Solution:कौटिल्य के अर्थशास्त्र और मौर्यकालीन सिक्कों में सूर्य पूजा पद्धति की लोकप्रियता नहीं पायी गयी है। कौटिल्य का अर्थशास्त्र मौर्यकालीन भारतीय समाज का दर्पण कहा जाता है इसके शुरूआत में ओम चिन्ह अंकित है। अर्थशास्त्र में अपराजित, अप्रतिहत, जयन्त, वैजयन्त, शिव, वैश्रवण, अश्विन दुर्गा, आदिति सरस्वती, सविता, अग्नि, सोम, कृष्ण का उल्लेख है।
मौर्य सम्राटों में अशोक एक अत्यंत शक्तिशाली राजा हुआ जिसने ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में बौद्धों की श्रमण पंरपरा को संरक्षण दिया था। धार्मिक पद्धतियों के कई आयाम होते हैं। वे किसी एक पूजा विधि तक ही सीमित नहीं है। उस समय यक्षों और मातृदेवियों की पूजा भी काफी प्रचलित थी। इस प्रकार पूजा के अनेक रूप विद्यमान थे। तथापि इनमें से बौद्ध धर्म सबसे अधिक सामाजिक और धार्मिक आंदोलन के रूप में लोकप्रिय हो गया। यक्ष पूजा बौद्ध धर्म के आगमन से पहले और उसके बाद भी काफी लोकप्रिय रही लेकिन आगे चलकर यह बौद्ध और जैन धर्म में विलीन हो गयी।
व्यूह सिद्धांत में से भिन्न या वैष्णव धर्म अवतारवाद के उत्तरकालीन शैव धर्म ने अवतार सिद्धांत में किसी प्रकार का सुपरिष्कृत विकास नहीं किया। उमा और पार्वती (सुपरिचित हेमावती) के नाम तैत्तरीय आरण्यक और केन उपनिषद में मिलते है। उमा का चित्र हुविष्क के सिक्कों में मिलता है। भविष्य, संबा, बराह और अन्य पुराणों में शकद्वीप (पूर्वी ईरान) से भारत में सूर्य पूजा पद्धति के प्रचलन के आरंभ सम्बन्धी कहानी का वर्णन मिलता है।