NTA यूजीसी नेट जेआरएफ पुनर्परीक्षा, जून 2024 (इतिहास) Shift-I

Total Questions: 100

1. चोल शासन काल के दौरान, 'इरिविरपत्तन' का तात्पर्य था :

Correct Answer: (c) संरक्षित व्यापारिक नगर, जो व्यापार के प्रमख केन्द्र के रूप में उभरे
Solution:

चोल शासन काल के दौरान 'इरिविरपत्तन' का तात्पर्य संरक्षित व्यापारिक नगर जो व्यापार के प्रमुख केन्द्र के रूप में उभरें थे। चोल काल के दौरान बसिनिकोण्ड अभिलेख से ज्ञात होता है कि व्यापारियों ने शीरावल्ली में सम्मेलन करके उसे इरिविरपत्तनम् घोषित किया तथा वहाँ के निवासियों को विशेषाधिकार और सुविधाए प्रदान की। चोल काल में वाणज्ज व्यापारियों के बस्तियों को सामान्यतः 'वीर पत्तनम' कहा जाता था।

2. निम्नलिखित में से किस इतिहासकार ने गयासुद्दीन तुगलक की बिजली गिरने से हुई आकस्मिक मृत्यु का विवरण प्रस्तुत किया है?

Correct Answer: (a) बरनी
Solution:

दिल्ली सल्तनत में तुगलक वंश का संस्थापक गयासुद्दीन तुगलक था जिसने 1320-1325 ई. तक शासन किया। इसने अलाउद्दीन के कठोर नीति के विपरीत उदारता की नीति को अपनाया। बंगाल के सफल अभियान के बाद जब वह वापस लौटा तो तुगलकाबाद में स्वागत समारोह के लिए निर्मित लकड़ी के भवन के गिरने से उसकी मृत्यु हो गयी। हाँलाकि इतिहासकार बरनी उसकी मृत्यु का कारण बिजली गिरना बताता है।

3. निम्नांकित कथनों में से कौन से कथन सही हैं?

(A) मध्यकाल के आरंभ में दक्षिण भारतीय ग्राम जीवन की मूलभूत इकाई 'उर' थी।
(B) 'उर' ग्राम सभाओं के साथ-साथ ग्राम से भी संबंधित था।
(C) 'उर' गैर-ब्रह्मदेय ग्राम था।
(D) 'नाडु', 'सभा' और 'नगरम्' जैसे कार्पोरेट निकाय राजस्व के मूल्यांकन और संग्रह का कार्य नहीं करते थे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल (A), (B) और (C)
Solution:

चोल अभिलेखो में मोटे तौर पर 3 प्रकार की ग्राम सभाओं का उल्लेख प्राप्त होता है- उर, सभा और नगरम । उर एक सामान्य प्रकार की ग्राम सभा थी जो ग्रामीण जीवन की मूलभूत इकाई थी।

उर में ग्राम, पुर या नगर दोनों शामिल थे। उर एक गैर ब्रह्मादेय ग्राम था क्योंकि ब्रह्मादेय ग्राम सभा या महासभा कहलाती थी। चोल प्रशासन में बलनाडू के नीचे नाडू होता था जो आधुनिक जिले के समान था तथा इसका मुख्य कार्य भूराजस्व का प्रबंध करना था।

4. ब्रिटिश काल के दौरान भारतीय प्रेम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

(A) लाइसेंसिंग विनिमयन, 1823 के लिए आवश्यक था : (a) प्रत्येक मुद्रक या प्रकाशक को प्रेस आरंभ करने या इसके उपयोग के लिए लाइसेंस प्राप्त करना (b) गवर्नर जनरल को लाइसेंस को रद्द करने या नये प्रार्थना पत्र मांगने का अधिकार था।
(B) 1857 के महासमर से उत्पन्न आपात स्थिति ने ब्रिटिश सत्ता को प्रेस पर पुनः प्रतिबंध लगाने के लिए बाध्य किया। मेटकॉफ अधिनियम में उल्लिखित एवं उस समय प्रभावी पंजीकरण प्रक्रिया के अतिरिक्त 1857 के नियम पंद्रह ने लाईसेंसिंग प्रतिबंधों को पुनर्पपरिभाषित किया।
(C) मार्च, 1941 में भारत सरकार ने एक 'प्रेस जाँच समिति' गठित कर उसे प्रेस सम्बंधी कानूनों की समीक्षाका दायित्व सौंपा।
(D) समाचार पत्र अधिनियम, 1908 ने मजिस्ट्रेट को ऐसेसमाचारपत्रों के प्रिंटिंग प्रेस व अन्य सम्पत्तियाँ जब्त करने का अधिकार दे दिया, जिनमें प्रकाशितआपत्तिजनक लेख हिंसा या हत्या की उत्प्रेरणा देते थे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल (A), (B) और (D)
Solution:

1823 ई. का अनुज्ञप्ति अधिनियम गवर्नर जनरल जान एडम्स के काल में आया था। जिसके तहत मुद्रक तथा प्रकाशक को प्रेस स्थापना के लिए लाइसेंस लेना पड़ता था जबकि गवर्नर जनरल को लाइसेंस रद्द करने या दूसरा प्रर्थना पत्र मांगने का अधिकार था।

1857 के विद्रोह से उत्पन्न आपातकालीन अधिनियम से निपटने के लिए लाइसेंस अधिनियम बनाया गया। 1908 के एक्ट के तहत मजिस्ट्रेट को ऐसे प्रेस को जब्त करने का अधिकार दिया गया जिसके लेख आपत्तिजनक हो ।

5. निम्नांकित में से कौन मगध से संबंधित नहीं है?

Correct Answer: (b) कैवर्त
Solution:

प्राचीन भारत में मगध साम्राज्य का प्रथम राजवंश हर्यंक वंश था जिसकी स्थापना बिम्बिसार ने की थी और जो अजातशत्रु के काल में सर्वोच्च शिखर पर था। हर्यंक वंश के बाद मगध में शैशुनाग ने शैशुनाग वंश की स्थापना किया। इसने अवन्ति को मगध साम्राज्य में शामिल किया। मगध का अंतिम वंश नंद वंश था जिसकी स्थापना महापद्मनंद ने की थी व धनानंद इस बंश का अंतिम  शासक था।

6. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए:

सूची-I (अष्टप्रधान अधिकारी)सूची-II मंत्री (शिवाजी के शासन काल में)
A. पेशवाI. अन्नाजी दत्तो
B. मजूमदार (अमात्य)II. दत्ताजी त्र्यम्बक
C. सरनीस (सचिव)III. मोरो त्र्यम्बक पिंगले
D. वाकनवीसIV. रामचंद्र नीलकण्ठ

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IVIIIIII
(c)IIIIIIIV
(d)IIIIVIII
Correct Answer: (d)
Solution:सही सुमेलन है-
(अष्टप्रधान अधिकारी)मंत्री (शिवाजी के शासन काले में)
पेशवामोरो त्र्यम्बक पिंगले
मजूमदार (अमात्य)रामचंद्र नीलकण्ठ
सरनीस (सचिव)अन्नाजी दत्तो
वाकनवीसदत्ताजी त्र्यम्बक

7. बुक्का I के पुत्र कुमार कंपन के अभियान का वर्णन करने वाले ग्रंथ मदुराविजयम (मदुरा विजय) की रचना किस भाषा में की गई?

Correct Answer: (b) संस्कृत
Solution:

विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 ई. में हरिहर और बुक्का ने किया था। 1356 ई.में बुक्का प्रथम विजयनगर का शासक बना तथा उसके काल में 1377 ई. में मदुरा विजय किया गया जिसका नेतृत्व बुक्का प्रथम के पुत्र कुमार कम्पन ने किया। जिसका विवरण संस्कृत भाषा में लिखित पुस्तक मदुरा विजयम् में मिलता है जिसको गंगा देवी द्वारा लिखा गया था।

8. निम्नांकित को कालानुक्रम में व्यवस्थित कीजिए (पहले से बाद) :

(A) पंजाब का विभाजन और पुनर्वास
(B) नई शिक्षा नीति, 2020
(C) प्रथम राज्य पुनर्गठन अधिनियम
(D) भारतीय अर्थव्यवस्था का वैश्वीकरण
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) (A), (C), (D) और (B)
Solution:सही कालानुक्रम है-
  • पंजाब का विभाजन और पुनर्वास - 1947
  • प्रथम राज्य पुनर्गठन अधिनियम - 1956
  • भारतीय अर्थव्यवस्था का वैश्वीकरण - 1991
  • नई शिक्षा नीति 2020 - 2020

9. वराहमिहिर की 'बृहत् संहिता' में निम्नांकित का वर्णन है:

(a) वर्षा की मात्रा के मापन की विधि
(b) खगोलशास्त्रीय (खगोलीय प्रेक्षण)
(c) घरों और मंदिरों का निर्माण
(d) पादपों का रोपण और फल उत्पादन में वृद्धि के तरीके
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल (A), (B), (C), (D)
Solution:वाराहमिहिर गुप्त काल के प्रमुख ज्योतिष और खगोलविद थे। इन्होंने पंचसिद्धांतिका वृहद् जातक, वृहद् संहिता तथा लघु जातक ग्रंथो की रचना की। इनके ग्रंथ वृहद् संहिता को ज्योतिष, भूगोल, वनस्पति तथा प्राकृतिक इतिहास का विश्वकोष माना जाता है। इस ग्रंथ में वर्षा की मात्रा के मापन की विधि, खगोलीय प्रेक्षण, घरों और मंदिरों का निर्माण तथा पादपों के रोपण व फल उत्पादन में वृद्धि के तरीके बताए गए हैं।

10. दिल्ली सल्तनत में कारखानों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?

(A) मसालिक-उल-अबसार के अनुसार मुहम्मद तुगलक की कसीदाकारी की कार्यशाला में 4000 सिल्क कारीगर और अनेकों सोने की जरी के कारीगर थे।
(B) अफीफ़ ने इन्हें शाही कारखाने का नाम दिया, फिरोजशाह तुगलक के शासन काल में इनकी संख्या 100 थी।
(C) बहुत से कारखाने रातिबी (राज्य सहायता प्राप्त) थे, तथा अन्य कारखाने स्वक्तिपोषित थे (गैर रातिबी)।
(D) गैर रातिबी में राजसी पोशाक, बैनर बनाने तथा कालीन बनाने वाले कारखाने शामिल थे। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल (A), (C) और (D)
Solution:

सल्तनत काल में कारखनों की व्यवस्था काफी विकसित रूप में थी। अफीफ के अनुसार राजकीय कारखाना 2 प्रकार के थे- रातिबी और गैर-रातिबी। में काम करने वाले को निश्चित वेतन मिलता था जबकि गैर-रातिबी को कोई निश्चित वेतन नही मिलता था। कारखानों के उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए फीरोजशाह तुगलक ने पर्याप्त धनरासी उपलब्ध करायी थी।