Solution:मुगल स्थापत्य चापाकार शैली का प्रदर्शन नहीं था। जिस कला को मुगल स्थापत्य कला (वास्तुकला) पुकारा गया है वह मध्य एशिया की इस्लामी कला और भारतीय हिन्दू-कला का मिश्रित रूप है। मुगलकालीन स्थापत्य की मुख्य विशेषता संगमरमर के पत्थरों पर हीरे-जवाहरत से की जड़ावट पित्रादुरा एवं महलों तथा विलास भवनों में बहते पानी का उपयोग है।
मुगल काल में स्थापत्य-कला की श्रेष्ठतम उन्नति हुई और भव्य महल, मकबरे, मस्जिदें आदि बनी। मुगल-स्थापत्य कला अपने में श्रेष्ठतम रही और उसने विभिन्न प्रान्तीय स्थापत्य कलाओं को भी प्रभावित किया। मुगल स्थापत्य कला की अपनी पृथक विशेषता थी और विदेशी प्रभावों को अपने वास्तुकला में सम्मिलित करते हुए भी उसका मूल स्वरूप भारतीय था।
मुगलों द्वारा बनवायी हुई ईमारतें टर्की, फारस और मध्य एशिया की इमारतों से भिन्न है ताजमहल भारतीय मुगलस्थापत्य-कला का एक नमूना है। अकबर की सुन्दरतम इमारतें फतेहपुर सीकरी (आगरा के निकट) में बनवायी गयीं थी परन्तु आधुनिक समय में फतेहपुर सीकरी एक उजड़ा हुआ स्थान है।
फतेहपुर सीकरी में दीवाने-आम, दीवाने खास, पंचमहल, तुर्की सुल्ताना का महल, जोधाबाई-महल, मरियम महल, बीरबल महल, हिरन-महल, जामा मस्जिद, हाथी पोल, बुलन्द दरवाजा और शेख सलीम चिश्ती का मकबरा प्रमुख हैं। सल्तनत कालीन स्थापत्य के मेहराब गुंबद, मेहराबदार छत मुगल शैली में समाविष्ट किए गए थे।