची प्रस्ताव को स्वयं गाँधी जी ने तैयार किया था जिसमें 'दिल्ली समझौते को मंजूरी दी गई। प्रथम बार इस अधिवेशन में कांग्रेस ने इस अधिवेशन में मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रमों से सम्बन्धित प्रस्ताव पास किए।
मौलिक अधिकार तथा आर्थिक कार्यक्रम सम्बन्धी प्रस्ताव का प्रारूप जवाहरलाल नेहरू ने लिखा था। इसमें अभिव्यक्ति की आजादी, जाति, लिंग, धर्म इत्यादि से हटकर कानून के समक्ष समानता का अधिकार, सभी धर्मों के प्रति राज्य का तटस्थ कार, सभी धर्मो के प्रति राज्य का तटस्थ होना, निःशुल्क एवं अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा की गारंटी, अल्पसंख्यकों तथा विभिन्न भाषाई क्षेत्रों की संस्कृति, भाषा एवं लिपि की सुरक्षा की गारंटी आदि शामिल थे।
राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रमों से सम्बन्धित प्रस्ताव में लगान और मालगुजारी में उचित कटौती, किसानों को कर्ज से राहत देने के लिए सूदखोरों पर नियंत्रण, मजदूरों के लिए बेहतर सेवा शर्ते, मजदूरों के विशेष अधिकारों जैसे वैतनिक अवकाश का संरक्षण, काम के नियमित घण्टे एवं महिला मजदूरों की सुरक्षा आदि शामिल था।
इस प्रस्ताव में प्रावधान था कि भारत में निर्मित नमक पर कोई शुल्क कर नहीं लगाया जायेगा। नोट- भाषाई आधार पर प्रांतों की स्थापना का प्रारम्भ 1894 में बिहार के महेशनारायण द्वारा उठाया गया। कांग्रेस ने 1908 में बिहार को बंगाल से अलग कर भाषा के आधार पर गठित करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था।
ब्रिटिश सरकार ने 1912 में बिहार को बंगाल से अलग कर स्वतंत्र राज्य के रूप में गठित किया। इसके बाद कांग्रेस ने 1927 में एक संवैधानिक समिति का गठन किया। इस समिति ने भाषाई आधार पर प्रांतों के गठन को स्वीकार किया था।
1928 के नेहरू रिपोर्ट में भी भाषाई आधार पर प्रांतों के गठन की बात स्वीकार कर ली गई। 1937 में कांग्रेस ने इस नीति की पुष्टि की, कि जहाँ तक सम्भव हो प्रांतों को भाषाई और सांस्कृतिक एकता के आधार पर निर्मित किया जाये।