यह कृति चालुक्य राजवंश की उत्पत्ति के साथ आरंभ होती है तथा किसी महाकाव्य की चिर-परिचित शैली में सम्राट विक्रमादित्य द्वारा लड़ी गई लड़ाईयों और लिए गए आनंदों का विवरण प्रदान करती है।
हर्ष चरित के प्रथम उच्छावस की तरह ही अंतिम भाग हमें स्वयं लेखक, उसकी साहित्यिक यात्रा, उसके परिवार तथा उसके देश और वहाँ के शासकों के बारें में लेखा-जोखा प्रदान करता है।
इतिहास के एक अंश के रूप में यह कृति विभिन्न झोल से परिपूर्ण है। यह सम्राट के जीवन में कतिपय दुखद प्रसंगों की व्यांख्या करने के लिए शिव के हस्तक्षेप की आकांक्षा रखती है। सटीक अभिव्यक्तियों के अभाव में शुद्ध सही कालक्रम भी लुप्त हो गया है।
ग्रंथ का लेखक कौन है?
Correct Answer: (b) बिल्हण
Solution:प्रस्तुत गद्यांश विक्रमांकदेव चरित का है जिसके लेखक विल्हण है जो विक्रमादित्य VI का दरबारी, कवि था। विल्हण मूल रूप से कश्मीर का निवासी था तथा विक्रमादित्य VI के काल में वह चालुक्य दरबार में आ गयां था। विल्हण ने विक्रमांकदेव चरित को महाकाव्य की शैली में लिखा है। यह ग्रंथ जीवन चरित ग्रंथों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।