NTA यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 (इतिहास) (Shift-II)

Total Questions: 100

41. सूची- I का सूची - II से मिलान कीजिए

 सूची- Iसूची- II
A. गोपाल गणेश आगरकरI. वाक्य मीमांसा
B. बाल गंगाधर तिलकII.ओरियन
C.पंडित सुंदर लालIII. ब्रिटिश रूल इन इंडिया
D. अरुणा वासुदेवIV. लिबर्टी एंड लाइसेंस इन इंडियन सिनेमा

निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) A-I, B-II, C-III, D-IV
Solution:सही सुमेलित इस प्रकार है-
(लेखक)(पुस्तक)
1.गोपाल गणेश आगरकर-वाक्य मीमांसा
2.बाल गंगाधर तिलक-दि ओरियन
3.पंडित सुंदर लाल-ब्रिटिश रूल इन इंडिया
4.अरूणा वासुदेव-लिबर्टी एण्ड लाइसेंस इन इंडियन सिनेमा

42. गंज सुवाई शब्द निम्नलिखित में से किससे संबंधित है?

Correct Answer: (c) चिप
Solution:

गंज-ए-सवाई (गंज सुवाई) मुगल कालीन शाहीव्यापारिक जहाज था। इसके संरक्षकों में मरियम-उज जमानी,जहाँगीर, शाहजहाँ तथा औरंगजेब प्रमुख थे। औरंगजेब के समय 1695 ई. में ब्रिटिश समुद्री डाकू कैप्टन अवेरी ने अपने जहाज 'फैंसी' से 'गंज-ए-सवाई' पर हमला करके उस पर अधिकार कर लिया।

इस घटना से अंग्रेजों एवं मुगलों के बीच वैमनस्य उत्पन्न होगया। इस समय बॉम्बे का गवर्नर जॉन गेयर था। औरंगजेब नेभारत के साथ ब्रिटिश व्यापार पर प्रतिबन्ध लगा दिया और ईस्टइण्डिया कंपनी से नुकसान की भरपाई करने को कहा एवं दोषियोंको फाँसी की सजा देने का आदेश दिया।

43. सेठ की लड़की (द मर्चेंट्स डॉटर-1935)नामक फिल्म का मूल शीर्षक क्या था जिसका दोबारापुनःनामकरण दया की देवी (गॉडेस ऑफ मर्सी) के रूपमें किया गया था?

Correct Answer: (a) द मिल मजदूर
Solution:

'सेठ की लड़की (द मर्चेंट्स डॉटर-1935) नामक फिल्म का मूल शीर्षक 'द मिल (मजदूर)'था जिसका पुनः नामकरण 'दया की देवी (गॉडेस ऑफ मर्सी)' के रूप में किया गया था। भारत में मुंशी प्रेमचन्द्र ने 1934 में द मिल (मजदूर) की कहानी कोलिखा था। इस फिल्म को प्रतिबंधित फिल्म के रूप में प्रचारित कियागया था

क्योंकि इसमें श्रम पूँजी संघर्ष और श्रमिकों के शोषण कोदर्शाया गया था। प्रतिबंधित किये गये इस फिल्म को नए शीर्षक'सेठ की लड़की' के नाम से पुनः प्रसारित किया गया किन्तु 1935ई. में इसे भी प्रतिबंन्धित कर दिया गया।'

44. जैकब बर्कहार्टस् की पुस्तक 'डेर सिसेरॉन' ने किस क्षेत्र में योगदान दिया?

Correct Answer: (b) कला इतिहास
Solution:

जैकब क्रिस्टोफ बर्कहार्टस् की पुस्तक 'डेर सिसेरॉन' ने कला इतिहास के क्षेत्र में अपना योगदान दिया था। वे एक स्विस इतिहासकार एवं दर्शानिक थे। उनकी किताबें सांस्कृतिक और कलात्मक इतिहास से सम्बन्धित होती थी। उनकी प्रमुख किताब 'द एज ऑफ कॉन्स्टेंटाइन द ग्रेट (1852 ई.)' सांस्कृतिक इतिहास से सम्बन्धित था। यह सांस्कृतिक इतिहास की एक श्रृंखला थी जो पेरिकल्स के युग से प्रारम्भ होकर राफेल के युग के साथ समाप्त हुई। उनकी दूसरी किताब 'डेर सिसेरॉन' इटली में कला के आनंद के लिए एक मार्गदर्शक था। इसमें व्यवस्थित कला इतिहास की समस्या को हल करने का प्रयास किया गया है।

45. इनमें से कौन सा कथन सही नहीं है?

Correct Answer: (d) गुप्त शासक नाग वंश की शाक्तियों को नियंत्रित नहीं कर पाए थे और उनकी स्वतंत्रता को स्वीकार करने के लिए बाध्य किए गए
Solution:

पुराणों के अनुसार नाग राजाओं का उत्थान कुषाणों के पतन के पश्चात हुआ। उनका शासन पद्मावती (पद्मपवैया), विदिशा, कान्तिपुरी तथा मथुरा में था। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण पद्मावती के नागवंश थे। 'नव' नामक शासक ने कान्तिपुरी में नवनाग वंश की स्थापना की।

पद्मावती के नागवंशी परिवार भारशिव (कंधों पर शिवलिंग वहन करना), लिंग की पूजा करते थे। इसलिए इस वंश को 'भारशिव नाग' भी कहा जाता है। नाग वंशी वीरसेन ने मथुरा में 'हिन्दु प्रभुत्व' की स्थापना की थी। लगभग चौथी शताब्दी ई. की एक त्यौहार ताम्र मुद्रा महाराज नागभट्ट के पुत्र राजकुमार महेश्वरनाग का सन्दर्भ देती है।

कहा जाता है कि भारशिवों ने वाराणसी में गंगा तट पर दस अश्वमेघ यज्ञ किये थे जिसके कारण उस घाट को दशाश्वमेध घाट कहा जाता है। गुप्त शासक समुद्रगुप्त तथा चन्द्रगुप्त द्वितीय ने इनकी शक्तियों को नियंत्रित किया था। चन्द्रगुप्त द्वितीय ने नागवंशी राजकुमारी कुबेरनागा से विवाह किया था। पूना ताम्रपत्र इस प्रकार गुप्त शासकों ने नाग राजाओं को अपना अधीनस्थ बना लिया था।

46. कराची कांग्रेस के संकल्प, 1930 के संदर्भ में इनमें से कौन-से कथन सही हैं :

A. लोकप्रिय मौलिक अधिकारों का आश्वासन
B. जनता के सभी वग में जातिगत और धार्मिक कमियों को दूर करना
C. भाषायी आधार पर भारतीय प्रांतों की स्थापना
D.  नमक कर को स्वीकार करना
E. कामगारों के विशेष अधिकारों जैसे वैतनिक अवकाश का संरक्षण
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:-

Correct Answer: (d) केवल A, B, C और E
Solution:

कराची कांग्रेस संकल्प 1930 के, 29 मार्च 1931 को कराची में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में पारित किया गया था। कराची अधिवेशन का आयोजन गाँधी-इरविन समझौते (दिल्ली समझौता) को मंजूरी देने के लिए किया गया था। कराची प्रस्ताव को स्वयं गाँधी जी ने तैयार किया था जिसमें 'दिल्ली समझौते को मंजूरी दी गई। प्रथम बार इस अधिवेशन में कांग्रेस ने इस अधिवेशन में मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रमों से सम्बन्धित प्रस्ताव पास किए।

मौलिक अधिकार तथा आर्थिक कार्यक्रम सम्बन्धी प्रस्ताव का प्रारूप जवाहरलाल नेहरू ने लिखा था। इसमें अभिव्यक्ति की आजादी, जाति, लिंग, धर्म इत्यादि से हटकर कानून के समक्ष समानता का अधिकार, सभी धर्मों के प्रति राज्य का तटस्थ कार, सभी धर्मो के प्रति राज्य का तटस्थ होना, निःशुल्क एवं अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा की गारंटी, अल्पसंख्यकों तथा विभिन्न भाषाई क्षेत्रों की संस्कृति, भाषा एवं लिपि की सुरक्षा की गारंटी आदि शामिल थे।

राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रमों से सम्बन्धित प्रस्ताव में लगान और मालगुजारी में उचित कटौती, किसानों को कर्ज से राहत देने के लिए सूदखोरों पर नियंत्रण, मजदूरों के लिए बेहतर सेवा शर्ते, मजदूरों के विशेष अधिकारों जैसे वैतनिक अवकाश का संरक्षण, काम के नियमित घण्टे एवं महिला मजदूरों की सुरक्षा आदि शामिल था।

इस प्रस्ताव में प्रावधान था कि भारत में निर्मित नमक पर कोई शुल्क कर नहीं लगाया जायेगा। नोट- भाषाई आधार पर प्रांतों की स्थापना का प्रारम्भ 1894 में बिहार के महेशनारायण द्वारा उठाया गया। कांग्रेस ने 1908 में बिहार को बंगाल से अलग कर भाषा के आधार पर गठित करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था।

ब्रिटिश सरकार ने 1912 में बिहार को बंगाल से अलग कर स्वतंत्र राज्य के रूप में गठित किया। इसके बाद कांग्रेस ने 1927 में एक संवैधानिक समिति का गठन किया। इस समिति ने भाषाई आधार पर प्रांतों के गठन को स्वीकार किया था।

1928 के नेहरू रिपोर्ट में भी भाषाई आधार पर प्रांतों के गठन की बात स्वीकार कर ली गई। 1937 में कांग्रेस ने इस नीति की पुष्टि की, कि जहाँ तक सम्भव हो प्रांतों को भाषाई और सांस्कृतिक एकता के आधार पर निर्मित किया जाये।

47. नीचे दो कथन दिए गए है

कथन I : मुगल शासन में राजस्व आकलन के अनेक तरीके थे।
कथन II: राजस्व आकलन के महत्वपूर्ण तरीकों में गल्ला-बख्शी, बटाई और भाउली थे।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) कथन I सही है, लेकिन कथन II गलत है
Solution:

मुगल शासन काल में सरकारी कर्मचारी राजस्व आकलन के लिए भूमि की किस्म, उसका क्षेत्रफल, गल्ला पैदा, कितनी पैदावार हुई आदि का हिसाब प्रति वर्ष तैयार करके लगान निर्धारित करते थे। अकबर ने राजा टोड़रमल (अर्थमंत्री) को लगान निर्धारण के लिए नियुक्त किया। उसकी रिपोर्ट के आधार पर 1580 ई. में दहसाला लगान-व्यवस्था' को लागू किया गया।

यह व्यवस्था कुछ निश्चित क्षेत्रों में ही लागू किया गया था। लगान को निर्धारित करने के लिए गल्ला बख्शी अथवा बटाई अथवा भाओली (फसल का किसान और राज्य के मध्य बंटवारा) को सिन्ध और काबुल के कुछ भागों तथा कन्धार एवं कश्मीर में लागू किया गया था। लगान निर्धारण हेतु नस्क या कनकूत (बिना पैमाइश के पैदावार का अन्दाजा मात्र करके लगान निश्चित करना) का बंगाल, गुजरात तथा काठियावाड़ में लागू किया गया था।

लगान निर्धारण की जब्ती.या नकदी (पैमाइश और गल्ले की किस्म के आधार पर लगान का आकलन) व्यवस्था बिहार, इलाहाबाद, मालवा, अवध, आगरा, दिल्ली, लाहौर और मुल्तान में प्रचलित थी। यहीं वे क्षेत्र हैं जहाँ दहसाला पद्धति लागू किया गया था। राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में हल की रेखा के आधार पर लगान का निर्धारण किया जाता था। इस प्रकार मुगलकाल में राजस्व आकलन के विभिन्न तरीके थे। गल्ला बख्शी को ही बटाई तथा भाओली पद्धति कहा जाता था।

48. प्राचीन भारत में 'सत्र' पद का उपयोग इनमें से किसके लिए होता था?

Correct Answer: (d) गुप्तचरों का एक विशेष वर्ग जिसमें अनाथों को बचपन से ही कार्य के लिए प्रशिक्षित किया जाता था
Solution:

प्राचीन कालीन गुप्तचरों का विस्तृत विवरण कौटिल्य के अर्थशास्त्र से प्राप्त होता है जिसमें उन्हें 'गूढ़ पुरूष' कहा गया है। मौर्यकाल में गुप्तचर विभाग का प्रधान 'महामात्यापसर्प' कहलाता है। गूढ़ पुरूष दो प्रकार के होते थे-

(1) संस्था एक ही स्थान पर रहकर कार्य करना। (2) संचारा (भ्रमणशील गुप्तचर) 1 संस्था गुप्तचर के पाँच प्रकार थे (1) कापटिक (विद्यार्थी के वेश में रहना), (2) उदास्थित (सन्यासी वेशधारी), (3) गृहपतिक (किसान के रूप में), (4) वैदेहक (गरीब व्यापारी के रूप में), (5) तापस (तपस्वी के वेश में) इस प्रकार संचारा गुप्तचर के भी चार प्रकार थे-

(1) सत्र सत्री (गुप्तचरों का एक विशेष वर्ग जिसमें अनाथों को बचपन से ही इस कार्य के लिए प्रशिक्षित किया जाता था) इसमें समुद्री विद्या, ज्योतिष, व्याकरण इन्द्रजाल नृत्य-गान, वशीकरण आदि का प्रशिक्षण दिया जाता था), (2) तीक्ष्ण (खतरों में रहकर कार्य करना), (3) सरद (क्रूर तथा आलसी गुप्तचर), (4) परिव्राजिका (भिक्षुणी संन्यासिनी वृषली के वेश में स्त्री गुप्तचर)।

इसके अतिरिक्त विदेशों में नियुक्त गुप्तचर को 'उभयवेतन' कहा जाता था क्योंकि वह दोनों ही स्थान से वेतन प्राप्त करता था।

49. सूची- I का सूची- II से मिलान कीजिए

सूची- Iसूची- II
A.कविप्रियाI.कुतबन
B.शिवराज भूषणII.मौलाना दाऊद
C.मृगावतीIII.केशवदास
D.चंदायनIV.भूषण त्रिपाठी

निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) A-III, B-IV, C-I, D-II
Solution:दोनों सूचियों का सही क्रम -
सूची-I (लेखक)सूची-II (रचना)
1. कुतबनमृगावती
2. मौलाना दाऊदचंदायन
3. केशवदासकविप्रिया
4. भूषण त्रिपाठीशिवराज भूषण

50. अंडमान द्वीप के पोर्ट ब्लेयर स्थित कुख्यात सेलुलर जेल में किसने स्वतंत्रता सेनानी के रूप में आठ वर्ष व्यतीत किया और अनोखी एवं दलित कुसुम नामक दो गैर फीचर फिल्मों का निर्देशन भी किया था?

Correct Answer: (a) लक्ष्मीकांत शुक्ला
Solution:अंडमान द्वीप के पोर्ट ब्लेयर स्थित कुख्यात सेलुलर जेल में प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी लक्ष्मीकान्त शुक्ला आठ वर्ष तक कैदी के रूप में रहे और उन्होंने अनोखी एवं दलित कुसुम नामक दो गैर फीचर फिल्मों का निर्देशन किया। वे उन्नाव (उ.प्र.) के रहने वाले थे।

तथा हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के सदस्य थे। झाँसी के कमिश्नर फ्लावर्स ने महिला सत्याग्रहियों का अपमान किया था। महिलाओं के अपमान का बदला लेने के लिए वे बम लेकर कमिश्नर आवास पर पहुँच गए, किन्तु वे पकड़े गए और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाकर अण्डमान भेज दिया गया।